
राहुल भोई महासमुंद..
महासमुंद जिले में सामने आए करीब 17 करोड़ 93 लाख रुपये के धान घोटाले ने अब प्रशासनिक कार्यप्रणाली और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जांच में सामने आया कि खरीदी केंद्रों के रिकॉर्ड में धान का स्टॉक दर्ज है, लेकिन कई केंद्रों पर भौतिक सत्यापन के दौरान एक दाना तक नहीं मिला। इसके बावजूद अब तक केवल 15 सहकारी समिति के प्रभारियों पर ही एफआईआर दर्ज की गई है, जबकि 39 अन्य संदिग्ध खरीदी केंद्रों पर अभी तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।

बता दे की जिले में वर्ष 2025-26 के धान खरीदी सीजन में 182 खरीदी केंद्रों के माध्यम से 1,01,95,681.20 मीट्रिक टन धान की खरीदी दर्ज की गई थी। मिलिंग के बाद केंद्रों में 57,860.47 क्विंटल धान का स्टॉक मौजूद होना चाहिए था, लेकिन भौतिक सत्यापन में 54 केंद्रों पर धान पूरी तरह गायब मिला। समर्थन मूल्य 3,100 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से इसकी कीमत 17 करोड़ 93 लाख 67 हजार 457 रुपये आंकी गई है। धान खरीदी प्रक्रिया की निगरानी के लिए प्रत्येक केंद्र में नोडल और मॉनिटरिंग अधिकारी नियुक्त किए जाते हैं तथा समय-समय पर भौतिक सत्यापन भी अनिवार्य होता है। इसके बावजूद करोड़ों रुपये का धान गायब हो जाना प्रशासनिक लापरवाही या मिलीभगत की आशंका को मजबूत करता है। सवाल यह भी उठ रहा है कि यदि समय रहते निगरानी होती, तो इतना बड़ा घोटाला कैसे हो जाता..वही पुरे मामले पर जिला विपणन अधिकारी ने करोडो रुपयों के धान गायब होने की बात सही बताते हुए कहा हैँ की शुरुआत से अब तक 15 समितियों पर मामले दर्ज कराये जा चुके हैँ. और उच्चाधिकारियो को रिपोर्ट दे दिया गया हैँ..

घोटाले के टॉप-10 केंद्र
जांच में जिन केंद्रों पर सबसे अधिक धान गायब मिला, उनमें प्रमुख हैं—
आरंगी सहकारी समिति – 4437 क्विंटल धान गायब।
बम्हनी सहकारी समिति – 4365 क्विंटल धान गायब।
तोषगांव सहकारी समिति – 2760.80 क्विंटल (करीब 85.58 लाख रुपये)।
बघरपाली सहकारी समिति – 2157.68 क्विंटल (करीब 66.88 लाख रुपये)।
मोगरापाली सहकारी समिति – 1952.40 क्विंटल (करीब 60.52 लाख रुपये)।
समहर सहकारी समिति – 1820.65 क्विंटल (करीब 56.44 लाख रुपये)।
कोटद्वारी सहकारी समिति – 1780.65 क्विंटल (करीब 55.20 लाख रुपये)।
मल्यामाल सहकारी समिति – 1713.25 क्विंटल (करीब 53.11 लाख रुपये)।
बेलसोंडा सहकारी समिति – 1680.41 क्विंटल (करीब 52.09 लाख रुपये)।
खेमड़ा सहकारी समिति – 1551.60 क्विंटल (करीब 48.09 लाख रुपये)।
आशुतोष कोसरिया -जिला विपणन अधिकारी महासमुंद..
जांच में करोड़ों रुपये के धान गायब होने की पुष्टि के बाद भी कार्रवाई केवल 15 समितियों तक सीमित है..ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या बाकी 39 संदिग्ध केंद्रों के जिम्मेदारों पर भी एफआईआर और कड़ी कार्रवाई होगी, या मामला सिर्फ दो केंद्रों तक ही सीमित रह जाएगा। अब पूरे जिले की निगाहें प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।

