
राहुल भोई महासमुंद..
महासमुंद जिले की तथाकथित गौरवपथ का चौडीकरण निर्माण आम लोगो के साथ कांवरियो के लिए मुसीबत का सबब बन गया है । करोड़ो की लागत से बनने वाले इस सड़क निर्माण की तय सीमा समाप्त होने के बावजूद पचास प्रतिशत काम अधूरा है । जिससे सड़क पर जगह – जगह अनगिनत गड्ढे हो गये ,जिससे लोगो का चलना दूभर हो गया है । नंगे पैर जल लेकर सिरपुर जाने वाले कांवरियो के पैरो में छाले पड़ जा रहे है ।
स्क्रीन पर दिखाई दे रही ये बदहाल सड़क महासमुंद शहर की महत्वपूर्ण सड़कों में से एक है। इसे गौरव पथ, बीटीआई रोड और कलेक्टोरेट पहुंच मार्ग के नाम से जाना जाता है।करीब 2.3 किलोमीटर सड़क के चौड़ीकरण और सौंदर्यीकरण के लिए शासन ने लगभग 10 करोड़ रुपये स्वीकृत किए हैं। निर्माण की जिम्मेदारी लोक निर्माण विभाग को दी गई और विभाग ने मई 2025 में मेसर्स किरण बिल्डकान, बेमेतरा को कार्यादेश जारी किया। निर्माण कार्य फरवरी 2026 तक पूरा होना था, लेकिन तय समय-सीमा गुजर जाने के बाद भी काम अधूरा है। बताया जा रहा है कि अब तक करीब 50 प्रतिशत ही काम पूरा हो पाया है।कलेक्टोरेट से बरोंडा चौक तक लगभग डेढ़ किलोमीटर सड़क पर जगह-जगह गड्ढे हैं।बारिश के कारण सड़क की हालत और खराब हो गई है। पैदल चलना मुश्किल है, तो दोपहिया और चारपहिया वाहन भी गड्ढों के बीच हिचकोले खाते हुए गुजर रहे हैं।इसी रास्ते से जिले के आला अधिकारियों से लेकर आम नागरिकों तक रोजाना आवाजाही होती है। इसके बावजूद सड़क का समय पर निर्माण पूरा नहीं होना कई सवाल खड़े करता है। सबसे ज्यादा परेशानी इस सावन में उन कांवरियों को हो रही है, जो बम्हनी से जल लेकर करीब 45 किलोमीटर दूर सिरपुर में भगवान शिव का जलाभिषेक करने पैदल जाते हैं। कांवरियों का कहना है कि खराब सड़क और बिखरे पत्थरों के कारण नंगे पैर चलना बेहद मुश्किल हो गया है। गड्ढों और उबड़-खाबड़ रास्ते की वजह से पैरों में छाले पड़ रहे हैं और चोट लगने का भी खतरा बना हुआ है।
युशू पटेल – रुपेश पटेल – कांवरियों ने सिरपुर से लौट कर बताया की रास्ते मे गड्ढे और नुकेले छोटे पत्थरो से उनके पैरो को काफी तकलीफ पहुंची है

सड़क की बदहाली को लेकर जब जिम्मेदार विभागों से सवाल किया गया तो लोक निर्माण विभाग विभाग के अधिकारी अपने तर्क देते नजर आए और कहा की विभिन्न समस्याओ के चलते दिसंबर तक यह सडक पूरी तरह बन पायेगी..

ए. के. अग्रवाल – एसडीओ, लोक निर्माण विभाग

फिलहाल लोक निर्माण विभाग ने दिसंबर 2026 तक काम पूरा करने का लक्ष्य बताया है और शासन से निर्माण अवधि बढ़ाने की मांग की है। लेकिन जिस गति से काम चल रहा है, उसे देखते हुए दिसंबर तक काम पूरा होगा या नहीं, यह बड़ा सवाल है।सवाल सिर्फ सड़क निर्माण की समय-सीमा का नहीं, बल्कि उन हजारों लोगों की परेशानी का है जो रोज इस सड़क से गुजरते हैं। खासकर सावन में भगवान शिव के दर्शन के लिए पैदल निकलने वाले कांवरियों के लिए यह रास्ता बड़ी चुनौती बना हुआ है। अब देखना होगा कि शहर की इस महत्वपूर्ण सड़क को आखिर कब तक उसका गौरव वापस मिलता है और कब आम लोगों को इस बदहाल रास्ते से राहत मिलती है।

