*बस्तर की धरोहर पर सट्टेबाज़ों का ‘डाका’: बीजापुर के रुद्रारम में परंपरा मुर्गा बाजार के नाम पर लाखों का जुआ, तेलंगाना-महाराष्ट्र से जुट रहे सट्टेबाज*
भोपाल पटनम,
आदिवासी संस्कृति, लोक-परंपरा और बस्तर की पहचान रही पारंपरिक ‘मुर्गा लड़ाई’ अब अवैध सट्टेबाज़ी और जुए के काले कारोबार का अड्डा बन चुकी है।
बीजापुर जिले के भोपालपटनम ब्लॉक अंतर्गत रुद्रारम गांव में आयोजित तीन दिवसीय मुर्गा बाजार में परंपरा की आड़ लेकर लाखों रुपयों का दांव लगाया जा रहा है।
आलम यह है कि तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और महाराष्ट्र जैसे पड़ोसी राज्यों से बड़े सट्टेबाज़ और जुआरी रुद्रारम पहुंच रहे हैं।
स्थानीय सूत्रों के मुताबिक, हाल ही में आवापल्ली से लाए गए एक मुर्गे पर लगभग 1.20 लाख रुपये का सट्टा लगा। औसतन एक-एक मुर्गे की लड़ाई पर 90,000 रुपये से लेकर 1.20 लाख रुपये तक की बोलियां लगाई जा रही हैं।
‘झंडी-मुंडा’ का अवैध खेल और कथित ‘एंट्री फीस’
मुर्गा लड़ाई के मैदान में न सिर्फ मुर्गों की बाज़ी लग रही है, बल्कि डाइस बोर्ड यानी ‘झंडी-मुंडा’ का अवैध खेल भी बेखौफ संचालित हो रहा है। बताया जा रहा है कि तेलंगाना के एक संचालक को इस खेल की अनुमति ग्राम पंचायत/आयोजकों द्वारा कथित रूप से राशि लेकर दी गई है।
इतना ही नहीं, रुद्रारम मुर्गा बाजार में प्रवेश और भागीदारी के नाम पर भी अवैध वसूली का आरोप लग रहा है: प्रवेश शुल्क (Entry Fee): मैदान के भीतर दाखिल होने के लिए प्रति व्यक्ति 300 रुपये की रसीद काटी जा रही है।
मुर्गा लड़ाने का शुल्क: मुर्गों के आकार और नस्ल के आधार पर 300 से 500 रुपये तक वसूले जा रहे हैं।
सवाल यह खड़ा होता है कि यदि यह वसूली ग्राम पंचायत द्वारा की जा रही है, तो इन दरों का निर्धारण किसने किया? क्या इस राजस्व का कोई पारदर्शी लेखा-जोखा रखा जा रहा है या यह सीधी-साधी उगाही का जरिया है?
*प्रशासन और पुलिस की चुप्पी पर उठे सवाल*
बस्तर की सांस्कृतिक धरोहर और अवैध आर्थिक गतिविधियों के बीच का अंतर पूरी तरह मिटाया जा चुका है।
लाखों रुपये के इस अवैध लेन-देन, अंतरराज्यीय जुआरियों के जमावड़े और सट्टेबाज़ी को लेकर ग्राम पंचायत, पुलिस प्रशासन और वन विभाग की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
थाना प्रभारी का पक्ष:
इस पूरे मामले पर जब भोपालपटनम थाना प्रभारी मुकेश पटेल से संपर्क किया गया, तो उन्होंने मामले को संज्ञान में लेते हुए कहा कि मुर्गा बाजार में चल रहे अवैध सट्टे और जुए पर जल्द ही कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
बड़ा सवाल: बस्तर की लोक-संस्कृति के नाम पर कानून की धज्जियां उड़ाने की यह छूट आखिर किसके शह पर दी जा रही है?

