HomeUncategorizedनाबालिग से दुष्कर्म और अश्लील वीडियो वायरल करने वाले आरोपी को 20...

नाबालिग से दुष्कर्म और अश्लील वीडियो वायरल करने वाले आरोपी को 20 वर्ष की सजा, 4.90 लाख रुपये अर्थदंड

राहुल भोई महासमुंद…

नाबालिग से दुष्कर्म और अश्लील वीडियो वायरल करने वाले आरोपी को 20 वर्ष की सजा, 4.90 लाख रुपये अर्थदंड

महासमुंद, 21 अगस्त 2026। नाबालिग पीड़िता के दैहिक शोषण और अश्लील वीडियो वायरल करने के मामले में सरायपाली की विशेष पॉक्सो अदालत ने आरोपी दीपक देवागंन, पिता खगेश देवागंन, निवासी भंवरपुर, तहसील बसना को दोषी ठहराते हुए कठोर सजा सुनाई है। अदालत ने पॉक्सो अधिनियम की धारा 6 के तहत आरोपी को 20 वर्ष के सश्रम कारावास से दंडित किया है। इसके साथ ही विभिन्न धाराओं में लगाए गए अर्थदंड सहित आरोपी पर कुल 4 लाख 90 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया गया है।

पुलिस के अनुसार आरोपी करीब तीन वर्ष पहले नाबालिग पीड़िता से मोबाइल नंबर लेकर व्हाट्सएप और फोन के माध्यम से बातचीत करता था। आरोप है कि आरोपी ने शादी का प्रलोभन देकर पीड़िता को बहला-फुसलाकर और धमकाकर उसके साथ जबरदस्ती दैहिक शोषण किया। आरोपी ने घटना का अश्लील वीडियो भी अपने मोबाइल में बना लिया था।

पुलिस के मुताबिक आरोपी इसी वीडियो को वायरल करने की धमकी देकर पीड़िता को ब्लैकमेल करता रहा और उसकी इच्छा के विरुद्ध कई बार दैहिक शोषण किया। बाद में जब पीड़िता ने आरोपी से मिलने से इनकार किया तो आरोपी ने कथित रूप से अश्लील वीडियो को व्हाट्सएप और इंस्टाग्राम पर वायरल कर दिया। इसके बाद पीड़िता के परिजनों ने थाना बसना में शिकायत दर्ज कराई।

मामले में थाना बसना में 22 अप्रैल 2025 को अपराध क्रमांक 167/2025 के तहत भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं और पॉक्सो अधिनियम की धाराओं में अपराध दर्ज किया गया। प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए तत्कालीन एसडीओपी सरायपाली श्रीमती ललिता मेहर ने मामले की विवेचना की।

इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों ने निभाई अहम भूमिका

पुलिस ने मामले में गवाहों के बयान के साथ इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को भी जुटाया। व्हाट्सएप और इंस्टाग्राम पर वायरल किए गए वीडियो का प्रयोगशाला से परीक्षण कराया गया। तकनीकी साक्ष्यों और अन्य दस्तावेजों को जांच में शामिल कर निर्धारित समयावधि में चालान न्यायालय में प्रस्तुत किया गया।

सुनवाई के दौरान पुलिस द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों, गवाहों के बयान और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के आधार पर अभियोजन पक्ष आरोपी के खिलाफ लगाए गए आरोपों को प्रमाणित करने में सफल रहा। इसके बाद विशेष न्यायाधीश पॉक्सो, सरायपाली श्रीमती वंदना दीपक देवागंन की अदालत ने आरोपी को दोषसिद्ध करते हुए सजा सुनाई।

अदालत ने पॉक्सो अधिनियम की धारा 6 के तहत 20 वर्ष सश्रम कारावास के अलावा भारतीय दंड संहिता की धारा 449 में 10 वर्ष, धारा 506 भाग-2 में 3 वर्ष तथा धारा 509 में 1 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई। वहीं सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 67 में 3 वर्ष का सश्रम कारावास और 50 हजार रुपये अर्थदंड, धारा 67(ए) में 3 वर्ष का सश्रम कारावास और 2 लाख रुपये अर्थदंड तथा धारा 67(बी) में 3 वर्ष का सश्रम कारावास और 2 लाख रुपये अर्थदंड लगाया गया।

बता दे की तत्कालीन एसडीओपी श्रीमती ललिता मेहर द्वारा विवेचना के बाद न्यायालय में चालान प्रस्तुत किया गया था। इसके बाद भी प्रकरण की लगातार ट्रायल मॉनिटरिंग की गई। अभियोजन की ओर से विशेष लोक अभियोजक लोचन प्रसाद साहू एवं वनस्वरूप सेन ने पैरवी की।

गौरतलब है की तकनीकी एवं इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के वैज्ञानिक तरीके से संकलन और प्रभावी न्यायालयीन प्रस्तुतिकरण से आरोपी को सजा दिलाने में महत्वपूर्ण सफलता मिली है। न्यायालय के इस फैसले से नाबालिग पीड़िता और उसके परिवार को न्याय मिला है।

आपकी राय

[poll id="2"]

- Advertisment -spot_img

राशिफल

आज का मौसम

क्रिकेट लाइव स्कोर

Most Popular

RELATED ARTICLES