*फरसगांव ब्लाक के अंतिम छोर पर बसे गांव पलना से 3 आदिवासी बेटियां लापता तमिलनाडु ले जाई गईं, परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल – दलाल पर कार्रवाई की मांग**
कोंडागांव जिले के फरसगांव ब्लॉक के अंतिम गांव पलना से तीन आदिवासी बेटियों के लापता होने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। परिजनों का आरोप है कि गांव के ही एक एजेंट ने बहला-फुसलाकर उन्हें काम के बहाने तमिलनाडु ले जाया है।
गुरुवार को मामले की जानकारी मिलने पर हमारी टीम गांव पलना पहुंची। वहां लापता बेटियों के पिता, पंच, पूर्व सरपंच और ग्रामीणों से बातचीत की गई।
परिजनों के अनुसार लापता बेटियों में दो नाबालिग हैं – सनो (13 वर्ष) और अनीता (13 वर्ष) और तीसरी मानबत्ती (18 वर्ष) बताई जा रही है। पिताओं ने बताया कि गांव के ही एजेंट ने बिना बताए बेटियों को बुलाकर तमिलनाडु भेज दिया। शुरू में एजेंट ने जिम्मेदारी लेने की बात कही थी, लेकिन अब वह मुंह मोड़ रहा है।

मामले की गंभीरता को देखते हुए पूर्व विधायक कृष्ण कुमार ध्रुव, केशकाल नगर पंचायत अध्यक्ष बिहारी लाल सोरी और समाजसेवी पत्रकार कृष्ण दत्त उपाध्याय भी आज ग्राम पलना पहुंचे और पीड़ित परिवारों से मिलकर पूरी जानकारी ली।
परिजन पिछले चार महीनों से अपनी बच्चियों की तलाश में दर-दर भटक रहे हैं। अनहोनी की आशंका से परिवार दहशत में है। घटना के बाद गांव में भारी आक्रोश है।
*पूर्व विधायक ने उठाया मामला*
मामले को गंभीरता से लेते हुए केशकाल के पूर्व विधायक कृष्ण कुमार ध्रुव ने कहा कि यह घटना हृदयविदारक और मानव तस्करी की आशंका से जुड़ी है। उन्होंने कहा –
ग्राम पंचायत पलना, जो कि पुलिस क्षेत्राधिकार थाना बेनुर जिला पुलिस नारायणपुर के अधीन आता है, तीन नाबालिग युवतियों के अचानक लापता होने की घटना बेहद हृदयविदारक, संवेदनशील और गंभीर चिंता का विषय है।
उन्होंने नारायणपुर पुलिस अधीक्षक से मांग की है कि मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए तुरंत विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया जाए और तमिलनाडु पुलिस के साथ समन्वय स्थापित कर तीनों बच्चियों की सकुशल बरामदगी की जाए।
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि लापता बेटियों को तत्काल तलाश कर सुरक्षित वापस लाया जाए और गांव से नाबालिगों को बाहर ले जाने वाले दलालों / एजेंटों पर सख्त कार्रवाई की जाए।


