बीजापुर। रूढ़िजन्य परंपरागत सर्व आदिवासी समाज बीजापुर के जिलाध्यक्ष अशोक कुमार तलांडी ने एकलव्य आवासीय विद्यालय, रुद्रारम में हाल ही में सामने आई घटना को गंभीरता से लेते हुए इसकी कड़ी निंदा की है। उन्होंने कहा कि संचालित आवासीय आश्रमों, छात्रावासों एवं पोटा केबिनों में इस प्रकार की गंभीर घटनाओं पर प्रभावी नियंत्रण के बजाय उनकी पुनरावृत्ति होना बेहद चिंताजनक है।
तलांडी ने कहा कि जब भी इस तरह की घटनाएं सामने आती हैं, तो जिम्मेदार अधिकारियों को केवल कारण बताओ नोटिस जारी करना और निचले स्तर के कर्मचारियों को निलंबित करना पर्याप्त कार्रवाई नहीं है। उन्होंने कहा कि जिम्मेदारी तय करते हुए लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों एवं प्रबंधन के विरुद्ध भी कठोर और दंडात्मक कार्रवाई होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि दैनिक समाचार पत्रों, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया, सोशल मीडिया एवं विभिन्न सूत्रों से सामने आई जानकारी के अनुसार कथित घटना लंबे समय से चल रही थी। यदि पीड़ित छात्राओं द्वारा समय रहते स्कूल प्रबंधन को इसकी जानकारी दी गई थी, तो प्रबंधन की जिम्मेदारी थी कि वह तत्काल संबंधित व्यक्ति के विरुद्ध कार्रवाई करता और छात्राओं को सुरक्षा प्रदान करता।
तलांडी ने कहा कि यदि प्रारंभिक स्तर पर ही शिकायतों को गंभीरता से लिया जाता और उचित कार्रवाई की जाती, तो स्थिति इतनी गंभीर नहीं होती। उन्होंने पूरे मामले की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच कराकर स्कूल प्रबंधन की भूमिका और लापरवाही की भी जांच करने तथा दोषी पाए जाने वाले प्रत्येक व्यक्ति के विरुद्ध नियमानुसार कठोर कार्रवाई की मांग की।
उन्होंने कहा कि बच्चों की सुरक्षा एवं संरक्षण से जुड़े मामलों में केवल प्रत्यक्ष रूप से कृत्य करने वाले व्यक्ति की ही नहीं, बल्कि उसे संरक्षण या सहयोग देने वाले लोगों की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए।
बालिका आवासीय विद्यालयों में महिला कर्मचारियों की हो पदस्थापना
अशोक तलांडी ने केंद्र एवं राज्य सरकार से सवाल करते हुए कहा कि आदिवासी बच्चों को बेहतर शिक्षा और सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराने के उद्देश्य से एकलव्य आवासीय विद्यालयों की स्थापना की गई है। ऐसे संवेदनशील संस्थानों में बच्चों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि बालिका आवासीय विद्यालय में महिला कर्मचारियों की पर्याप्त एवं प्राथमिकता के आधार पर पदस्थापना की जानी चाहिए, ताकि छात्राओं को सुरक्षित एवं सहज वातावरण मिल सके और भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति को रोका जा सके।
नियमित स्वास्थ्य परीक्षण और निरीक्षण की मांग
तलांडी ने जिला प्रशासन से मांग की कि जिले के सभी स्कूलों, आश्रमों, छात्रावासों एवं पोटा केबिनों में बच्चों का नियमित स्वास्थ्य परीक्षण कराया जाए। साथ ही संबंधित अधिकारियों द्वारा इन संस्थानों का नियमित एवं औचक निरीक्षण किया जाए, ताकि व्यवस्थाओं की वास्तविक स्थिति सामने आ सके और किसी भी प्रकार की लापरवाही अथवा अनियमितता पर समय रहते कार्रवाई की जा सके।
उन्होंने कहा कि बच्चों की सुरक्षा, सम्मान और बेहतर भविष्य से किसी भी स्तर पर समझौता नहीं किया जाना चाहिए। प्रशासन को ऐसे मामलों में त्वरित, निष्पक्ष और कठोर कार्रवाई सुनिश्चित करनी चाहिए, ताकि पीड़ितों को न्याय मिले और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

