*बीजापुर में भाजपा नेता जागर लक्ष्मैया की हरकतों से आक्रोशित झाड़ी तेलंगा समाज; वन मंत्री और विधायक को सौंपा ज्ञापन*
*वन मंत्री केदार कश्यप का आश्वासन: आरोपी नेता को पार्टी और सांगठनिक पदों से किया जाएगा बर्खास्त*
*विधायक विक्रम मंडावी की चेतावनी: TI और SP को तत्काल कार्रवाई के दिए निर्देश, न्याय न मिलने पर चक्काजाम का एलान*
*समाज की अंतिम चेतावनी: कार्रवाई नहीं हुई तो 35 हजार की आबादी करेगी सड़क पर उग्र आंदोलन और भाजपा का सामाजिक बहिष्कार*
: बीजापुर 03 अक्टूबर 2026
बीजापुर :: कोत्तापाल में व्यवसायी श्री हरिशंकर लिंगम के साथ मारपीट और घर की महिलाओं से अभद्र व्यवहार करने वाले आरोपी भाजपा नेता जागर लक्ष्मैया के खिलाफ झाड़ी तेलंगा/तेलगा समाज का आक्रोश चरम पर है।
मामले में दोषी के खिलाफ त्वरित एवं सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग को लेकर समाज के एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने छत्तीसगढ़ शासन के माननीय वन मंत्री श्री केदार कश्यप जी, सांसद प्रतिनिधि श्री जिलाराम राणा जी, भाजपा जिलाध्यक्ष श्री घासीराम नाग जी, पूर्व मंत्री श्री महेश गागड़ा जी एवं स्थानीय विधायक श्री विक्रम शाह मंडावी जी से मुलाकात कर लिखित ज्ञापन सौंपा।
*कैबिनेट मंत्री का आश्वासन और विधायक का सख्त रुख:*
प्रतिनिधिमंडल से वार्ता के दौरान माननीय वन मंत्री श्री केदार कश्यप जी ने समाज को आश्वस्त किया कि आरोपी जागर लक्ष्मैया को भारतीय जनता पार्टी के तमाम सांगठनिक पदों से तत्काल प्रभाव से मुक्त कर बाहर का रास्ता दिखाया जाएगा।
वहीं, स्थानीय विधायक श्री विक्रम शाह मंडावी जी ने मामले की गंभीरता को देखते हुए मौके से ही बीजापुर थाना प्रभारी (TI) एवं पुलिस अधीक्षक (SP) को फोन लगाकर आरोपी पर सख्त से सख्त धाराओं में कानूनी कार्रवाई करने के निर्देश दिए।
विधायक मंडावी ने स्पष्ट किया कि यदि पीड़ित परिवार को न्याय नहीं मिलता है, तो वे स्वयं समाज के साथ सड़कों पर बैठकर उग्र चक्काजाम करेंगे।
*विवादित इतिहास का हवाला, समाज ने दी अंतिम चेतावनी:*
झाड़ी तेलंगा/तेलगा समाज (छ.ग. तेलंगा/तेलगा समाज समिति) के पदाधिकारियों ने शासन-प्रशासन का ध्यान आरोपी के पुराने विवादित इतिहास (स्व. राजू पुजारी प्रकरण) की ओर भी आकर्षित कराया।
समाज ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि दिए गए आश्वासनों के अनुरूप यदि तय समय-सीमा के भीतर आरोपी की गिरफ्तारी और ठोस कानूनी कार्रवाई नहीं होती है, तो बीजापुर जिले का लगभग 30 से 35 हजार का पूरा समाज सड़कों पर उतरकर उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होगा।
इसके साथ ही भारतीय जनता पार्टी का पूर्ण सामाजिक बहिष्कार किया जाएगा, जिसकी समस्त जिम्मेदारी शासन और स्थानीय प्रशासन की होगी।

