*लापता पलना की 3 बेटियां सकुशल लौटीं घर, प्रशासन की तत्परता की हो रही सराहना पर 4 महीने की मजदूरी अब भी बख्काया*
**पालना /* तमिलनाडु में लापता हुई पालना की तीन बेटियों के सकुशल घर लौट आने से परिवारों में खुशी की लहर दौड़ गई है। चार महीने से मजदूरी करने गई बेटियों से संपर्क टूटने के बाद परिजन अनहोनी की आशंका से परेशान थे, लेकिन जिला प्रशासन और पुलिस की त्वरित कार्रवाई से तीनों बेटियां आज सुरक्षित अपने गांव पालना पहुंच गई हैं।
मामला कोंडागांव जिले के फरसगांव विकासखंड के ग्राम पालना का है। गांव की तीन युवतियां काम की तलाश में एक एजेंट के माध्यम से तमिलनाडु गई थीं। परिजनों के अनुसार एजेंट ने तीनों को तमिलनाडु में तीन अलग-अलग जगहों पर काम पर लगवा दिया था। पिछले चार महीनों से उन्हें मजदूरी भी नहीं दी गई थी और पिछले कुछ दिनों से उनका परिजनों से संपर्क भी टूट गया था, जिसके बाद परिजनों ने उनके लापता होने की सूचना स्थानीय लोगों को दी थी।
इस मामले को मीडिया टीम ने प्रमुखता से उठाया। खबर सामने आने के बाद मामले ने तूल पकड़ लिया। 3 दिन पूर्व बेटियों के लापता होने की सूचना पर पूर्व विधायक कृष्ण कुमार ध्रुव, नगर पंचायत फरसगांव के अध्यक्ष बिहारीलाल सोरी और वरिष्ठ पत्रकारों ने पीड़ित परिजनों से मुलाकात कर उन्हें ढांढस बंधाया और प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग की थी।
मीडिया में खबर प्रकाशित होते ही केशकाल विधायक नीलकंठ टेकाम ने भी मामले को गंभीरता से लिया और कोंडागांव कलेक्टर से संपर्क कर मामले में इमीडिएट एक्शन लेने के लिए कहा।
इस पूरे मामले में जिला कोंडागांव प्रशासन एवं नारायणपुर जिला पुलिस की भूमिका अत्यंत सराहनीय रही। दोनों जिलों के अधिकारियों ने मामले को अत्यंत संवेदनशीलता से लिया। सबसे बड़ी बात यह रही कि परिजनों के लिखित आवेदन का इंतजार किए बगैर ही नारायणपुर पुलिस ने मानवता का परिचय देते हुए तत्काल तमिलनाडु पुलिस से संपर्क साधा और पतासाजी शुरू कर दी।
पुलिस की इस त्वरित और संवेदनशील कार्रवाई का ही परिणाम है कि तीनों बेटियां आज सकुशल अपने गांव लौट आई हैं। बेटियों को सकुशल देखकर परिजनों की आंखों में आंसू आ गए। परिजनों ने कोंडागांव जिला प्रशासन, नारायणपुर जिला पुलिस और सहयोग करने वाले सभी जनप्रतिनिधियों व पत्रकार साथियों का हृदय से आभार व्यक्त किया है।
वहीं परिजनों ने मांग की है कि जिन एजेंट के द्वारा बेटियों को बाहर ले जाया गया था और चार महीने की मजदूरी नहीं दी गई है, उस पर कड़ी कार्रवाई की जाए ताकि भविष्य में किसी अन्य बेटी के साथ ऐसी घटना न हो।

