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*अंदरूनी क्षेत्र के नौनिहालों के भविष्य से खिलवाड़: नया सत्र शुरू हुए बीते 20 दिन, पर स्कूल में लटका है ताला*दीपक मरकाम की खबर,,,

*अंदरूनी क्षेत्र के नौनिहालों के भविष्य से खिलवाड़: नया सत्र शुरू हुए बीते 20 दिन, पर स्कूल में लटका है ताला*दीपक मरकाम की खबर,,,

नेशनल हाईवे से महज 3 किमी अंदर ‘प्राथमिक शाला पे-कोत्तागुड़ा का हाल, शिक्षक नदारद,

पढ़ाई ठप, – बच्चों का भविष्य पर लगा ताला ‘,

मद्देड़ :: राज्य शासन बस्तर के अंदरूनी इलाकों में शिक्षा का उजियारा फैलाने के लिए लाखों-करोड़ों रुपए पानी की तरह बहा रही है। चमचमाते नए भवन भी स्वीकृत किए जा रहे हैं, लेकिन धरातल पर जिम्मेदार शिक्षकों की मनमानी और लापरवाही के कारण इन योजनाओं को पलीता लगाया जा रहा है।

 

ताजा मामला बीजापुर जिले के भोपालपटनम विकासखंड के अंतर्गत आने वाले शासकीय प्राथमिक शाला पे-कोतागुडा (संकुल केंद्र- पेगड़ापल्ली, -डाइस कोड- 22203611901) से सामने आया है ,यहाँ नया शैक्षणिक सत्र 16 जून 2026 से प्रारंभ हो चुका है, परंतु आज 7 जुलाई की स्थिति में भी स्कूल के मुख्य द्वार पर ताला लटका पाया गया।

 

अंदरूनी क्षेत्र का उठा रहे फायदा, मनमर्जी का अड्डा बना स्कूल ग्रामीणों से मिली जानकारी के अनुसार, यह स्कूल नेशनल हाईवे (NH) से महज 3 से 4 किलोमीटर अंदरूनी क्षेत्र में स्थित है।

इसी भौगोलिक स्थिति का अनुचित लाभ उठाते हुए यहाँ पदस्थ शिक्षक अपनी ड्यूटी से पूरी तरह नदारद रहते हैं।

अंदरूनी क्षेत्र होने के कारण उच्च अधिकारियों का औचक निरीक्षण यहाँ न के बराबर होता है, जिसका फायदा उठाकर शिक्षकों ने स्कूल को अपनी मनमर्जी का अड्डा बना लिया है ,जब चाहा स्कूल खोल दिया, जब चाहा ताला लगाकर गायब गए।

शिक्षकों के इस गैर-जिम्मेदाराना रवैये के कारण क्षेत्र के मासूम बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह ठप पड़ी है।

” मां बाप रोज उम्मीद से भेजते हैं बच्चे, मगर स्कूल के आगे ताला मिलता है”

ग्रामीणों ने बताया कि वे अपने बच्चों को सुनहरे भविष्य की उम्मीद में रोज स्कूल भेजते हैं, ताकि वे पढ़-लिखकर आगे बढ़ सकें, लेकिन स्कूल पहुँचने पर पता चलता है कि गुरुजी खुद ही ताला लगाकर गायब हैं।

सही संचालन नहीं होने से पालकों में आक्रोश ग्रामीणों ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि स्कूल का संचालन लंबे समय से सही तरीके से नहीं हो रहा है।

शासन की ओर से मिलने वाली मुफ्त किताबें, मध्यान्ह भोजन और अन्य सुविधाएं धरी की धरी रह गई हैं। जब स्कूल का मुख्य द्वार ही बंद है, तो व्यवस्थाओं का अंदाजा खुद लगाया जा सकता है।

माता-पिता शिक्षा के नाम पर अपने बच्चों को उम्मीद के साथ भेजते हैं, मगर शिक्षा के इस मंदिर में ताले लटके देखकर वे अब ठगा सा महसूस कर रहे हैं।

ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और स्कूल शिक्षा विभाग के उच्च अधिकारियों से मांग की है कि इस अंदरूनी क्षेत्र की सुध ली जाए और नदारद रहने वाले शिक्षकों पर तत्काल सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई कर स्कूल का नियमित संचालन सुनिश्चित कराया जाए।

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