25 अगस्त को प्रदेशभर में ज्ञापन कार्यक्रम, शिक्षकों से एकजुट होकर शामिल होने की अपील
बीजापुर। टीईटी की अनिवार्यता से मुक्ति एवं पुरानी पेंशन योजना की मांग को लेकर छत्तीसगढ़ शालेय शिक्षक संघ की वर्चुअल बैठक प्रदेश अध्यक्ष वीरेंद्र दुबे की अध्यक्षता में संपन्न हुई। बैठक में प्रदेशभर के पदाधिकारी शामिल हुए और शिक्षकों से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक में निर्णय लिया गया कि 25 अगस्त को शिक्षक संघर्ष मोर्चा के बैनर तले प्रदेशभर में ज्ञापन कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा।

छत्तीसगढ़ शालेय शिक्षक संघ के जिला सचिव एवं शिक्षक संघर्ष मोर्चा बीजापुर के कैलाश रामटेके ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर जिले के समस्त सहायक शिक्षक, शिक्षक एवं व्याख्याताओं से 25 अगस्त के आंदोलन में बढ़-चढ़कर शामिल होने की अपील की है।

बैठक में शिक्षा मंत्री, शिक्षा सचिव एवं शिक्षा विभाग के संचालक के साथ हुई चर्चाओं की जानकारी भी पदाधिकारियों को दी गई। पदाधिकारियों ने बताया कि वर्तमान परिस्थितियों में शिक्षकों के सामने टीईटी की अनिवार्यता एक गंभीर विषय बनकर सामने आई है। उनका कहना है कि सहायक शिक्षक के लिए एक टीईटी तथा पदोन्नति के लिए मिडिल स्तर की टीईटी की आवश्यकता होने से शिक्षकों के सामने अतिरिक्त चुनौती उत्पन्न हो रही है।
शिक्षक संघर्ष मोर्चा की ओर से मांग की गई है कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम लागू होने से पूर्व नियुक्त शिक्षकों तथा 17 अगस्त 2012 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों को टीईटी की अनिवार्यता से मुक्त किया जाए। प्रांतीय सचिव धर्मेश शर्मा ने सुझाव दिया कि सरकार इस संबंध में अध्यादेश लाकर आवश्यक संशोधन करे, ताकि पूर्व से कार्यरत शिक्षकों को राहत मिल सके।
एकता के इतिहास को याद करते हुए आंदोलन का आह्वान
प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया कि छत्तीसगढ़ के शिक्षा कर्मियों के संघर्ष का लंबा इतिहास रहा है। संजय शर्मा, केदार जैन और वीरेंद्र दुबे सहित शिक्षक नेताओं ने अलग-अलग समय पर शिक्षकों के अधिकारों एवं नियमितीकरण के लिए लगातार संघर्ष किया है।
वर्ष 2017 में संघर्ष मोर्चा के बैनर तले तीनों प्रांताध्यक्षों के नेतृत्व में एकजुट होकर आंदोलन किया गया था। संगठन का दावा है कि इस एकजुट आंदोलन के परिणामस्वरूप शिक्षकों को छठवें वेतनमान सहित वर्ष 2018 से नियमितीकरण का लाभ मिला और उनका भविष्य सुरक्षित हुआ। इसी तरह वर्ष 2008 से शिक्षा कर्मी व्यवस्था को समाप्त कर नियमित शिक्षक भर्ती की प्रक्रिया शुरू होने को भी लंबे संघर्ष का परिणाम बताया गया।
शिक्षक संघर्ष मोर्चा का कहना है कि वर्तमान समय में एक बार फिर शिक्षकों के भविष्य से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दे सामने हैं। ऐसे में टीईटी की अनिवार्यता से मुक्ति और पुरानी पेंशन योजना को प्रमुख मांग बनाते हुए तीनों शिक्षक नेतृत्व एक मंच पर आए हैं।
कैलाश रामटेके ने कहा कि “एकता में ही शक्ति है” और शिक्षकों के हितों से जुड़े इन मुद्दों के समाधान के लिए सभी शिक्षक संवर्ग को एकजुट होकर आंदोलन में भाग लेना चाहिए।
उन्होंने बीजापुर जिले के सभी सहायक शिक्षक, शिक्षक एवं व्याख्याताओं से अपील की है कि वे 25 अगस्त को आयोजित ज्ञापन कार्यक्रम में अनिवार्य रूप से शामिल होकर आंदोलन को सफल बनाएं।
बैठक का संचालन प्रांतीय प्रवक्ता जितेंद्र शर्मा ने किया। वर्चुअल बैठक में प्रदेश के विभिन्न जिलों के पदाधिकारी एवं शिक्षक प्रतिनिधि जुड़े रहे।

