Homeछत्तीसगढ़*10 वर्षों से लगातार प्रतिमाएं बना रहे दुष्यंत देहारी, पूरे भोपालपटनम ब्लॉक...

*10 वर्षों से लगातार प्रतिमाएं बना रहे दुष्यंत देहारी, पूरे भोपालपटनम ब्लॉक की मांग अकेले कर रहे पूरी*,,,, ,,,,,,,,,,, तेजनारायण सिंह की रिपोर्ट,,,,,,,,

*10 वर्षों से लगातार प्रतिमाएं बना रहे दुष्यंत देहारी, पूरे भोपालपटनम ब्लॉक की मांग अकेले कर रहे पूरी*,,,,

,,,,,,,,,,, तेजनारायण सिंह की रिपोर्ट,,,,,,,,

*विरासत का हुनर: पिता से सीखी मूर्तिकला, अब दुष्यंत के हाथों आकार ले रहे विघ्नहर्ता*

*जगदलपुर पर निर्भरता खत्म; धरती माता की पूजा के बाद जंगल से मिट्टी लाकर शुरू होती है निर्माण प्रक्रिया*

भोपालपटनम। गणेश चतुर्थी पर्व को लेकर नगर व ग्रामीण क्षेत्रों में तैयारियां जोरों पर हैं। विघ्नहर्ता भगवान श्री गणेश की स्थापना के लिए श्रद्धालुओं में भारी उत्साह है। वहीं, भोपालपटनम के युवा मूर्तिकार दुष्यंत देहारी पिछले एक महीने से गणेश प्रतिमाओं को अंतिम रूप देने में दिन-रात जुटे हुए हैं। पर्व नजदीक आते ही उनकी कार्यशाला में रंग-रोगन और बारीक कारीगरी का काम तेजी से चल रहा है।

*10 वर्षों से अकेले संभाल रहे पूरे क्षेत्र की जिम्मेदारी*

युवा दुष्यंत देहारी पिछले 10 वर्षों से स्वयं गणेश प्रतिमाएं तैयार कर रहे हैं। वे छोटे से लेकर विशाल आकार तक की प्रतिमाएं बनाते हैं और पूरे ब्लॉक में गणेश उत्सव के लिए लगने वाली अधिकांश मांग को अकेले पूरा करते हैं।

*पिता से विरासत में मिली कला*

दुष्यंत ने यह कला अपने पिता भरत देहारी से सीखी है। लगभग 35-40 वर्ष पूर्व भरत देहारी एक शिक्षक के रूप में इस क्षेत्र में आए थे। उन्होंने यहां धार्मिक आयोजनों के लिए प्रतिमाएं बनाना शुरू किया। पिता के साथ काम करते-करते दुष्यंत ने भी मूर्ति निर्माण की बारीकियां सीखीं और अब इस कला को आधुनिक निखार के साथ आगे बढ़ा रहे हैं।

*बाहरी शहरों पर निर्भरता हुई खत्म*

स्थानीय निवासियों के अनुसार, पहले भोपालपटनम और आसपास के गांवों में प्रतिमाएं जगदलपुर से मंगवानी पड़ती थीं। देहारी परिवार द्वारा मूर्ति निर्माण कार्य शुरू करने से स्थानीय लोगों को बड़ी राहत मिली है। अब क्षेत्रवासियों को किसी भी धार्मिक आयोजन के लिए दूसरे शहरों का रुख नहीं करना पड़ता।

*परंपरा और आस्था: धरती माता की पूजा से शुरुआत*

दुष्यंत बताते हैं कि मूर्ति निर्माण केवल मिट्टी को आकार देना नहीं, बल्कि आस्था से जुड़ा कार्य है। जंगल से मिट्टी लाने से पहले धरती माता की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की जाती है। इसके बाद ही मिट्टी तैयार कर प्रतिमा निर्माण की प्रक्रिया शुरू होती है।

*14 सितंबर को गणेश चतुर्थी, तैयारियों को दिया जा रहा अंतिम रूप*

14 सितंबर को आयोजित होने वाले गणेश चतुर्थी पर्व के लिए अब कुछ ही दिन शेष हैं। दुष्यंत प्रतिमाओं के चेहरे, आभूषण और वस्त्रों पर रंग-रोगन व बारीक कारीगरी करने में जुटे हैं। उनके लिए यह कार्य केवल आजीविका का साधन नहीं, बल्कि पिता से मिली सांस्कृतिक विरासत को श्रद्धा और लगन के साथ सहेजने का संकल्प है।

आपकी राय

[poll id="2"]

- Advertisment -spot_img

राशिफल

आज का मौसम

क्रिकेट लाइव स्कोर

Most Popular

RELATED ARTICLES