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महासमुंद मे विजय कृषि केन्द्र बंसुला का उर्वरक प्राधिकार पत्र निरस्त किसानों को निर्धारित दर पर खाद उपलब्ध कराने प्रशासन सख्त

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महासमुंद।,13 जून ।कलेक्टर श्री विनय लंगेह ने जिले के किसानों को उचित दर पर उर्वरक उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कृषि विभाग के अधिकारियों को खाद के भंडारण एवं वितरण व्यवस्था की सतत निगरानी करने के निर्देश दिए हैं।
इसी क्रम में दिनांक 16 मई 2026 को अनुविभागीय कृषि अधिकारी सरायपाली एवं वरिष्ठ कृषि अधिकारी बसना द्वारा विजय कृषि केन्द्र, पदमपुर रोड बंसुलाडीपा, बसना का औचक निरीक्षण किया गया।
निरीक्षण के दौरान संबंधित फर्म द्वारा दुकान में उर्वरक की मूल्य सूची प्रदर्शित नहीं करना, बिल बुक का संधारण नहीं करना तथा पॉस मशीन के स्टॉक एवं भौतिक स्टॉक में अंतर पाया गया। इस पर संबंधित फर्म को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया।
फर्म द्वारा प्रस्तुत जवाब संतोषजनक नहीं पाए जाने पर उर्वरक नियंत्रण आदेश 1985 के प्रावधानों के उल्लंघन के तहत विजय कृषि केन्द्र बंसुला का उर्वरक प्राधिकार पत्र निरस्त कर दिया गया है।
उप संचालक कृषि श्री एफ. आर. कश्यप ने बताया कि जिले में उर्वरक विक्रेताओं की सतत जांच की जा रही है। कोई भी विक्रेता उर्वरक नियमों का उल्लंघन करते हुए पाया जाता है तो उसके विरुद्ध उर्वरक नियंत्रण आदेश के तहत नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

*नवरात्रि की अष्टमी पर मां दुर्गा के दरबार पहुंचीं जिला पंचायत सभापति सुशीला सिन्हा**सम्पादक आर, एल, कुलदीप की रिपोर्ट*

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*नवरात्रि की अष्टमी पर मां दुर्गा के दरबार पहुंचीं जिला पंचायत सभापति सुशीला सिन्हा**सम्पादक आर, एल, कुलदीप की रिपोर्ट*

 

*धमनी में विधि-विधान से हुई पूजा-अर्चना, ग्रामवासियों ने मां दुर्गा से लिया आशीर्वाद; गांव की खुशहाली और क्षेत्र की समृद्धि के लिए की प्रार्थना*

शक्ती 18  अक्टूबर 2026

सक्ती // धमनी शारदीय नवरात्रि पर्व के पावन अवसर पर ग्राम पंचायत धमनी में भक्ति और आस्था का माहौल देखने को मिला। नवरात्रि की अष्टमी तिथि पर जिला पंचायत सभापति सुश्री सुशीला सिन्हा ग्राम पंचायत धमनी पहुंचीं, जहां उन्होंने मां दुर्गा के दर्शन कर विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। इस दौरान उन्होंने मां दुर्गा से क्षेत्रवासियों के सुख, समृद्धि, शांति और खुशहाली की कामना करते हुए सभी के जीवन में सुखद एवं मंगलमय वातावरण बनाए रखने की प्रार्थना की।

 

नवरात्रि का पर्व मां दुर्गा की आराधना, शक्ति की उपासना और श्रद्धा का प्रतीक माना जाता है। इस पावन अवसर पर ग्राम पंचायत धमनी में श्रद्धालुओं ने मां दुर्गा के प्रति अपनी आस्था व्यक्त करते हुए पूजा-अर्चना में भाग लिया। अष्टमी के अवसर पर आयोजित धार्मिक कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों, दुर्गा पूजा समिति के सदस्यों और ग्रामवासियों की सहभागिता रही। सभी ने मां दुर्गा का आशीर्वाद प्राप्त कर ग्राम पंचायत की उन्नति, खुशहाली और क्षेत्र में सुख-शांति कायम रहने की कामना की।

 

इस अवसर पर ग्राम पंचायत धमनी के सरपंच श्री नेतराम मधुकर भी उपस्थित रहे। उन्होंने भी मां दुर्गा की पूजा-अर्चना कर ग्रामवासियों के सुखमय जीवन और गांव की समृद्धि के लिए प्रार्थना की। धार्मिक आयोजन के दौरान उपस्थित लोगों ने नवरात्रि पर्व की महत्ता को आत्मसात करते हुए श्रद्धा और भक्ति के साथ मां दुर्गा की आराधना की।

 

कार्यक्रम में जिला पंचायत सभापति सुश्री सुशीला सिन्हा, ग्राम पंचायत धमनी के सरपंच श्री नेतराम मधुकर, दीपक मधुकर, उपसरपंच युवराज साहू, पंचगण, दुर्गा पूजा समिति के समस्त सदस्यगण एवं बड़ी संख्या में ग्रामवासी उपस्थित रहे। सभी ने धार्मिक आयोजन में अपनी सहभागिता निभाते हुए मां दुर्गा का आशीर्वाद प्राप्त किया।

 

नवरात्रि की अष्टमी पर आयोजित इस धार्मिक कार्यक्रम ने ग्राम पंचायत धमनी में आस्था और भक्ति के वातावरण को और भी मजबूत किया। इस अवसर पर उपस्थित जनप्रतिनिधियों एवं ग्रामवासियों ने गांव की सुख-समृद्धि, सामाजिक सौहार्द और क्षेत्र की निरंतर उन्नति के लिए मां दुर्गा से प्रार्थना की।

*माटी पुत्र और हर घर के लाल: बीजापुर विधायक विक्रम शाह मंडावी बतकम्मा और नवरात्रि पर्व पर पहुंचे गांव-गांव, माता-बहनों के साथ साझा की खुशियां*

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*माटी पुत्र और हर घर के लाल: बीजापुर विधायक विक्रम शाह मंडावी बतकम्मा और नवरात्रि पर्व पर पहुंचे गांव-गांव, माता-बहनों के साथ साझा की खुशियां*

बीजापुर: 18 अक्टूबर 2026

छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में इन दिनों चारों तरफ आस्था, उल्लास और सांस्कृतिक परंपराओं की अद्भुत छटा बिखरी हुई है। जिले के हर गांव में पारंपरिक बतकम्मा पर्व की धूम मची हुई है।

इस पावन अवसर पर जिले के माटी पुत्र, हर घर के चहेते और लोकप्रिय विधायक विक्रम शाह मंडावी माता-बहनों की खुशियों में शामिल होने के लिए खुद गांवों में पहुंच रहे हैं।

बिना किसी राजनीतिक स्वार्थ के, केवल अपनेपन और पारिवारिक आत्मीयता के साथ विक्रम मंडावी रात के अंधेरे, खराब मौसम, या कड़ाके की धूप की परवाह किए बिना दूर-दराज के गांवों तक पहुंच रहे हैं। क्षेत्र के लोग उन्हें प्यार से अपना नेता जी जो सुख दुःख’ का साथी  और हर संकट में तुरंत हाजिर होने वाला अपना नेता मानते हैं।

*हर घर को अपना घर मानते हैं विधायक विक्रम मंडावी*

विक्रम शाह मंडावी की सबसे बड़ी खूबी उनका ‘अपनापन’ है, वे राजनीति को बाद में और अपनेपन को हमेशा पहले रखते हैं, जिले के हर घर को वे अपना ही घर मानते हैं।

यही कारण है कि बतकम्मा पर्व के दौरान वे देर रात तक गांवों का दौरा कर रहे हैं, माता-बहनों को शुभकामनाएं दे रहे हैं और मां गौरी की पूजा-अर्चना कर क्षेत्र की सुख-समृद्धि का आशीर्वाद ले रहे हैं।

*दुर्गा पंडालों में पहुंचकर लिया माता रानी का आशीर्वाद*

बतकम्मा उत्सव के साथ-साथ विधायक विक्रम मंडावी जिले के विभिन्न दुर्गा मंदिरों और पूजा पंडालों में भी लगातार पहुंच रहे हैं। उन्होंने नवरात्रि की इस पवित्र बेला में मां दुर्गा के दर्शन कर आशीर्वाद लिया तथा पंडालों में मौजूद श्रद्धालुओं, माताओं, बहनों, युवाओं और बुजुर्गों से भेंट कर उन्हें पर्व की बधाइयां दीं।

*सुख-दुख के सच्चे साथी क्षेत्रवासियों का कहना है कि विक्रम मंडावी केवल चुनावों में वोट मांगने वाले नेता नहीं हैं, बल्कि वे हर परिस्थिति में जनता के कंधे से कंधा मिलाकर चलने वाले जननेता हैं। जब भी किसी गांव या घर पर कोई विपत्ति आती है, वे सुरक्षा और मदद का जिम्मा खुद उठा लेते हैं।

विधायक के इस जन-सरोकार और मिलनसार स्वभाव से पूरे जिले के ग्रामीण अंचलों में खुशी का माहौल है।

माटी पुत्र विक्रम मंडावी की यह सादगी और जनता के प्रति समर्पण पूरे बस्तर संभाग में एक मिसाल बन चुकी है।

*बस्तर की 150 साल पुरानी मुरिया दरबार परंपरा को मिटाने की साजिश बर्दाश्त नहीं होगी — विधायक विक्रम मंडावी*

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*बस्तर की 150 साल पुरानी मुरिया दरबार परंपरा को मिटाने की साजिश बर्दाश्त नहीं होगी — विधायक विक्रम मंडावी*

 

 

बीजापुर -18/ अक्टूबर /2025

75 दिन तक चलने वाले विश्व प्रसिद्ध बस्तर दशहरा के समापन पर होने वाले पारंपरिक मुरिया दरबार का नाम बदलने की कोशिश बस्तर की आदिम परंपरा, संस्कृति और ऐतिहासिक पहचान को मिटाने का घृणित और सुनियोजित षड्यंत्र है।

यह भारतीय जनता पार्टी और उसके नेताओं की ओर से बस्तर के आदिवासियों के अस्तित्व पर सीधा हमला है।

विधायक विक्रम मंडावी ने अपने विज्ञप्ति में कहा कि बस्तर दशहरा केवल एक पर्व नहीं, बल्कि बस्तर के आदिवासियों की आस्था, अस्मिता और जीवन का आधार है।

विधायक विक्रम मंडावी ने अपने विज्ञप्ति में आगे कहा कि सिरहासार में लगने वाला मुरिया दरबार बस्तर रियासत की उस जीवंत लोक परंपरा का प्रतीक है, जिसमें मांझी-चालकी और आदिवासी समाज अपनी बात प्रशासन के सामने रखते थे।

आज इसे “आम दरबार” कहकर मिटाने की कोशिश न केवल आदिवासियों का अपमान है, बल्कि माँ दंतेश्वरी का भी अपमान है।

विधायक विक्रम मंडावी ने आगे कहा कि भाजपा की यह सोच उसी मानसिकता का हिस्सा है, जो बस्तर की जल-जंगल-जमीन और आदिवासी संस्कृति को अपने हिसाब से तोड़-मरोड़ कर बदलना चाहती है।

उन्होंने यह भी कहा इससे पहले जगदलपुर का मशहूर माड़िया चौक का नाम बदला गया अब मुरिया दरबार का नाम बदला जा रहा है, नाम बदलना कोई छोटी बात नहीं है यह आदिवासियों के ऐतिहासिक पहचान को मिटाने का पहला कदम है।

विधायक विक्रम मंडावी ने प्रदेश के आदिवासी मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से मांग की है कि मुरिया दरबार का नाम बदलने का निर्णय तत्काल प्रभाव से वापस लिया जाए। सभी आधिकारिक दस्तावेजों, आमंत्रण पत्रों और कार्यक्रम सूची में केवल “मुरिया दरबार” ही लिखा जाए।अन्यथा इसे लेकर उग्र आंदोलन करेगा।

 

 

 

*महाअष्टमी  में जगत जननी मां महागौरी की आराधना,  पूजा-विधि, मंत्र, भोग और संपूर्ण अनुष्ठान* * नवरात्रि विशेष रिपोर्ट दीपक मरकाम*

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*महाअष्टमी  में जगत जननी मां महागौरी की आराधना,  पूजा-विधि, मंत्र, भोग और संपूर्ण अनुष्ठान*

* नवरात्रि विशेष रिपोर्ट दीपक मरकाम*

भारतीय संस्कृति और सनातन परंपरा में शारदीय और चैत्र नवरात्रि का विशेष आध्यात्मिक महत्व है। नवरात्रि की अष्टमी तिथि को महाअष्टमी या दुर्गा अष्टमी के नाम से जाना जाता है। इस पावन दिन मां दुर्गा के आठवें स्वरूप मां महागौरी की उपासना की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन मां की विधिवत पूजा करने से भक्तों के सभी संकट दूर होते हैं, सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है और असंभव कार्य भी संभव हो जाते हैं।

*1. मां महागौरी का स्वरूप और नाम का महत्व*

* स्वरूप: मां महागौरी का वर्ण अत्यंत गौर (श्वेत) है, इसीलिए इन्हें ‘महागौरी’ कहा जाता है। इनकी तुलना शंख, चंद्र और कुंद के फूल से की जाती है। इनके वस्त्र और आभूषण भी श्वेत रंग के ही हैं।

* वाहन: मां महागौरी का वाहन वृषभ (बैल) है, इसीलिए इन्हें ‘वृषारूढ़ा’ भी कहा जाता है।

* चतुर्भुज रूप: मां के चार हाथ हैं। इनके ऊपर वाले दाहिने हाथ में अभय मुद्रा और नीचे वाले दाहिने हाथ में त्रिशूल है। ऊपर वाले बाएं हाथ में डमरू और नीचे वाले बाएं हाथ में वरद मुद्रा है।

* कथा: भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए इन्होंने कठोर तपस्या की थी, जिससे इनका शरीर काला पड़ गया था। इनकी तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने जब गंगा के पवित्र जल से इनका अभिषेक किया, तब इनका शरीर विद्युत के समान कांतिवान और अत्यंत गौर हो गया, तभी से इनका नाम महागौरी पड़ा।

*2. पंचांग अनुसार महत्व एवं तिथि*

पंचांग के अनुसार, महाअष्टमी का दिन महासंयोग और विशेष ऊर्जा का प्रतीक होता है। इस दिन माता के दर्शन मात्र से ही कई यज्ञों के समान पुण्य फल की प्राप्ति होती है। कई घरों और मंदिरों में इस दिन कन्या पूजन (कंजक) का विशेष विधान है, जिसमें 2 वर्ष से 10 वर्ष तक की कन्याओं को मां का रूप मानकर पूजा जाता है।

3. वस्त्र और रंग (विशेष चढ़ावा)

* प्रिय रंग: मां महागौरी को सफेद (श्वेत) या गुलाबी रंग अत्यंत प्रिय है।

* वस्त्र: इस दिन साधक को स्नान के बाद श्वेत या गुलाबी वस्त्र धारण कर, मां को भी इसी रंग के वस्त्र या चुनरी अर्पित करनी चाहिए।

* विशेष चढ़ावा: मां को शृंगार का सामान (लाल सिंदूर, महावर, चूड़ियां, बिंदी, आलता, इत्र और लाल चुनरी) अर्पित करना अत्यंत शुभ माना जाता है। इसके अलावा सुहाग की पिटारी चढ़ाने से अखंड सौभाग्य की प्राप्ति होती है।

*4. महाभोग और प्रसाद*

मां महागौरी को उनकी प्रसन्नता के लिए विशेष व्यंजनों का भोग लगाया जाता है:

* मुख्य भोग: मां को नारियल या नारियल से बनी मिठाई का भोग अत्यंत प्रिय है।

* कन्या पूजन भोग: महाअष्टमी के दिन विशेष रूप से हलवा, पूरी और काले चने का प्रसाद बनाकर मां को भोग लगाया जाता है और यही प्रसाद कन्याओं को परोसा जाता है।

*5. पूजा-पाठ विधि एवं विधान*

* ब्रह्म मुहूर्त स्नान: प्रातः काल जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र पहनें।

* कलश स्थापना पूजन: यदि घर में घटस्थापना की गई है, तो सबसे पहले गणेश-अंबिका, नवग्रह और कलश देवताओं की पूजा करें।

* चौकी सजाएं: लकड़ी की चौकी पर श्वेत वस्त्र बिछाकर मां महागौरी की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें।

* षोडशोपचार पूजा: मां को रोक्षत, अक्षत, सफेद फूल, चमेली या रात की रानी के पुष्प, धूप, दीप और नैवेद्य अर्पित करें।

* मंत्र जाप: रुद्राक्ष की माला से मां के मूल मंत्र का कम से कम एक या पांच माला जाप करें।

* दुर्गा सप्तशती पाठ: इस दिन दुर्गा सप्तशती के मध्यम चरित्र का पाठ या संपूर्ण पाठ करना बहुत फलदायी माना जाता है।

*6. अचूक मंत्र एवं स्तुति*

ध्यान मंत्र

> पूर्णेंदु निभा गौरी मनेवृषसंस्थिता हस्तत्रिशूल डमरूधरां भजेम्।

 

मूल मंत्र

ॐ ऐं ह्रीं क्लीं महागौरी नमः

 

देवी प्रार्थना (सर्वमंगलकारी)

या देवी सर्वभू‍तेषु माँ महागौरी रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

 

*7. महाअष्टमी के विशेष क्रिया-कलाप एवं अनुष्ठान*

* संधि पूजा (विशेष समय): अष्टमी और नवमी तिथि के संधिकाल (संधि काल) में मां दुर्गा की विशेष पूजा और बलि (प्रतीकात्मक रूप से फल या खीर की आहुति) दी जाती है। इस समय 108 दीपक जलाने की परंपरा है।

* हवन: कई स्थानों पर महाअष्टमी के दिन या नवमी के दिन विधि-विधान से हवन किया जाता है। अग्नि में आहुति देकर नवरात्रि व्रत की पूर्णता की कामना की जाती है।

* कन्या पूजन एवं लंगूरा पूजा: कन्याओं के चरण धोकर उन्हें आसन पर बैठाएं, उनके माथे पर रोली-अक्षत लगाएं, भोजन कराएं और अंत में दक्षिणा व उपहार देकर उनका आशीर्वाद लें। इसके साथ एक बालक (बटुक भैरव) को भी भोजन अवश्य कराएं।

*8. महाआरती*

संध्या के समय या पूजा के अंत में कपूर और घी के दीपक से मां महागौरी की आरती करें:

जय महागौरी जगत की माया। जै उमा भवानी जय महामाया॥

हरिद्वार मन कि आसन है मेरा। महा शक्ति रूप में डेरा तेरा॥

कठिन तपस्या तुमने की जब। भयों प्रकट वरदान तब॥

चतुरभुज रूप विराजित सोहे। रूप देख सुर-मुनि मन मोहे॥

जो कोई आवे तेरी द्वारे। सब की विपत मिटावें सारे॥

मार्कण्डेय पूजत पद सेवा। महिमा तेरी गावे देवा॥

महागौरी मां की आरती जो गावे। सुख-समृद्धि घर में पावे॥

 

विशेष नोट: महाअष्टमी की रात्रि को मां भगवती की जागरण या भजन-कीर्तन करने से घर की नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है और सकारात्मकता एवं माता का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

 

*राष्ट्र सेवा के साथ सेहत की अलख: CRPF की A/22 बटालियन ने संगमपल्ली में चलाया ‘फिट इंडिया’ अभियान, ग्रामीणों को दिया तंदुरुस्ती का संदेश*

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*राष्ट्र सेवा के साथ सेहत की अलख: CRPF की A/22 बटालियन ने संगमपल्ली में चलाया ‘फिट इंडिया’ अभियान, ग्रामीणों को दिया तंदुरुस्ती का संदेश*

 

 

बीजापुर मद्देड़, 17 अक्टूबर 2026

 

केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) के जवान देश की आंतरिक सुरक्षा संभालने के साथ-साथ आम जनता के कल्याण और उनके स्वास्थ्य के प्रति भी पूरी तरह समर्पित हैं।

 

इसी कड़ी में, सीआरपीएफ की 22 वीं वाहिनी की ए/कंपनी के अधिकारियों और जवानों द्वारा बीजापुर जिले के संगमपल्ली क्षेत्र में एक विशेष और प्रेरणादायक कार्यक्रम का आयोजन किया गया ।

 

 

स्थानीय ग्रामीणों और युवाओं में स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से यहाँ ‘फिट इंडिया’ अभियान के तहत ” फिटनेस को डोज आधा घंटा रोज ” कार्यक्रम चलाया गया ।

 

इस पहल का मुख्य मकसद सुदूर ग्रामीण अंचलों के लोगों को शारीरिक रूप से फिट रहने के लिए प्रेरित करना था।

 

युवाओं और बच्चों में दिखा भारी उत्साह

कार्यक्रम के दौरान संगमपल्ली के स्थानीय युवाओं और स्कूली बच्चों में गजब का उत्साह देखने को मिला।

 

उनकी सक्रिय सहभागिता ने इस आयोजन को बेहद सफल बना दिया ।

 

सीआरपीएफ जवानों के साथ कदम से कदम मिलाकर युवाओं और बच्चों ने लंबी दौड़ लगाई और विभिन्न शारीरिक व्यायाम किये ।

 

खेलकूद और फिटनेस के इस माहौल ने पूरे गांव में एक नया जोश भर दिया ।

 

जवानों ने दिए सेहत और खान-पान से जुड़े जरूरी टिप्स

व्यायाम और दौड़ के बाद, ए/22 बटालियन के सीआरपीएफ अधिकारियों ने उपस्थित युवाओं और ग्रामीणों को स्वास्थ्यवर्धक जीवनशैली अपनाने के लिए मार्गदर्शन दिया ।

 

जवानों ने बल देकर निम्नलिखित बातों पर चर्चा की:

* नियमित व्यायाम: जीवन में रोजाना कसरत को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाने की सलाह दी ।

 

* संतुलित आहार: शरीर को ऊर्जावान और मजबूत बनाए रखने के लिए पौष्टिक व संतुलित भोजन करने के लिए प्रेरित किया ।

 

* पर्याप्त पानी: शरीर को हाइड्रेट रखने के लिए पर्याप्त मात्रा में पानी पीने की बात कही ।

 

* जंक फूड से बचाव: फास्ट फूड और अस्वस्थ खान-पान से दूर रहने की हिदायत दी, जो स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होते हैं ।

 

सुरक्षा बलों और आम जनता के बीच मजबूत हो रहे हैं प्रगाढ़ संबंध

इस अनूठी पहल में स्थानीय ग्रामीणों और युवाओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया ।

 

इस प्रकार के आयोजनों से न केवल ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ रही है, बल्कि सुरक्षा बलों और आम जनता के बीच आपसी विश्वास, भाईचारा और मधुर संबंध भी और अधिक मजबूत हो रहे हैं ।

 

सीआरपीएफ का यह मानवीय चेहरा बस्तर अंचल में सुरक्षा के साथ-साथ सकारात्मक बदलाव की एक नई कहानी लिख रहा है ।

 *मददेड दुर्गा मंदिर में नवरात्रि की सप्तमी पर भव्य दीप यज्ञ का आयोजन, गायत्री परिवार की अगवानी में गूंजे मंत्र*

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*मददेड दुर्गा मंदिर में नवरात्रि की सप्तमी पर भव्य दीप यज्ञ का आयोजन, गायत्री परिवार की अगवानी में गूंजे मंत्र*

 

बीजापुर,भोपालपटनम, मद्देड़,18 अक्टूबर 2026,

 

शारदीय नवरात्रि के पावन पर्व पर बस्तर अंचल के बीजापुर जिले के भोपालपटनम तहसील अंतर्गत ऐतिहासिक और धार्मिक गांव मददेड स्थित दुर्गा मंदिर में नवरात्रि की महासप्तमी के अवसर पर एक भव्य और दिव्य दीप यज्ञ का आयोजन किया गया।

 

इस धार्मिक अनुष्ठान में बड़ी संख्या में पहुंचे महिला भक्त गण,श्रद्धालुओं और अन्य ग्राम के महिलाएं बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और मां दुर्गा व वेदमाता गायत्री की आराधना की।

 

*विधि-विधान और मंत्रोच्चार के साथ संपन्न हुआ अनुष्ठान,*

 

दीप यज्ञ का शुभारंभ गायत्री परिवार की प्रतिष्ठित पुरोहित गुरु माता शांता मरकाम के मार्गदर्शन में पूरी विधि-विधान और मंत्रोच्चार के साथ किया गया।

 

*यज्ञ की शुरुआत से लेकर पूर्णाहुति तक की संपूर्ण प्रक्रिया वैदिक मंत्रों के बीच संपन्न हुई:*

 

* गुरु वंदना और ध्यान: अनुष्ठान के आरंभ में सर्वप्रथम गुरु माता और गुरु पिता का ध्यान किया गया, इसके पश्चात जगत जननी वेदमाता गायत्री माता का स्मरण कर पूजन की शुरुआत हुई।

 

* कलश पूजन व रक्षा सूत्र: कार्यक्रम के दौरान कलश पूजन किया गया और श्रद्धालुओं ने एक-दूसरे के हाथों में रक्षा सूत्र (कलावा) बांधकर आपसी सौहार्द, स्नेह और भाईचारे का संदेश दिया। साथ ही माथे पर तिलक लगाकर परस्पर मंगलकामनाएं की गईं।

 

* दीप प्रज्वलन और संकल्प: इस विशेष दीप यज्ञ में महिलाओं, युवतियों और भक्तगणों द्वारा घरों से लाए गए आटे के दीपकों को पंक्तिबद्ध कर अगरबती की लव से प्रज्वलित किया गया।

 

*दुर्गा मंदिर ,परिसर दीपों की अलौकिक रोशनी से जगमगा उठा ऐसा प्रतीत हो पूरा ग्राम जगमगा हो*

 

*जनकल्याण और बुराइयों को त्यागने का संकल्प*

यज्ञ के दौरान पुरोहित गुरु माता शांता मरकाम ने श्रद्धालुओं को वेदमंत्रों के माध्यम से अपने परिवार, रिश्तेदारों, सगा-संबंधियों, पड़ोसियों और खास मित्रों के उत्तम स्वास्थ्य, दीर्घायु और सुख-समृद्धि की कामना कराई।

 

इस दौरान गुरु माता शांता मरकाम ने एक बेहद प्रेरणादायी संदेश दिया गया कि प्रत्येक व्यक्ति को अपने भीतर की बुराइयों, अहंकार और दुर्गुणों का संकल्प पूर्वक त्याग करना चाहिए, ताकि एक सकारात्मक और आदर्श समाज का निर्माण हो सके।

 

*आरती के साथ पूर्ण हुआ अनुष्ठान,*

 

कार्यक्रम के अंतिम चरण में गायत्री माता की आरती और मां दुर्गा जी की भव्य आरती की गई, जिसके पश्चात प्रसाद वितरण के साथ इस पावन दीप यज्ञ का समापन हुआ।

 

इस धार्मिक आयोजन से पूरा मददेड क्षेत्र भक्तिमय और आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर नजर आया।

बसना वासियों के लिए अच्छी खबर: अब बच्चों के दिल की जांच के लिए बाहर नहीं जाना पड़ेगा..

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बसना वासियों के लिए अच्छी खबर: अब बच्चों केदिल की जांच के लिए बाहर नहीं जाना पड़ेगा

बसना (महासमुंद) – क्षेत्र के लोगों के लिए राहत भरी खबर है। अब बाल हृदय रोगों के इलाज के लिए बड़े शहरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे।

अग्रवाल नर्सिंग होम मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल, बसना में पहली बार बाल हृदय रोग विशेषज्ञ की विशेष ओपीडी लगने जा रही है।

 

इस विशेष शिविर में रायपुर और अन्य बड़े शहरों में अपनी सेवाएं दे चुके प्रसिद्ध बाल हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. अनिल चौहान अपनी सेवाएं देंगे। डॉ. चौहान MBBS, M.D. (VNSGU, सूरत), Fellowship in Pediatrics Cardiology हैं और उन्हें इस क्षेत्र में 7 वर्षों से अधिक का अनुभव है।

इन बीमारियों का होगा विशेष परीक्षण:

• जन्म से दिल में छेद या बनावट की समस्या • बच्चों में नीला पड़ना या जल्दी साँस फूलना • बार-बार थक जाना या दूध ठीक से न पी पाना • बच्चों में दिल की धड़कन का तेज़ या अनियमित होना • दिल के वाल्व से जुड़ी समस्या • बच्चों में सीने में दर्द या चक्कर आना • दिल के संक्रमण या सूजन • पहले हुए दिल के ऑपरेशन या इलाज से जुड़ी परेशानियाँ 

शिविर का विवरण:

स्थान – अग्रवाल नर्सिंग होम, बसना

दिनांक – 18 अक्टूबर 2026, रविवार

समय – सुबह 11:00 बजे से दोपहर 3:00 बजे तक

 

अस्पताल प्रबंधन ने अपील की है कि जिन बच्चों में इस तरह के लक्षण दिख रहे हैं, वे समय पर पहुंचकर विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य लें। यह बसना क्षेत्र के लिए एक बड़ी स्वास्थ्य सुविधा है।

संपर्क के लिए: अग्रवाल नर्सिंग होम मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल, बसना, जिला – महासमुंद (छ.ग.)

मो. 84618-11000, 77730-86100

* 40 साल बाद पर्यटकों के लिए खुलेगा इंद्रावती टाइगर रिजर्व, 1 नवंबर से शुरू होगी जंगल सफारी* * बीजापुर के जंगलों में फिर गूंजेगी पर्यटन की हलचल, शांति बहाली के बाद वन विभाग ने शुरू की तैयारियां; स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के खुलेंगे नए रास्ते* *बस्तर सम्भाग जगदलपुर बीजापुर* * बीजापुर जिले से तेज नारायण सिंह की रिपोर्ट*,,,,

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* 40 साल बाद पर्यटकों के लिए खुलेगा इंद्रावती टाइगर रिजर्व, 1 नवंबर से शुरू होगी जंगल सफारी*

* बीजापुर के जंगलों में फिर गूंजेगी पर्यटन की हलचल, शांति बहाली के बाद वन विभाग ने शुरू की तैयारियां; स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के खुलेंगे नए रास्ते*

*बस्तर सम्भाग जगदलपुर बीजापुर*

* बीजापुर जिले से तेज नारायण सिंह की रिपोर्ट*,,,,

*बीजापुर।,,,,,, छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग के बीजापुर जिले में स्थित इंद्रावती टाइगर रिजर्व से पर्यटन को लेकर बड़ी खबर सामने आई है। करीब 40 साल के लंबे इंतजार के बाद यह टाइगर रिजर्व 1 नवंबर 2026 से पर्यटकों के लिए फिर से खोले जाने की तैयारी है। इससे बस्तर के प्राकृतिक सौंदर्य, वन्यजीवों और घने जंगलों को करीब से देखने के इच्छुक पर्यटकों को नया अवसर मिलने की उम्मीद है।*

*शांति बहाली के बाद पर्यटन को बढ़ावा देने की तैयारी*

लंबे समय तक नक्सल गतिविधियों के कारण प्रभावित रहे इस क्षेत्र में शांति बहाली के बाद पर्यटन की संभावनाओं को फिर से विकसित करने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं। वन विभाग राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) के दिशा-निर्देशों के अनुरूप नए सफारी रूट तैयार करने में जुटा है। इन तैयारियों का उद्देश्य पर्यटकों को सुरक्षित तरीके से जंगल सफारी का अनुभव उपलब्ध कराना है।

स्थानीय युवाओं को मिलेगा रोजगार का अवसर

इंद्रावती टाइगर रिजर्व के दोबारा खुलने से क्षेत्र में पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। सफारी संचालन, स्थानीय गाइड, वाहन सेवा और पर्यटकों से जुड़ी अन्य सुविधाओं के माध्यम से स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर भी पैदा हो सकते हैं। इससे क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने की संभावना है।

बस्तर के पर्यटन को मिलेगी नई पहचान

इंद्रावती टाइगर रिजर्व अपनी समृद्ध जैव विविधता, घने जंगलों और वन्यजीवों के लिए जाना जाता है। यहां पर्यटन की शुरुआत होने से बस्तर को प्राकृतिक पर्यटन के मानचित्र पर नई पहचान मिल सकती है।

हालांकि, सफारी शुरू होने की अंतिम तारीख, बुकिंग प्रक्रिया, निर्धारित रूट और पर्यटकों के लिए जारी होने वाले दिशा-निर्देशों की आधिकारिक पुष्टि वन विभाग की ओर से होना बाकी है। पर्यटकों को यात्रा की योजना बनाने से पहले आधिकारिक सूचना का इंतजार करना चाहिए।

*स्वामित्व योजना से ग्रामीणों को मिला संपत्ति पर अधिकार, ग्राम भट्टीगुड़ा में अधिकार अभिलेखों का वितरण* ,,,,,,, तेजनारायण सिंह की रिपोर्ट,,,,,,

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*स्वामित्व योजना से ग्रामीणों को मिला संपत्ति पर अधिकार, ग्राम भट्टीगुड़ा में अधिकार अभिलेखों का वितरण*

,,,,,,, तेजनारायण सिंह की रिपोर्ट,,,,,,

**कलेक्टर श्री विश्वदीप के मार्गदर्शन में ग्रामीणों को मिला अधिकार अभिलेख, संपत्ति संबंधी अधिकारों को मिलेगी मजबूती**

**ग्रामीणों के आर्थिक सशक्तिकरण एवं संपत्ति के दस्तावेजीकरण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल**

**बीजापुर,,,,,,,,, कलेक्टर श्री विश्वदीप के मार्गदर्शन में जिले में केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी स्वामित्व योजना का प्रभावी क्रियान्वयन किया जा रहा है। इसी क्रम में ग्राम भट्टीगुड़ा में स्वामित्व योजना अंतर्गत ग्रामीणों को अधिकार अभिलेखों का वितरण किया गया। इस पहल से ग्रामीणों को उनकी आवासीय संपत्तियों के संबंध में वैधानिक दस्तावेज उपलब्ध होने के साथ ही संपत्ति संबंधी अधिकारों को मजबूती मिलेगी।

स्वामित्व योजना का प्रमुख उद्देश्य ग्रामीण आबादी क्षेत्रों में स्थित आवासीय संपत्तियों का आधुनिक तकनीक के माध्यम से सर्वेक्षण कर उनका सटीक अभिलेखीकरण करना तथा पात्र संपत्ति धारकों को अधिकार अभिलेख प्रदान करना है। योजना के माध्यम से ग्रामीण परिवारों को उनकी संपत्ति का प्रमाणिक दस्तावेज उपलब्ध कराया जा रहा है, जिससे भूमि एवं संपत्ति संबंधी विवादों में कमी लाने तथा ग्रामीणों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने में सहायता मिलेगी।

**संपत्ति का अधिकार अभिलेख बनेगा आर्थिक सशक्तिकरण का आधार**

स्वामित्व योजना के अंतर्गत प्राप्त अधिकार अभिलेख ग्रामीणों के लिए महत्वपूर्ण दस्तावेज साबित होंगे। इससे संपत्ति के स्वामित्व की पहचान स्पष्ट होगी तथा पात्र हितग्राही नियमानुसार अपनी संपत्ति का उपयोग बैंक ऋण एवं अन्य वित्तीय सुविधाओं के लिए कर सकेंगे। इसके साथ ही संपत्ति के क्रय-विक्रय, उत्तराधिकार एवं अन्य संबंधित प्रक्रियाओं में पारदर्शिता बढ़ाने में भी मदद मिलेगी।

**ग्रामीण क्षेत्रों में सुशासन और पारदर्शिता को मिल रहा बढ़ावा**

कलेक्टर श्री विश्वदीप के मार्गदर्शन में जिला प्रशासन द्वारा शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। स्वामित्व योजना के माध्यम से ग्रामीण आबादी की संपत्तियों का व्यवस्थित अभिलेखीकरण होने से राजस्व प्रशासन में पारदर्शिता बढ़ेगी तथा ग्रामीणों को अपनी संपत्ति से संबंधित दस्तावेज प्राप्त करने में सुविधा होगी।

ग्राम भट्टीगुड़ा में अधिकार अभिलेखों का वितरण ग्रामीण परिवारों को संपत्ति संबंधी अधिकारों के प्रति जागरूक करने और उन्हें सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। जिला प्रशासन का प्रयास है कि योजना के अंतर्गत सभी पात्र ग्रामीण परिवारों को निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार लाभान्वित किया जाए, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक सुरक्षा, आत्मनिर्भरता एवं सुशासन को नई मजबूती मिल सके।

*महासप्तमी पर पंडालों के खुलेंगे पट, मां कालरात्रि के जयकारों से गूंजेंगे मंदिर और दरबार* *नवरात्रि विशेष रिपोर्ट दीपक मरकाम*

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*महासप्तमी पर पंडालों के खुलेंगे पट, मां कालरात्रि के जयकारों से गूंजेंगे मंदिर और दरबार*

*नवरात्रि विशेष रिपोर्ट दीपक मरकाम*

शारदीय नवरात्रि के पावन पर्व पर आज सप्तमी तिथि (महासप्तमी) के अवसर पर मां दुर्गा के सातवें स्वरूप मां कालरात्रि की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की जाएगी । महासप्तमी के इस पावन दिन के साथ ही मंदिरों और भव्य दुर्गा पंडालों के पट आज आम भक्तों के दर्शन के लिए पूरी तरह खोल दिए गए हैं, जिससे आज सुबह से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी है।

*पंडालों के खुले पट और गूंजते मंत्र*

सप्तमी तिथि की प्रात:कालीन बेला में मां दुर्गा के नेत्र खोले जाने के साथ ही भक्तों के लिए दर्शन का सिलसिला शुरू हो गया है। मंदिरों और पंडालों में ‘या देवी सर्वभूतेषु माँ कालरात्रि रूपेण संस्थिता…’ के मंत्रोच्चार, ढोल-नगाड़ों और शंख-घंटियों की गूंज से पूरा वातावरण पूरी तरह भक्तिमय  होगा।

*मां कालरात्रि का दिव्य स्वरूप और महिमा*

* शुभंकरी स्वरूप: धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां कालरात्रि का यह स्वरूप अत्यंत शक्तिशाली और दुष्टों का संहार करने वाला है, जो भक्तों के लिए हमेशा ‘शुभंकरी’ (कल्याणकारी) होता है।

* भय और बाधाओं से मुक्ति: इनकी आराधना करने से सभी प्रकार के भय, बाधाएं, रोग और नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है। साथ ही जीवन में साहस, संयम और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

*आज की विशेष पूजा-विधि, भोग और रंग*

* प्रिय भोग: मां कालरात्रि को गुड़ या गुड़ से बनी मिठाइयों का भोग अत्यंत प्रिय माना जाता है। मान्यता है कि इससे माता प्रसन्न होकर आरोग्य और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देती हैं।

* रंग का महत्व: सप्तमी तिथि के दिन स्लेटी (ग्रे) रंग को संतुलन और शुभता का प्रतीक माना जाता है, इसलिए आज बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने पारंपरिक परिधानों में माता की आराधना की।

*भक्तों में भारी उत्साह*

महासप्तमी के साथ ही सप्तमी, अष्टमी,नवमी, मां दुर्गा की त्रिदिवसीय विशेष पूजा का मुख्य चरण आरंभ हो चुका है। उत्सव के इस उल्लासपूर्ण माहौल के बीच श्रद्धालु माता के दरबार में पहुंचकर अपने और अपने परिवार की सुख-समृद्धि की मंगलकामना कर रहे हैं।

 

*विभाग का नाम बदलने के विरोध में सर्व आदिवासी समाज ने सौंपा ज्ञापन*

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*विभाग का नाम बदलने के विरोध में सर्व आदिवासी समाज ने सौंपा ज्ञापन*

 

*15 दिन में जवाब देने की मांग, निर्णय वापस नहीं लेने पर आंदोलन की चेतावनी*

 

बीजापुर 16 अक्टूबर 2026

 

आदिम जाति कल्याण विभाग का नाम बदलकर जनजातीय कार्य विभाग किए जाने के निर्णय के विरोध में शुक्रवार को सर्व आदिवासी समाज ने एसडीएम राकेश साहू के माध्यम से मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। समाज ने विभाग का पुराना नाम यथावत रखने और नाम परिवर्तन के औचित्य को सार्वजनिक करने की मांग की है।

सर्व आदिवासी समाज के जिला अध्यक्ष जग्गूराम तेलामी के नेतृत्व में सौंपे गए ज्ञापन में समाज ने कहा कि आदिवासी समाज के कल्याण, शिक्षा और विकास के उद्देश्य से स्थापित विभाग के नाम से ‘कल्याण’ और ‘विकास’ जैसे शब्द हटाने से समाज में असंतोष है। समाज ने सरकार से निर्णय के पीछे का कारण स्पष्ट करने और इस संबंध में आदिवासी प्रतिनिधियों व सामाजिक संगठनों से चर्चा करने की मांग की है।

ज्ञापन में आश्रम शालाओं और छात्रावासों की व्यवस्था, शिक्षा की गुणवत्ता, स्वास्थ्य, रोजगार, कुपोषण उन्मूलन तथा पांचवीं अनुसूची, पेसा कानून और वनाधिकार अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन का मुद्दा भी उठाया गया। समाज ने विभागीय बदलावों, बजट और प्रशासनिक जिम्मेदारियों का विवरण सार्वजनिक करने की मांग की है।

सर्व आदिवासी समाज ने ज्ञापन प्राप्त होने के 15 दिनों के भीतर लिखित जवाब देने की मांग करते हुए चेतावनी दी कि संतोषजनक जवाब नहीं मिलने और नाम परिवर्तन वापस लेने की दिशा में कार्रवाई नहीं होने पर चरणबद्ध आंदोलन किया जाएगा। समाज ने स्पष्ट किया कि उसका विरोध किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि आदिवासी समाज की पहचान, गरिमा और संवैधानिक अधिकारों से जुड़ा है।

इस दौरान शंकर कुडियम, कुंवर सिंह मज्जी, पांडु तेलम, मंगू लेकम, मासा लेकम, बुधराम लेकम, सु ताती, लक्ष्मण मिच्चा, लक्ष्मण कड़ती, गणपत यालम, जितेंद्र हेमला, सुखराम, कश्मीर एक्का, मुन्ना मिच्चा, गुड्डू मोडियाम, राकेश तेलम, विनोद काका सहित अन्य सामाजिक पदाधिकारी मौजूद थे।

*विभाग के नाम परिवर्तन का आधार स्पष्ट करे सरकार: सर्व आदिवासी समाज*

 

सरकार बताए कि ‘आदिम जाति कल्याण विभाग’ का नाम बदलकर ‘जनजातीय कार्य विभाग’ करने का निर्णय किन प्रशासनिक, नीतिगत अथवा वैधानिक आधारों पर लिया गया है। नाम परिवर्तन से आदिवासी समाज को क्या ठोस लाभ मिलेगा और इस निर्णय से पहले समाज के प्रतिनिधियों एवं सामाजिक संगठनों से विचार-विमर्श क्यों नहीं किया गया? सर्व आदिवासी समाज ने सरकार से नाम परिवर्तन का औचित्य सार्वजनिक करने और पूर्व नाम ‘आदिम जाति कल्याण विभाग’ को यथावत रखने की मांग की है।

* 40 साल बाद पर्यटकों के लिए खुलेगा इंद्रावती टाइगर रिजर्व, 1 नवंबर से शुरू होगी जंगल सफारी*

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* 40 साल बाद पर्यटकों के लिए खुलेगा इंद्रावती टाइगर रिजर्व, 1 नवंबर से शुरू होगी जंगल सफारी*

 

*बीजापुर के जंगलों में फिर गूंजेगी पर्यटन की हलचल, शांति बहाली के बाद वन विभाग ने शुरू की तैयारियां; स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के खुलेंगे नए रास्ते*

बस्तर सम्भाग, जगदलपुर,बीजापुर

*बीजापुर :::छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग के बीजापुर जिले में स्थित इंद्रावती टाइगर रिजर्व से पर्यटन को लेकर बड़ी खबर सामने आई है। करीब 40 साल के लंबे इंतजार के बाद यह टाइगर रिजर्व 1 नवंबर 2026 से पर्यटकों के लिए फिर से खोले जाने की तैयारी है। इससे बस्तर के प्राकृतिक सौंदर्य, वन्यजीवों और घने जंगलों को करीब से देखने के इच्छुक पर्यटकों को नया अवसर मिलने की उम्मीद है।*

 

*शांति बहाली के बाद पर्यटन को बढ़ावा देने की तैयारी*

 

लंबे समय तक नक्सल गतिविधियों के कारण प्रभावित रहे इस क्षेत्र में शांति बहाली के बाद पर्यटन की संभावनाओं को फिर से विकसित करने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं। वन विभाग राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) के दिशा-निर्देशों के अनुरूप नए सफारी रूट तैयार करने में जुटा है। इन तैयारियों का उद्देश्य पर्यटकों को सुरक्षित तरीके से जंगल सफारी का अनुभव उपलब्ध कराना है।

 

*स्थानीय युवाओं को मिलेगा रोजगार का अवसर*

 

इंद्रावती टाइगर रिजर्व के दोबारा खुलने से क्षेत्र में पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। सफारी संचालन, स्थानीय गाइड, वाहन सेवा और पर्यटकों से जुड़ी अन्य सुविधाओं के माध्यम से स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर भी पैदा हो सकते हैं। इससे क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने की संभावना है।

 

*बस्तर के पर्यटन को मिलेगी नई पहचान*

 

इंद्रावती टाइगर रिजर्व अपनी समृद्ध जैव विविधता, घने जंगलों और वन्यजीवों के लिए जाना जाता है। यहां पर्यटन की शुरुआत होने से बस्तर को प्राकृतिक पर्यटन के मानचित्र पर नई पहचान मिल सकती है।

 

हालांकि, सफारी शुरू होने की अंतिम तारीख, बुकिंग प्रक्रिया, निर्धारित रूट और पर्यटकों के लिए जारी होने वाले दिशा-निर्देशों की आधिकारिक पुष्टि वन विभाग की ओर से होना बाकी है। पर्यटकों को यात्रा की योजना बनाने से पहले आधिकारिक सूचना का इंतजार करना चाहिए।

*  जामताड़ा के साइबर ठगों पर बस्तर पुलिस का शिकंजा, 5.90 लाख की ठगी में दो आरोपी गिरफ्तार*

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*  जामताड़ा के साइबर ठगों पर बस्तर पुलिस का शिकंजा, 5.90 लाख की ठगी में दो आरोपी गिरफ्तार*

 

*फेसबुक पर पेंशन कार्ड बनवाने का विज्ञापन देकर सेवानिवृत्त शिक्षक को बनाया निशाना, 82 एटीएम कार्ड सहित मोबाइल और नकदी बरामद*

बस्तर सम्भाग जगदलपुर,

बस्तर पुलिस ने अंतरराज्यीय साइबर ठगी के मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए झारखंड के जामताड़ा जिले के दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों ने सेवानिवृत्त शिक्षक को पेंशन कार्ड बनवाने का झांसा देकर उनके बैंक खाते से 5 लाख 90 हजार रुपये ऑनलाइन ट्रांसफर कर ठगी की थी। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से विभिन्न बैंकों के 82 एटीएम कार्ड, 6 मोबाइल फोन, 25 हजार रुपये नकद और अन्य इलेक्ट्रॉनिक सामग्री बरामद की है।

*गिरफ्तार आरोपियों की पहचान*

सहबाज अंसारी (34 वर्ष), पिता इजराइल मिया, निवासी कोरीडी, नारायणपुर, जिला जामताड़ा, झारखंड।

जियाउल हक (36 वर्ष), पिता नफील मिया, निवासी मानपुर, कोईडीह-2, जिला जामताड़ा, झारखंड।

 

 

*फेसबुक पर विज्ञापन देखकर किया था संपर्क*

 

पुलिस के मुताबिक, पीड़ित ने शिकायत दर्ज कराई थी कि फेसबुक पर सीनियर सिटीजन पेंशन कार्ड बनवाने से संबंधित विज्ञापन देखकर उन्होंने लिंक पर क्लिक किया था। इसके बाद खुले ऑनलाइन फॉर्म में नाम, पता, आधार कार्ड, पैन कार्ड, मोबाइल नंबर और बैंक खाते से जुड़ी जानकारी भरने का विकल्प दिया गया। फॉर्म में अधूरी जानकारी छोड़ने के बाद अज्ञात मोबाइल नंबर से फोन आया। ठगों ने पीड़ित की व्यक्तिगत और बैंकिंग जानकारी हासिल करVOB उनके खाते से 5.90 लाख रुपये ऑनलाइन ट्रांसफर कर लिए।

 

मामले में थाना फ्रेजरपुर (परपा) में अपराध क्रमांक 241/2026 दर्ज कर जांच शुरू की गई। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक शलभ कुमार सिन्हा के निर्देश पर अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सुखनंदन राठौर के पर्यवेक्षण में नगर पुलिस अधीक्षक सुमित कुमार धोत्रे और साइबर सेल के उप पुलिस अधीक्षक चंद्रहास के मार्गदर्शन में अलग-अलग टीमें गठित की गईं।

 

*तकनीकी जांच में जामताड़ा के आरोपियों का मिला सुराग*

 

जांच के दौरान VOB पुलिस ने ठगी में इस्तेमाल किए गए मोबाइल नंबरों, रकम ट्रांसफर किए गए बैंक खातों और एटीएम से निकासी की जानकारी जुटाई। तकनीकी विश्लेषण से आरोपियों का संबंध झारखंड के जामताड़ा से सामने आया। आरोपी लगातार अपनी लोकेशन बदल रहे थे, लेकिन पुलिस ने जांच के दौरान उनकी लोकेशन कोलकाता में ट्रेस कर ली।

 

इसके बाद वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर निरीक्षक सागर पाठक के नेतृत्व में पुलिस टीम को कोलकाता, पश्चिम बंगाल भेजा गया। टीम ने पार्क स्ट्रीट क्षेत्र के करीब 200 होटलों में जानकारी जुटाते हुए स्थानीय पुलिस की मदद से घेराबंदी कर दोनों आरोपियों को गिरफ्तार किया।

 

*82 एटीएम कार्ड सहित कई सामान जब्त*

 

पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से अलग-अलग बैंकों के 82 एटीएम कार्ड, 6 मोबाइल फोन, 25 हजार रुपये नकद और अन्य इलेक्ट्रॉनिक सामग्री जब्त की है। गिरफ्तार आरोपियों को ट्रांजिट रिमांड पर लेकर बस्तर लाया गया है।

 

पुलिस अब आरोपियों से बरामद एटीएम कार्ड और मोबाइल नंबरों के आधार पर अन्य जिलों तथा राज्यों में हुई साइबर ठगी की घटनाओं में उनकी संलिप्तता की जानकारी जुटा रही है। पुलिस को इस मामले में और भी खुलासे होने की संभावना है।

बसना में 17 अक्टूबर को लगेगा नेत्र जांच शिविर, विशेषज्ञ डॉक्टर करेंगे आंखों की जांच

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बसना में 17 अक्टूबर को लगेगा नेत्र जांच शिविर, विशेषज्ञ डॉक्टर करेंगे आंखों की जांच

महासमुंद/बसना। आंखों से जुड़ी समस्याओं की पहचान और समय पर उपचार की सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से बसना स्थित अग्रवाल नर्सिंग होम मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल में 17 अक्टूबर 2026, शनिवार को नेत्र जांच एवं परामर्श की विशेष सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। इस दौरान नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉक्टरों द्वारा मरीजों की आंखों की जांच कर आवश्यक परामर्श दिया जाएगा। शिविर में आंखों से संबंधित विभिन्न समस्याओं की जांच और उपचार के लिए मरीज पहुंच सकेंगे।

अस्पताल द्वारा जारी जानकारी के अनुसार, नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. मोनीष सक्सेना, एमबीबीएस, एमएस, एफएमआरएफ (चेन्नई), जो अरविंद नेत्रालय, रायपुर से जुड़े हैं, अपनी टीम के साथ सेवाएं देंगे। पोस्टर के अनुसार, शिविर में सुबह 10 बजे से मरीजों की जांच की जाएगी।

शिविर में मोतियाबिंद, कालामोतिया यानी ग्लूकोमा, रेटिना संबंधी समस्याएं, डायबिटिक रेटिनोपैथी, आंखों में चोट, कंप्यूटर विजन सिंड्रोम, नवजात एवं बच्चों की आंखों की जांच और आरओपी स्क्रीनिंग जैसी समस्याओं पर ध्यान दिया जाएगा। इसके अलावा आंखों में सूखापन, जलन, खुजली, कम दिखाई देना, चश्मे एवं कॉन्टैक्ट लेंस से संबंधित परामर्श और अन्य नेत्र समस्याओं की जांच की सुविधा भी पोस्टर में दर्शाई गई है।

वहीं, अस्पताल में प्रत्येक रविवार को भी नेत्र रोग संबंधी जांच एवं चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने की जानकारी दी गई है। नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. देवेश अग्रवाल, एमबीबीएस, डीओ, एफसीओ, एफओओ, नेत्र रोग विशेषज्ञ एवं फैको तथा ऑकुलोप्लास्टी सर्जन के रूप में सेवाएं देते हैं। अस्पताल के अनुसार, उनकी ओपीडी में आंखों के पर्दे की जांच, पुतली की जांच, ड्राई आईज, आंखों की एलर्जी, कम दिखाई देना, मोतियाबिंद, ग्लूकोमा, तिरछी आंख और आंखों की सर्जरी से संबंधित परामर्श एवं जांच की सुविधा उपलब्ध है।

अस्पताल की ओर से जारी पोस्टर में आयुष्मान कार्ड, टीपीए, इंश्योरेंस, सीजीएचएस और सीएसपीडीएल के माध्यम से पात्र मरीजों के लिए निःशुल्क इलाज एवं ऑपरेशन की सुविधा उपलब्ध होने की जानकारी भी दी गई है। हालांकि, संबंधित योजना की पात्रता और उपचार की उपलब्धता के संबंध में मरीज अस्पताल से संपर्क कर जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

अस्पताल प्रबंधन ने नेत्र संबंधी परेशानी से जूझ रहे लोगों से जांच एवं परामर्श का लाभ लेने की अपील की है। समय पर आंखों की जांच कराने से कई समस्याओं की पहचान शुरुआती अवस्था में की जा सकती है, जिससे उचित उपचार में मदद मिलती है।

स्थान: अग्रवाल नर्सिंग होम मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल, बसना, जिला महासमुंद, छत्तीसगढ़।

संपर्क नंबर: 9303623130, 9039645760, 7773086100। रविवार की नियमित ओपीडी के लिए पोस्टर पर 9131276828 और 7773086100 नंबर भी दिए गए हैं।.

महासमुंद डेढ़ साल तक अश्लील फोटो-वीडियो वायरल करने की धमकी देकर ब्लैकमेलिंग, नाबालिग से जुड़े मामले में 5 आरोपी गिरफ्तार..

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राहुल भोई महासमुंद..

महासमुंद डेढ़ साल तक अश्लील फोटो-वीडियो वायरल करने की धमकी देकर ब्लैकमेलिंग, नाबालिग से जुड़े मामले में 5 आरोपी गिरफ्तार

बसना पुलिस की कार्रवाई, दो मुख्य आरोपियों समेत तीन सह-आरोपियों पर शिकंजा; BNS, POCSO और IT एक्ट के तहत कार्रवाई, सभी न्यायिक हिरासत में जेल भेजे गए..

महासमुंद जिले के बसना थाना क्षेत्र में नाबालिग से जुड़े गंभीर मामले में पुलिस ने पांच आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया है। पुलिस के मुताबिक, आरोपियों पर नाबालिग के अश्लील फोटो और वीडियो बनाकर उन्हें सोशल मीडिया पर वायरल करने की धमकी देने, ब्लैकमेलिंग करने और पैसे की मांग करने के आरोप हैं। बताया जा रहा है कि यह सिलसिला करीब डेढ़ साल से चल रहा था। मामले में दुष्कर्म के आरोप भी शामिल हैं।

पुलिस के अनुसार, प्रकरण में दो मुख्य आरोपियों के साथ तीन अन्य सह-आरोपियों की संलिप्तता सामने आने के बाद उनके खिलाफ कार्रवाई की गई। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS), पॉक्सो एक्ट (POCSO) और आईटी एक्ट की संबंधित धाराओं के तहत अपराध दर्ज कर पांचों आरोपियों को गिरफ्तार किया। न्यायालय में पेश किए जाने के बाद सभी को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है।

डेढ़ साल तक ब्लैकमेलिंग करने का आरोप..

इस मामले में सामने आई जानकारी के मुताबिक, आरोपियों पर नाबालिग के अश्लील फोटो और वीडियो के जरिए उसे लगातार धमकाने का आरोप है। फोटो-वीडियो को सोशल मीडिया पर वायरल करने की धमकी देकर कथित तौर पर पैसों की मांग की जाती थी। करीब डेढ़ साल तक ब्लैकमेलिंग किए जाने की बात सामने आने के बाद मामला और गंभीर हो गया है। पुलिस इस प्रकरण में उपलब्ध शिकायत, साक्ष्यों और अन्य तथ्यों के आधार पर कार्रवाई कर रही है।

मामले में दुष्कर्म, अश्लील सामग्री के जरिए धमकी और जबरन वसूली से जुड़े आरोपों की जांच की जा रही है।

एसपी प्रभात कुमार के नेतृत्व में पुलिस की कार्रवाई

पुलिस अधीक्षक प्रभात कुमार के निर्देशन में मामले में कार्रवाई करते हुए पुलिस ने दो मुख्य आरोपियों सहित तीन सह-आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के खिलाफ BNS, POCSO और IT एक्ट की संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई की गई है। सभी पांच आरोपी फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं..

प्रभात कुमार पुलिस अधीक्षक महासमुंद

 

स्कूल में बड़ा हादसा, झूला बना मौत का फंदा स्कूल परिसर में पेड़ से बने झूले में फंसने से चौथी कक्षा के छात्र की मौत, गांव में पसरा मातम..

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राहुल भोई महासमुंद..

– स्कूल में बड़ा हादसा, झूला बना मौत का फंदा

स्कूल परिसर में पेड़ से बने झूले में फंसने से चौथी कक्षा के छात्र की मौत, गांव में पसरा मातम..

 

महासमुंद: जिले के बसना थाना क्षेत्र के मुड़ीडीह गांव से बेहद दर्दनाक खबर सामने आई है। यहां शासकीय प्राथमिक शाला परिसर में खेल-खेल में हुए हादसे में चौथी कक्षा के छात्र की मौत हो गई। घटना के बाद पूरे गांव में शोक का माहौल है।

 

कैसे हुआ हादसा –

 

मृतक छात्र की पहचान तरुण चौहान के रूप में हुई है, जो प्राथमिक शाला मुड़ीडीह में कक्षा चौथी में पढ़ता था। बताया जा रहा है कि रोज की तरह बच्चे स्कूल खुलने से पहले स्कूल परिसर में पहुंचकर खेल रहे थे। स्कूल प्रांगण में लगे पेड़ पर बच्चों ने ही साड़ियों को बांधकर एक झूला बना रखा था।

तरुण अपने 8-9 अन्य साथियों के साथ उसी झूले पर पेड़ पर चढ़कर झूल रहा था। झूलने के दौरान अचानक उसका पैर फिसल गया और वह नीचे गिरने लगा, तभी साड़ी से बना झूला उसके गले में फंस गया। गले में फंदा लगने से वह वहीं झूल गया। बच्चों ने शोर मचाया तब तक उसकी मौके पर ही मौत हो चुकी थी।

इस पूरे मामले पर भंवरपुर चौकी प्रभारी अंजना चंद्रा ने बताया कि,

 

“स्कूल करीब 10:00 बजे खुलता है, लेकिन 9:30 बजे ही रोज की भांति बच्चे स्कूल में आकर खेलने लगते हैं। आज भी स्कूल की सहायिका 9:30 बजे स्कूल खोलकर चली गई थी, तब तक कोई भी टीचर स्कूल नहीं पहुंचा था। इसी दरमियान स्कूल प्रांगण में बच्चों ने मौजूद पेड़ पर साड़ियों का एक झूला बनाया हुआ था। करीब 9 बच्चे खेल-खेल में पेड़ पर चढ़कर झूला झूल रहे थे। तभी एक बच्चे का पैर अचानक पेड़ से फिसला और वह नीचे गिरने लगा, तभी साड़ियों से बनाया हुआ झूला उसके गले में अचानक फंस गया और वह बच्चा सीधे नीचे झूल गया, जिससे उसकी मौत हो गई। फिलहाल मामले पर जांच जारी है और बच्चे के पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार है।”

घटना के बाद स्कूल परिसर में हड़कंप मच गया। सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची और पंचनामा कार्रवाई कर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। मामले में जांच जारी है..

*मोहला—महिला एवं बाल विकास विभाग की पहल, जिला पंचायत से पुलिस थाना तक समझीं प्रशासनिक व्यवस्था और जनसेवा की बारीकियां ,प्रशासन की कार्यप्रणाली से रूबरू हुईं सेजेस की 50 बालिकाएं, सरकारी कार्यालयों का किया शैक्षणिक भ्रमण*

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मनीष कौशिक

मोहला– महिला एवं बाल विकास विभाग के तत्वावधान में सेजेस स्कूल की 50 बालिकाओं को विभिन्न शासकीय कार्यालयों का शैक्षणिक भ्रमण कराया गया। इस पहल का उद्देश्य बालिकाओं को प्रशासनिक व्यवस्था, शासकीय कार्यालयों की कार्यप्रणाली, जनसेवा तथा विभिन्न विभागीय योजनाओं की जानकारी प्रदान करना था भ्रमण के दौरान बालिकाओं ने पुलिस अधीक्षक कार्यालय, जिला पंचायत कार्यालय, रक्षित आरक्षी केंद्र तथा पुलिस थाना का अवलोकन किया। इस दौरान अधिकारियों ने अपने-अपने कार्यालयों की कार्यप्रणाली, विभागीय जिम्मेदारियों, कानून-व्यवस्था और आम नागरिकों को उपलब्ध कराई जाने वाली सेवाओं के संबंध में विस्तारपूर्वक जानकारी दी कार्यक्रम में मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जिला पंचायत, पुलिस अधीक्षक, रक्षित आरक्षी केंद्र के आरआई तथा थाना प्रभारी (टीआई) ने बालिकाओं को प्रशासनिक कार्यप्रणाली से अवगत कराया। अधिकारियों ने बालिकाओं के सवालों और जिज्ञासाओं का समाधान करते हुए विभिन्न विभागों की भूमिका एवं कार्यप्रणाली को सरल तरीके से समझाया इस शैक्षणिक भ्रमण से बालिकाओं को किताबी ज्ञान से आगे बढ़कर शासन-प्रशासन की व्यवस्था को करीब से जानने और समझने का अवसर मिला। साथ ही उन्हें विभिन्न शासकीय सेवाओं, प्रशासनिक दायित्वों तथा जनहित में संचालित योजनाओं के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त हुई।चार शासकीय कार्यालयों के भ्रमण के बाद बालिकाओं के लिए भोजन की व्यवस्था की गई अधिकारियों एवं आयोजनकर्ताओं की उपस्थिति में बालिकाओं ने भोजन ग्रहण किया, जिसके साथ ही कार्यक्रम का समापन हुआ। महिला एवं बाल विकास विभाग की यह पहल बालिकाओं में प्रशासनिक जागरूकता बढ़ाने और उन्हें शासन की कार्यप्रणाली से परिचित कराने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम रही।

समान नागरिक संहिता के मुद्दे पर सर्व अन्य पिछड़ा वर्ग समाज ने जताया विरोध, तीन सूत्रीय मांगों पर बनी सहमति ,,,,,,,,, तेजनारायण सिंह की रिपोर्ट,,,,,,,,

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समान नागरिक संहिता के मुद्दे पर सर्व अन्य पिछड़ा वर्ग समाज ने जताया विरोध, तीन सूत्रीय मांगों पर बनी सहमति

,,,,,,,,, तेजनारायण सिंह की रिपोर्ट,,,,,,,,

यूसीसी के नाम पर समाज को बांटने की कोशिश बर्दाश्त नहीं; 27 प्रतिशत आरक्षण का पालन, समाज के भवन और संगठन के विस्तार पर हुई चर्चा – रामलाल यादव

बीजापुर ,,,,,,,- जिला मुख्यालय बीजापुर में सर्व अन्य पिछड़ा वर्ग समाज की बैठक में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) के मुद्दे पर विरोध दर्ज कराने के साथ समाज के अधिकारों, संगठन के विस्तार और सामाजिक सुविधाओं से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की गई। बैठक में तीन सूत्रीय मांगों को लेकर प्रदेश के मुख्यमंत्री एवं राज्यपाल से मुलाकात करने के लिए समाज के प्रतिनिधिमंडल को भेजने पर सहमति बनी।छत्तीसगढ़ सर्व अन्य पिछड़ा वर्ग समाज के जिला अध्यक्ष रामलाल यादव ने कहा कि समान नागरिक संहिता लागू करने के नाम पर समाज की परंपराओं, रीति-रिवाजों और सांस्कृतिक पहचान पर पड़ने वाले संभावित प्रभावों को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रदेश के अनुसूचित जनजाति, अनुसूचित जाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के सामाजिक एवं सांस्कृतिक हितों का ध्यान रखना आवश्यक है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि यूसीसी के नाम पर समाज को बांटने की कोशिश बर्दाश्त नहीं की जाएगी।बैठक के दौरान समाज के प्रतिनिधियों ने समान नागरिक संहिता को लेकर अपनी चिंताएं व्यक्त करते हुए विरोध दर्ज कराया। समाज के संरक्षक ए. सुधाकर ने कहा कि समाज की परंपराओं, रीति-रिवाजों और अधिकारों से जुड़े विषयों पर कोई भी निर्णय लेने से पहले संबंधित समुदायों की भावनाओं एवं सुझावों को गंभीरता से सुना जाना चाहिए। उन्होंने इस विषय पर व्यापक चर्चा और संवाद की आवश्यकता पर जोर दिया।

*समाज के विस्तार और 27 प्रतिशत आरक्षण पर जोर*

बैठक में केवल यूसीसी ही नहीं, बल्कि बीजापुर जिले में सर्व अन्य पिछड़ा वर्ग समाज के संगठन को मजबूत बनाने और उसका विस्तार करने पर भी चर्चा हुई। प्रतिनिधियों ने कहा कि समाज के अधिक से अधिक लोगों को संगठन से जोड़कर सामाजिक एकजुटता बढ़ाने की दिशा में काम किया जाना चाहिए।इसके साथ ही अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए निर्धारित 27 प्रतिशत आरक्षण के प्रावधान का शासकीय भर्ती के साथ राजनीति, सरकारी योजनाओ में रोस्टर का पालन सुनिश्चित करने का विषय प्रमुखता से उठाया गया। समाज के प्रतिनिधियों ने मांग की कि पात्र वर्ग को आरक्षण का लाभ नियमानुसार मिले और रोस्टर में निर्धारित प्रावधानों का पालन हो।

*समाज के भवन के लिए भी उठी आवाज*

बैठक में बीजापुर जिला मुख्यालय में सर्व अन्य पिछड़ा वर्ग समाज के लिए भवन की आवश्यकता पर भी चर्चा की गई। प्रतिनिधियों ने कहा कि समाज के भवन से सामाजिक बैठकों, सामुदायिक कार्यक्रमों और संगठनात्मक गतिविधियों के संचालन में सुविधा मिलेगी। इस विषय को भी समाज की प्रमुख मांगों में शामिल करने पर सहमति बनी। युवा प्रदेश अध्यक्ष कोमल निषाद ने कहा कि युवाओं को समाज की जिम्मेदारियों से जोड़ना समय की आवश्यकता है। शिक्षा, प्रतियोगी परीक्षाओं, रोजगार के अवसरों और कौशल विकास के प्रति जागरूकता बढ़ाकर युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में सामूहिक प्रयास किए जाने चाहिए। उन्होंने कहा कि समाज का संगठन तभी मजबूत होगा, जब प्रत्येक गांव, प्रत्येक परिवार और विशेषकर युवा पीढ़ी सामाजिक विकास की प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी निभाएगी। समाज की एकजुटता को शिक्षा, जागरूकता और रचनात्मक कार्यों की ताकत बनाना होगा। वही मीडिया प्रभारी के. संतोष कुमार ने कहा कि समाज की समस्याओं, मांगों और उपलब्धियों को जिम्मेदारी के साथ शासन-प्रशासन तथा आम जनता तक पहुंचाना आवश्यक है। संगठन का उद्देश्य केवल समस्याएं उठाना नहीं, बल्कि उनके समाधान के लिए सकारात्मक पहल करना भी होना चाहिए। समाज के प्रत्येक व्यक्ति तक शिक्षा, रोजगार, संवैधानिक अधिकारों और सरकारी योजनाओं की जानकारी पहुंचाने के लिए व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाने की जरूरत है।

*मुख्यमंत्री और राज्यपाल से मिलेगा प्रतिनिधिमंडल*

बैठक में समाज के विस्तार, 27 प्रतिशत आरक्षण के प्रावधान का नियमानुसार पालन तथा बीजापुर में सर्व अन्य पिछड़ा वर्ग समाज के भवन से संबंधित तीन सूत्रीय मांगों को लेकर आगामी दिनों में समाज का प्रतिनिधिमंडल प्रदेश के मुख्यमंत्री और राज्यपाल से मुलाकात करेगा। बैठक में इस संबंध में सहमति बनी और मांगों को संबंधित स्तर पर उठाने की दिशा में आगे बढ़ने का निर्णय लिया गया।बैठक में वैचारिक विरोध के साथ समाज के संगठनात्मक विस्तार और स्थानीय आवश्यकताओं को लेकर भी सार्थक चर्चा हुई। बैठक सकारात्मक माहौल में संपन्न हुई, जिसमें समाज की एकजुटता, अधिकारों की पैरवी और मांगों को शासन-प्रशासन तक पहुंचाने की कार्ययोजना पर सहमति बनी। बैठक में संरक्षक नीलम गणपत, तेलंगा समाज में अध्यक्ष आदिनारायण पुजारी , उपाध्यक्ष दिनेश पुजारी , मधु कटला , माधव कोड्रा समेत भोपालपटनम, उसूर, भैरमगढ़ और बीजापुर विकासखंड के पदाधिकारी और सैकड़ों सामाजिक कार्यकर्ता एवं समाज के सदस्य उपस्थित रहे।

*  सांसद महेश कश्यप का न्योता, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने किया स्वीकार, ‘मुरिया दरबार’ में शामिल होने आएंगी 23 अक्टूबर को जगदलपुर *

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*  सांसद महेश कश्यप का न्योता, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने किया स्वीकार, ‘मुरिया दरबार’ में शामिल होने आएंगी 23 अक्टूबर को जगदलपुर *

बस्तर सम्भाग जगदलपुर

महामहिम राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू के आगामी बस्तर प्रवास को लेकर प्रशासनिक तैयारियां युद्धस्तर पर शुरू हो गई हैं। तय कार्यक्रम के अनुसार, राष्ट्रपति 23 अक्टूबर को बस्तर प्रवास पर रहेंगी, जहां वे ऐतिहासिक ‘मुरिया दरबार’ में शिरकत करेंगी और लालबाग मैदान में आयोजित विशाल आमसभा को संबोधित करेंगी।

 

महामहिम राष्ट्रपति के प्रवास कार्यक्रम को सुव्यवस्थित और गरिमामय ढंग से संपन्न कराने के लिए कलेक्टर श्री आकाश छिकारा और पुलिस अधीक्षक श्री शलभ सिन्हा ने कलेक्टोरेट स्थित ‘प्रेरणा कक्ष’ में एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक ली। बैठक में दोनों वरिष्ठ अधिकारियों ने सुरक्षा, यातायात, प्रोटोकॉल, बैठक व्यवस्था और अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं को लेकर संबंधित विभागीय अधिकारियों को समयपूर्व सभी तैयारियां सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

 

बैठक के पश्चात कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक ने सीधे लालबाग मैदान जाकर चल रही जमीनी तैयारियों का बारीकी से मुआयना किया। उन्होंने मंच निर्माण, सुरक्षा व्यवस्था, वीआईपी व आम जनता के प्रवेश एवं निकास द्वार, पेयजल, आपातकालीन चिकित्सा व्यवस्था तथा पार्किंग प्रबंधन की विस्तृत समीक्षा की। कलेक्टर ने आयोजन स्थल पर सभी नागरिक सुविधाएं चाक-चौबंद रखने पर जोर दिया वहीं पुलिस अधीक्षक ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम सुनिश्चित करने के संबंध में चर्चा की। इस दौरान नगर पुलिस अधीक्षक श्री सुमित कुमार, अपर कलेक्टर श्री सीपी बघेल अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्री सुखनंदन राठौर, नगर निगम आयुक्त श्री प्रवीण वर्मा सहित सभी अनुविभागीय दंडाधिकारी एवं लोक निर्माण विभाग एवं अन्य विभागों के अधिकारी उपस्थित थे।

*  समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code) पर जगदलपुर में महत्वपूर्ण बैठक शुक्रवार को कलेक्टोरेट के प्रेरणा कक्ष में*

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  • *  समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code) पर जगदलपुर में महत्वपूर्ण बैठक शुक्रवार को कलेक्टोरेट के प्रेरणा कक्ष में*

* बस्तर सम्भाग जगदलपुर,16 अक्टूबर 2026*

जगदलपुर, छत्तीसगढ़ में समान नागरिक संहिता लागू करने तथा इसका प्रारूप तैयार करने के उद्देश्य से गठित उच्च स्तरीय समिति द्वारा जनसंवाद शुरू कर दिया गया है।

इसी क्रम में शुक्रवार 16 अक्टूबर को बस्तर संभाग के संभागीय मुख्यालय जगदलपुर के कलेक्टोरेट स्थित प्रेरणा सभागार में प्रातः 10.30 बजे से एक महत्वपूर्ण बैठक एवं समूह चर्चा आयोजित की जा रही है। समिति द्वारा जारी कार्यक्रम के अनुसार जगदलपुर में आयोजित होने वाली इस बैठक में जगदलपुर और कोंडागांव जिले के प्रतिनिधि सम्मिलित होकर समान नागरिक संहिता के विभिन्न प्रावधानों और उनके सामाजिक प्रभावों पर व्यापक विचार-विमर्श करेंगे।

इस परिचर्चा को समावेशी, सार्थक और पारदर्शी बनाने के लिए व्यापक स्तर पर तैयारियां की गई हैं।

बैठक में राजनीतिक दलों, सामाजिक एवं धार्मिक संगठनों के प्रमुखों के साथ-साथ शिक्षाविदों, प्रतिष्ठित व गणमान्य नागरिकों तथा विभिन्न आयोगों, निगमों और मंडलों के प्रतिनिधियों को आमंत्रित किया गया है ताकि समाज के प्रत्येक वर्ग के विचारों और सुझावों को संकलित किया जा सके।

समिति के सचिव श्री श्याम धावड़े द्वारा दिए गए निर्देशों के तहत पूरी बैठक की संपूर्ण कार्यवाही का विधिवत दस्तावेजीकरण सुनिश्चित किया जाएगा, जिससे इन विमर्शों को राज्य स्तर पर तैयार होने वाले ड्राफ्ट में यथोचित स्थान मिल सके।

PV ऐप की अव्यवहारिक प्रक्रिया से किसानों के हितों पर मंडरा रहा खतरा, पटवारी संघ ने उठाए तकनीकी एवं व्यवहारिक सवाल,,,,,,,,,,,,,,, ,,,,,,,, तेजनारायण सिंह की रिपोर्ट,,,,,,,,

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PV ऐप की अव्यवहारिक प्रक्रिया से किसानों के हितों पर मंडरा रहा खतरा, पटवारी संघ ने उठाए तकनीकी एवं व्यवहारिक सवाल,,,,,,,,,,,,,,,

,,,,,,,, तेजनारायण सिंह की रिपोर्ट,,,,,,,,

बीजापुर,,,,,,,,

राजस्व पटवारी संघ छत्तीसगढ़ ने फसल भौतिक सत्यापन (PV) ऐप की वर्तमान प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा है कि बिना पर्याप्त तकनीकी आधार एवं नक्शा बटांकन के खसरे की डिजिटल मैपिंग कराने की प्रक्रिया भविष्य में किसानों के लिए बड़ी परेशानी का कारण बन सकती है। संघ का कहना है कि यह मामला केवल पटवारियों की कार्य-सुविधा का नहीं, बल्कि किसानों के खेतों की सही पहचान, राजस्व अभिलेखों की शुद्धता एवं धान खरीदी से जुड़े उनके आर्थिक हितों का भी है।

संघ ने बताया कि पारंपरिक गिरदावरी व्यवस्था में पटवारी मौके पर जाकर फसल का निरीक्षण करते थे तथा संबंधित खसरे में फसल की जानकारी दर्ज करते थे। बाद में डिजिटल क्रॉप सर्वे (DCS) लागू किया गया, जिसमें प्रारंभिक रूप से उन्हीं खसरों को शामिल किया गया जिनका नक्शा बटांकन डिजिटल सर्वर पर उपलब्ध था। बाद में कुछ और खसरे DCS में जोड़े गए, लेकिन अनेक खसरों की मैपिंग एक ही स्थान पर कई खसरों को सम्मिलित करके की गई। इसके बावजूद बड़ी संख्या में खसरे DCS से बाहर रह गए।

इन्हीं शेष खसरों को डिजिटल सर्वेक्षण में शामिल करने के लिए PV ऐप लाया गया। इस ऐप में ऐसे खसरे शामिल हैं जिनका नक्शा बटांकन उपलब्ध नहीं है। इन खसरों की पहचान के लिए पटवारी को मौके पर जाकर खेत के चारों कोनों की फोटो लेनी होती है, जिसके आधार पर Polygon तैयार कर DCS सर्वर में भेजा जाता है। इसके बाद संबंधित खसरे में लगी फसल का पुनः सर्वेक्षण प्राइवेट सर्वेयरों से कराया जाता है।

संघ के अनुसार वर्तमान समय में खेतों में खरीफ की फसल खड़ी है। अनेक स्थानों पर जलभराव, मेड़ों की खराब स्थिति, पहुंच मार्ग का अभाव, तार की घेराबंदी एवं अन्य बाधाओं के कारण खेतों के चारों कोनों तक पहुंचना अत्यंत कठिन है। सबसे बड़ी समस्या यह है कि जिन खसरों का नक्शा बटांकन ही उपलब्ध नहीं है, उनकी सही पहचान किसान के सहयोग के बिना करना भी मुश्किल है। छत्तीसगढ़ के अलग-अलग जिलों की भौगोलिक एवं कृषि परिस्थितियां भी भिन्न हैं, ऐसे में एक समान प्रक्रिया सभी क्षेत्रों में लागू करना व्यवहारिक नहीं है।

संघ ने यह भी कहा कि पटवारियों द्वारा इन कठिनाइयों को सामने रखकर विरोध दर्ज कराने के बाद अब PV ऐप का कार्य प्राइवेट सर्वेयरों के माध्यम से कराया जा रहा है। जबकि संबंधित गांव के राजस्व अभिलेखों, खसरा नंबरों एवं खेतों की वास्तविक सीमाओं की जानकारी के बिना बाहरी सर्वेयरों द्वारा खसरे की सही पहचान करना एक गंभीर चुनौती है। जब स्थानीय राजस्व अभिलेखों से परिचित पटवारियों को ही बिना नक्शा बटांकन के खसरे की पहचान में कठिनाई हो रही है, तो बाहरी सर्वेयरों द्वारा तैयार किए गए Polygon की शुद्धता एवं प्रमाणिकता कैसे सुनिश्चित होगी?

संघ ने आशंका जताई है कि गलत पहचान के आधार पर तैयार किया गया Polygon एक किसान के खेत को दूसरे किसान के खसरे में प्रदर्शित कर सकता है। इससे खेत की वास्तविक सीमा, रकबे एवं फसल संबंधी डिजिटल रिकॉर्ड में विसंगतियां उत्पन्न हो सकती हैं।

इस पूरे मामले का सबसे गंभीर पहलू धान खरीदी से जुड़ा हुआ है। केंद्र शासन की व्यवस्था के संबंध में प्राप्त निर्देशों के अनुसार धान खरीदी DCS सर्वेक्षण में शामिल खसरों के आधार पर की जानी है। ऐसी स्थिति में यदि प्राइवेट सर्वेयरों द्वारा गलत खसरे की पहचान कर Polygon तैयार किया जाता है और उसके आधार पर DCS में गलत फसल दर्ज हो जाती है, तो वास्तविक रूप से धान की फसल उगाने वाला किसान भी अपनी उपज बेचने में परेशानी का सामना कर सकता है। आखिरकार तकनीकी सर्वेक्षण की त्रुटियों का खामियाजा किसान क्यों भुगते?

संघ ने सवाल उठाया है कि गलत Polygon अथवा गलत फसल सर्वेक्षण के कारण यदि कोई किसान धान बेचने से वंचित होता है तो उसकी जिम्मेदारी किसकी होगी? क्या ऐसी स्थिति में किसानों के नुकसान की भरपाई की कोई व्यवस्था है? बिना नक्शा बटांकन के खसरे की सही भौगोलिक सीमा निर्धारित करने एवं तैयार Polygon की प्रमाणिकता सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी किसकी होगी?

राजस्व पटवारी संघ छत्तीसगढ़ ने स्पष्ट किया है कि पटवारी डिजिटल गिरदावरी अथवा आधुनिक तकनीक के विरोधी नहीं हैं। विरोध केवल ऐसी अव्यवहारिक प्रक्रिया एवं दबावपूर्ण क्रियान्वयन का है, जिसमें तकनीकी कमियों और मैदानी परिस्थितियों की अनदेखी की जा रही है।

संघ ने मांग की है कि PV ऐप की प्रक्रिया की तकनीकी एवं व्यवहारिक समीक्षा कराई जाए। जिन खसरों का नक्शा बटांकन उपलब्ध नहीं है, उनके लिए पहले उचित नक्शा एवं मैपिंग की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। Geo Referencing Sheet एवं Map Overlap Sheet उपलब्ध कराई जाए। चारों कोनों की फोटो लेने की अनिवार्यता के स्थान पर Google Map अथवा अन्य उपयुक्त डिजिटल माध्यम से खेत की वास्तविक सीमाओं के अनुसार Polygon तैयार करने की सुविधा दी जाए। साथ ही, विपरीत परिस्थितियों में सर्वेक्षण नहीं कर पाने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था उपलब्ध कराई जाए तथा प्राइवेट सर्वेयरों द्वारा किए गए सर्वेक्षण का स्थानीय राजस्व अभिलेखों के आधार पर सत्यापन सुनिश्चित किया जाए।

संघ ने कहा कि PV ऐप की तकनीकी एवं व्यवहारिक कमियों को दूर किए बिना सर्वेक्षण का कार्य दबावपूर्वक कराना न तो उचित है और न ही किसानों के हित में है।

संघ का स्पष्ट मत है कि यह लड़ाई पटवारियों की सुविधा मात्र की नहीं, बल्कि किसानों के खेतों की सही पहचान, राजस्व अभिलेखों की शुद्धता एवं उनकी मेहनत से उपजाई गई फसल के उचित अधिकार की रक्षा की लड़ाई है।

डिजिटल व्यवस्था का उद्देश्य किसानों को सुविधा देना होना चाहिए, न कि तकनीकी त्रुटियों के कारण उन्हें अपनी ही उपज बेचने के लिए परेशान होना पड़े।

कृषि विज्ञान केंद्र, बीजापुर में ‘महिला किसान दिवस’ का आयोजन: कृषि और आजीविका संवर्धन में महिलाओं की भूमिका को सराहा

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कृषि विज्ञान केंद्र, बीजापुर में आज राष्ट्रीय ‘महिला किसान दिवस’ धूमधाम और उत्साह के साथ मनाया गया। इस विशेष कार्यक्रम में बड़ी संख्या में क्षेत्र की प्रगतिशील महिला किसानों, स्व-सहायता समूहों की दीदियों और ग्रामीण महिलाओं ने सक्रिय रूप से भाग लिया।

कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य कृषि क्षेत्र में महिलाओं के अद्वितीय योगदान को रेखांकित करना और उन्हें उन्नत कृषि तकनीकों से जोड़कर आत्मनिर्भर बनाना रहा। कार्यक्रम का शुभारंभ केन्द्र के वैज्ञानिक डॉ. शमशेर आलम के द्वारा किया गया जिसमें उन्होंने महिला किसान दिवस क्यों मनाया जाना जरूरी है, इस सन्दर्भ मे प्रकाश डाला, साथ ही भारतीय कृषि मे महिलाएं की हिस्सेदारी पे परिचर्चा किएI डॉ. राजकाल पटेल एवम डॉ. अरविन्द आयाम वैज्ञानिकों ने उन्नत तकनीकों और उद्यमिता पर जोर कार्यक्रम के दौरान वैज्ञानिकों ने महिलाओं को आधुनिक कृषि, जैविक खेती, मशरूम उत्पादन तकनीक, पोषण वाटिका (न्यूट्रिशन गार्डन), वर्मी कंपोस्ट निर्माण और मूल्य संवर्धन (वैल्यू एडिशन) से संबंधित व्यावहारिक जानकारियां दीं। श्री. अरुण सकनी वरिष्ट वैज्ञानिक एवं प्रमुख ने कहा कि भारतीय कृषि की रीढ़ ग्रामीण महिलाएं हैं। बीज बोने से लेकर कटाई, भंडारण और पशुपालन तक हर स्तर पर उनकी भागीदारी सबसे अहम होती है। यदि महिलाएं कृषि आधारित कुटीर उद्योग और वैज्ञानिक पद्धतियों को अपनाएं, तो वे परिवार की पोषण सुरक्षा के साथ-साथ आय में भी उल्लेखनीय वृद्धि कर सकती हैं। डॉ. सुनीता पटेल, श्रीमती उषा दुर्गम, सुश्री रजिया बेगम एवम अन्य प्रगतिशील महिला किसानों ने कार्यक्रम के सन्दर्भ मे अपने मत रखे, साथ ही साथ महिलाओं को कृषि के नए नए उद्यमों को अपनाकर विकसित भारत 2047 का सपना पूरा करने पे जोर दिया।अंत मे प्रगतिशील महिला किसानों का सम्मान इस अवसर पर उत्कृष्ट कार्य करने वाली क्षेत्र की प्रगतिशील महिला किसानों और स्व-सहायता समूहों को शॉल, श्रीफल व प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। सम्मानित महिलाओं ने अपनी सफलता की कहानियां साझा करते हुए अन्य बहनों को भी आगे आने और केंद्र की योजनाओं व प्रशिक्षणों से जुड़ने के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम के अंत में उपस्थित सभी महिलाओं को केंद्र के प्रक्षेत्र का भ्रमण कराया गया। अंत में केंद्र के वैज्ञानिकों ने सभी प्रतिभागियों और आगंतुकों का आभार व्यक्त किया।

*ग्राम लिंगागिरी में जन चौपाल: ग्रामीणों को शासन की योजनाओं की जानकारी, समस्याओं के निराकरण के निर्देश*,,,,,,,,,,,,, ,,,,,,,,,, तेजनारायण सिंह की रिपोर्ट,,,,,,,,

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*ग्राम लिंगागिरी में जन चौपाल: ग्रामीणों को शासन की योजनाओं की जानकारी, समस्याओं के निराकरण के निर्देश*,,,,,,,,,,,,,

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*कलेक्टर एवं जिला पंचायत की मुख्य कार्यपालन अधिकारी की उपस्थिति में आयोजित हुई जन चौपाल*

बीजापुर,,,,,,,,,,,,,,,,,/ ग्राम लिंगागिरी में आज कलेक्टर श्री विश्वदीप एवं जिला पंचायत की मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्रीमती नम्रता चौबे की उपस्थिति में जन चौपाल का आयोजन किया गया। इस दौरान ग्रामीणों को शासन की महत्वपूर्ण योजनाओं एवं हितग्राहीमूलक योजनाओं की विस्तृत जानकारी दी गई।

जन चौपाल में अधिकारियों ने ग्रामीणों को विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए आवश्यक प्रक्रिया और पात्रता के संबंध में जानकारी दी। साथ ही ग्राम की समस्याओं एवं आवश्यक निर्माण कार्यों से संबंधित मांग पत्र लिखित रूप से प्रस्तुत करने के निर्देश सरपंच को दिए गए।

ग्रामीणों द्वारा उप स्वास्थ्य केंद्र लिंगागिरी में पक्के स्ट्रक्चर के निर्माण की मांग रखी गई। अधिकारियों ने ग्रामीणों की मांगों और समस्याओं को गंभीरता से सुना तथा आवश्यक कार्रवाई के लिए संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया।

*एग्रीस्टेक, पीएम किसान सम्मान निधि और खसरा पंजीयन के लिए शिविर लगाने के निर्देश*

जन चौपाल के दौरान बचे हुए एग्रीस्टेक, प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, खसरा पंजीयन, वोटर आईडी, आधार कार्ड सहित अन्य महत्वपूर्ण योजनाओं और दस्तावेजों से संबंधित कार्यों को पूरा कराने के लिए शिविर आयोजित करने के निर्देश दिए गए। अधिकारियों ने कहा कि शिविर के माध्यम से ग्रामीणों को योजनाओं का लाभ दिलाने और आवश्यक दस्तावेज तैयार कराने की प्रक्रिया पूरी की जाए।

इस अवसर पर ग्रामीण जनसमूह, जनप्रतिनिधि, पंचायत पदाधिकारी एवं संबंधित विभागों के अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे। अधिकारियों ने कहा कि शासन की योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना प्रशासन की प्राथमिकता है।

 *शारदीय नवरात्रि  की षष्ठी पर करें मां कात्यायनी की आराधना, जानें , शुभ मुहूर्त और संपूर्ण विधि*  * नवरात्रि विशेष रिपोर्ट दीपक मरकाम*

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*शारदीय नवरात्रि  की षष्ठी पर करें मां कात्यायनी की आराधना, जानें , शुभ मुहूर्त और संपूर्ण विधि*  * नवरात्रि विशेष रिपोर्ट दीपक मरकाम*

विशेष नवरात्रि  16 अक्टूबर 2026

शारदीय नवरात्रि का पावन पर्व इन दिनों पूरे देश में पूरी श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जा रहा है। आज नवरात्रि का छठवां दिन है, जो जगत जननी मां दुर्गा के छठे स्वरूप माता कात्यायनी को समर्पित है। आज यानी शुक्रवार, 16 अक्टूबर 2026 को आश्विन शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, आज के दिन विधि-विधान से मां कात्यायनी की पूजा करने से भक्तों के सभी संकट दूर होते हैं और मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है।

आइए जानते हैं आज के पंचांग, मां कात्यायनी के स्वरूप, पूजा विधि और इस पर्व से जुड़ी संपूर्ण खबरें।

पंचांग एवं तिथि विवरण (16 अक्टूबर 2026)

* पर्व: शारदीय नवरात्रि (षष्ठी तिथि – छठा दिन)

* दिनांक: 16 अक्टूबर 2026 (शुक्रवार)

* मास एवं पक्ष: आश्विन मास, शुक्ल पक्ष

* नक्षत्र एवं योग: ज्योतिषीय गणना के अनुसार आज साधक मां की आराधना कर विशेष कृपा प्राप्त कर सकते हैं।

* शुभ रंग: हरा रंग (जो जीवन में हरियाली, शांति, और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है)।

ब्रजमंडल की अधिष्ठात्री और अमोघ फलदायिनी हैं मां कात्यायनी,

पौराणिक कथाओं के अनुसार, महर्षि कात्यायन ने भगवती पराशक्ति को पुत्री रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या की थी। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर आदिशक्ति ने उनके यहाँ पुत्री रूप में जन्म लिया, जिससे इनका नाम ‘कात्यायनी’ पड़ा।

* स्वरूप वर्णन: माता कात्यायनी का यह स्वरूप अत्यंत भव्य और तेजोमय है। इनका वाहन सिंह (शेर) है। इनकी चार भुजाएं हैं—ऊपर वाला दाहिना हाथ अभय मुद्रा में और नीचे वाला हाथ वरद मुद्रा में रहता है। बाईं ओर के ऊपर वाले हाथ में तलवार और नीचे वाले हाथ में कमल का फूल सुशोभित है।

* विशेष महत्व: मां कात्यायनी को ब्रजमंडल की अधिष्ठात्री देवी माना जाता है। द्वापर युग में ब्रज की गोपियों ने भगवान श्री कृष्ण को पति रूप में पाने के लिए कात्यायनी देवी की ही पूजा की थी। इसलिए ज्योतिष शास्त्र में विवाह में आ रही बाधाओं को दूर करने और सुयोग्य वर-वधु की प्राप्ति के लिए षष्ठी तिथि के दिन मां कात्यायनी की साधना को अत्यंत अचूक माना गया है।

* पूजा विधि, प्रिय भोग और अचूक मंत्र*

षष्ठी तिथि के दिन ब्रह्म बेला में स्नान-ध्यान कर स्वच्छ वस्त्र (विशेष रूप से हरे या लाल रंग के वस्त्र) धारण करें। इसके बाद माता की पूजा का आरंभ करें।

* पूजा सामग्री: माता को पीले या लाल पुष्प, अक्षत, कुमकुम, और सोलह श्रृंगार की सामग्री अर्पित करें। मां को प्रसन्न करने के लिए आज के दिन 3 हल्दी की गांठ चढ़ाना बेहद शुभ माना जाता है।

* विशेष भोग: माता कात्यायनी को शहद (मधु) का भोग अत्यंत प्रिय है। मान्यता है कि शहद का भोग लगाने से साधक की आकर्षण शक्ति बढ़ती है और जीवन की कड़वाहट दूर होती है।

* मंत्र जाप: पूजा के दौरान मां के इस मुख्य मंत्र का कम से कम 108 बार जाप करें: मंत्र: विवाह बाधा निवारण विशेष मंत्र:मां कात्यायनी की पावन स्तुति

चन्द्रहासोज्ज्वलकरा शार्दूलवरवाहना।

कात्यायनी शुभं दद्याद् देवी दानवघातिनी॥

या देवी सर्वभूतेषु माँ कात्यायनी रूपेण संस्थिता।

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

देशभर के शक्तिपीठों और दुर्गा पंडालों में आज सुबह से ही भक्तों का तांता लगा हुआ है। मां कात्यायनी की यह पावन आराधना हर घर में सुख, शांति, साहस, और आरोग्य का संचार करे।

*बीजापुर जिले में शारदीय नवरात्रि की पंचमी पर गूंजे जयकारे: मां स्कंदमाता की आराधना के साथ जगह-जगह भव्य दीप यज्ञ संपन्न*  *नवरात्रि विशेष रिपोर्ट दीपक मरकाम *

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*बीजापुर जिले में शारदीय नवरात्रि की पंचमी पर गूंजे जयकारे: मां स्कंदमाता की आराधना के साथ जगह-जगह भव्य दीप यज्ञ संपन्न*  *नवरात्रि विशेष रिपोर्ट दीपक मरकाम *

बीजापुर 15 अक्टूबर 2026

शारदीय नवरात्रि के पावन पर्व पर छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में भक्ति और अध्यात्म का अद्भुत माहौल देखने को मिल रहा है। नवरात्रि के पांचवें दिन, जो कि जगत जननी के मातृ स्वरूप मां स्कंदमाता को समर्पित है, जिले के विभिन्न दुर्गा मंदिरों और पूजा पंडालों में विशेष धार्मिक अनुष्ठान आयोजित किए गए। इसी क्रम में पंचमी तिथि के पावन अवसर पर जगह-जगह भव्य दीप यज्ञ का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।

मां स्कंदमाता और पंचमी तिथि पर ‘दीप यज्ञ’ का विशेष महत्व,

धार्मिक और पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, नवरात्रि की पंचमी तिथि पर मां स्कंदमाता की पूजा और दीप यज्ञ का अत्यंत खास महत्व है:

* सूर्य मंडल की अधिष्ठात्री का स्वरूप: मां स्कंदमाता सूर्य मंडल की अधिष्ठात्री देवी मानी जाती हैं, जिनका तेज सूर्य के समान दैदीप्यमान है। अग्नि और प्रकाश (दीपक) को सूर्य का ही लघु रूप माना गया है, इसलिए इस दिन दीप यज्ञ करने से सीधे तौर पर मां की दिव्य ऊर्जा और सूर्य देव का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

* अज्ञान अंधकार का नाश: मां स्कंदमाता अपने भक्तों को अज्ञानता के अंधकार से निकालकर ज्ञान के प्रकाश की ओर ले जाती हैं। दीप यज्ञ के माध्यम से प्रज्वलित होने वाली हजारों ज्योतियां साधक के भीतर की नकारात्मकता को दूर कर सकारात्मकता और चेतना का संचार करती हैं।

* कार्तिकेय की शक्ति का प्रतीक: मां स्कंदमाता की गोद में उनके बाल रूप में विराजमान भगवान कार्तिकेय (स्कंद) वीरता, तेज और पराक्रम के प्रतीक हैं। जीवन के हर क्षेत्र में विजय और आरोग्यता पाने के लिए पंचमी तिथि पर अग्नि की आहुति व दीप यज्ञ का विधान है।

वैदिक मंत्रोच्चार और विधि-विधान के साथ संपन्न हुआ दीप यज्ञ,

बीजापुर जिले के विभिन्न दुर्गा मंदिरों में पंचमी के दिन सुबह से ही श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। मंदिरों और अनुष्ठान स्थलों पर कुशल पुरोहितों के मार्गदर्शन में पूरी पवित्रता और वैदिक विधि-विधान के साथ दीप यज्ञ का शुभारंभ किया गया।

* संकल्प और शुद्धिकरण: पुरोहितों द्वारा वेदमंत्रों के उच्चारण के बीच यजमानों और श्रद्धालुओं ने हाथ में जल व अक्षत लेकर परिवार की सुख-शांति, समृद्धि और आरोग्यता के लिए दीप यज्ञ का संकल्प लिया।

* मुख्य दीप और दीप श्रृंखला प्रज्वलन: सबसे पहले मां स्कंदमाता के समक्ष मुख्य अखंड दीप प्रज्वलित किया गया। इसके बाद मंदिर परिसरों में कतारबद्ध तरीके से 11, 21 और 51 दीपों को सजाकर पुरोहितों की उपस्थिति में एक-एक कर प्रज्वलित किया गया, जिससे पूरा परिसर दीपों की जगमगाहट से जगमगा उठा।

* मंत्र जाप व आरती: दीप यज्ञ के दौरान श्रद्धालुओं ने मां स्कंदमाता के मूल मंत्र ‘ॐ देवी स्कन्दमातायै नमः’ का सामूहिक जाप किया। अंत में विधि-विधान से मां की भव्य आरती कर क्षेत्र की खुशहाली की कामना की गई और भक्तों में प्रसाद वितरण किया गया।

इस पावन और भव्य आयोजन से पूरा बीजापुर जिला मां दुर्गा के जयकारों और दीपों के दिव्य प्रकाश से गूंज उठा। मां स्कंदमाता की कृपा से सभी के जीवन में सुख, शांति और यश का संचार हो।

*शारदीय नवरात्रि पंचमी पर मां स्कंदमाता की आराधना और दीप यज्ञ का रहस्य व संपूर्ण विधि-विधान**नवरात्रि विशेष रिपोर्ट दीपक मरकाम*

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*शारदीय नवरात्रि पंचमी पर मां स्कंदमाता की आराधना और दीप यज्ञ का रहस्य व संपूर्ण विधि-विधान**नवरात्रि विशेष रिपोर्ट दीपक मरकाम*

शारदीय नवरात्रि का पावन पर्व हिंदू धर्म में अदम्य शक्ति, भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा का प्रतीक है। नवरात्रि के हर दिन का अपना एक विशिष्ट महत्व है, लेकिन पंचमी तिथि का विशेष स्थान है क्योंकि यह दिन जगत जननी के मातृ स्वरूप यानी मां स्कंदमाता को समर्पित होता है। इसी पावन दिन पर ‘दीप यज्ञ’ करने की प्राचीन और दिव्य परंपरा रही है।

आइए जानते हैं कि नवरात्रि के पांचवें दिन मां स्कंदमाता की पूजा का क्या विधान है और इसी विशिष्ट दिन पर दीप यज्ञ क्यों किया जाता है, इसका संपूर्ण विवरण।

1. नवरात्रि के पांचवें दिन ही ‘दीप यज्ञ’ क्यों किया जाता है? (आध्यात्मिक और धार्मिक कारण)

नवरात्रि की पंचमी तिथि को दीप यज्ञ के आयोजन के पीछे गहरा वैज्ञानिक और तांत्रिक-आध्यात्मिक रहस्य छिपा है:

* मां स्कंदमाता और सूर्य मंडल की अधिष्ठात्री: ज्योतिष और पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, मां स्कंदमाता सूर्य मंडल की अधिष्ठात्री देवी मानी जाती हैं। उनके शरीर का तेज सूर्य के समान ही दैदीप्यमान है। चूंकि अग्नि और प्रकाश (दीपक) सूर्य का ही लघु रूप हैं, इसलिए पंचमी तिथि पर दीप यज्ञ करने से सीधे तौर पर सूर्य की ऊर्जा और मां स्कंदमाता की दिव्य शक्ति का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

* ज्ञान और चेतना का विस्तार: मां स्कंदमाता अपने भक्तों को अज्ञान रूपी अंधकार से निकालकर ज्ञान के प्रकाश की ओर ले जाती हैं। दीप यज्ञ के माध्यम से प्रज्वलित होने वाली हजारों ज्योतियां साधಕ के भीतर छिपी नकारात्मकता को जलाकर उसकी चेतना को जाग्रत करती हैं।

* कार्तिकेय (स्कंद) की ऊर्जा का प्रतीक: मां स्कंदमाता की गोद में उनके पुत्र भगवान कार्तिकेय (स्कंद) बाल रूप में विराजित हैं, जो देवताओं के सेनापति और महापराक्रमी योद्धा हैं। युद्ध कौशल, तेज और वीरता के प्रतीक स्कंद की ऊर्जा को पुष्ट करने और जीवन के हर क्षेत्र में विजय पाने के लिए पंचमी तिथि पर अग्नि (दीप यज्ञ) की आहुति व प्रकाश का विशेष महत्व है।

2. पंचमी तिथि का पूजा पंचांग और शुभ स्वरूप

* तिथि: आश्विन मास, शुक्ल पक्ष, पंचमी तिथि

* स्वरूप: मां स्कंदमाता (कमल के आसन पर विराजमान और अपनी गोद में कुमार कार्तिकेय को लिए हुए)

* प्रिय रंग: पीला (इस दिन पीले वस्त्र पहनना और पीली वस्तुओं का दान/भोग अत्यंत फलदायी होता है)

* विशेष भोग: केले का फल, केसर युक्त खीर या बेसन के मिष्ठान्न

* मंत्र:

‘सिंहासनगता नित्यं पद्माश्रितकरद्वया। शुभदास्तु सदा देवी स्कन्दमाता यशस्विनी॥’

3. दीप यज्ञ की संपूर्ण विधि-विधान और सामग्री

पंचमी तिथि के दिन दीप यज्ञ को घर के पूजा स्थल पर विधिपूर्वक इस प्रकार संपन्न किया जा सकता है:

आवश्यक सामग्री:

* शुद्ध गाय का घी या तिल का तेल

* लंबी या गोल रुई की बत्तियां

* मुख्य स्थापना हेतु एक बड़ा दीपक तथा दीप यज्ञ के लिए 11, 21 या 51 छोटे दीपक

* पूजा थाली, रोली, अक्षत, कलावा, जनेऊ, और पीले पुष्प (गेंदे के फूल)

* धूप, कपूर, फल और नैवेद्य

चरण-बद्ध पूजा और दीप यज्ञ विधि:

* शुद्धिकरण: पंचमी के दिन ब्रह्म मुहूर्त में स्नानादि करके स्वच्छ और पीले वस्त्र धारण करें। अपने घर के मंदिर को गंगाजल से शुद्ध कर लें।

* चौकी की स्थापना: एक साफ लकड़ी की चौकी पर पीला वस्त्र बिछाकर मां स्कंदमाता की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें।

* संकल्प: हाथ में जल और अक्षत लेकर मां का स्मरण करते हुए परिवार की सुख-शांति, आरोग्यता और दीप यज्ञ का संकल्प लें।

* मां स्कंदमाता का पूजन: सबसे पहले मां को रोली, अक्षत, पीले फूल और वस्त्र अर्पित करें। इसके बाद उन्हें उनके प्रिय भोग (केले या खीर) का नैवेद्य लगाएं।

* दीप यज्ञ का अनुष्ठान:

* सबसे पहले मां के आगे घी का मुख्य दीपक जलाएं।

* इसके बाद, मुख्य दीप के चारों ओर या एक व्यवस्थित कतार में छोटे-छोटे दीपों (11 या 21) को सजाएं।

* सभी दीपों में घी और बत्ती डालकर उन्हें एक-एक करके प्रज्वलित करें। यह दीपों की श्रृंखला ही ‘दीप यज्ञ’ का रूप ले लेती है।

* मंत्र जाप व आरती: दीप प्रज्वलित करने के बाद मां स्कंदमाता के मूल मंत्र ‘ॐ देवी स्कन्दमातायै नमः’ का कम से कम एक माला (108 बार) जाप करें। अंत में कर्पूर जलाकर मां की भव्य आरती करें।

4. दीप यज्ञ के दौरान ध्यान रखने योग्य मुख्य नियम

* पवित्रता और अनुशासन: दीप यज्ञ के दौरान घर का वातावरण शांत, सात्विक और पूरी तरह पवित्र होना चाहिए। इस दिन तामसिक भोजन (मांस-मदिरा) का सेवन पूर्णतः वर्जित है।

* दिशा का महत्व: दीपों की लौ हमेशा पूर्व या उत्तर दिशा की ओर रखें, इसे दीर्घायु और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है।

* अखंडता और सुरक्षा: यदि आप बड़े पैमाने पर दीप यज्ञ कर रहे हैं, तो अग्नि सुरक्षा का विशेष ध्यान रखें। साथ ही, संकल्पित दीपों को बीच में बुझने न दें, आवश्यकतानुसार उनमें घी या तेल डालते रहें।

मां स्कंदमाता की कृपा और दीप यज्ञ के इस दिव्य प्रकाश से आपके जीवन में सुख, शांति, यश और ऐश्वर्य का संचार हो।

जनपद प्राथमिक एवं माध्यमिक शाला बीजापुर में मनाई गई डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम की जयंती

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विद्यार्थियों ने मिसाइल मैन के जीवन, संघर्ष और राष्ट्र निर्माण में योगदान को किया याद

बीजापुर, 15 अक्टूबर 2026। जनपद प्राथमिक शाला बीजापुर एवं जनपद माध्यमिक शाला बीजापुर के संयुक्त तत्वावधान में गुरुवार को भारत के पूर्व राष्ट्रपति एवं महान वैज्ञानिक डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम की जयंती उत्साहपूर्वक मनाई गई। इस अवसर पर विद्यार्थियों एवं शिक्षकों ने उनके छायाचित्र पर माल्यार्पण कर पुष्प अर्पित किए तथा दीप प्रज्ज्वलित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी।

कार्यक्रम के दौरान संस्था के विद्यार्थियों विनोद तेलम, संदीप कुड़ियम, अनुज उईका, विकास कुड़ियम, कुमारी प्रियंका साहू, कुमारी आमना खातून, हुसैन खान, लव्यांश एंड्रिक, कुमारी अश्वनी फूलमाद्री, रिजवान बेग, आशीष कोरसा एवं प्रदीप वाचम सहित अन्य विद्यार्थियों ने डॉ. कलाम के जीवन, उपलब्धियों और राष्ट्र के प्रति उनके योगदान पर प्रकाश डाला। विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक उनके प्रेरणादायी जीवन से जुड़ी जानकारी साझा की।

संघर्ष से सफलता तक का प्रेरणादायी सफर

कार्यक्रम में शिक्षक कैलाश रामटेके ने विद्यार्थियों को डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम के जीवन परिचय और वैज्ञानिक उपलब्धियों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि डॉ. कलाम का जन्म 15 अक्टूबर 1931 को तमिलनाडु के रामेश्वरम में एक साधारण परिवार में हुआ था। अपनी मेहनत, लगन और दृढ़ संकल्प के बल पर उन्होंने विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल कीं।

उन्होंने बताया कि डॉ. कलाम ने भारत के अंतरिक्ष एवं रक्षा कार्यक्रमों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। स्वदेशी उपग्रह प्रक्षेपण यान एसएलवी-3 के विकास में उनके योगदान से भारत ने वर्ष 1980 में रोहिणी उपग्रह को पृथ्वी की कक्षा में स्थापित करने में सफलता प्राप्त की। इसके बाद उन्होंने रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) तथा भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

भारत के मिसाइल विकास कार्यक्रम में उनकी अग्रणी भूमिका के कारण उन्हें ‘मिसाइल मैन ऑफ इंडिया’ के नाम से जाना गया। अग्नि और पृथ्वी जैसी मिसाइलों के विकास में उनके योगदान ने देश की रक्षा क्षमता को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वर्ष 1998 के पोखरण परमाणु परीक्षणों में भी उन्होंने अहम भूमिका निभाई।

देश के 11वें राष्ट्रपति बनकर युवाओं को किया प्रेरित

शिक्षक रामटेके ने बताया कि डॉ. कलाम वर्ष 2002 से 2007 तक भारत के 11वें राष्ट्रपति रहे। राष्ट्रपति पद पर रहते हुए भी वे विद्यार्थियों और युवाओं से संवाद करना बेहद पसंद करते थे। वे युवाओं को बड़े सपने देखने, वैज्ञानिक सोच विकसित करने और कठिन परिश्रम के माध्यम से अपने लक्ष्य हासिल करने के लिए प्रेरित करते थे।

डॉ. कलाम का सपना वर्ष 2020 तक भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाने का था। उन्होंने अपने विचारों और लेखन के माध्यम से देश के युवाओं को राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भागीदारी निभाने का संदेश दिया। उनका जीवन इस बात का उदाहरण है कि दृढ़ इच्छाशक्ति, अनुशासन और निरंतर प्रयास से कठिन से कठिन लक्ष्य भी हासिल किए जा सकते हैं।

डॉ. कलाम का निधन 27 जुलाई 2015 को मेघालय की राजधानी शिलांग में भारतीय प्रबंधन संस्थान में विद्यार्थियों को व्याख्यान देते समय हुआ। अंतिम समय तक विद्यार्थियों के बीच रहकर ज्ञान साझा करना उनके शिक्षा और युवा पीढ़ी के प्रति समर्पण को दर्शाता है।

राष्ट्र निर्माण में योगदान देने का लिया संदेश

कार्यक्रम के अंत में शिक्षक कैलाश रामटेके ने विद्यार्थियों से डॉ. कलाम के जीवन से प्रेरणा लेकर अपने लक्ष्य निर्धारित करने, मेहनत करने, वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाने और देश की प्रगति में योगदान देने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि प्रत्येक विद्यार्थी को यह विचार करना चाहिए कि वह अपने ज्ञान, प्रतिभा और कार्यों के माध्यम से समाज तथा राष्ट्र के विकास में किस प्रकार सहभागी बन सकता है।

कार्यक्रम को सफल बनाने में संस्था की शिक्षिका सुश्री रजनी लता सिंह एवं शिक्षक सुरेश कुमार नरेटी का विशेष योगदान रहा। कार्यक्रम का संचालन छात्र नायक राजू गटपल्ली ने किया।

प्रेषक:
जनपद माध्यमिक शाला, बीजापुर, छत्तीसगढ़।

हेडलाइन: बसना में कल लगेगा किडनी और यूरोलॉजी कैंप, विशेषज्ञ डॉक्टर देंगे परामर्श

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हेडलाइन: बसना में लगेगा किडनी और यूरोलॉजी कैंप, विशेषज्ञ डॉक्टर देंगे परामर्श

एंकर – महासमुंद जिले के बसना में किडनी, पथरी और मूत्र रोग से परेशान मरीजों के लिए राहत भरी खबर है। अग्रवाल नर्सिंग होम मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल में 16 अक्टूबर, शुक्रवार को किडनी रोग विशेषज्ञ और यूरो सर्जन की सेवाएं उपलब्ध रहेंगी। इस दौरान मरीजों को जांच, परामर्श और ऑपरेशन से संबंधित जानकारी मिलेगी। खास बात यह है कि आयुष्मान कार्ड और बीजू कार्ड के माध्यम से पात्र मरीजों को किडनी, मूत्र रोग, प्रोस्टेट और पथरी के ऑपरेशन की सुविधा भी उपलब्ध होने की जानकारी दी गई है।

वीओ – बसना स्थित अग्रवाल नर्सिंग होम में शुक्रवार को दो अलग-अलग समय पर विशेषज्ञ चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध रहेंगी। सुबह 12 बजे से दोपहर 2 बजे तक किडनी रोग विशेषज्ञ डॉ. नमन महेश पाठक मरीजों की जांच और परामर्श करेंगे। वहीं, शाम 5 बजे से यूरो सर्जन डॉ. योगेश बारापात्रे यूरोलॉजी कैंप में मरीजों को सेवाएं देंगे।

किडनी रोग विशेषज्ञ शिविर में किडनी की पुरानी बीमारी, उच्च रक्तचाप से जुड़ी किडनी की समस्या, मूत्र मार्ग संक्रमण, पेशाब में प्रोटीन आने, डायलिसिस, किडनी स्टोन और किडनी प्रत्यारोपण के मूल्यांकन जैसी समस्याओं पर परामर्श मिलेगा।

वहीं, यूरोलॉजी कैंप में किडनी और मूत्र नली की पथरी, प्रोस्टेट की समस्या, पेशाब रुक-रुककर आना, पेशाब में खून आना, मूत्राशय में संक्रमण, मूत्र नली में सिकुड़न और पुरुषों में बांझपन जैसी समस्याओं के उपचार पर सलाह दी जाएगी। बच्चों से संबंधित यूरोलॉजी और आपातकालीन यूरोलॉजी सेवाओं के संबंध में भी परामर्श उपलब्ध रहेगा।

अस्पताल प्रबंधन के अनुसार, यूरोलॉजी कैंप में जांच शुल्क 700 रुपये निर्धारित किया गया है। ऑपरेशन कराने के इच्छुक मरीजों को अपनी पुरानी जांच रिपोर्ट साथ लाने और 15 अक्टूबर को भर्ती संबंधी प्रक्रिया पूरी करने की सूचना दी गई है।

वीओ – अस्पताल प्रबंधन ने किडनी और मूत्र रोग से जुड़ी समस्याओं से परेशान मरीजों से इस सुविधा का लाभ लेने की अपील की है। अधिक जानकारी और संपर्क के लिए अस्पताल के नंबर 84618-11000, 77708-68473 और 77730-86100 पर संपर्क किया जा सकता है।

स्थान – बसना, जिला महासमुंद।

महासमुंद में पुलिस की फुर्ती – अस्पताल से फरार हुआ नशीली टेबलेट तस्करी का आरोपी कुछ घंटों में ही धराया..

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राहुल भोई महासमुंद..

महासमुंद. सरायपाली पुलिस की गिरफ्त से महासमुंद मेडिकल कॉलेज सह जिला अस्पताल से फरार हुआ नशीली टैबलेट तस्करी का आरोपी पुलिस की सक्रियता से ज्यादा देर तक बाहर नहीं रह सका। फरार आरोपी दिनेश सिंह राजपूत (20) को पुलिस ने कुछ ही घंटों में पकड़ लिया है और वह फिलहाल पुलिस हिरासत में है।

दरअसल सरायपाली पुलिस ने बुधवार को ओडिशा से नशीली टैबलेट तस्करी के आरोप में दिनेश सिंह राजपूत को गिरफ्तार किया था। गिरफ्तारी के बाद आरोपी ने पेट में तेज दर्द और झटके आने की शिकायत की। जिसके बाद सरायपाली के डॉक्टरों ने उसे बेहतर इलाज के लिए महासमुंद मेडिकल कॉलेज सह जिला अस्पताल रेफर कर दिया था।

 

आरोपी की सुरक्षा के लिए सिपाही खोमनलाल साहू और रामचरण यादव की ड्यूटी लगाई गई थी। बुधवार सुबह करीब 7:30 से 8:30 बजे के बीच एक जवान बाथरूम गया था, जबकि दूसरा डॉक्टर के काम में व्यस्त था। इसी का फायदा उठाकर पैर में रॉड लगे होने के बावजूद आरोपी पुलिस को चकमा देकर फरार हो गया था।

 

इस संबंध में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सुशील कुमार नायक ने बताया कि – आरोपी अलसुबह अस्पताल से फरार हुआ था, जिसकी सूचना मिलते ही तत्काल सिटी कोतवाली में एफआईआर दर्ज कर नाकेबंदी की गई और अलग-अलग टीम बनाकर तलाश शुरू की गई। पुलिस की त्वरित कार्रवाई का परिणाम रहा कि फरार आरोपी को कुछ ही घंटों में पकड़ लिया गया है, वह हिरासत में है और उससे पूछताछ की जा रही है।

एडिशनल एसपी ने आगे कहा कि मामले में अस्पताल के CCTV फुटेज खंगाले गए हैं और इस बात की भी जांच की जा रही है कि आरोपी को हथकड़ी लगी थी या नहीं, और उस वक्त दोनों जवान कहां थे। जांच में जिसकी भी लापरवाही सामने आएगी, उसके खिलाफ सख्त विभागीय कार्रवाई की जाएगी।

 

 

*विद्यार्थियों और शिक्षकों ने महान वैज्ञानिक व पूर्व राष्ट्रपति के छायाचित्र पर पुष्प अर्पित कर मनाई जयंती *

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*विद्यार्थियों और शिक्षकों ने महान वैज्ञानिक व पूर्व राष्ट्रपति के छायाचित्र पर पुष्प अर्पित कर मनाई जयंती *

 

*बीजापुर के स्कूलों में धूमधाम से मनाई गई ‘मिसाइल मैन’ डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम की जयंती*

 

बीजापुर 15 अक्टूबर 2026

 

जनपद प्राथमिक शाला एवं जनपद माध्यमिक शाला बीजापुर के संयुक्त तत्त्वावधान में आज 15 अक्टूबर 2026 को भारत के पूर्व राष्ट्रपति और महान वैज्ञानिक ‘मिसाइल मैन’ डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम की जयंती गरिमामय वातावरण में मनाई गई।

 

कार्यक्रम का शुभारंभ छात्र-छात्राओं एवं शिक्षकों द्वारा डॉ. कलाम के छायाचित्र पर माल्यार्पण, पुष्पांजलि एवं दीप प्रज्वलन कर किया गया।

 

*विद्यार्थियों ने डॉ. कलाम के जीवन-वृत्त पर डाला प्रकाश*

 

जयंती समारोह में शाला के छात्र-छात्राओं—विनोद तेलम, संदीप कुड़ियम, अनुज उईका, विकास कुड़ियम, प्रियंका साहू, आमना खातून, हुसैन खान, लव्यांश एण्ड्रिक, अश्वनी फूलमाद्री, रिजवान बेग, आशीष कोरसा एवं प्रदीप वाचम—ने बड़े ही उत्साह और रुचि के साथ डॉ. कलाम की जीवन गाथा, उनके संघर्षों और महान उपलब्धियों पर अपने विचार व्यक्त किए।

 

*शिक्षक ने बताया ‘मिसाइल मैन’ बनने का सफर*

 

संस्था के शिक्षक कैलाश रामटेके ने विद्यार्थियों को डॉ. कलाम के जीवन से विस्तारपूर्वक अवगत कराया। उन्होंने बताया कि:

 

प्रारंभिक जीवन एवं शिक्षा: डॉ. कलाम का जन्म 15 अक्टूबर 1931 को तमिलनाडु के रामेश्वरम में एक साधारण परिवार में हुआ था। हाई स्कूल की पढ़ाई के बाद 1960 में उन्होंने एयरोनॉटिकल (वैमानिकी) इंजीनियरिंग की शिक्षा पूरी की।

 

अंतरिक्ष एवं मिसाइल कार्यक्रम में योगदान: 1980 में भारत के पहले स्वदेशी उपग्रह प्रक्षेपण यान (SLV-3) के सफल प्रक्षेपण में उनकी प्रमुख भूमिका रही। 1984 में वे DRDO से जुड़े। उनके कुशल नेतृत्व में भारत ने अग्नि, पृथ्वी, आकाश, नाग और त्रिशूल जैसी 5 प्रमुख मिसाइलों का सफल निर्माण किया, जिससे उन्हें पूरे विश्व में ‘मिसाइल मैन’ के नाम से पहचान मिली।

 

पोखरण परमाणु परीक्षण: 1998 के पोखरण परमाणु परीक्षण का नेतृत्व कर डॉ. कलाम ने पूरी दुनिया को संदेश दिया कि भारत एक शक्तिशाली और परमाणु संपन्न राष्ट्र है।

 

जनता के राष्ट्रपति एवं युवाओं के प्रेरणास्रोत: वे 2002 से 2007 तक भारत के 11वें राष्ट्रपति रहे। युवाओं से संवाद करना और ‘विजन 2020’ के तहत भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाना उनका मुख्य ध्येय था।

 

* डॉ. कलाम का अमर संदेश:*

 

“सपने वो नहीं जो हम सोते हुए देखते हैं, सपने वो हैं जो हमें सोने नहीं देते। हमेशा ऊँचे सपने देखें और उन्हें पूरा करने के लिए जी-तोड़ मेहनत करें।”

 

 

 

 

*27 जुलाई 2015 को देश ने खोया महान रत्न*

 

व्याख्यान के दौरान बताया गया कि 27 जुलाई 2015 को आईआईएम शिलांग (मेघालय) में युवाओं को संबोधित करते समय हृदयघात के कारण इस महान विभूति का निधन हो गया था। शिक्षकों ने सभी विद्यार्थियों को डॉ. कलाम के पदचिह्नों पर चलकर देश के उत्थान में अपना योगदान देने का संकल्प दिलाया।

 

*कार्यक्रम का संचालन एवं योगदान*

 

कार्यक्रम का सफल एवं सुचारू संचालन छात्र नायक राजू गटपल्ली द्वारा किया गया। इस आयोजन को सफल बनाने में संस्था की शिक्षिका सुश्री रजनी लता सिंह एवं शिक्षक सुरेश कुमार नरेटी का विशेष योगदान रहा।

सीआरपीएफ जवानों ने पेश की मानवता की मिसाल, बेहोश वृद्ध महिला की मदद कर पहुंचाया अस्पताल

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आज दिनांक 15 अक्टूबर 2026 को प्रातः लगभग 0930 बजे, केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) की ई/199वीं बटालियन, भैरमगढ़ के जवानों ने तत्परता एवं मानवीय संवेदनशीलता का परिचय देते हुए बेहोश हुई एक वृद्ध महिला की सहायता की तथा उसे उपचार हेतु नजदीकी अस्पताल पहुंचाने की व्यवस्था की।

भैरमगढ़, बीजापुर (छत्तीसगढ़) | 

प्राप्त जानकारी के अनुसार, एक वृद्ध महिला अपने तीन साथियों के साथ जांगला की ओर से मंगलनार स्थित मंदिर में दर्शन करने जा रही थीं। इसी दौरान भैरमगढ़ थाना के सामने अचानक उनकी तबीयत बिगड़ गई और वे बेहोश हो गईं।

घटनास्थल के समीप एमसीपी ड्यूटी पर तैनात ई/199वीं बटालियन, सीआरपीएफ के जवानों ने तत्काल स्थिति का संज्ञान लिया और महिला की सहायता के लिए आगे आए। जवानों ने उन्हें ठंडा पेयजल उपलब्ध कराया, जिसके बाद उन्हें होश आ गया। इसके पश्चात, आगे के चिकित्सकीय उपचार हेतु ऑटो-रिक्शा के माध्यम से उन्हें नजदीकी अस्पताल भिजवाया गया।

ई/199वीं बटालियन, सीआरपीएफ, भैरमगढ़ के जवानों की इस त्वरित एवं संवेदनशील कार्रवाई ने एक बार फिर यह साबित किया कि सीआरपीएफ केवल देश की सुरक्षा में ही नहीं, बल्कि आम नागरिकों की सहायता और सेवा में भी सदैव तत्पर है।

कमांडेंट श्री आनंद कुमार के नेतृत्व में बटालियन जनसेवा, मानवीय संवेदना और नागरिकों की सहायता के प्रति अपनी प्रतिबद्धता निरंतर निभा रही है।

सीआरपीएफ — देश की सुरक्षा के साथ, जनसेवा में सदैव तत्पर।

नवरात्रि पर आज मां कन्हाई परमेश्वरी मंदिर में होगा रास गरबा, महाआरती और प्रसादी वितरण..

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राहुल भोई महासमुंद..

नवरात्रि पर आज मां कन्हाई परमेश्वरी मंदिर में होगा रास गरबा, महाआरती और प्रसादी वितरण..

महासमुंद के इमलीभाठा स्थित मंदिर में जुटेंगे समाज के लोग, मातृशक्ति और युवा मंच के सदस्य होंगे शामिल

महासमुंद। शारदीय नवरात्रि के पावन अवसर पर महासमुंद नगर के वार्ड नंबर 2, इमलीभाठा स्थित मां कन्हाई परमेश्वरी मंदिर में आज गुरुवार, 15 अक्टूबर को रास गरबा का आयोजन किया जाएगा। पंचमी तिथि पर आयोजित इस धार्मिक कार्यक्रम में समाज की मातृशक्ति, स्वजातीय बंधुओं, युवाओं और वरिष्ठजनों से परिवार सहित शामिल होने की अपील की गई है।

मंदिर में शाम 7:30 बजे मां की आरती के पश्चात रास गरबा का आयोजन होगा। इसके साथ ही महाआरती और प्रसादी वितरण भी किया जाएगा। आयोजन के माध्यम से समाज के लोगों को मां की भक्ति से जोड़ने के साथ धार्मिक परंपराओं, सामाजिक एकता और आपसी भाईचारे को बढ़ावा देने का प्रयास किया जा रहा है।

कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ कहार भोई समाज महासभा के कोषाध्यक्ष एवं महासमुंद राज के अध्यक्ष मिथिलेश बोयर, सचिव शिवम बनवासी, कोषाध्यक्ष रोशन औसर और मंदिर प्रभारी मिकुन औसर की प्रमुख भूमिका रहेगी। वहीं युवा मंच के सदस्य रिंकू गौतम, सुधीर सैनिक, सुभाष गौतम, तारेंद गौतम, करुण औसर, समीर सैनिक और सागर औसर सहित समाज के वरिष्ठजनों एवं मातृशक्ति से आयोजन में शामिल होने की अपील की गई है।

आयोजकों ने समस्त समाजजनों से सपरिवार पहुंचकर मां कन्हाई परमेश्वरी का आशीर्वाद प्राप्त करने और रास गरबा में शामिल होकर आयोजन को सफल बनाने का आग्रह किया है।

स्थान: मां कन्हाई परमेश्वरी मंदिर, इमलीभाठा, वार्ड नंबर 2, महासमुंद।

समय: आज शाम 7:30 बजे, मां की आरती के पश्चात।

*शारदीय नवरात्रि के पंचमी तिथि पर ,करें मां स्कंदमाता की आराधना, जानिए संपूर्ण पूजा विधि, मंत्र, भोग और शुभ रंग** नवरात्रि विशेष रिपोर्ट दीपक मरकाम*

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*शारदीय नवरात्रि के पंचमी तिथि पर ,करें मां स्कंदमाता की आराधना, जानिए संपूर्ण पूजा विधि, मंत्र, भोग और शुभ रंग** नवरात्रि विशेष रिपोर्ट दीपक मरकाम*

शारदीय नवरात्रि का पांचवां दिन ममता, करुणा और स्नेह की मूर्ति मां स्कंदमाता को समर्पित होता है। भगवान कार्तिकेय (स्कंद कुमार) की माता होने के कारण देवी के इस पांचवें स्वरूप को ‘स्कंदमाता’ कहा जाता है। मान्यता है कि जो भक्त सच्चे मन से मां स्कंदमाता की पूजा करता है, उसे बल, ज्ञान, मोक्ष और संतान सुख की प्राप्ति होती है। मां अपने भक्तों पर ठीक वैसे ही ममता बरसाती हैं जैसे एक मां अपनी संतान पर लुटाती है।

आइए जानते हैं पांचवें दिन की संपूर्ण पूजा विधि, प्रिय भोग, मंत्र और अन्य महत्वपूर्ण जानकारियां:

*मां स्कंदमाता का स्वरूप और धार्मिक महत्व*

* स्वरूप: मां स्कंदमाता कमल के आसन पर विराजमान रहती हैं, इसी वजह से इन्हें ‘पद्मासना देवी’ भी कहा जाता है। इनकी गोद में बाल रूप में भगवान कार्तिकेय (स्कंद) विराजमान हैं। माता की चार भुजाएं हैं—ऊपर की एक भुजा में उन्होंने भगवान स्कंद को पकड़ा हुआ है, एक भुजा में कमल का फूल है, दूसरी भुजा वरमुद्रा में है और नीचे वाले हाथ में भी उन्होंने कमल का पुष्प धारण किया हुआ है। इनका वाहन सिंह (शेर) है।

*दिन का विशेष रंग और वस्त्र *

* शुभ रंग: नवरात्रि के पांचवें दिन पीला रंग पहनना अत्यंत शुभ और मंगलकारी माना जाता है। पीला रंग ऊर्जा, प्रसन्नता और सकारात्मकता का प्रतीक है। पूजा के दौरान पीले वस्त्र धारण करना और पीले फूलों का प्रयोग करना श्रेष्ठ फल देता है।

*मां स्कंदमाता की संपूर्ण पूजा विधि*

* स्नान और शुद्धि: ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नानादि से निवृत्त होकर स्वच्छ या पीले रंग के वस्त्र पहनें।

* पूजा स्थल की सफाई: मंदिर या पूजा स्थान को गंगाजल छिड़क कर पवित्र करें।

* चौकी स्थापना: यदि घर में कलश स्थापना की है तो उसकी पूजा करने के बाद चौकी पर मां स्कंदमाता की तस्वीर या मूर्ति स्थापित करें।

* पंचोपचार/षोडशोपचार पूजा:*

* मां को पीले फूल (विशेषकर कमल या गुलाब) अर्पित करें।

* रोली, अक्षत, कुमकुम, सिंदूर और श्रृंगार का सामान चढ़ाएं।

* भोग अर्पण: मां को प्रसाद स्वरूप केला या बेसन के लड्डू, केसर की खीर अथवा कोई भी पीली मिठाई और पान-सुपारी का बीड़ा अर्पित करें।

* मंत्र जाप और आरती: घी का दीपक और धूप जलाकर मां के मंत्रों का जाप करें, दुर्गा सप्तशती या दुर्गा चालीसा का पाठ करें और अंत में श्रद्धापूर्वक आरती संपन्न करें।

*चमत्कारी मंत्र एवं स्तुति*

* प्रधान मंत्र:

ॐ देवी स्कन्दमातायै नमः

* शालोक / ध्यान मंत्र:

सिंहासनगता नित्यं पद्माश्रितकरद्वया।

शुभदास्तु सदा देवी स्कन्दमाता यशस्विनी,

* प्रार्थना मंत्र:

या देवी सर्वभू‍तेषु माँ स्कंदमाता रूपेण संस्थिता।

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

*मां का प्रिय भोग*

* मां स्कंदमाता को केला अति प्रिय है। भोग में केला अवश्य शामिल करें। इसके अलावा आप दूध से बनी खीर या अन्य पीले मिष्ठान का भोग भी लगा सकते हैं। पूजा के बाद प्रसाद को परिवार के सभी सदस्यों में बांटें।

*पूजा का विशेष लाभ*

संतान प्राप्ति की कामना रखने वाले दंपत्तियों या संतान के सुखी जीवन और उन्नति के लिए मां स्कंदमाता की आराधना अत्यंत फलदायी मानी गई है। इनकी कृपा से भक्तों के सभी संकट दूर होते हैं और घर में सुख-शांति व समृद्धि का वास होता है।

*लोक संस्कृति और आस्था का महापर्व: बथुकम्मा के पांचवें दिन ‘अटला बथुकम्मा’ का हुआ भव्य और सफल आयोजन* *बतकम्मा नवरात्रि विशेष रिपोर्ट दीपक मरकाम*

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*लोक संस्कृति और आस्था का महापर्व: बथुकम्मा के पांचवें दिन ‘अटला बथुकम्मा’ का हुआ भव्य और सफल आयोजन* * बतकम्मा नवरात्रि विशेष रिपोर्ट दीपक मरकाम*

*देशभर में इन दिनों में उमड़ी महिलाओं की भीड़, पारंपरिक गीतों और गूंजते मंत्रोच्चार के बीच प्रकृति और मातृ शक्ति की हुई आराधना*

 

*दिनांक 14 अक्टूबर 2026नवरात्रि , बतकम्मा पावन पर्व*

शारदीय नवरात्रि के पावन अवसर पर महिलाओं के सबसे बड़े पारंपरिक और सांस्कृतिक पर्व ‘बथुकम्मा’ का पांचवा दिन अत्यंत उत्साह, उमंग और श्रद्धा के साथ मनाया गया। बथुकम्मा उत्सव के पांचवें दिन को विशेष रूप से ‘अटला बथुकम्मा’  के रूप में मनाया जाता है। इस दिन प्रकृति के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हुए माँ गौरी (गौराम्मा) की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की गई।

* आकर्षक फूलों की सजावट और बथुकम्मा का निर्माण*

पांचवें दिन की शुरुआत से ही महिलाओं और युवतियों में भारी उत्साह देखने को मिला। सुबह से ही विभिन्न प्रकार के मौसमी और जंगली फूलों—जैसे तंगेदू , गुनुकू  गेंदा  और गुलदाउदी को एकत्रित किया गया।

* महिलाओं ने पारंपरिक कलात्मकता का परिचय देते हुए मंदिर के गोपुर जैसी गोलाकार और पिरामिडनुमा परतों में फूलों को बेहद खूबसूरती से सजाया।

* बथुकम्मा के बिल्कुल शीर्ष पर हल्दी से माँ गौराम्मा का स्वरूप बनाकर स्थापित किया गया, जिस पर कुमकुम और फूलों से श्रृंगार किया गया।

* विधि-विधान और पारंपरिक पूजा-पाठ*

शाम होते ही बस्तियों, गाँवों में  रोशनी और रंगोली से सजाया गया। सभी महिलाएं पारंपरिक परिधानों (विशेषकर साड़ियों और आभूषणों) में सुसज्जित होकर एकत्रित हुईं।

* परिक्रमा और गीत: सजी हुई बथुकम्मा को बीच में रखकर महिलाओं ने उसके चारों ओर घेरा बनाया और पारंपरिक लोकगीतों (बथुकम्मा पाटा) की मधुर धुनों पर तालियां बजाते हुए गोल-गोल घूमकर नृत्य किया। गीतों के माध्यम से प्रकृति, जल, और जीवनदायिनी शक्तियों की वंदना की गई।

* आरती और मंगल कामनाएं: महिलाओं ने परिवार की सुख-समृद्धि, अच्छी सेहत और अखंड सौभाग्य के लिए माँ गौरी से प्रार्थना की। इसके पश्चात पूरी श्रद्धा के साथ कपूर और दीप जलाकर आरती उतारी गई।

*’अटला बथुकम्मा’ का विशेष नैवेद्य और प्रसाद वितरण*

बथुकम्मा के प्रत्येक दिन का नाम उस दिन अर्पित किए जाने वाले विशेष प्रसाद (नैवेद्यम) के नाम पर होता है। पांचवें दिन यानी ‘अटला बथुकम्मा’ पर विशेष रूप से अट्लू  – गेहूं या चावल के आटे और दाल से बने स्वादिष्ट पैनकेक/डोसा) का भोग लगाया जाता है।

* माँ को भोग अर्पित करने के बाद उपस्थित सभी महिलाओं, बच्चों और गणमान्य लोगों में प्रसाद का बड़े प्रेम से वितरण किया गया।

* प्रसाद ग्रहण करने के बाद महिलाओं ने एक-दूसरे को  पर्व की बधाइयां दीं।

*श्रद्धा और आपसी भाईचारे का संदेश*

अटला बथुकम्मा के इस पांचवें दिन के सफल आयोजन ने यह सिद्ध कर दिया कि हमारी पारंपरिक लोक कलाएं किस प्रकार समाज को जोड़ती हैं। इस भव्य आयोजन ने एक बार फिर नारी शक्ति, सांस्कृतिक विरासत और प्रकृति प्रेम की अनुपम मिसाल पेश की, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा।

 

ग्राम बढ़ानजी खासपारा में बाढ़ प्रभावित परिवारों से मिले संतु कश्यप, लगभग 65 परिवारों पर बाढ़ की मार

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किसी के मकान गिरे, तो किसी की फसल बर्बाद; किसानों को प्रति हेक्टेयर मात्र ₹8,000 मुआवजा मिलने की बात पर उठे सवाल

बस्तर। ग्राम बढ़ानजी खासपारा में बाढ़ से प्रभावित ग्रामीणों की समस्याओं और नुकसान का जायजा लेने के लिए बस्तर ग्रामीण जिला अध्यक्ष संतु कश्यप, सचिव हरिराम कश्यप एवं परमेश्वर भारद्वाज ने गांव का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने बाढ़ प्रभावित परिवारों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनीं और बाढ़ से हुए नुकसान की जानकारी ली।

दौरे के दौरान ग्रामीणों ने बताया कि गांव के लगभग 65 परिवार बाढ़ से प्रभावित हुए हैं। बाढ़ के कारण किसी का मकान क्षतिग्रस्त होकर गिर गया, तो किसी किसान की मेहनत से तैयार की गई धान की फसल बर्बाद हो गई। कई परिवारों के सामने अब घर की मरम्मत, परिवार के भरण-पोषण और अगली फसल की तैयारी का संकट खड़ा हो गया है।

ग्रामीणों ने बताया कि बाढ़ से हुए फसल नुकसान के लिए किसानों को प्रति हेक्टेयर मात्र ₹8,000 मुआवजा दिए जाने की बात सामने आ रही है। ऐसे में किसानों के सामने सवाल है कि इतनी कम राशि से वे अगली फसल की तैयारी कैसे करेंगे, खेती के लिए लिया गया कर्ज कैसे चुकाएंगे और अपने परिवार का भरण-पोषण कैसे करेंगे?

₹8,000 प्रति हेक्टेयर में किसान कैसे उबरेंगे बाढ़ की तबाही से?

बाढ़ से प्रभावित किसानों का कहना है कि खेतों में पानी भरने और फसल खराब होने से उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है। किसानों के लिए खेती ही आजीविका का प्रमुख साधन है। ऐसे में फसल बर्बाद होने के बाद उन्हें आर्थिक सहायता की आवश्यकता है, ताकि वे दोबारा खेती शुरू कर सकें।

वहीं, जिन परिवारों के मकान बाढ़ के कारण क्षतिग्रस्त हुए हैं, उनके सामने रहने और घर की मरम्मत कराने की गंभीर समस्या है। ऐसे परिवारों को भी नुकसान के आकलन के आधार पर उचित सहायता मिलनी चाहिए।

संतु कश्यप ने प्रशासन से की उचित मुआवजे की मांग

बस्तर ग्रामीण जिला अध्यक्ष संतु कश्यप ने कहा कि बाढ़ प्रभावित परिवारों की समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए प्रशासन को वास्तविक नुकसान का आकलन करना चाहिए। जिन किसानों की फसल बर्बाद हुई है, उनके खेतों का निष्पक्ष सर्वे कर नियमानुसार उचित मुआवजा दिया जाए। जिन ग्रामीणों के मकान गिरे या क्षतिग्रस्त हुए हैं, उन्हें भी पात्रता के अनुसार राहत राशि उपलब्ध कराई जाए।

उन्होंने कहा कि प्राकृतिक आपदा से प्रभावित ग्रामीण पहले ही आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं। ऐसे समय में प्रशासन की जिम्मेदारी है कि वह प्रभावित परिवारों तक समय पर राहत पहुंचाए। किसानों को ऐसी सहायता मिलनी चाहिए, जिससे वे अगली फसल की तैयारी कर सकें और अपने परिवार को इस संकट से बाहर निकाल सकें।

उन्होंने प्रशासन से मांग की कि ग्राम बढ़ानजी खासपारा के सभी प्रभावित परिवारों का निष्पक्ष सर्वे कराया जाए तथा कोई भी पात्र परिवार राहत और मुआवजे से वंचित न रहे।

ग्रामीणों ने बताई अपनी पीड़ा

ग्राम दौरे के दौरान स्थानीय ग्रामीणों ने बाढ़ से हुए नुकसान की जानकारी साझा की और अपनी समस्याओं से प्रतिनिधिमंडल को अवगत कराया। ग्रामीणों का कहना है कि मकान और फसल को हुए नुकसान के कारण उनके सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। उन्होंने प्रशासन से मांग की कि प्रभावित परिवारों की स्थिति को देखते हुए उन्हें उचित राहत और मुआवजा दिया जाए।

इस दौरान स्थानीय ग्रामीण मोटू भारद्वाज, भागीरथी भारद्वाज, दामोदर भारद्वाज, भवानी, परमेश्वर, दुशासन, हीरामनी, फारसू भारद्वाज सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे।

महासमुंद जिले के बसना में आज 14 अक्टूबर को रक्त संबंधी विकारों और रक्त कैंसर के विशेषज्ञ करेंगे परामर्श

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महासमुंद जिले के बसना में 14 अक्टूबर को रक्त संबंधी विकारों और रक्त कैंसर के विशेषज्ञ करेंगे परामर्श

संजीवनी कैंसर केयर हॉस्पिटल रायपुर एवं अग्रवाल नर्सिंग होम बसना के संयुक्त तत्वावधान में लगेगा विशेष परामर्श शिविर, डॉ. अदम्य गुप्ता देंगे सेवाएं

बसना, महासमुंद। जिले के बसना क्षेत्र में रक्त संबंधी बीमारियों से जूझ रहे मरीजों के लिए राहत भरी खबर है। संजीवनी कैंसर केयर हॉस्पिटल रायपुर एवं अग्रवाल नर्सिंग होम मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल बसना के संयुक्त तत्वावधान में 14 अक्टूबर 2026 को रक्त संबंधी विकारों एवं रक्त कैंसर के मरीजों के लिए विशेष परामर्श शिविर आयोजित किया जाएगा। शिविर में विशेषज्ञ चिकित्सक डॉ. अदम्य गुप्ता मरीजों को परामर्श देंगे।

यह शिविर अग्रवाल नर्सिंग होम मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल बसना में सुबह 11 बजे से दोपहर 3 बजे तक आयोजित होगा। इसमें खून की कमी, बार-बार खून चढ़ाने की आवश्यकता, प्लेटलेट्स की कमी, श्वेत रक्त कोशिकाओं (WBC) की कमी, सिकल सेल, थैलेसीमिया तथा ब्लड कैंसर से संबंधित बीमारियों के मरीज परामर्श ले सकेंगे। इसके अलावा AML और CML जैसे रक्त कैंसर के मामलों में भी विशेषज्ञ सलाह उपलब्ध रहेगी।

शिविर में पहुंचने वाले मरीजों को उनकी बीमारी के अनुसार जांच, उपचार की संभावनाओं और आगे की चिकित्सा प्रक्रिया के संबंध में मार्गदर्शन दिया जाएगा। इसका उद्देश्य क्षेत्र के मरीजों को रक्त रोगों एवं रक्त कैंसर के विशेषज्ञ तक पहुंच उपलब्ध कराना और बेहतर उपचार के प्रति जागरूक करना है।

डॉ. अदम्य गुप्ता एमडी मेडिसिन एवं डीएम क्लिनिकल हीमैटोलॉजी विशेषज्ञ हैं। उन्हें बोन मैरो ट्रांसप्लांट और CAR-T थेरेपी के क्षेत्र का भी अनुभव है। शिविर के माध्यम से मरीजों को विशेषज्ञ परामर्श के लिए रायपुर जाने की आवश्यकता कम करने में मदद मिल सकती है।

यहां मिलेगा परामर्श: अग्रवाल मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल, बसना, जिला महासमुंद (छत्तीसगढ़)।

संपर्क नंबर: 7770868473, 7773086100, 8461811000।

रक्त संबंधी बीमारी से पीड़ित मरीज एवं उनके परिजन निर्धारित समय पर अस्पताल पहुंचकर परामर्श प्राप्त कर सकते हैं।

*नवरात्रि का चौथा दिन: मां कूष्माण्डा  उपासना, पंचांग, पूर्ण विधि-विधान और विशेष मंत्र* * नवरात्रि विशेष रिपोर्ट दीपक मरकाम*

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*नवरात्रि का चौथा दिन: मां कूष्माण्डा  उपासना, पंचांग, पूर्ण विधि-विधान और विशेष मंत्र* * नवरात्रि विशेष रिपोर्ट दीपक मरकाम*

14  अक्टूबर 2026

शारदीय नवरात्रि के पावन पर्व का चौथा दिन माँ दुर्गा के चतुर्थ स्वरूप माँ कूष्माण्डा की उपासना को समर्पित है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जब सृष्टि का अस्तित्व नहीं था और चारों तरफ अंधकार था, तब माँ ने अपनी ‘मंद हंसी’ (ब्रह्मांडीय मुस्कान) से इस ब्रह्मांड की रचना की थी। इसी कारण इन्हें ब्रह्मांड की सृष्टा या ‘कूष्माण्डा’ कहा जाता है। इनकी कृपा से भक्तों के जीवन से सभी प्रकार के कष्ट, रोग और अंधकार दूर होते हैं।

*पंचांग विशेष (चौथा दिन)*

* तिथि: आश्विन शुक्ल पक्ष, चतुर्थी तिथि

* देवी स्वरूप: माँ कूष्माण्डा (अष्टभुजाधारी, जिनका निवास सूर्य मंडल के भीतर माना जाता है)

* विशेष रंग: रॉयल ब्लू (Royal Blue) – यह रंग दिव्यता, स्थिरता और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक है।

* प्रिय भोग: माँ को मालपुआ का भोग अत्यंत प्रिय है। इसके अलावा दूध और उससे बनी चीजें या मिष्ठान का भोग भी लगा सकते हैं।

*माँ कूष्माण्डा पूजा-पाठ की पूर्ण विधि-विधान*

* स्नान और शुद्धि: ब्रह्म बेला में उठकर स्नानादि से निवृत्त होकर स्वच्छ, विशेषकर रॉयल ब्लू या पीले वस्त्र धारण करें।

* पूजा स्थल की तैयारी: माँ के विग्रह या तस्वीर को चौकी पर स्थापित करें। गंगाजल छिड़ककर स्थान को पवित्र करें।

* संकल्प और पूजन सामग्री: हाथ में जल या अक्षत लेकर व्रत और पूजन का संकल्प लें। माँ को रोली, अक्षत, लाल पुष्प, धूप, दीप और गंध अर्पित करें।

* अष्टभुजा देवी का ध्यान: माँ कूष्माण्डा के हाथों में कमंडल, धनुष, बाण, कमल का फूल, अमृत कलश, चक्र, गधा और जपमाला सुशोभित हैं। उनका स्मरण करते हुए उनका पूजन करें।

* भोग अर्पण: माँ को शुद्ध घी, मिष्ठान या मालपुआ का भोग लगाएं। भोग के बाद आचमन कराएं।

* आरती व क्षमा प्रार्थना: अंत में घी के दीपक या कपूर से माँ कूष्माण्डा की आरती उतारें, परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करें और जाने-अनजाने हुई भूल के लिए क्षमा मांगें।

*विशेष मंत्र और स्तुति*

* मूल मंत्र:

ॐ देवी कूष्माण्डायै नमः॥

* ध्यान मंत्र / प्रार्थना:

सुरासम्पूर्णकलशं रुधिराप्लुतमेव च।

दधाना हस्तपद्माभ्यां कूष्माण्डा शुभदास्तु मे॥

* देवी का सिद्ध मंत्र (प्रार्थना हेतु):

या देवी सर्वभू‍तेषु माँ कूष्माण्डा रूपेण संस्थिता।

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

 

*आज की विशेष क्रिया एवं उपाय*

* स्वास्थ्य और ऊर्जा के लिए: चूंकि माँ कूष्माण्डा का संबंध सूर्य ग्रह और शरीर की ऊर्जा से है, अतः आज के दिन लाल या पीले फलों का दान करना और जरूरतमंदों को भोजन कराना अत्यंत फलदायी माना जाता है।

* मानसिक शांति हेतु: पूजा के पश्चात संध्या के समय घर के ईशान कोण में गाय के घी का दीपक जलाकर माँ के मंत्रों का कम से कम 108 बार जाप करें।

जय माता दी! 🙏🌺

*मोहला—मां दुर्गा सेवा संस्थान के तत्वावधान में पंचमी पर भव्य जस झांकी, षष्ठी-सप्तमी पर गरबा महोत्सव, 19 अक्टूबर को हवन-भंडारा और 20 अक्टूबर को विजयादशमी पर होगा रावण वध व सांस्कृतिक कार्यक्रम*

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मनीष कौशिक

मोहला–: शारदीय नवरात्रि के पावन अवसर पर नगर के दुर्गा चौक में भक्ति, शक्ति, श्रद्धा और संस्कृति का भव्य संगम देखने को मिलेगा। मोहला मां दुर्गा सेवा संस्थान के तत्वावधान में आयोजित नवरात्रि महोत्सव को यादगार बनाने के लिए धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों की विशेष श्रृंखला तैयार की गई है। पंचमी के पावन अवसर पर जहां भव्य जस झांकी के माध्यम से माता रानी की महिमा का गुणगान होगा, वहीं षष्ठी एवं सप्तमी पर गरबा महोत्सव की धूम रहेगी। इन आयोजनों से पूरा दुर्गा चौक भक्तिमय वातावरण और उत्साह के रंगों से सराबोर होगा। नवरात्रि महोत्सव के अंतर्गत 19 अक्टूबर को सुबह 8 बजे विधि-विधान के साथ हवन-पूजन का आयोजन किया जाएगा। हवन के माध्यम से मां दुर्गा से नगर की सुख-समृद्धि, शांति और खुशहाली की कामना की जाएगी। इसके पश्चात दोपहर 12 बजे से भव्य भंडारे का आयोजन होगा, जिसमें श्रद्धालु माता रानी का प्रसाद ग्रहण करेंगे। धार्मिक अनुष्ठान और भंडारे के माध्यम से सेवा, समर्पण और सामूहिक सद्भाव का संदेश दिया जाएगा।वहीं,20 अक्टूबर को विजयादशमी के पावन अवसर पर रात्रि 8 बजे रावण वध का भव्य आयोजन किया जाएगा। बुराई पर अच्छाई और अधर्म पर धर्म की विजय के प्रतीक इस आयोजन को लेकर नगरवासियों में विशेष उत्साह रहेगा। इसके पश्चात रात्रि 9 बजे से सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा, जिसमें कला, संस्कृति और मनोरंजन की रंगारंग प्रस्तुतियां महोत्सव की रौनक बढ़ाएंगी। मोहला मां दुर्गा सेवा संस्थान का यह आयोजन केवल धार्मिक अनुष्ठानों तक सीमित नहीं है, बल्कि नगर की सांस्कृतिक विरासत को सहेजने, सामाजिक एकता को मजबूत करने और नई पीढ़ी को भारतीय परंपराओं से जोड़ने का भी एक महत्वपूर्ण प्रयास है। जस झांकी में गूंजते माता रानी के जयकारे, गरबा की लयबद्ध थाप, हवन की पवित्र आहुतियां, भंडारे की सेवा भावना और विजयादशमी पर रावण वध का आयोजन नवरात्रि महोत्सव को विशेष गरिमा प्रदान करेंगे।

मोहला मां दुर्गा सेवा संस्थान के अध्यक्ष कन्हैया सिंह राजपूत ने उक्त जानकारी देते हुए नगरवासियों, श्रद्धालुओं एवं धर्मप्रेमियों से सभी धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में अधिक से अधिक संख्या में शामिल होने की अपील की है। उन्होंने आयोजन को सफल बनाने में नगरवासियों की सहभागिता को महत्वपूर्ण बताते हुए सभी से माता रानी के इस पावन उत्सव में सहभागी बनकर धार्मिक आस्था, सामाजिक एकता और सांस्कृतिक परंपराओं को मजबूत करने का आह्वान किया।

 

*जय माता दी! जय मां दुर्गा!*

*बस्तर दशहरा: सिरहासार भवन में आस्था के साथ संपन्न हुई ऐतिहासिक ‘जोगी बिठाई’ की रस्म*

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*बस्तर दशहरा: सिरहासार भवन में आस्था के साथ संपन्न हुई ऐतिहासिक ‘जोगी बिठाई’ की रस्म*

*दशहरे के निर्विघ्न आयोजन और बस्तर की सुख-समृद्धि के लिए 4 फीट गहरे गड्ढे में 9 दिनों की कठिन तप साधना में बैठे ग्राम बड़े आमाबाल के दौलत*

बस्तर सम्भाग जगदलपुर:12 अक्टूबर 2026

विश्व प्रसिद्ध एवं 75 दिनों तक चलने वाले ऐतिहासिक बस्तर दशहरा महापर्व के अंतर्गत शारदीय (क्वार) नवरात्रि के प्रथम दिवस पर अत्यंत महत्वपूर्ण और अनूठी ‘जोगी बिठाई’ की रस्म पूरे विधि-विधान और पारंपरिक गरिमा के साथ सिरहासार भवन में संपन्न हो गई। बस्तर अंचल की सुख-समृद्धि, शांति और दशहरा पर्व के निर्विघ्न समापन की कामना को लेकर ग्राम बड़े आमाबाल (हल्बा समुदाय) के युवा दौलत इस वर्ष लगातार तीसरी बार 9 दिनों की अत्यंत कठिन तप साधना पर बैठे हैं।

*मां मावली मंदिर से पूजा-अर्चना के बाद सिरहासार पहुंचे जोगी*

करीब 600 वर्षों की समृद्ध लोक-आस्था को समेटे इस परंपरा की शुरुआत शाम को मावली मंदिर में पुजारी द्वारा दीप प्रज्ज्वलन एवं पूजा-अर्चना के साथ हुई। देवी की आराधना के पश्चात वहां स्थापित पवित्र तलवार का विधिवत पूजन किया गया। इसके बाद जोगी दौलत इसी पावन तलवार को धारण कर पारंपरिक मुंडाबाजा और गाजे-बाजे की मंगल धुनों के बीच सिरहासार भवन पहुंचे। सिरहासार भवन में प्रार्थना के उपरांत वे वहां तैयार किए गए लगभग 3 से 4 फीट गहरे वर्गाकार गड्ढे (आसन) में पालथी लगाकर बैठे और आगामी नौ दिनों के लिए कठिन तपस्या व निराहार व्रत का संकल्प लिया।

*600 वर्षों का इतिहास: रियासतकाल से चली आ रही है परंपरा*

ऐतिहासिक मान्यताओं के अनुसार, बस्तर रियासतकाल में पर्व के दौरान किसी भी प्रकार की विघ्न-बाधा, अनहोनी या अमंगल को रोकने के लिए स्वयं राजा साधना में बैठते थे। कालंतर में यह दैवीय दायित्व हल्बा समाज के पारंपरिक परिवारों को सौंप दिया गया। तभी से हल्बा समुदाय की पीढ़ियां पूरी निष्ठा और श्रद्धा के साथ इस परंपरा का निर्वहन करती आ रही हैं।

*9 दिनों का कठोर अनुशासन और जन-आस्था*

‘जोगी बिठाई’ के बाद जोगी आगामी 9 दिनों तक बिना अन्न-जल ग्रहण किए अत्यंत कठिन साधना और मौन व्रतनुमा स्थिति में लीन रहेंगे। नवरात्रि के इन नौ दिनों तक सिरहासार भवन में जोगी के दर्शन और उनका आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए दूर-दूर से श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है। विजयादशमी के उपरांत हवन-पूजन एवं ‘जोगी उठाई’ की रस्म के साथ ही इस कठिन तपस्या का समापन (पारणा) होगा।

पाठजात्रा, डेरी गड़ाई और काछनगादी जैसी महत्वपूर्ण रस्मों के बाद आयोजित इस गरिमामय अनुष्ठान के दौरान दशहरा समिति के पदाधिकारी, मांझी-चालकी, पुजारी, ग-चविया तथा जोगी परिवार के सदस्य एवं बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे।

बच्चों के बेहतर स्वास्थ्य के लिए अग्रवाल नर्सिंग होम बसना की पहल, सरायपाली में मिलेगी विशेषज्ञ शिशु रोग चिकित्सकों की सुविधा

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बच्चों के बेहतर स्वास्थ्य के लिए अग्रवाल नर्सिंग होम बसना की पहल, सरायपाली में मिलेगी विशेषज्ञ शिशु रोग चिकित्सकों की सुविधा

सरायपाली में प्रत्येक मंगलवार और शुक्रवार को सुबह 10 से दोपहर 1 बजे तक उपलब्ध रहेंगे विशेषज्ञ डॉक्टर

महासमुंद/सरायपाली। बच्चों के बेहतर स्वास्थ्य और समय पर उपचार की सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से अग्रवाल नर्सिंग होम, बसना द्वारा सरायपाली में विशेषज्ञ शिशु रोग चिकित्सकों की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। इसके तहत बच्चों के स्वास्थ्य परीक्षण, बीमारियों की पहचान और उचित उपचार के लिए अनुभवी चिकित्सकों की टीम निर्धारित दिनों में सेवाएं देगी।

अग्रवाल नर्सिंग होम की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, 13 अक्टूबर 2026 से प्रत्येक मंगलवार एवं शुक्रवार को सुबह 10 बजे से दोपहर 1 बजे तक सरायपाली में शिशु रोग विशेषज्ञों की टीम उपलब्ध रहेगी। इस टीम में डॉ. अमित अग्रवाल, वरिष्ठ शिशु रोग विशेषज्ञ; डॉ. मुकेश ठाकुर, वरिष्ठ शिशु रोग विशेषज्ञ; डॉ. संतोष घोटमारे, एमडी पीडियाट्रिक; तथा डॉ. दीक्षित जे. राम, शिशु रोग विशेषज्ञ, एसएमएस मेडिकल कॉलेज जयपुर शामिल हैं।

इस सुविधा से सरायपाली और आसपास के क्षेत्रों के अभिभावकों को बच्चों के स्वास्थ्य संबंधी परामर्श एवं उपचार के लिए विशेषज्ञ चिकित्सकों तक पहुंचने में सहूलियत मिलेगी। बच्चों की सेहत को लेकर अभिभावकों को समय पर चिकित्सकीय सलाह मिलना महत्वपूर्ण है, ताकि बीमारी की पहचान कर उचित उपचार कराया जा सके।

यह सुविधा अग्रवाल डेंटल एंड पॉलीक्लिनिक, मेन रोड, सरायपाली में उपलब्ध रहेगी। क्लीनिक आईडीबीआई बैंक एवं संतोषी माता मंदिर के पास स्थित है।

संपर्क नंबर: 91743-35366, 91313-44252, 93036-23130 एवं 77730-86100।

अग्रवाल नर्सिंग होम की इस पहल से सरायपाली क्षेत्र में बच्चों के लिए विशेषज्ञ चिकित्सा सेवाओं की उपलब्धता बढ़ने और अभिभावकों को सुविधा मिलने की उम्मीद है।

* साहस, पराक्रम और शांति की अधिष्ठाता मां चंद्रघंटा की पूजा आज, जानिए पूर्ण विधि-विधान, मंत्र और प्रिय भोग*  *नवरात्रि विशेष रिपोर्ट दीपक मरकाम*

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* साहस, पराक्रम और शांति की अधिष्ठाता मां चंद्रघंटा की पूजा आज, जानिए पूर्ण विधि-विधान, मंत्र और प्रिय भोग*  *नवरात्रि विशेष रिपोर्ट दीपक मरकाम*

शारदीय नवरात्रि का पावन पर्व पूरे देश में पूरी श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जा रहा है। नवरात्रि के तीसरे दिन मां दुर्गा के तृतीय स्वरूप मां चंद्रघंटा की आराधना की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां चंद्रघंटा का यह स्वरूप परम शांतिदायक, कल्याणकारी और भक्तों के सभी संकटों को हरने वाला है। उनके मस्तक पर घंटे के आकार का अर्धचंद्र सुशोभित है, इसीलिए इन्हें ‘चंद्रघंटा’ कहा जाता है।

आइए जानते हैं आज के दिन की विशेष पूजा-विधि, मंत्र, भोग और इसका क्या है खास आध्यात्मिक महत्व।

मां चंद्रघंटा का स्वरूप और महत्व

मां चंद्रघंटा का वाहन सिंह (शेर) है और उनके दस हाथ हैं, जिनमें अस्त्र-शस्त्र सुशोभित रहते हैं। उनके गले में हमेशा घंटे की गूंज बनी रहती है जो नकारात्मक शक्तियों और बाधाओं को दूर रखती है। मान्यता है कि इनकी उपासना करने से भक्तों में असीम साहस, आत्मबल और निर्भयता की प्राप्ति होती है।

चरणबद्ध पूजा-विधि (Puja Vidhi)

* प्रातः स्नान और संकल्प:

सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि से निवृत्त होकर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। आज के दिन लाल या सुनहरे रंग के वस्त्र पहनना अत्यंत शुभ माना जाता है। इसके बाद माता का ध्यान कर व्रत और पूजा का संकल्प लें।

* चौकी की सजावट और स्थापना:

पूजा घर की अच्छी तरह साफ-सफाई करें। यदि घर में घटस्थापना (कलश) की गई है, तो उसकी नियमित पूजा जारी रखें। माता चंद्रघंटा की प्रतिमा या तस्वीर को चौकी पर स्थापित करें।

* षोडशोपचार पूजन:

* माता को गंगाजल छिड़ककर शुद्ध करें।

* उन्हें रोली, कुमकुम, अक्षत (चावल) और सुगंधित पुष्प अर्पित करें।

* मां को लाल या श्वेत-पीले पुष्प विशेष प्रिय हैं, अतः ताजे फूल अर्पित करें।

* धूप-दीप और आरती:

शुद्ध घी का दीपक और धूप प्रज्वलित करें। इसके बाद परिवार के साथ मां दुर्गा और मां चंद्रघंटा की आरती गाएं।

मां का विशेष भोग (Bhog)

मां चंद्रघंटा को दूध और दूध से बनी चीजों का भोग अति प्रिय है।

* मुख्य भोग: आप माता को केसरयुक्त चावल की खीर, दूध की मिठाई (जैसे पेड़ा, बर्फी) या मखाने की खीर का भोग लगा सकते हैं।

* भोग में मिश्री और पंचमेवा (ड्राई फ्रूट्स) शामिल करना भी बहुत फलदायी माना गया है।

अमोघ मंत्र और स्तुति

पूजा के दौरान एकाचित होकर मां के इस मूल मंत्र का कम से कम 108 बार (एक माला) जाप अवश्य करें:

* मूल मंत्र:*

* ॐ देवी चन्द्रघण्टायै नमः॥*

* प्रार्थना मंत्र:*

* पिण्डजप्रवरारूढ़ा चण्डकोपास्त्रकैर्युता। प्रसादं तनुते मह्यं चन्द्रघण्टेति विश्रुता॥*

 

*विशेष संदेश*

तृतीय नवरात्रि की यह साधना मानसिक शांति, एकाग्रता और आंतरिक शत्रुओं पर विजय पाने के लिए सर्वश्रेष्ठ मानी जाती है। मां चंद्रघंटा की कृपा से आपके जीवन में भी साहस, सुख-समृद्धि और आरोग्य का संचार हो—ऐसी मंगल  कामना है।

*जय माता दी, 🌺 💐 🌺 🙏 🙏 🙏 🙏*

*छत्तीसगढ़ शासन की नक्सल आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति से प्रभावित होकर 35 लाख रुपए के 6 ईनामी नक्सलियों ने आत्म समर्पण किया जिसमें 4 नक्सली उड़ीसा राज्य में बड़े कैडर में शामिल थे*,,,,,,,, ,,,,,,,,,,, तेजनारायण सिंह की रिपोर्ट,,,,,,,

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*छत्तीसगढ़ शासन की नक्सल आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति से प्रभावित होकर 35 लाख रुपए के 6 ईनामी नक्सलियों ने आत्म समर्पण किया जिसमें 4 नक्सली उड़ीसा राज्य में बड़े कैडर में शामिल थे*,,,,,,,,

,,,,,,,,,,, तेजनारायण सिंह की रिपोर्ट,,,,,,,

🟪 *उड़ीसा राज्य में सक्रिय 04 माओवादी कैडरो सहित पश्चिम बस्तर डिवीजन के संगठन छोड़कर फरार 02 माओवादी ने हिंसा का रास्ता छोड़ बीजापुर पुलिस के समक्ष किया आत्मसमर्पण ।*

🟪 *आत्मसमर्पण करने वाले 06 माओवादी कैडरों में 04 PPCM एवं 02 PM रैंक के माओवादी शामिल ।*

बीजापुर ,,,,,,,

🟪 *आत्मसमर्पण करने वाले माओवादी कैडरो पर कुल रूपये 35 लाख का ईनाम घोषित था ।*

🔳 छत्तीसगढ़ शासन की नक्सल आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति, सुरक्षा बलों द्वारा लगातार संचालित नक्सल विरोधी अभियानों तथा पुनर्वास एवं कौशल विकास कार्यक्रमों से प्रभावित होकर, उड़ीसा राज्य में सक्रिय 04 माओवादी कैडरों सहित पश्चिम बस्तर डिवीजन के संगठन छोड़कर फरार 02 माओवादियों ने आत्मसमर्पण किया। बीजापुर जिले में संचालित पुनर्वास एवं कौशल विकास कार्यक्रमों के संबंध में प्रकाशित समाचारों तथा सुरक्षा बलों द्वारा लगातार किए जा रहे संपर्क एवं आपसी समन्वय के सकारात्मक परिणामस्वरूप इन माओवादी कैडरों ने डीआरजी बीजापुर एवं केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) के सहयोग से बीजापुर पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण किया। यह आत्मसमर्पण सुरक्षा बलों के सतत प्रयासों, प्रभावी समन्वय तथा शासन की पुनर्वास नीति के प्रति बढ़ते विश्वास को दर्शाता है।

🔳 सुरक्षा बलों के बढ़ते प्रभाव, संगठन के विघटन की स्थिति, संगठन की हिंसक एवं जनविरोधी विचारधारा से मोहभंग, पूर्व माओवादी कैडरों के सफल पुनर्वास तथा आदिवासी क्षेत्रों में तेजी से हो रहे विकास कार्यों से प्रभावित होकर उन्होंने हिंसा का मार्ग त्यागकर समाज की मुख्यधारा से जुड़ने का निर्णय लिया।

🔳 आत्मसमर्पण करने वाले कैडरों के नाम इस प्रकार हैं –
1. नाम: रानी सोढ़ी उर्फ संध्या, पति संतोष कुड़ियम,उम्र: 30 वर्ष, जाति: मुरिया, पता: गोरना बटटूमपारा, थाना बीजापुर, जिला बीजापुर, छत्तीसगढ़। संगठन: उड़ीसा राज्य, कंपनी नंबर 08 पीपीसीएम इनाम राशि: 08.00 लाख रूपये

2. नाम: पांडो पोड़ियम उर्फ सस्मिता, पिता कोंदा पोड़ियम, उम्र: 28 वर्ष, जाति: मुरिया, पता: नेलनार मंतूपारा, थाना ओरछा, जिला नारायणपुर, छत्तीसगढ़, संगठन: उड़ीसा राज्य, कंपनी नंबर 08 पीपीसीएम पद/रैंक: PPCM, इनाम राशि: 08.00 लाख रूपये

3. नाम: सुक्कू कुड़ियम उर्फ संतोष, पिता मूसा कुड़ियम, उम्र: 27 वर्ष, जाति: मुरिया, पता: सागमेटा ईमलीपारा, थाना फरसेगढ़, जिला बीजापुर, छत्तीसगढ़, संगठन: उड़ीसा राज्य, कंपनी नंबर 08 पीपीसीएम / उड़ीसा राज्य सीसीएम गणेश उईका का सुरक्षा गार्ड, पद/रैंक: PPCM, इनाम राशि: 08 लाख रूपये

4. नाम: कोसा माड़वी उर्फ सतीश, पिता हिड़मा माड़वी, उम्र: 30 वर्ष, जाति: मुरिया, पता: पोनडवाया, थाना भैरमगढ़, जिला बीजापुर, छत्तीसगढ़, संगठन: कंपनी नंबर 02, पीपीसीएम / ए-सेक्शन कमांडर पद/रैंक: PPCM, इनाम राशि: 08 लाख रूपये

5. नाम: देवे मड़कम उर्फ जन्नी, पिता हड़मा मड़कम, उम्र: 22 वर्ष, जाति: मुरिया, पता: सिंगनपल्ली स्कूलपारा, थाना उसूर, जिला बीजापुर, छत्तीसगढ़, संगठन: उड़ीसा राज्य, कंपनी नंबर 08 की पार्टी सदस्य / उड़ीसा राज्य एसजेडसीएम जगदीश इरपा उर्फ रमन्ना का सुरक्षा गार्ड सदस्य, पद/रैंक: PM, इनाम राशि: 02.00 लाख रूपये

6. नाम: लालू ताती, पिता सुक्कू ताती, उम्र: 25 वर्ष, जाति: मुरिया, पता: तोड़का गायता पारा, थाना गंगालूर, जिला बीजापुर, छत्तीसगढ़, संगठन: गंगालूर एरिया कमेटी , पार्टी सदस्य, पद/रैंक: PM पार्टी मेम्बर, इनाम राशि: 01 लाख रूपये

*रानी सोढ़ी उर्फ संध्या, PPCM*
संगठन में भर्ती:
• वर्ष 2012 से जून 2015: ग्राम गोरना में बाल संघम सदस्य के रूप में कार्य किया।
• जुलाई 2015 से अप्रैल 2016: PLGA सदस्य के रूप में कार्य किया।
• मई 2016: पार्टी सदस्य के रूप में जवाबदारी दी गई और ओडिशा राज्य के DGN डिवीजन में भेजी गई।
• जनवरी 2017 से फरवरी 2022: पार्टी सदस्य के रूप में कार्य करते हुए ओडिशा राज्य SZCM कार्तिक के सुरक्षा गार्ड के रूप में रही।
• मार्च 2022: PPCM पद पर जवाबदारी दी गई, ओडिशा राज्य की कंपनी नंबर 08 में भेजी गई ।
• मार्च 2022 से जुलाई 2026: कंपनी नंबर 08 में PPCM के पद पर कार्यरत रही।

आपराधिक घटनाओं में संलिप्तता:
• अक्टूबर 2017: महाराष्ट्र के गढ़चिरौली जिले में पुलिस-माओवादी मुठभेड़ की घटना में शामिल रही, जिसमें एक माओवादी सुरक्षा गार्ड की मृत्यु हुई।
• अप्रैल 2018: ओडिशा में मतदान दल पर हमले की घटना में शामिल रही, जिसमें 02 पुलिस जवान शहीद हुए।
• 01 जनवरी 2022: DGN डिवीजन में मोबाइल नेटवर्क सर्च अभियान के दौरान पुलिस की कार्रवाई से संबंधित घटना में शामिल रही, जिसमें 01 पुलिस जवान घायल हुआ।
• 08 जनवरी 2022: ओडिशा में माओवादी अस्थायी कैंप के विरुद्ध पुलिस अभियान की घटना में शामिल रही।
• 22 जनवरी 2026: ओडिशा के कोनारी जंगल में पुलिस अभियान के दौरान हुई मुठभेड़ में शामिल रही। इस घटना में 02 माओवादी मारे गए तथा 02 घायल हुए, जिनमें वह स्वयं भी घायल हुई थी ।
• 08 जुलाई 2022: ओडिशा के ताराजार जंगल में पुलिस अभियान की घटना में शामिल रही, जिसमें 01 पुलिस जवान घायल हुआ।
• अक्टूबर 2023: ओडिशा में माओवादी अस्थायी कैंप के विरुद्ध पुलिस अभियान की घटना में शामिल रही।
• अप्रैल 2024: ओडिशा में माओवादी अस्थायी कैंप के विरुद्ध पुलिस अभियान की घटना में शामिल रही, जिसमें 02 माओवादी मारे गए।

*पांडो पोड़ियम ऊर्फ सस्मिता PPCM*
संगठन में भर्ती एवं पद: वर्ष 2015 में ग्राम नेलनार में बाल संघम सदस्य के रूप में संगठन में शामिल हुई। दिसंबर 2016 में PLGA सदस्य, अप्रैल 2018 में पार्टी सदस्य तथा दिसंबर 2025 में PPCM पद की जिम्मेदारी दी गई । दिसंबर 2025 से 05 जुलाई 2026 तक ओडिशा राज्य की कंपनी नंबर 08 में कार्यरत रही।

आपराधिक घटनाओं में संलिप्तता:
• जनवरी 2022 में ओडिशा के ग्राम ओड-सिकाचार डेम क्षेत्र में माओवादी अस्थायी कैंप लगाकर ठहरे हुए थे सुरक्षा बलों की कार्यवाही मुठभेड में माओवादी भाग खड़े हुए ।
• जुलाई 2022 में ताराजार जंगल में अस्थाई माओवादी कैंप लगाये हुए थे सुरक्षा बलों के साथ हुए मुठभेड़ में 01 जवान घायल ।
• अक्टूबर 2023 में केकेबीएन डीविजन अन्तगर्त सारागढ़ जंगल तथा अप्रैल 2024 में पडेल जंगल में माओवादी कैंप लगाकर ठहरे हुए थे पुलिस कार्यवाही में मुठभेड़ पश्चात भाग खडे हुए ।
• अप्रैल 2024 में बीजीएन डीविजन में अस्थाई कैम्प लगाकर ठहरे हुए थे पुलिस के बढ़ते दबाव से हुए मुठभेड़ में 02 माओवादियों के मारे गये ।

*सुक्कू कुड़ियम ऊर्फ संतोष PPCM*

संगठन में भर्ती : वर्ष 2005 से दिसम्बर 2013 तक ग्राम सागमेटा का बाल संगम सदस्य। जनवरी 2014 से दिसम्बर 2015 तक नेशनल पार्क एरिया कमेटी पीएलजीए सदस्य । जनवरी 2016 नेशनल पार्क एरिया कमेटी पार्टी सदस्य। जुलाई 2018 में नेशनल पार्क एरिया कमेटी से बदली करके ओडिशा राज्य अंतर्गत सीसी स्टॉफ के सुरक्षा हेतु कार्य करने भेजा गया। दिसम्बर 2021 से जुलाई 2026 तक ओडिशा राज्य अंतर्गत सीसी स्टॉफ सुरक्षा गार्ड सदस्य/पीपीसीएम/ धारित हथियार एके 47 ।

आपराधिक घटनाओं में संलिप्तता:
• वर्ष 2016 में नेशनल पार्क एरिया कमेटी अंतर्गत ग्राम गुंडम मुठभेड़ में शामिल।
• वर्ष 2023 में ओडिशा राज्य अंतर्गत ग्राम कारीपानी मुठभेड़ में शामिल।
• अगस्त 2023 में ओडिशा राज्य अंतर्गत ग्राम नागेश मुठभेड़ में शामिल।
• 15 नवंबर 2023 में ओडिशा राज्य अंतर्गत ग्राम सोनाबेड़ा मुठभेड़ में शामिल।
• अप्रैल 2024 में ओडिशा राज्य अंतर्गत ग्राम पीपलकुट्टा मुठभेड़ में शामिल।
• 25 दिसम्बर 2025 में ओडिशा राज्य अंतर्गत ग्राम रम्भा मुठभेड़ में शामिल।
• 22 फरवरी 2026 ओडिशा राज्य अंतर्गत ग्राम कोरोड़ा मुठभेड़ में शामिल।

*कोसा माड़वी उर्फ सतीश PPCM*

संगठन में भर्ती :- जनवरी 2005 से दिसम्बर 2005 तक इंद्रावती एरिया कमेटी पीएलजीए सदस्य, जनवरी 2006 से दिसम्बर 2009 तक कंपनी नं 02 पार्टी सदस्य, जनवरी 2010 से अब तक कंपनी नं 02 पीपीसीएम / A सेक्शन कमांडर । जनवरी 2026 में स्वास्थ्यगत कारणों से संगठन से फरार चल रहा था । सुरक्षा बलों के द्वारा लगातार प्रयासों से समाज की मुख्यधारा में जुड़ने का फैसला लिया ।

आपराधिक घटनाओं में संलिप्तता:
• वर्ष 2006 में NMDC के CISF कैंप हमले में शामिल ।
• वर्ष 2008 में नेड्रा व कोरचोली घटना में शामिल ।
• वर्ष 2016 में ग्राम चेरली सीआरपीएफ कैंप पर हमला में शामिल ।
• वर्ष 2024 में ग्राम तेकुलगुडा सीआरपीएफ कैंप हमला की घटना में शामिल ।

*देवे मड़कम उर्फ जन्नी — PM पार्टी मेम्बर*
• संगठन में भर्ती एवं पद: वर्ष 2015 से 2017 तक कमलापुर RPC की CNM सदस्य रही। जुलाई 2018 में PLGA सदस्य के पद का कार्य दिया गया । अक्टूबर 2019 में पार्टी सदस्य बनी। मार्च 2021 में ओडिशा राज्य की कंपनी नंबर 08 में भेजी गई, जहाँ नवंबर 2022 से जून 2025 तक SZCM जगदीश इरपा उर्फ रमन्ना के सुरक्षा गार्ड के रूप में कार्य किया। जुलाई 2025 से मार्च 2026 तक कंपनी नंबर 08 में पार्टी सदस्य के रूप में कार्यरत रही।

आपराधिक घटनाओं में संलिप्तता:
• जनवरी 2022 में ओडिशा के ओड-सिकाचार डेम क्षेत्र में माओवादी कैंप के विरुद्ध पुलिस मुठभेड़ में शामिल थी
• जुलाई 2022 में ताराजार जंगल में माओवादी कैंप लगाकर ठहरे हुए थे पुलिस अभियान के दौरान हुए मुठभेड़ में 01 जवान घायल हुआ ।
• अक्टूबर 2023 में सारागढ़ जंगल तथा अप्रैल 2024 में पडेल जंगल में माओवादी कैंप लगाकर ठहरे हुए थे, पुलिस कार्यवाही में 02 माओवादी मारे गये एवं शेष माओवादी जंगल झाडी का आड़ लेकर भाग खड़े हुए ।

*लालू ताती , PM पार्टी मेम्बर*

संगठन में भर्ती :- वर्ष 2010 में ग्राम तोड़का का बाल संगम सदस्य , अगस्त 2020 में गंगालूर एरिया कमेटी पीएलजीए सदस्य, जनवरी 2021 को गंगालूर एरिया कमेटी से बदली होकर बटालियन No 01 में कार्य करने भेजा गया, वर्ष 2022 में बटालियन न 01, HQ कंपनी में पार्टी सदस्य, सितम्बर 2023 को बटालियन No 01 से बदली करके गंगालूर एरिया कमेटी में इलाज करवाने हेतु भेजा गया, वर्ष 2022 से पार्टी सदस्य के पद पर कार्यरत था । जनवरी-फरवरी 2026 में संगठन से फरार था सुरक्षा बलों के द्वारा समन्वय स्थापित कर किये गये प्रयासों से समाज की मुख्यधारा में जुडने का फैसला लिया ।

आपराधिक घटनाओं में संलिप्तता:
• अप्रैल 2021 ग्राम तेकुलगुडा घटना में शामिल।
• वर्ष 2022 ग्राम एलमागुंडा कैंप अटैक में शामिल ( वर्ष 2022 में 03 बार इस कैंप अटैक में शामिल था)
• वर्ष 2022 में तेलंगाना सुकमा बीजापुर बॉर्डर में स्थित ग्राम सन्नापुर कैंप अटैक में शामिल
• मार्च 2023 में सुकमा जिला अंतर्गत ग्राम गुंडराज गुड़ा कैंप अटैक में शामिल

🔳 आत्मसमर्पण करने वाले सभी कैडरों को छत्तीसगढ़ शासन की नक्सल आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति के अंतर्गत नियमानुसार आर्थिक सहायता, कौशल विकास प्रशिक्षण, आवास, शिक्षा, स्वरोजगार एवं रोजगार से संबंधित सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी, ताकि वे सम्मानपूर्वक समाज की मुख्यधारा से जुड़कर नया जीवन प्रारंभ कर सकें।

🔳 सुरक्षा बलों की सक्रियता और टीमवर्क: इस आत्मसमर्पण की सफलता में डीआरजी बीजापुर, केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल 170वी बटालियन (CRPF) तथा बीजापुर पुलिस के बीच बेहतर समन्वय, विश्वास निर्माण एवं संवेदनशील कार्यशैली की महत्वपूर्ण भूमिका रही । सुरक्षा बलों के सतत प्रयासों एवं पुनर्वास की सकारात्मक पहल से प्रभावित होकर इन माओवादी कैडरों ने हिंसा का मार्ग त्यागने का निर्णय लिया।

🔳 शासन की नक्सल आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति के अंतर्गत आत्मसमर्पण करने वाले कैडरों को नियमानुसार आर्थिक सहायता, कौशल विकास प्रशिक्षण, आवास, शिक्षा एवं रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जाएंगे। इसके अतिरिक्त उन्हें समाज में सम्मानजनक पुनर्वास सुनिश्चित करने हेतु जिला प्रशासन एवं पुलिस द्वारा निरंतर मार्गदर्शन और सहयोग प्रदान किया जाएगा, ताकि वे स्थायी रूप से मुख्यधारा के जीवन से जुड़ सकें।

एक वर्ष, अनेक उपलब्धियाँ: कुप्पागुड़ा FOB ने नक्सल विरोधी अभियानों और जनकल्याण में स्थापित किए नए आयाम 

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 (पीडिया), जिला बीजापुर, छत्तीसगढ़ | 12 अक्टूबर 2026

छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले के पीडिया क्षेत्र अंतर्गत कुप्पागुड़ा में 06 अक्टूबर 2025 को स्थापित FOB की प्रथम वर्षगाँठ के उपलक्ष्य में 12 अक्टूबर 2026 को एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि श्री बी.एस. नेगी, उपमहानिरीक्षक, रेंज बीजापुर द्वारा कैंप परिसर में नवनिर्मित मंदिर का उद्घाटन किया गया। कार्यक्रम का आयोजन श्री आनंद कुमार, कमांडेंट, 199वीं वाहिनी केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल की अगुवाई में संपन्न हुआ। 

इस अवसर पर श्री कुमार मनीष कमांडेंट 196 वीं वाहिनी, श्री सरकार राजा रमन कमांडेंट 170 वीं वाहिनी, श्री आर. एस. जांगिड कमांडेंट 168 वीं वाहिनी व श्री उमेश प्रसाद गुप्ता (IPS) पुलिस अधीक्षक जिला बीजापुर के अतिरिक्त 199 वीं वाहिनी के श्री कुमार नीरज द्वितीय कमान अधिकारी, श्री बाबू साहेब उपकमांडेंट, श्री ईश्वर चंद्र शर्मा उपकमांडेंट, श्री जुगल किशोर माहापात्रा सहायक कमांडेंट, श्री त्रिलोचन प्रसाद सहायक कमांडेंट, डॉ. प्रीतेश कनिक चिकित्साधिकारी उपस्थित रहे।

### नक्सल प्रभावित क्षेत्र से विकास और विश्वास की ओर

FOB की स्थापना से पूर्व कुप्पागुड़ा एवं आसपास का क्षेत्र लंबे समय तक नक्सल गतिविधियों से प्रभावित रहा। नक्सलियों के भय और दबाव के कारण स्थानीय ग्रामीणों का सामान्य जनजीवन प्रभावित था। लोगों को स्वतंत्र रूप से आवागमन करने, अपनी आजीविका से जुड़ी गतिविधियाँ संचालित करने तथा शासन-प्रशासन तक अपनी समस्याएँ पहुँचाने में अनेक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। नक्सलियों की धमकियों और उनके प्रभाव के चलते क्षेत्र में भय एवं असुरक्षा का वातावरण बना रहता था, जिससे ग्रामीणों के सामाजिक, आर्थिक और शैक्षणिक विकास पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता था। दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों और सुरक्षा संबंधी चुनौतियों के कारण स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा, पेयजल, बिजली, सड़क संपर्क तथा विभिन्न सरकारी जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ प्राप्त करना भी कठिन था। परिणामस्वरूप, क्षेत्र के अनेक ग्रामीण मूलभूत सुविधाओं से वंचित रहकर सीमित संसाधनों के बीच जीवनयापन करने को विवश थे।

ऐसे चुनौतीपूर्ण परिवेश में 06 अक्टूबर 2025 को 199वीं वाहिनी CRPF द्वारा कुप्पागुड़ा में FOB की स्थापना क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने, नक्सल गतिविधियों पर प्रभावी अंकुश लगाने तथा ग्रामीणों के लिए विकास एवं जनकल्याण की संभावनाओं को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुई।

पिछले एक वर्ष के दौरान 199वीं वाहिनी की निरंतर उपस्थिति, क्षेत्र में परिचालन गतिविधियों तथा स्थानीय प्रशासन के साथ समन्वय के माध्यम से ग्रामीणों में सुरक्षा की भावना मजबूत करने और उन्हें मुख्यधारा की विकास प्रक्रिया से जोड़ने के प्रयास किए गए हैं। आवागमन, पेयजल, बिजली, स्वास्थ्य सुविधाओं तथा सरकारी योजनाओं से संबंधित आवश्यकताओं को दूर करने की दिशा में भी पहल की गई है। इन प्रयासों से क्षेत्र में सामान्य जनजीवन को बेहतर बनाने तथा ग्रामीणों और सुरक्षा बलों के बीच विश्वास एवं सहयोग को प्रोत्साहित करने में मदद मिली है।

### एक वर्ष में सुरक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियाँ

कुप्पागुड़ा FOB की स्थापना के पश्चात 199वीं वाहिनी CRPF ने क्षेत्र में नक्सल विरोधी अभियानों के साथ-साथ शांति एवं सुरक्षा का वातावरण सुदृढ़ करने के लिए निरंतर प्रयास किए हैं। बीते एक वर्ष में कैंप के माध्यम से हासिल की गई प्रमुख उपलब्धियाँ निम्नलिखित हैं—

* 70 से अधिक नक्सलियों का आत्मसमर्पण: नक्सलियों को हिंसा का रास्ता छोड़कर समाज की मुख्यधारा में लौटने के लिए प्रेरित करने तथा आत्मसमर्पण की प्रक्रिया को प्रोत्साहित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई गई।

* 52 नक्सल डंप बरामद: विभिन्न अभियानों के दौरान 500 से अधिक नक्सल सामग्रियाँ बरामद की गईं, जिनमें 12 हथियार, गोला-बारूद, विस्फोटक सामग्री, IED तथा IED निर्माण में प्रयुक्त सामग्री एवं अन्य नक्सल संबंधी सामान शामिल रहे।

* 75 IED की बरामदगी: विभिन्न अभियानों के दौरान सुरक्षा बलों के रास्तों में लगाईं गई व नक्सल डंप से कुल 75 इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस (IED) बरामद की गईं, जिससे संभावित विस्फोटक खतरों को निष्क्रिय करने तथा आम नागरिकों एवं सुरक्षा बलों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में योगदान मिला।

* 12 नक्सल स्मारकों का ध्वस्तीकरण: क्षेत्र में नक्सल प्रभाव एवं हिंसक गतिविधियों से जुड़े प्रतीकों को हटाने की दिशा में कार्रवाई की गई।

इन उपलब्धियों ने क्षेत्र में नक्सल गतिविधियों पर अंकुश लगाने, संभावित खतरों को कम करने और सुरक्षित वातावरण विकसित करने के प्रयासों को गति प्रदान की है। साथ ही, आत्मसमर्पण के लिए प्रेरित करने तथा स्थानीय नागरिकों के बीच विश्वास स्थापित करने की पहल ने शांति और सामान्य जनजीवन की बहाली के प्रयासों को बल दिया है।

### सुरक्षा के साथ सेवा और संवेदनशीलता का संकल्प

199 वीं वाहिनी CRPF की भूमिका केवल सुरक्षा एवं परिचालन गतिविधियों तक सीमित नहीं रही है। वाहिनी द्वारा स्थानीय ग्रामीणों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए समय-समय पर सिविक एक्शन प्रोग्राम, चिकित्सा शिविर तथा अन्य जनकल्याणकारी गतिविधियाँ आयोजित की गई हैं।

इन कार्यक्रमों के माध्यम से ग्रामीणों को आवश्यक सामग्री उपलब्ध कराने, स्वास्थ्य संबंधी सहायता प्रदान करने तथा सरकारी योजनाओं एवं मूलभूत सुविधाओं तक उनकी पहुँच सुगम बनाने के प्रयास किए गए हैं। जरूरतमंद ग्रामीणों की सहायता, स्थानीय समुदाय के साथ संवाद तथा प्रशासनिक सेवाओं से जुड़ने में सहयोग जैसी पहलों ने सुरक्षा बलों और ग्रामीणों के बीच आपसी विश्वास को मजबूत करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

वाहिनी का उद्देश्य सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के साथ-साथ यह सुनिश्चित करना भी रहा है कि क्षेत्र के नागरिक भयमुक्त वातावरण में अपने दैनिक जीवन, आजीविका, शिक्षा, स्वास्थ्य एवं सामाजिक गतिविधियों को आगे बढ़ा सकें।

### प्रथम वर्षगाँठ पर मंदिर का उद्घाटन, चिकित्षा शिविर व भंडारे में ग्रामीणों की सहभागिता ने बढ़ाई कार्यक्रम की गरिमा

इस कार्यक्रम में कुप्पापारा, इंदेडपारा, डोडीतुमनार, गायतापारा, गट्टूपारा, एंड्री, कुवेम, पटेलपारा, मोरुमपारा, मुकापारा, पेदापारा, गोटपल्ली, इरेनार, गदेपारा, लेकमपारा एवं हर्रा सहित आसपास के अनेक गाँवों के 300 से अधिक ग्रामीणों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

मंदिर उद्घाटन के पश्चात चिकित्सा शिविर का आयोजन किया गया जिसमें जरूरतमंद ग्रामीणों को आवश्यक दवाइयां वितरित की गई। इसके उपरांत ग्रामीणों के लिए सामुदायिक भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें लोगों ने सहभागिता की। इन गतिविधियों ने ग्रामीणों, सुरक्षा बलों एवं स्थानीय समुदाय के बीच आपसी मेलजोल, सहयोग और सौहार्द को बढ़ावा दिया।

### शांति, सुरक्षा और विकास के लिए निरंतर प्रतिबद्ध

इस अवसर पर मुख्य अतिथि श्री बी.एस. नेगी, उपमहानिरीक्षक, रेंज बीजापुर ने सैनिक सम्मेलन के दौरान जवानों को संबोधित करते हुए उनके कर्तव्यनिष्ठा, अनुशासन एवं समर्पण की सराहना की। उन्होंने क्षेत्र में शांति एवं सुरक्षा बनाए रखने के साथ-साथ स्थानीय जनता के साथ सौहार्दपूर्ण संबंध स्थापित कर जनसेवा एवं विकास कार्यों में निरंतर योगदान देने के लिए जवानों को प्रेरित किया।

कुप्पागुड़ा FOB की प्रथम वर्षगाँठ केवल एक सुरक्षा प्रतिष्ठान की स्थापना के एक वर्ष पूरे होने का अवसर नहीं, बल्कि क्षेत्र में शांति, सुरक्षा, जनविश्वास एवं विकास की दिशा में किए गए सामूहिक प्रयासों को रेखांकित करने का भी अवसर है।

199वीं वाहिनी CRPF द्वारा बीते एक वर्ष में नक्सल विरोधी अभियानों, आत्मसमर्पण को प्रोत्साहित करने, IED व नक्सल डंप की बरामदगी, चिकित्सा सहायता, सिविक एक्शन कार्यक्रमों तथा ग्रामीणों को मूलभूत सुविधाओं से जोड़ने के प्रयासों के माध्यम से सुरक्षा और जनसेवा के बीच समन्वय स्थापित करने की दिशा में कार्य किया गया है।

वाहिनी भविष्य में भी स्थानीय प्रशासन एवं ग्रामीण समुदाय के साथ समन्वय बनाए रखते हुए क्षेत्र में शांति एवं सुरक्षा को सुदृढ़ करने, जनकल्याणकारी गतिविधियों को बढ़ावा देने तथा स्थानीय नागरिकों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए प्रतिबद्ध है।

कुप्पागुड़ा FOB का एक वर्ष सुरक्षा, सेवा, समर्पण और जनविश्वास के उस संकल्प का प्रतीक है, जिसका उद्देश्य क्षेत्र में भयमुक्त वातावरण स्थापित कर शांति एवं विकास के नए अवसरों का मार्ग प्रशस्त करना है।

*नशामुक्त समाज के निर्माण का संकल्प, तारलागुड़ा में विद्यार्थियों ने दिया जागरूकता का संदेश*,,,,,,,, ,,,,,,,,, तेजनारायण सिंह की रिपोर्ट,,,,,,,,

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*नशामुक्त समाज के निर्माण का संकल्प, तारलागुड़ा में विद्यार्थियों ने दिया जागरूकता का संदेश*,,,,,,,,

,,,,,,,,, तेजनारायण सिंह की रिपोर्ट,,,,,,,,

**सेवा संकल्प अभियान के तहत बालक पोर्टाकेबिन तारलागुड़ा में नशामुक्ति जनजागरूकता कार्यक्रम आयोजित**

**चार शैक्षणिक संस्थाओं के विद्यार्थियों ने की सहभागिता, नशे के दुष्प्रभावों से बचने और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने पर दिया जोर**

**बीजापुर/,,,,,,,,,सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत समाज को नशामुक्त बनाने तथा बच्चों एवं युवाओं में नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से बालक पोर्टाकेबिन तारलागुड़ा में नशामुक्ति जनजागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में विद्यार्थियों को नशे से होने वाले शारीरिक, मानसिक, सामाजिक एवं आर्थिक दुष्प्रभावों की जानकारी देते हुए स्वस्थ, सुरक्षित एवं नशामुक्त जीवन अपनाने के लिए प्रेरित किया गया।

कार्यक्रम में स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट विद्यालय (सेजेस) हिन्दी माध्यम तारलागुड़ा, स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट विद्यालय अंग्रेजी माध्यम तारलागुड़ा, कन्या पोर्टाकेबिन तारलागुड़ा एवं बालक पोर्टाकेबिन तारलागुड़ा के विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की।

इस अवसर पर जिला नोडल अधिकारी डॉ. मनोज लम्बाड़ी, स्वास्थ्य विभाग से सुश्री सबिता चन्द्राकर एवं शिक्षा विभाग के जिला नोडल अधिकारी श्री नरवेद सिंह उपस्थित रहे।

*नशा स्वास्थ्य के साथ भविष्य को भी करता है प्रभावित*

कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों को बताया गया कि नशे की लत व्यक्ति के स्वास्थ्य के साथ-साथ उसकी शिक्षा, पारिवारिक जीवन एवं भविष्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव डालती है। विशेष रूप से किशोरावस्था में नशे से दूरी बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है। तंबाकू, गुटखा, शराब एवं अन्य नशीले पदार्थों के सेवन से होने वाली स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूक रहने तथा सकारात्मक गतिविधियों में भाग लेने के लिए विद्यार्थियों को प्रेरित किया गया।

स्वास्थ्य विभाग के प्रतिनिधियों द्वारा नशे के कारण उत्पन्न होने वाली विभिन्न स्वास्थ्य समस्याओं तथा इनसे बचाव के उपायों की जानकारी दी गई। साथ ही विद्यार्थियों को नियमित अध्ययन, खेलकूद, योग एवं अन्य रचनात्मक गतिविधियों के माध्यम से स्वस्थ जीवनशैली अपनाने का संदेश दिया गया।

*विद्यार्थी बनें नशामुक्ति अभियान के जागरूकता दूत*

कार्यक्रम में विद्यार्थियों को अपने परिवार, मित्रों एवं आसपास के लोगों को भी नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करने के लिए प्रेरित किया गया। इस दौरान बताया गया कि नशामुक्त समाज के निर्माण में युवाओं और विद्यार्थियों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। विद्यार्थी स्वयं नशे से दूर रहकर दूसरों को भी इसके प्रति जागरूक कर सकते हैं।

शिक्षा एवं स्वास्थ्य विभाग के समन्वय से आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों में जागरूकता विकसित करने के साथ उन्हें जिम्मेदार नागरिक बनने के लिए प्रोत्साहित करना रहा।

*सेवा संकल्प अभियान से जनजागरूकता को मिल रही नई दिशा*

सेवा संकल्प अभियान के तहत आयोजित इस गतिविधि के माध्यम से दूरस्थ अंचलों के विद्यार्थियों तक नशामुक्ति एवं स्वस्थ जीवनशैली का संदेश पहुंचाया गया। कार्यक्रम में विभिन्न शैक्षणिक संस्थाओं की सहभागिता से नशे के विरुद्ध सामूहिक जागरूकता को बढ़ावा मिला।

इस प्रकार के जनजागरूकता कार्यक्रम बच्चों एवं युवाओं को नशे के दुष्प्रभावों से बचाने, उनमें सकारात्मक सोच विकसित करने तथा स्वस्थ एवं जागरूक समाज के निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

**कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों को संदेश दिया गया कि नशे से दूरी, शिक्षा से जुड़ाव और स्वस्थ जीवनशैली ही उज्ज्वल भविष्य की मजबूत आधारशिला है।**

*नवरात्रि का दूसरा दिन: तपस्या और साधना की देवी मां ब्रह्मचारिणी की पूजा विधि, मंत्र और सम्पूर्ण विवरण* *नवरात्रि विशेष रिपोर्ट दीपक मरकाम*

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*नवरात्रि का दूसरा दिन: तपस्या और साधना की देवी मां ब्रह्मचारिणी की पूजा विधि, मंत्र और सम्पूर्ण विवरण*

*नवरात्रि विशेष रिपोर्ट दीपक मरकाम*

नवरात्रि के दूसरे दिन माता नवदुर्गा के द्वितीय स्वरूप मां ब्रह्मचारिणी की उपासना की जाती है।

‘ब्रह्म’ का अर्थ तपस्या और ‘चारिणी’ का अर्थ आचरण करने वाली है।

मां ब्रह्मचारिणी के दाएं हाथ में जप की माला और बाएं हाथ में कमंडल विद्यमान रहता है।

इनकी आराधना से साधक में तप, त्याग, वैराग्य, संयम और सदाचार के गुणों की वृद्धि होती है।

1. मां ब्रह्मचारिणी पूजा का शुभ मुहूर्त एवं सामग्री,

* पवित्र रंग: हरा (Green) या श्वेत (White),

* प्रिय पुष्प: कमल, चमेली या श्वेत पुष्प,

* प्रिय भोग: चीनी (शक्कर), मिश्री या पंचामृत,

* पूजन सामग्री: गंगाजल, अक्षत, रोली, चंदन, धूप-दीप, पान-सुपारी, वस्त्र, और फल।

2. कदम-दर-कदम सम्पूर्ण पूजा विधि (Step-by-Step Vidhi),

* प्रातःकाल स्नान एवं वस्त्र:,

प्रातः जल्दी उठकर स्नान करें और हरे या सफेद रंग के स्वच्छ वस्त्र धारण करें।

* कलश ध्यान एवं शुद्धिकरण:,

प्रथम दिन स्थापित कलश का जल छिड़कें और थोड़ा गंगाजल मिलाकर पवित्र करें।

* दीप प्रज्वलन एवं स्नान:,

माता की प्रतिमा के समक्ष घी का दीपक जलाएं। मां ब्रह्मचारिणी को पहले शुद्ध जल और फिर पंचामृत से स्नान कराएं।

* श्रृंगार एवं अर्पण:,

देवी मां को रोली, अक्षत, और चंदन का तिलक लगाएं। इसके बाद सफेद या सुगंधित पुष्प और कमल का फूल अर्पित करें।

* विशेष भोग अर्पण:,

मां ब्रह्मचारिणी को मिश्री या चीनी (शक्कर) का भोग लगाएं। मान्यता है कि चीनी का भोग लगाने से व्यक्ति को दीर्घायु प्राप्त होती है।

* मंत्र जप एवं आरती:,

कमल गट्टे या रुद्राक्ष की माला से माता के दिव्य मंत्रों का 108 बार जाप करें। अंत में कपूर और घी के दीपक से मां ब्रह्मचारिणी की आरती करें और क्षमा प्रार्थना करके प्रसाद वितरित करें।

3. मां ब्रह्मचारिणी के सिद्ध मंत्र,

* ध्यान श्लोक:

दधाना करपद्माभ्यामक्षमालाकमण्डलू।

देवी प्रसीदतु मयि ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा॥

 

* सरल आराधना मंत्र (108 बार जप करें):

या देवी सर्वभूतेषु माँ ब्रह्मचारिणी रूपेण संस्थिता।

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

 

4. पूजा का धार्मिक एवं ज्योतिषीय महत्व,

विशेष मान्यता: मां ब्रह्मचारिणी नवग्रहों में मंगल ग्रह (Mars) को नियंत्रित करती हैं। जिनकी कुंडली में मंगल दोष हो, उन्हें आज मां ब्रह्मचारिणी की पूजा अवश्य करनी चाहिए। इससे मन में धैर्य, साहस और कार्य- सिद्धि की प्राप्ति होती है।

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भोपालपटनम में भक्तिभाव के साथ मां दुर्गा की स्थापना, नवरात्रि महोत्सव का हुआ शुभारंभ,,,,,,, ,,,,,,,, तेजनारायण सिंह की रिपोर्ट,,,,,,,,,,

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भोपालपटनम में भक्तिभाव के साथ मां दुर्गा की स्थापना, नवरात्रि महोत्सव का हुआ शुभारंभ,,,,,,,

,,,,,,,, तेजनारायण सिंह की रिपोर्ट,,,,,,,,,,

**सार्वजनिक नवदुर्गा समिति द्वारा श्री कृष्णा पामभोई क्लब में विधि-विधान से की गई पूजा-अर्चना, सैकड़ों श्रद्धालु हुए शामिल**

**भोपालपटनम।** नगर में शारदीय नवरात्रि के पावन अवसर पर मां दुर्गा की पूजा-अर्चना धूमधाम और भक्तिभाव के साथ संपन्न हुई। सार्वजनिक नवदुर्गा समिति द्वारा नगर के हृदय स्थल स्थित श्री कृष्णा पामभोई क्लब में विधि-विधान के साथ मां दुर्गा की प्रतिमा स्थापित की गई। इस अवसर पर पूरे क्षेत्र में भक्तिमय वातावरण देखने को मिला। पूजा-अर्चना में नगर की सैकड़ों महिलाओं और पुरुषों ने शामिल होकर मां दुर्गा का आशीर्वाद प्राप्त किया।

नवरात्रि के प्रथम दिन आयोजित पूजा-अर्चना में यजमान के रूप में उगेंद्र वासम ने विधि-विधान से मां दुर्गा की पूजा की। बताया जाता है कि उगेंद्र वासम को वर्षों से मां दुर्गा की पूजा-अर्चना करने का सौभाग्य मिलता रहा है। वे इस धार्मिक जिम्मेदारी को पूरी श्रद्धा और निष्ठा के साथ निभाते आ रहे हैं।

पूजा-अर्चना के दौरान श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखने को मिला। मां दुर्गा की स्थापना के साथ ही नगर में नवरात्रि महोत्सव का उल्लास छा गया। श्रद्धालुओं ने माता रानी के दर्शन कर सुख, शांति और समृद्धि की कामना की। महिलाओं और पुरुषों की सहभागिता ने आयोजन को विशेष बना दिया।

**लगभग 40 वर्षों से चली आ रही है नवरात्रि आयोजन की परंपरा**

भोपालपटनम नगर में सार्वजनिक नवदुर्गा समिति द्वारा नवरात्रि महोत्सव का आयोजन लगभग 40 वर्षों से किया जा रहा है। वर्षों से चली आ रही इस धार्मिक परंपरा में नगरवासी बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हैं। नवरात्रि के दौरान मां दुर्गा की आराधना के साथ श्रद्धालुओं में धार्मिक आस्था, उत्साह और सामूहिक सहभागिता का विशेष माहौल रहता है।

नगरवासियों के सहयोग और श्रद्धालुओं की भागीदारी से यह आयोजन स्थानीय धार्मिक परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया है। मां दुर्गा की स्थापना के साथ ही भोपालपटनम में नौ दिनों तक चलने वाले नवरात्रि पर्व को लेकर श्रद्धालुओं में उत्साह और उमंग का माहौल है।

*शक्ति स्वरूपा माँ शैलपुत्री की पूजा से हुई शारदीय नवरात्रि की अलौकिक शुरुआत* *नवरात्रि विशेष रिपोर्ट दीपक मरकाम*

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*शक्ति स्वरूपा माँ शैलपुत्री की पूजा से हुई शारदीय नवरात्रि की अलौकिक शुरुआत* *नवरात्रि विशेष रिपोर्ट दीपक मरकाम*

 

*जानिए घटस्थापना, विधि-विधान और पंचांग*

 

देशभर में आज आस्था और उल्लास के साथ गूंजे माता के जयकारे, जानिए पहले दिन का पूरा महत्व और अनुष्ठान विधि,

 

भारतीय संस्कृति में सनातन धर्म के सबसे बड़े और पावन पर्वों में से एक शारदीय नवरात्रि का शुभारंभ हो चुका है।

 

आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से शुरू होने वाले इस नौ दिवसीय अनुष्ठान के पहले दिन माँ दुर्गा के प्रथम स्वरूप माँ शैलपुत्री की अराधना की जाती है।

 

पर्वतराज हिमालय की पुत्री होने के कारण इन्हें ‘शैलपुत्री’ कहा गया है।

 

आज पहले दिन देश भर के मंदिरों और घरों में घटस्थापना (कलश स्थापना) के साथ माँ की पूजा-अर्चना का दौर शुरू हो गया है।

 

पंचांग एवं घटस्थापना मुहूर्त

* तिथि: आश्विन शुक्ल पक्ष, प्रतिपदा तिथि

* नक्षत्र: हस्त / चित्रा (पंचांगीय गणना के अनुसार)

* घटस्थापना का महत्व: नवरात्रि के पहले दिन शुभ मुहूर्त में कलश स्थापित करके वरुण देव, समस्त देवी-देवताओं और नौ माताओं का आह्वान किया जाता है। यह घर में सकारात्मक ऊर्जा, सुख और समृद्धि का संचार करता है।

 

माँ शैलपुत्री का स्वरूप और महिमा,

माँ शैलपुत्री का वाहन वृषभ (नंदी) है और इनके दाहिने हाथ में त्रिशूल तथा बाएं हाथ में कमल का फूल सुशोभित रहता है।

 

यह देवी प्रकृति, स्थिरता, धैर्य और असीम शक्ति की प्रतीक हैं।

 

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जो भक्त सच्चे मन से पहले दिन माँ शैलपुत्री की पूजा करता है, उसे जीवन में दृढ़ता, आरोग्य और मोक्ष की प्राप्ति होती है।

 

विधि-विधान: ऐसे करें माँ शैलपुत्री की पूजा,

* ब्रह्म मुहूर्त और संकल्प: सुबह जल्दी उठकर स्नानादि से निवृत्त होकर स्वच्छ वस्त्र धारण करें और माँ के व्रत व पूजन का संकल्प लें।

 

* घटस्थापना (कलश स्थापना):

* एक साफ चौकी पर लाल वस्त्र बिछाकर माँ शैलपुत्री की तस्वीर या मूर्ति स्थापित करें।

 

 

 

* षोडशोपचार पूजन: माँ को रोली, अक्षत, सिंदूर, लाल फूल, धूप, दीप और नैवेद्य (भोग) अर्पित करें।

* विशेष भोग: माँ शैलपुत्री को गाय के घी का भोग अतिप्रिय माना जाता है।

 

मान्यता है कि घी का भोग लगाने से आरोग्य की प्राप्ति होती है।

 

* मंत्र जाप और आरती: पूजा के दौरान माँ के बीज मंत्र का जाप करें और अंत में कपूर जलाकर आरती करें।

 

माँ शैलपुत्री का मंत्र एवं प्रार्थना

ॐ ऐं ह्रीं क्लीं शैलपुत्र्यै नमः।

वन्दे वाञ्छितलाभाय चन्द्रार्धकृतशेखराम्

वृषारूढाम शूलधरां शैलपुत्रीं यशस्विनीम्॥

शुभ मुहूर्त में माँ कन्हाई परमेश्वरी मंदिर में हुई ज्योति स्थापना, 64 ज्योत से जगमगाया मंदिर..

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राहुल भोई महासमुंद..

महासमुंद के इमली भाठा में विराजमान माँ कन्हाई परमेश्वरी की धार्मिक आयोजन, सैकड़ों श्रद्धालुओं की मौजूदगी में हुई पूजा-अर्चना और आरती..

महासमुंद। शहर के इमली भाठा स्थित माँ कन्हाई परमेश्वरी मंदिर में शुभ मुहूर्त में ज्योति स्थापना का पावन कार्य संपन्न हुआ। इस अवसर पर कहार भोई समाज के सैकड़ों महिला-पुरुष एवं श्रद्धालु उपस्थित रहे। सभी ने मिलकर विधि-विधान से माँ कन्हाई परमेश्वरी की पूजा-अर्चना की और आरती कर माता रानी का आशीर्वाद प्राप्त किया। धार्मिक आयोजन के दौरान मंदिर में कुल 64 ज्योत प्रज्वलित की गईं, जिससे मंदिर परिसर भक्तिमय वातावरण से आलोकित हो उठा।

शुभ मुहूर्त में संपन्न हुए इस धार्मिक अनुष्ठान में समाज के लोगों ने माता रानी के समक्ष श्रद्धापूर्वक शीश नवाया और परिवार, समाज एवं क्षेत्र की सुख-समृद्धि, शांति तथा खुशहाली की कामना की। महिलाओं और पुरुषों ने सामूहिक रूप से आरती एवं पूजा-अर्चना में भाग लिया। इस दौरान मंदिर परिसर में श्रद्धा और भक्ति का माहौल देखने को मिला।

माँ कन्हाई परमेश्वरी के प्रति समाज की आस्था को दर्शाते इस आयोजन में सैकड़ों श्रद्धालुओं की उपस्थिति रही। ज्योति स्थापना के पावन अवसर पर समाज के लोगों ने धार्मिक परंपराओं को आगे बढ़ाने और माता रानी के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त की।

मंदिर एवं समाज की ओर से समस्त श्रद्धालु भक्तजनों से अपील की गई है कि वे अपने पूरे परिवार के साथ माँ कन्हाई परमेश्वरी मंदिर पहुंचकर माता रानी के दर्शन करें और उनका आशीर्वाद प्राप्त करें।

इस अवसर पर छत्तीसगढ़ कहार भोई समाज महासभा के कोषाध्यक्ष एवं महासमुंद राज कहार भोई समाज के अध्यक्ष मिथिलेश बोयर, सचिव शिवम बनवासी, कोषाध्यक्ष रोशन औसर तथा मंदिर प्रभारी मिकुन औसर सहित समाज के अनेक सदस्य और श्रद्धालु उपस्थित रहे।

जय माँ कन्हाई परमेश्वरी!

*शक्ति की उपासना का महापर्व: आज से शुरू हुई शारदीय नवरात्रि, जानिए पंचांग, घटस्थापना मुहूर्त और संपूर्ण विधि-विधान* *नव रात्रि विशेष रिपोर्ट दीपक मरकाम*

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*शक्ति की उपासना का महापर्व: आज से शुरू हुई शारदीय नवरात्रि, जानिए पंचांग, घटस्थापना मुहूर्त और संपूर्ण विधि-विधान*

 

*नव रात्रि विशेष रिपोर्ट दीपक मरकाम*

 

भारतीय सनातन संस्कृति में शक्ति और साधना के सबसे बड़े पर्व शारदीय नवरात्रि का शुभारंभ हो चुका है।

 

हिंदू पंचांग के अनुसार, आज आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि और वर्ष 2026 के इस पावन पर्व का प्रथम दिन है।

 

नवरात्रि के इस पहले दिन मां दुर्गा के प्रथम स्वरूप माता शैलपुत्री की पूजा-अर्चना की जा रही है।

 

आइए जानते हैं पंचांग के हिसाब से इस बार की तिथियों, घटस्थापना के शुभ मुहूर्तों और पूजा की पूरी विधि के बारे में,

 

पंचांग और तिथि विवरण

* माह और पक्ष: आश्विन मास, शुक्ल पक्ष,

* प्रतिपदा तिथि आरंभ: 10 अक्टूबर 2026 की रात्रि 09:19 बजे से,

* प्रतिपदा तिथि समापन: 11 अक्टूबर 2026 की रात्रि 09:30 बजे तक,

* उदया तिथि के अनुसार: नवरात्रि और घटस्थापना मुख्य रूप से 11 अक्टूबर 2026 (रविवार) को मान्य है।,

 

* माता का आगमन: इस वर्ष रविवार के दिन नवरात्रि का आरंभ होने के कारण माता दुर्गा का आगमन ‘हाथी’ पर हुआ है, जिसे शास्त्रों में बेहद शुभ, उत्तम वर्षा और सुख-समृद्धि का प्रतीक माना गया है।

 

घटस्थापना (कलश स्थापना) के शुभ मुहूर्त

हिंदू धर्म में नवरात्रि के पहले दिन घटस्थापना का विशेष महत्व है।

 

आज कलश स्थापित करने के लिए प्रमुख मुहूर्त इस प्रकार हैं:

* प्रातःकाल मुख्य मुहूर्त: सुबह 06:19 बजे से सुबह 10:12 बजे तक (पूजा के लिए यह सबसे लंबी और उत्तम अवधि है)

 

* अभिजीत मुहूर्त (दोपहर का शुभ समय): सुबह 11:44 बजे से दोपहर 12:31 बजे तक (यदि आप सुबह ना कर पाएं, तो इस दौरान कलश स्थापित कर सकते हैं),

 

घटस्थापना और पूजा की संपूर्ण विधि-विधान

* सफाई और मंडप सजावट: सबसे पहले अपने घर के मंदिर या पूजा स्थल की अच्छी तरह साफ-सफाई करें। गंगाजल छिड़ककर पवित्र करें।

* जौ (खेती) बोना: एक साफ मिट्टी के बर्तन या वेदी में पवित्र मिट्टी बिछाएं और उसमें जौ के बीज बोएं।

 

इसमें प्रतिदिन हल्का जल छिड़कना होता है।

* कलश स्थापना: तांबे, पीतल या मिट्टी के कलश (घड़े) में शुद्ध जल भरें। उसमें एक सिक्का, सुपारी, अक्षत (चावल) और दूर्वा डालें।

* आम के पत्ते और नारियल: कलश के मुख पर आम या अशोक के 5 पत्ते लगाएं। इसके बाद कलश के ऊपर लाल कपड़े में लिपटा हुआ जटावाला नारियल रखें। इस तैयार कलश को जौ वाले मिट्टी के पात्र के ठीक पास स्थापित करें।

 

* माता का आह्वान: अब गणेश जी और मां शैलपुत्री का ध्यान करते हुए कलश पर रोली, अक्षत और पुष्प अर्पित करें।

* अखंड दीप प्रज्वलन: यदि आपके यहां परंपरा है, तो पूजा स्थल पर घी या तेल का अखंड दीपक प्रज्वलित करें।

 

* प्रथम स्वरूप की पूजा: मां शैलपुत्री को सफेद वस्तुएं

शारदीय नवरात्रि के पहले दिन यानी आज माँ दुर्गा के प्रथम स्वरूप माँ शैलपुत्री को मुख्य रूप से गाय के शुद्ध घी का भोग लगाया जाता है।

 

इसके अलावा आप माता को उनकी पसंद की निम्नलिखित चीजें भी अर्पित कर सकते हैं:

* सफेद वस्तुएं व मिठाइयाँ: चूँकि माँ शैलपुत्री को सफेद रंग अतिप्रिय है, इसलिए आप उन्हें दूध और चावल से बनी खीर, सफेद बर्फी, पेड़ा, या मावा (खोया) से बनी शुद्ध सात्विक मिठाइयों का भोग लगा सकते हैं।

 

* फल और मिश्री: माता को ताजे फल और मिश्री का भोग भी बेहद प्रिय है।

 

* विशेष फूल: पूजा के दौरान माँ शैलपुत्री को चमेली का फूल अवश्य अर्पित करें, यह उन्हें बहुत पसंद है।

 

उनके प्रिय भोग अर्पित करें, धूप-दीप दिखाएं और दुर्गा चालीसा या ‘ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चै’ मंत्र का जाप करें।

 

माता रानी की कृपा से आप सभी के जीवन में सुख, शांति, आरोग्य और ऐश्वर्य का संचार हो।

 

*जय माता दी! 💐🙏🙏🙏*

* ब्रेकिंग न्यूज: बस्तर दशहरा में इस बार शामिल नहीं होंगे मुंडा बाजा वादक! ,6 साल से मानदेय का इंतजार, प्रशासन को लिखित आश्वासन देने की मांग*

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* ब्रेकिंग न्यूज: बस्तर दशहरा में इस बार शामिल नहीं होंगे मुंडा बाजा वादक! ,6 साल से मानदेय का इंतजार, प्रशासन को लिखित आश्वासन देने की मांग*

बस्तर सम्भाग जगदलपुर

*एक महीने पहले बस्तर महाराजा कमलचंद्र भंजदेव, दशहरा समिति अध्यक्ष एवं सांसद महेश कश्यप, कलेक्टर और तहसीलदार को दिया था आवेदन; कार्रवाई नहीं होने से वादकों में नाराजगी*

 

जगदलपुर ::::बस्तर की ऐतिहासिक और पारंपरिक पहचान बस्तर दशहरा में इस बार मुंडा बाजा वादकों की भागीदारी पर संकट खड़ा हो गया है।

पिछले छह वर्षों से मानदेय नहीं मिलने का आरोप लगाते हुए 30 मुंडा बाजा वादकों ने इस बार दशहरा में शामिल होने से साफ इनकार कर दिया है।

वादकों का कहना है कि बार-बार आश्वासन मिलने के बावजूद उनकी मांग पूरी नहीं हुई है। अब वे प्रशासन से लिखित आश्वासन मिलने पर ही दशहरा में शामिल होने को तैयार हैं।

 

*एक महीने पहले दिया आवेदन, फिर भी कार्रवाई नहीं*

मुंडा बाजा वादकों के अनुसार, मानदेय की समस्या से संबंधित आवेदन एक महीने पहले बस्तर महाराजा कमलचंद्र भंजदेव, बस्तर दशहरा समिति के अध्यक्ष एवं बस्तर सांसद महेश कश्यप, बस्तर कलेक्टर और जगदलपुर तहसीलदार को सौंपकर पूरे मामले से अवगत कराया गया था।

इसके बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। वादकों का कहना है कि उन्हें ऐसा कोई भरोसेमंद आश्वासन भी नहीं मिला है, जिसके आधार पर वे अपनी परंपरागत जिम्मेदारी निभाने का निर्णय ले सकें।

 

* छह साल से आश्वासन, लेकिन मानदेय नहीं मिलने का आरोप*

वादकों ने बताया कि वर्ष 2019 में तत्कालीन मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह द्वारा मांझी, मेम्बरिन और मुंडा बाजा वादकों को प्रतिमाह 2,000 रुपये मानदेय देने की घोषणा किए जाने की बात कही गई थी। उनका आरोप है कि छह वर्ष बीत जाने के बाद भी उन्हें इसका लाभ नहीं मिला है। वादकों का कहना है कि अन्य संबंधित वर्गों को मानदेय मिल रहा है, लेकिन मुंडा बाजा वादक इससे वंचित हैं। इस भेदभाव को लेकर उन्होंने दुख जताया है।

 

* लिखित आश्वासन मिलने पर ही दशहरा में शामिल होंगे वादक*

मुंडा बाजा वादकों ने स्पष्ट किया है कि वे बस्तर दशहरा की परंपरा और अपनी जिम्मेदारी को समझते हैं, लेकिन वर्षों से लंबित मांग को लेकर अब केवल मौखिक आश्वासन पर भरोसा नहीं कर सकते। उनका कहना है कि यदि प्रशासन की ओर से लिखित आश्वासन दिया जाता है, तो वे दशहरा में शामिल होने के लिए तैयार हैं। अन्यथा इस बार आयोजन में शामिल नहीं होने का निर्णय कायम रहेगा।

 

*परंपरा से जुड़े वादकों में मायूसी*

बस्तर दशहरा आदिवासी संस्कृति, आस्था और परंपराओं का महत्वपूर्ण प्रतीक है। ऐसे में 30 मुंडा बाजा वादकों का आयोजन में शामिल होने से इनकार करना परंपरा से जुड़े इस विवाद को और महत्वपूर्ण बना रहा है।

वादकों ने दुख जताते हुए कहा कि वे वर्षों से अपनी पारंपरिक सेवाएं देते आए हैं, लेकिन मानदेय के मामले में उनकी मांग अब तक पूरी नहीं हुई। उनका कहना है कि प्रशासन की कार्रवाई नहीं होने के कारण उन्हें इस बार दशहरा से दूर रहने जैसा कदम उठाना पड़ रहा है।

 

*मनाने पहुंचे अधिकारी, फिर भी नहीं माने वादक*

मुंडा बाजा वादकों को मनाने के लिए एसडीएम और आरआई साहब भी पहुंचे, लेकिन उनकी समझाइश के बावजूद वादक अपने फैसले पर अडिग रहे। उन्होंने स्पष्ट किया कि छह साल से लंबित मानदेय की मांग पर लिखित आश्वासन मिलने के बाद ही वे बस्तर दशहरा में शामिल होंगे।

 

अब निगाहें जिला प्रशासन, दशहरा समिति और संबंधित जिम्मेदारों पर टिकी हैं कि वे वादकों की मांग पर क्या पहल करते हैं और क्या लिखित आश्वासन देकर उन्हें बस्तर दशहरा में शामिल होने के लिए तैयार कर पाते हैं।