Sunday, April 19, 2026

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* सर्व आदिवासी समाज ने भूमकाल दिवस मनाया, भूमकाल दिवस पर शहीद गुंडाधूर को नमन किया, सर्व आदिवासी समाज हर साल 10 फरवरी को गुंडाधूर की शहादत दिवस को भूमकाल दिवस के रूप में मनाती है*,,,,,,,,,,,*आर एल कुलदीप की रिपोर्ट*

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* सर्व आदिवासी समाज ने भूमकाल दिवस मनाया, भूमकाल दिवस पर शहीद गुंडाधूर को नमन किया, सर्व आदिवासी समाज हर साल 10 फरवरी को गुंडाधूर की शहादत दिवस को भूमकाल दिवस के रूप में मनाती है*,,,,,,,,,,,*आर एल कुलदीप की रिपोर्ट*

दुर्गूकोंदल:::::::::: सुरूंगदोह में सर्व आदिवासी समाज ने भूमकाल दिवस मनाया, भूमकाल दिवस पर शहीद गुंडाधूर को नमन किया, 10फरवरी गुंडाधूर की शहादत दिन है, इसीलिए सर्व आदिवासी समाज हर साल 10फरवरी को गुंडाधूर की शहादत दिवस को भूमकाल दिवस के रूप में मनाती है।

सुरूंगदोह में दो दिवसीय विकासखंड स्तरीय भूमकाल दिवस मनाया गया। भूमकाल दिवस पर शहीद गुंडाधूर के छायाचित्र और बूढ़ादेव को नमन किया।

9फरवरी को कार्यशाला और 10फरवरी को सभा हुई।

10फरवरी को सुरूंगदोह में विशाल सभा हुई। सभा को संबोधित करते हुए सर्व आदिवासी समाज के ब्लाक अध्यक्ष जगतराम दुग्गा ने कहा कि आज गुंडाधूर की 113वीं शहादत दिवस मना रहे हैं।

हमको गुंडाधूर से प्रेरणा लेकर सामाजिक एकता बनाकर संवैधानिक अधिकारों के लड़ना है।

जल जंगल जमीन और संविधान में प्रदत्त अधिकारों को प्राप्त करना है, एकजुटता में ताकत है,एक रहेंगे और लड़कर जीतेंगे।

आज सूचना के कई साधन हैं, फिर भी लोग दूरियां बनाते हैं, जब गुंडाधूर ने लड़ाई लड़ी तब सूचना पहुंचाने कोई साधन नहीं थी, लेकिन वे जनता की आवाज को दबने नहीं दिया,उन्होंने लड़ाई लड़ी‌।

हमें शहीद गुंडाधूर की जीवनी पढ़कर सीखना है, और संघर्ष को जारी रखना है,बस्तर की स्थिति सब जानते हैं।

यहां सरकार अपनी मनमर्जी से काम करने केन्द्रीय फ़ोर्स की कैंप लगाकर कारपोरेट घरानों को लाभ पहुंचा रही है।

स्थानीय लोग हक के लिए लड़ रहे हैं, उसे पुलिस, बीएसएफ के टीम घेर लेती है, ये आदिवासी समाज और मूल निवासी समाज के साथ केंद्र और राज्य सरकार का षड्यंत्र है।

सभा में सर्व आदिवासी समाज के प्रदेश उपाध्यक्ष सुरजू टेकाम, गोंड़ समाज ब्लाक उपाध्यक्ष रामचंद्र कल्लो ने कहा कि हम जल जंगल के मालिक हैं, पेशा कानून और 5वीं अनुसूची लागू है।

सरकार आदिवासी समाज को मालिक कहती है, लेकिन जब पुलिस कैंप स्थापना करती है, तो आदिवासी समाज से बात करना, पूछना तक उचित नहीं समझ रही है।

सरकार जो बस्तर में काम करती है, आदिवासी समाज से बात करना चाहिए।

पेशा नियम बनाने और 5अनुसूची मतलब सही होगी।

सरकार पेशा नियम आदिवासियों के जल जंगल ज़मीन के अधिकारियों के लिए कहती है, वन संपदा, खनिज संपदा, भू अधिग्रहण अपनी मर्जी से करती है, बस्तर में आंदोलन सरकार के ज्यादी के खिलाफ चल रही है,समूचा बस्तर संभाग आक्रोशित है।

आमजनता से इन्होंने कहा कि जनता जागरूक और सचेत रहें।

समाज आह्वान करती है, वहां पहुंचकर लड़ाई में सहयोग करें, तभी बस्तर में अमन चैन से रहेंगे,अन्यथा आदिवासियों की अधिकार खत्म करने भाजपा और कांग्रेस तुले हुए हैं।

हम नहीं जागे तो संवैधानिक अधिकार खत्म होने में देरी नहीं लगेगी।

सर्व आदिवासी समाज अध्यक्ष कुबेर दर्रो, दुर्जन उयका ने कहा आदिवासी समाज से कांग्रेस और बीजेपी ईर्ष्या करते हैं, आदिवासियों को अपने से संवैधानिक अधिकार दे नहीं सकते हैं, लेकिन संविधान में आदिवासी समाज के लिए जो अधिकतर उल्लेखित हैं, उन अधिकारियों से लगातार छेड़छाड़ कर खत्म करने की साज़िश कर रहे हैं।

छत्तीसगढ़ में आरक्षण मुद्दा फुटबाल की तरह हो गई है, कांग्रेस आरक्षण को किक मारती है, बीजेपी की ओर और बीजेपी किक मारती है, कांग्रेस सरकार मे इसी कारण आरक्षण सिर्फ छत्तीसगढ़ में राजनीतिक षड्यंत्र बन गई है।

कांग्रेस और बीजेपी दोनों पार्टी आदिवासी समाज के आरक्षण से जलते हैं, आरक्षण देना नहीं चाहते हैं।

आरक्षण कब खत्म करेंगे इसकी ताक में बीजेपी और कांग्रेस टकटकी लगाए बैठे हैं।

मानसू आचला और दुर्जन उयका, सर्व आदिवासी समाज सर्कल अध्यक्ष सुरूंगदोह बहादुर तुलावी, ने कहा कि शिक्षा नीति फ्री में बच्चों को परीक्षा उत्तीर्ण करना भी आदिवासी समाज को अंधकार में डालने जैसा कांग्रेस और बीजेपी का षड्यंत्र है, सब फोकट में पास हों, और अपने अधिकार के लिए लड़ ना सकें, इसलिए बच्चे स्कूल जायें या ना जायें, फिर भी परीक्षा में उत्तीर्ण हो रहे हैं, समाज को शिक्षित बनाने के वर्तमान शिक्षा नीति का भी खुलकर विरोध करेंगे।

अन्यथा कक्षा 1ली से कक्षा 12वीं तक उत्तीर्ण होने के बाद भी हमारे समाज के लोग पढ़ लिख नहीं पायेंगे।

इस अवसर पर सरपंच कलिता आचला, मीना गावड़े, रमशीला कोमरा, ठाकुरराम नेताम, प्रेम पुड़ो, मानसू आचला, कुबेर दर्रो, सुकलाल नाग, टिकेश नरेटी, आयनू ध्रुव, बाबूलाल कोला, रमेश दुग्गा सहित बड़ी संख्या में सर्व आदिवासी समाज के पदाधिकारी आम नागरिक उपस्थित थे।

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