राहुल भोई-महासमुंद…।
एंकर – छत्तीसगढ़ में मानसून आने से कहीं लोगों को राहत मिल रही है तो कहीं आफत बनी हुई हैं..और ऐसी एक आफत महासमुंद जिले के ग्राम कूड़केल से सामने आ रही है जहाँ कई ग्रामीणों को अपनी जान जोखिम मे डालकर पुल पार करना पड़ रहा है..जी हाँ..पुल पुलिया का निर्माण ग्रामीण इलाकों को शहर से जोड़कर विकास करने के लिए बना होता है ताकि ग्रामीणजन आसानी से मुख्यालयों तक पहुंच कर अपनी जरूरत के कामो को पूरा कर सके और अपनी ज़िन्दगी अच्छे से सुगम बना सके.लेकिन बसना मुख्यालय को जोड़ने वाली कुडेकेल नाला धसकने से ग्रामीणजन अपनी जान जोखिम में डालकर इस पुल को पार कर रहे है..यह पुल बिच से कुछ इस तरह धशक चूका है की कभी भी यह पूरी तरह निचे धरासायी हो सकता है..लेकिन फिर भी यहां के ग्रामीणों को इसकी कोई परवाह नहीं है वह अपने जान हथेली मे लेकर इसे पार रहे है क्यों की इस रास्ते ग्राम से नगर जाने मे मात्र 2 किलोमीटर की दुरी तय करणी पड़ती है वही इनके पास और कोई दूसरा रास्ता नहीं है और है भी तो वह 9 से 10 किलोमीटर दूर घूमकर जाने का मार्ग है..इसीलिए स्कूली बच्चे हो या रोज शहर काम से जाने वाले लोग हर कोई इसी मौत के रास्ते ही गुजर कर जल्दी पहुंचने को तैयार है.यहां के जनप्रतिनिधियों को समस्या का भली-भांति ज्ञात हैं लेकिन ग्रामीणों की इस बड़ी समस्या का अब तक कोई समाधान किसी के पास नहीं नहीं है..यहां ग्रामीणजन तमाम बड़े नेताओं से लेकर शाशन प्रशासन तक अपनी गुहार लगा चुके है लेकिन समस्या जस की तस है..

वीओ – 01- आपको बता दे की विगत 17-18 वर्ष पूर्व प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के ठेकेदार और अधिकारियों की मनमाने ढंग से गुणवत्ताविहीन इस पुलिया का निर्माण किया गया था..जिसकी महज 8-9 वर्षो में हालत ख़राब हो गयी और यह धसकना शुरू हो गया था.. इसकी जानकारी विभागीय अधिकारी व जनप्रतिनिधियों को ग्रामीण अवगत करा चुके थे. लेकिन अब तक ग्रामीणों की कोई सुनवाई नही हुई है..कई वर्ष बीत गए ग्रामीणों के आवागमन के लिए नये पुल या मरम्मत की कोई कार्ययोजना प्रशासन स्तर पर नहीं बनायी गई..वर्तमान में पुलिया बहुत क्षतिग्रस्त हैं पुलिया का एक हिस्सा टूट कर 4 से 5 फिट नीचे झुक चुका हैं, नीचे का हिस्सा जर्जर होकर मालवा बन गया हैं…बारिश के दिनों में कुडकेल, जमड़ी, पोटापारा, बिछिया, सहित अनेकों गांव के हजारों लोगों का मुख्यालय से संपर्क टूट जाता है.. दूसरे रास्ता की अगर बात कहे तो वो 9 से 10 किलोमीटर अतिरिक्त दूरी पड़ता हैं जिसमे से भी वाहन गुजर पाना मुश्किल है..इस गंभीर मामले पर ग्रामीणजन गोपाल सिदार,अधू रात्रे,और बलिराम यादव ने बताया की शिक्षा, स्वास्थ्य और कृषि की अगर बात कही जाये तो कुडेकेल सहित अनेको गांव के लोग बहुत परेशान हैं, बारिश के दिनों में बच्चे स्कूल जा नही पाते, गंभीर जटिल बीमारी या डिलीवरी पेशेंट के लिए एम्बुलेंस व चार पहिया वाहन गांव नही पहुंच पाता हमने जनप्रतिनिधियों,शाशन प्रशासन से तक गुहार ली है पर आश्वासन के सिवा हमें आज तक कुछ नहीं मिला है..।
वीओ-02-वही इस पुरे मामले पर जिला के कलेक्टर विनय कुमार लंगेह का कहना है की इस समस्या का आवेदन प्राप्त हुआ है..अधिकारियो से जाँच करायी जाएगी और ग्रामीणों के लिए क्या कुछ बेहतर हो सकता है इसके लिए रास्ता बनाया जाएगा..।
वीओ-03-गौरतलब है की ग्रामीणों की वर्षो से की जा रही मांग पर सिर्फ उन्हें आश्वासन मिलता आया है जिसके चलते आज वह अपनी जान जोखिम मे डालने को मजबूर है..प्रशासन जल्द से जल्द अगर ग्रामीणों की इस बड़ी समस्या पर कार्यवाही करे तो ग्रामीणों को थोड़ी राहत जरूर मिलेगी…

