Saturday, April 18, 2026

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*महिलाओं के लखपति बनने का रास्ता है – एसएचजी* *गरीबी उन्मूलन के लिए टीआरआईएफ के सहयोग से कार्यशाला का आयोजन* ,,,,,,,,,,,,,तेजनारायण सिंह की रिपोर्ट,,,,,

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*महिलाओं के लखपति बनने का रास्ता है – एसएचजी*
*गरीबी उन्मूलन के लिए टीआरआईएफ के सहयोग से कार्यशाला का आयोजन*
,,,,,,,,,,,,,तेजनारायण सिंह की रिपोर्ट,,,,,,,,

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बीजापुर – अगर महिलाएं समूह में रहकर मेहनत ,लगन और ईमानदारी से कार्य करें तो उनके परिवार को लखपति बनने के रास्ते आसान हो जाते है। ऐसा हम इसलिए कह रहे है चुकीं जिले में जिला आजीविका संभावनाएं मैपिंग पर दो दिवसीय कार्यशाला का आयोजन 27 और 29 सितंबर को जिला पंचायत सभागार में आयोजित की गई। जिसमें कलेक्टर श्री राजेंद्र कटारा ने कृषि , पशुपालन, कुटीर उघोग जैसे क्षेत्र में विस्तृत रूप से कार्ययोजना बनाने की बात कहते हुए जिन स्व सहायता समूहों के लेन देन नियमित है उन समूहों को चिन्हाकित कर उनके परिवार को आजीविका मूलक गतिविधि से जोड़ने की बात कही है। कार्यशाला में जिला पंचायत मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री रवि कुमार साहू ने अधिक से अधिक एस एच जी के लिए प्रकरण तैयार करने के निर्देश दिए हैं।
यह कार्यशाला ट्रांसफॉर्म रूरल इंडिया फाउंडेशन के सहयोग से आयोजित की गई। जिसमें फाउंडेशन की श्रीमती अनु सिंह और पी पी आई ए फेलो श्री सूरज सिंह ने कृषि, उधानिकी, मत्स्यपालन, पशु चिकित्सा सेवाएं, आदिवासी विकास शाखा, रेशम विभाग, जिला कौशल विकास प्राधिकरण, जिला उद्योग केंद्र, महिला बाल विकास विभाग, कृषि विज्ञान केंद्र के अधिकारियों से उनके विभाग में चल रही योजनाओं का विस्तृत अध्यन कर जिले में गरीब परिवार को शासकीय योजनाओं से जोड़कर लखपति परिवार की श्रेणी में लाने के लिए संभावनाएं तलाश कर कार्ययोजना बनाने की रणनीति पर कार्य किया।
इस कार्यशाला में विभागीय जिला अधिकारियों के अलावा राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के सहायक परियोजना अधिकारी के अलावा जमीनी स्तर के अमले भी शामिल हुए। जिन्होंने साथ मिलकर जिले में गरीबी उन्मूलन के लिए विस्तृत कार्ययोजना बनाने की रणनीति तैयार की। इस कार्ययोजना की बदौलत आने वाले दिनों में गरीबी उन्मूलन की दिशा में एक ठोस कदम उठाए जाने की तैयारी की जा रही है।

*जानें! क्या है एसएचजी*
एसएचजी का तात्पर्य सेल्फ हेल्फ ग्रुप जिसे स्व सहायता समूह कहा जाता है (एसएचजी) गॉव में एक छोटी वित्तीय संस्था के रूप में कार्य करती है, जिसमें ग्रामीण महिलाएं समूह के रूप में कार्य करते हुए स्वयं को बचत राशि का आंतरिक लेन-देन करती है।

एसएचजी महिलाओं के आंतरिक लेन-देन में गति प्रदान करने हेतु चक्रीय निधि के रूप में 15000 रूपये व सामुदायिक निवेश निधि के रूप में 60000 रूपये राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के द्वारा प्रदाय किया जाता है।

एसएचजी महिलाओं की आजीविका संवर्धन हेतु और अधिक राशि की आवश्यकता होने पर बैंको से कम ब्याज दर पर लोन दिलवाया जाता है।

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