*बड़गई में दो दिवसीय 9 कुण्डीय गायत्री महायज्ञ के साथ नवीन प्रज्ञा मंडल का भव्य लोकार्पण, 193 लोगों के विविध संस्कार संपन्न*
राजमन नाग
*बड़गई -* तीर्थ स्थल पावड़ा के अंतर्गत हीरक मंडल भोंगापाल आश्रित प्रज्ञा मंडल बड़गई में दो दिवसीय 9 कुण्डीय गायत्री महायज्ञ का भव्य आयोजन किया गया। इसी महायज्ञ के साथ विधि-विधान से हवन-पूजन कर नवीन प्रज्ञा मंडल का लोकार्पण भी किया गया। दो दिनों तक चले इस आध्यात्मिक आयोजन में पूरे क्षेत्र में भक्तिमय माहौल बना रहा और वैदिक मंत्रों से पूरा परिसर गूंजता रहा।
अखिल विश्व गायत्री परिवार शांतिकुंज हरिद्वार के मार्गदर्शन में आयोजित इस महायज्ञ में गायत्री परिवार की टोली द्वारा विभिन्न संस्कारों को संपन्न कराया गया। जानकारी के अनुसार इस दौरान कुल 193 लोगों के संस्कार कराए गए, जिसमें 129 नन्हे बच्चों का विद्या संस्कार, 28 लोगों का दीक्षा संस्कार, 25 बच्चों का मुंडन संस्कार और 11 गर्भवती माताओं का पुंसवन संस्कार शामिल है। विद्या संस्कार के माध्यम से बच्चों को शिक्षा के प्रति जागरूक किया गया तो वहीं दीक्षा संस्कार के द्वारा लोगों को गायत्री मंत्र से जोड़कर जीवन में सद्मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी गई।
इस महायज्ञ को सफल बनाने के लिए ग्रामीणों ने बढ़-चढ़कर सहयोग दिया। महिला मंडल, युवा मंडल और प्रज्ञा मंडल के सभी कार्यकर्ताओं ने दिन-रात मेहनत कर व्यवस्था को संभाला। यज्ञ में आहुति देने के लिए आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे थे।
महायज्ञ के पश्चात चारों हीरक मंडलों की संयुक्त गोष्ठी का आयोजन किया गया। इस गोष्ठी में संगठन को और अधिक मजबूत बनाने, प्रत्येक गांव में प्रज्ञा मंडल का विस्तार करने और परम पूज्य गुरुदेव पं. श्रीराम शर्मा आचार्य एवं वंदनीया माता भगवती देवी शर्मा के बताए सिद्धांतों – हम सुधरेंगे, युग सुधरेगा और हम बदलेंगे, युग बदलेगा पर सक्रिय रूप से कार्य करने पर जोर दिया गया। कार्यकर्ताओं ने नशामुक्ति और अंधविश्वास उन्मूलन के लिए कार्य करने का संकल्प भी लिया।
चारों हीरक मंडल के प्रमुख *श्री सत्येंद्र मरापी जी* ने मीडिया से चर्चा करते हुए कहा कि इतने कम समय में 9 कुण्डीय गायत्री महायज्ञ का सफल आयोजन करना एक बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि आज के समय में ऐसे संस्कारों की बहुत आवश्यकता है। विद्या संस्कार से बच्चों में बुद्धि का विकास होता है, मुंडन और पुंसवन संस्कार का वैज्ञानिक महत्व है, वहीं दीक्षा संस्कार व्यक्ति को एक नई ऊर्जा प्रदान करता है।
कार्यक्रम के अंत में एक भावुक क्षण देखने को मिला जब चिकलपुट्टी केंद्रीय कार्यालय के संस्थापक वनवासी बाबू जी की भावभीनी विदाई की गई। सभी कार्यकर्ताओं ने पीले चावल और पुष्पों की वर्षा कर उन्हें सम्मानित किया और उनके योगदान को याद किया। बाबू जी ने अपने आशीर्वचन में सभी कार्यकर्ताओं को संगठित रहकर कार्य करने की प्रेरणा दी, जिसे सुनकर सभी की आंखें नम हो गईं।

