धर्मांतरण पर कड़ा रुख, कफन-दफन पर रोक की पहल,,
,,,,,,,,,,,तेजनारायण सिंह की रिपोर्ट,,,,,,,,
पेसा कानून, पांचवीं अनुसूची और ग्राम सभा के अधिकारों को बताया सर्वोपरि
बीजापुर,,,
भोपालपटनम,,, ,,,,,,,,,,,,,-भोपालपटनम फारेस्ट रेस्ट हाउस में सर्व आदिवासी समाज के प्रदेश कार्यकारिणी अध्यक्ष एवं पूर्व विधायक राजाराम तोडम तथा समाज के अध्यक्ष अरविंद नेताम की ओर से एक अहम प्रेस वार्ता आयोजित की गई, जिसमें धर्मांतरण के मुद्दे पर समाज ने सख्त और स्पष्ट रुख अपनाया। प्रेस वार्ता में सर्व आदिवासी समाज के प्रदेश कार्यकारिणी अध्यक्ष एवं पूर्व विधायक राजाराम तोडम तथा छत्तीसगढ़ सर्व आदिवासी समाज के अध्यक्ष व पूर्व केंद्रीय मंत्री अरविंद नेताम ने संयुक्त रूप से बयान देते हुए कहा कि आदिवासी समाज की परंपरा, संस्कृति और आस्था से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा।
प्रेस वार्ता में कहा गया कि आदिवासी समाज की अपनी विशिष्ट रीति-रिवाज, सामाजिक व्यवस्था और धार्मिक परंपराएं हैं, जिन्हें धर्मांतरण के माध्यम से कमजोर करने की कोशिश की जा रही है। यदि किसी गांव में किसी ऐसे व्यक्ति की मृत्यु होती है, जिसने धर्मांतरण कर लिया है, तो उसका कफन-दफन कार्यक्रम आदिवासी परंपराओं के विरुद्ध है और इससे समाज की भावनाएं आहत होती हैं। ऐसे मामलों में समाज द्वारा कफन-दफन पर रोक लगाने की पहल की जा रही है।
वहीं अध्यक्ष अरविंद नेताम ने कहा कि आदिवासी समाज की पहचान उसकी संस्कृति और परंपराओं से जुड़ी है। धर्मांतरण के जरिए इन परंपराओं को तोड़ने का प्रयास किया जा रहा है, जिसे आदिवासी समाज कभी स्वीकार नहीं करेगा। उन्होंने कहा कि समाज अपनी संस्कृति और आस्था की रक्षा के लिए संगठित होकर हर स्तर पर विरोध करेगा।
सर्व आदिवासी समाज के प्रदेश कार्यकारिणी अध्यक्ष एवं पूर्व विधायक राजाराम तोडम ने कहा कि छत्तीसगढ़ के पांचवीं अनुसूचित क्षेत्रों में पेसा कानून और ग्राम सभा के अधिकार सर्वोपरि हैं। गांव से जुड़े सभी सामाजिक, धार्मिक और सामुदायिक फैसले ग्राम सभा के माध्यम से ही लिए जाएंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि धर्मांतरण के बाद होने वाली किसी भी गतिविधि को ग्राम सभा की स्वीकृति नहीं मिलेगी।
प्रेस वार्ता में यह भी कहा कि ग्राम सभा आदिवासी समाज की सर्वोच्च इकाई है और उसके फैसले सभी के लिए मान्य होंगे। धर्मांतरण के मामलों में ग्राम सभा की अनदेखी कर कोई भी गतिविधि स्वीकार नहीं की जाएगी। सर्व आदिवासी समाज ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि धर्मांतरण के मामलों पर रोक नहीं लगी और आदिवासी समाज की परंपराओं का उल्लंघन जारी रहा, तो समाज भविष्य में उग्र आंदोलन करने से भी पीछे नहीं हटेगा। प्रेस वार्ता के माध्यम से सर्व आदिवासी समाज ने साफ संकेत दिए कि आदिवासी संस्कृति, परंपरा और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष लगातार जारी रहेगा।

