* महानवमी मां सिद्धिदात्री की उपासना, विधि-विधान, हवन, कन्या पूजन और व्रत पारण की संपूर्ण जानकारी*
* नवरात्रि विशेष रिपोर्ट दीपक मरकाम*
19 अक्टूबर 2026
शारदीय नवरात्रि के पावन पर्व का अंतिम और अत्यंत महत्वपूर्ण दिन महानवमी का होता है। इस दिन जगत जननी आदिशक्ति मां दुर्गा के नौवें स्वरूप मां सिद्धिदात्री की विधिवत पूजा-अर्चना की जाती है। मान्यता है कि इनकी आराधना से भक्तों को सभी प्रकार की सिद्धियों, मोक्ष, सुख-समृद्धि और ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है।
पंचांग और शास्त्र सम्मत विधान के अनुसार आज की विशेष पूजा, हवन, भोग और कन्या पूजन से जुड़ी संपूर्ण जानकारी नीचे प्रस्तुत है:
1. आज का पंचांग एवं विशेष मुहूर्त ,
पंचांगीय गणना के अनुसार, इस वर्ष नवमी तिथि का प्रारंभ और पावन मुहूर्त इस प्रकार है:
* महानवमी तिथि एवं हवन का समय: आज सुबह से ही नवमी तिथि का पूर्ण प्रभाव है, जिसके चलते पूरे दिन हवन, पूजन और अनुष्ठान करना अत्यंत फलदायी रहेगा।
* ब्रह्म मुहूर्त: प्रातः 04:43 AM से 05:34 AM तक
* अमृत काल: सुबह 08:29 AM से 10:16 AM तक
* अभिजित मुहूर्त (सर्वश्रेष्ठ समय): पूर्वाह्न 11:43 AM से दोपहर 12:29 PM तक
* विजय मुहूर्त: दोपहर 02:00 PM से 02:45 PM तक
* विशेष ध्यान दें (राहुकाल): सुबह 07:50 AM से 09:15 AM के बीच राहुकाल रहेगा, इस दौरान कोई नया या मुख्य कार्य शुरू करने से बचें।
2. मां सिद्धिदात्री स्वरूप और रंग महत्व
* रूप व स्वभाव: मां सिद्धिदात्री कमल के आसन पर विराजमान हैं और उनके चार हाथों में गदा, चक्र, त्रिशूल और शंख सुशोभित है। यह अपने भक्तों को हर प्रकार के संताप और कष्ट से मुक्ति दिलाती हैं।
* विशेष रंग: आज के दिन बैंगनी या जामुनी , रंग के वस्त्र पहनना या इस रंग का प्रयोग पूजा में करना बहुत शुभ माना जाता है।
3. महानवमी पूजा-पाठ एवं हवन विधि ,
नवरात्रि का अनुष्ठान महानवमी के दिन हवन के बिना अधूरा माना जाता है। घर पर सरल विधि से हवन इस प्रकार करें:
* शुद्धिकरण: प्रातःकाल स्नानादि से निवृत्त होकर स्वच्छ वस्त्र धारण करें और माता के दरबार को गंगाजल से पवित्र करें।
* हवन कुंड की स्थापना: घर के ईशान कोण या सुरक्षित स्थान पर हवन कुंड (तांबे या लोहे का पात्र) रखें।
* अग्नि प्रज्वलन: आम की लकड़ी और कपूर की सहायता से पवित्र अग्नि प्रज्वलित करें।
* आहुति: शुद्ध घी, हवन सामग्री, काले तिल, जौ और शक्कर का मिश्रण तैयार करें। गणेश जी, नवग्रहों और “ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे स्वाहा” मंत्र का उच्चारण करते हुए माता को कम से कम 108 आहुतियां दें।
* पूर्णाहुति: अंत में सूखे नारियल (गोला) में घी भरकर, पान का पत्ता, लौंग और बताशा रखकर पूर्ण आहुति दें और माता की आरती उतारें।
4. कन्या पूजन और विशेष भोग,
* कन्या पूजन: महानवमी के पावन अवसर पर 2 वर्ष से लेकर 10 वर्ष तक की कन्याओं को मां दुर्गा का रूप मानकर उनके चरण धोए जाते हैं, माथे पर कुमकुम-अक्षत का तिलक लगाया जाता है और कलाई पर कलावा बांधा जाता है। साथ ही एक बटुक (बालक) को भैरव का रूप मानकर बैठाया जाता है।
* विशेष भोग: माता सिद्धिदात्री को हलवा, पूरी, काले चने और नारियल का भोग अत्यंत प्रिय है। यही प्रसाद कन्याओं को आदर सहित परोसा जाता है।
* उपहार व दक्षिणा: भोजन के बाद कन्याओं को अपनी श्रद्धा उपहार (जैसे फल, स्टेशनरी, चुनरी या दक्षिणा) देकर उनके चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लें।
5. नवरात्रि व्रत का पारण ,
जो श्रद्धालु नौ दिनों का व्रत रखते हैं, वे महानवमी की पूजा, हवन और कन्या पूजन संपन्न करने के बाद पारिवारिक परंपरा और पंचांग के अनुसार अपने व्रत का पारण (व्रत खोलना) करते हैं। कई परिवारों में दशमी तिथि यानी विजयादशमी के दिन भी पारण का विधान होता है।
विशेष संदेश: माता रानी की कृपा आप और आपके पूरे परिवार पर सदैव बनी रहे। आपके घर में सुख, शांति, समृद्धि और आरोग्य का वास हो—यही हमारी मंगलकामना है।

