मनीष कौशिक
मोहला—- जिले की पंचायत राजनीति में पिछले कई दिनों से चल रहे विवाद के बीच आखिरकार बड़ा प्रशासनिक फैसला सामने आया है। जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO)भारती चंद्राकर का स्थानांतरण कर दिया गया है। इस फैसले के बाद जिला मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी सरपंच संघ ने इसे अपने लंबे संघर्ष और एकजुट आंदोलन की बड़ी सफलता बताया है।गौरतलब है कि कुछ समय पहले जिला सरपंच संघ ने जिला पंचायत कार्यालय के सामने धरना-प्रदर्शन कर जिला पंचायत CEO को हटाने की मांग को लेकर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया था। इसके बाद सरपंच संघ के प्रतिनिधिमंडल ने शासन के नाम ज्ञापन सौंपते हुए गंभीर आरोप लगाए थे। संघ का कहना था कि पंचायतों के विकास कार्यों की फाइलें बिना कारण लंबित रखी जा रही हैं तथा कमीशन नहीं देने पर प्रस्तावों और भुगतान संबंधी फाइलों में अनावश्यक विलंब किया जाता है इन आरोपों को लेकर सरपंचों में लंबे समय से नाराजगी बनी हुई थी।सरपंच संघ के जिला अध्यक्ष पुष्पेंद्र कुमार भूआर्य के नेतृत्व में जिलेभर के सरपंच एक मंच पर आए और पंचायतों के अधिकारों तथा विकास कार्यों में आ रही कथित बाधाओं के खिलाफ लगातार आवाज बुलंद की। आंदोलन के दौरान सरपंचों ने चेतावनी भी दी थी कि यदि उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।अब जिला पंचायत CEO भारती चंद्राकर के स्थानांतरण के आदेश के बाद सरपंच संघ इसे अपने संघर्ष की जीत मान रहे है। संघ के पदाधिकारियों का कहना है कि उनका उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष का विरोध नहीं, बल्कि पंचायतों को पारदर्शी, जवाबदेह और भ्रष्टाचारमुक्त व्यवस्था उपलब्ध कराना था। उनका दावा है कि लगातार किए गए लोकतांत्रिक आंदोलन और ज्ञापन का ही परिणाम है कि शासन ने यह निर्णय लिया।जिला पंचायत CEO के तबादले के साथ ही पंचायत राजनीति का एक अध्याय समाप्त और नए दौर की शुरुआत मानी जा रही है। सरपंच संघ इसे अपने संघर्ष की ऐतिहासिक सफलता बता रहे है। अब उम्मीद की जा रही है कि नए नेतृत्व में पंचायतों के विकास कार्यों को रफ्तार मिलेगी और जनप्रतिनिधियों व प्रशासन के बीच बेहतर समन्वय स्थापित होगा।

