*कागजों पर मुस्तैद, जमीन पर लाचार; मद्देड़ क्षेत्र के स्कूलों में ‘राम भरोसे’ चल रहा मध्याह्न भोजन , किचन सेड*दीपक मरकाम की खबर,,,
*अधिकारियों की अनदेखी पड़ सकती है नौनिहालों की जान पर भारी;*
* वर्षों बाद भी नहीं बने शेड, तीन ईंटों के चूल्हे और रेंगते जहरीले जीवों के बीच पक रहा बच्चों का निवाला*
बीजापुर भोपालपटन मद्देड़,,
शासन-प्रशासन एक तरफ जहां शाला प्रवेश उत्सव मनाकर शिक्षा के स्तर को ऊंचा उठाने के बड़े-बड़े दावे करता है, वहीं दूसरी ओर मद्देड़ क्षेत्र के अंदरूनी इलाकों से लेकर नेशनल हाईवे सड़क तक आई एक जमीनी हकीकत इन दावों की कलई खोल रही है।
क्षेत्र के कई ऐसे सरकारी स्कूल हैं, जिन्हें संचालित हुए वर्षों बीत चुके हैं, लेकिन आज तक वहां बच्चों के लिए व्यवस्थित ‘मध्याह्न भोजन शेड’ (Kitchen Shed) नसीब नहीं हो सका है।
शेड के नाम पर सिर्फ ‘चार खंभे और टीन’, कहीं जुगाड़ तो कहीं खुले आसमान के नीचे रसोई घर संचालित हो रही वहीं क्षेत्र के स्कूलों में मध्याह्न भोजन की स्थिति बेहद दयनीय और चिंताजनक है।
जहां सालों से शालाएं लग रही हैं, वहां या तो शेड बना ही नहीं है, और जहां बना भी है, वह सिर्फ नाममात्र के चार खंभों के ऊपर टीन की चादरें डाल दी गई हैं, जो न तो धूप से बचा सकती हैं और न ही बारिश से।
कई जगहों पर तो मध्याह्न भोजन बनाने वाले रसोइयों ने खुद अपने स्तर पर जुगाड़ कर अस्थाई शेड तैयार किया है, तो कहीं सिर्फ तीन ईंटों का चूल्हा रखकर खुले आसमान के नीचे नौनिहालों का निवाला पकाया जा रहा है।
बरसात में बढ़ जाता है खतरा: जमीन पर चूल्हा, इर्द-गिर्द रेंगते हैं सांप-बिच्छू
सबसे भयानक और डरावनी स्थिति बारिश के दिनों में देखने को मिलती है।
चूल्हा जमीनी सतह पर होने के कारण हल्की सी तेज बारिश में भी बुझ जाता है, जिससे बच्चों के भोजन में देरी होती है।
इससे भी ज्यादा खतरनाक बात यह है कि बारिश के मौसम में जमीन गीली होने के कारण कीड़े-मकोड़े, सांप और बिच्छू जैसे जहरीले जीव-जंतु भोजन पकाने वाले स्थान के इर्द-गिर्द रेंगते नजर आते हैं। खुले में खाना बनने के कारण हर वक्त यह डर बना रहता है कि कोई जहरीला जीव दाल, सब्जी या उबलते चावल में न गिर जाए।
बड़ा सवाल: निरीक्षण से गायब जिम्मेदार; क्या सीएसी, बीईओ और जिला अधिकारियों को खबर नहीं?
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, नया शाला सत्र शुरू होने के बाद भी आज तक किसी जिम्मेदार सीएसी (CAC), विकासखंड शिक्षा अधिकारी (BEO) या जिला स्तर के अधिकारी ने इन स्कूलों का रुख नहीं किया है।
निरीक्षण करना तो दूर की बात, सत्र शुरू होने के बाद स्कूल सही ढंग से खुल रहे हैं या नहीं, यह पूछने वाला भी कोई नहीं है।
अधिकारियों की इस घोर लापरवाही के कारण आज स्कूली बच्चे और रसोइये भगवान भरोसे हैं।
दुर्घटना हुई तो जिम्मेदार कौन? क्या सारा बोझ सिर्फ रसोइया उठाएगा?
इस बदइंतजामी के बीच सबसे बड़ा यक्ष प्रश्न यह खड़ा होता है कि यदि भगवान न करे, किसी जहरीले जीव के गिरने से भोजन दूषित हो जाए और उसे खाने से बच्चों के साथ कोई अप्रिय या जानलेवा दुर्घटना घटित हो जाए, तो इसका जिम्मेदार कौन होगा?
क्या विभाग अपनी कमियों को छुपाने के लिए इसका पूरा ठीकरा एक गरीब रसोइए पर फोड़ देगा?
शेड की राशि डकारने वाले ठेकेदारों/एजेंसियों और एयरकंडीशनर कमरों में बैठकर कागजी खानापूर्ति करने वाले निरीक्षण अधिकारी क्या अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लेंगे?
प्रशासन को किसी बड़ी अनहोनी का इंतजार किए बिना, तत्काल इस दिशा में संज्ञान लेकर व्यवस्था सुधारनी होगी।
विजय कोर्राम ,,विकास खण्ड शिक्षा अधिकारी भोपाल पटनम फोन पर सम्पर्क जानकारी छाई गई तो उन्होंने कहा, की अभी मेरे आए साल भर भी नहीं हुआ है ओर अभी मेरे कार्य काल कोई नया कार्य भी स्वीकृति नहीं हुई, जो भी है सब पूर्व से बना हुआ हैं,।