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महासमुंद बाल श्रम के लिए ले जाए जा रहे 6 नाबालिग बच्चों को कराया गया मुक्त, राज्य बाल आयोग अध्यक्ष की तत्परता से हुई कार्रवाई..

राहुल भोई महासमुंद…

महासमुंद, 21 जून 2026। छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा की सक्रियता से महासमुंद जिले के तुमगांव थाना क्षेत्र में बाल श्रम का एक गंभीर मामला सामने आया, जिसमें बैंड पार्टी के साथ श्रम के लिए ले जाए जा रहे छह नाबालिग बच्चों को तत्काल रेस्क्यू कर सुरक्षित मुक्त कराया गया।

जानकारी के अनुसार, आयोग अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा जिले के प्रवास पर थीं। इसी दौरान उन्होंने सड़क पर एक पिकअप वाहन में कुछ बच्चों को संदिग्ध परिस्थितियों में जाते देखा। पूछताछ करने पर पता चला कि बैंड पार्टी द्वारा छह नाबालिग लड़कों को काम के लिए ले जाया जा रहा था। मामले की गंभीरता को देखते हुए डॉ. शर्मा स्वयं करीब आधे घंटे तक मौके पर मौजूद रहीं और पूरे घटनाक्रम की निगरानी करती रहीं।

उन्होंने तत्काल स्पेशल जूविनाइल पुलिस यूनिट (एसजेपीयू), जिला कार्यक्रम अधिकारी (डीपीओ) तथा जिला बाल संरक्षण इकाई (डीसीपीओ) की टीम को मौके पर बुलाकर कार्रवाई के निर्देश दिए। अधिकारियों की संयुक्त टीम ने सभी छह बच्चों का रेस्क्यू कर उन्हें सुरक्षित तुमगांव थाना पहुंचाया। वहीं बाल श्रम में प्रयुक्त पिकअप वाहन क्रमांक CG06GM4266 के चालक तथा संबंधित बैंड पार्टी के विरुद्ध नियमानुसार कड़ी कार्रवाई के निर्देश भी दिए गए हैं।

डॉ. वर्णिका शर्मा ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश देते हुए कहा कि बाल श्रम जैसी गंभीर सामाजिक बुराई के प्रति किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने चाइल्डलाइन और संबंधित विभागों को लगातार निगरानी एवं निरीक्षण करने के निर्देश दिए, ताकि भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो सके।

उन्होंने कहा कि बच्चों को शिक्षा, सुरक्षा और सम्मानजनक जीवन का अधिकार प्राप्त है तथा उन्हें श्रम में लगाना कानूनन अपराध है। बच्चों के अधिकारों की रक्षा और बाल श्रम उन्मूलन के लिए आयोग पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

आयोग ने संकेत दिए हैं कि इस पूरे मामले में बाल अधिकार संरक्षण नियम, 2005 की धारा 13 एवं सहपठित धारा 14 के तहत संज्ञान लेकर आवश्यक वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।

डॉ. वर्णिका शर्मा ने कहा कि समाज के सभी वर्गों को बाल श्रम के खिलाफ जागरूक होकर आगे आना होगा, ताकि बच्चों का बचपन सुरक्षित रह सके और उन्हें शिक्षा व बेहतर भविष्य का अवसर मिल सके। इस कार्रवाई को जिले में बाल अधिकारों की रक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।

 

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