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स्कूलों में धार्मिक थोपना बंद हो’: आदिवासी छात्र संगठन युवा प्रभाग सर्कल अध्यक्ष ,,,lसंजय सिंह सलाम।

स्कूलों में धार्मिक थोपना बंद हो’: आदिवासी छात्र संगठन युवा प्रभाग सर्कल अध्यक्ष ,,,lसंजय सिंह सलाम।

कोयलीबेडा़:-

छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा सरकारी स्कूलों में हिंदू प्रार्थनाओं को अनिवार्य बनाने वाले नए सर्कुल पर आदिवासी छात्र संगठन, युवा प्रभाग के सर्कल अध्यक्ष संजय सिंह सलाम ने कड़ा ऐतराज जताया है। सलाम ने इसे संवैधानिक मूल्यों और राज्य की धर्मनिरपेक्ष पहचान के खिलाफ एक कदम बताया है, जिससे आदिवासी समुदाय की सांस्कृतिक अस्मिता पर खतरा मंडरा रहा है।

सर्व आदिवासी समाज के सामने अपने साथियों के साथ मीडिया से बात करते हुए सलाम ने इस सर्कुलर को तत्काल वापस लेने की मांग की

“यह स्कूल है, मंदिर नहीं”: संवैधानिक मर्यादा पर सवाल

सलाम ने संविधान के अनुच्छेद 28 का हवाला देते हुए कहा कि यह राज्य द्वारा पूरी तरह से फंड किए जाने वाले शैक्षणिक संस्थानों में किसी भी तरह की धार्मिक शिक्षा को प्रतिबंधित करता है। उन्होंने सरकार को याद दिलाया कि सरकारी स्कूल सभी धर्मों और समुदायों के बच्चों के लिए हैं, न कि किसी एक विशेष धर्म के लिए। उन्होंने कहा, “जब हमें बच्चों में वैज्ञानिक सोच विकसित करने की जरूरत है, तब भाजपा सरकार उन्हें धार्मिक भावनाओं से भरने की कोशिश कर रही है।”

आदिवासी अस्मिता पर सीधा हमला

प्रदेश की 32 प्रतिशत आदिवासी आबादी पर इस फैसले के प्रभाव के बारे में चिंता व्यक्त करते हुए, सलाम ने स्पष्ट किया कि आदिवासी समुदाय की अपनी विशिष्ट जीवन शैली और उपासना पद्धतियां हैं, जो हिंदू आडंबरों से भिन्न हैं। “आदिवासी प्रकृति पूजक हैं, और हम पर कोई अन्य धार्मिक पद्धति थोपना हमारी विशिष्ट पहचान को प्रभावित करता है,” उन्होंने कहा।

विरोध की रणनीति: ग्राम सभा और कानूनी लड़ाई

विरोध की रणनीति के बारे में पूछे जाने पर, सलाम ने कहा कि आदिवासी समाज इस मुद्दे पर एकजुट है और विभिन्न स्तरों पर विरोध दर्ज कराएगा:

ग्राम सभा का प्रस्ताव (पेसा कानून): छत्तीसगढ़ के अनुसूचित क्षेत्रों में पेसा (PESA) कानून लागू है, जो ग्राम सभाओं को अपनी संस्कृति और परंपराओं के संरक्षण का विशेष अधिकार देता है। सलाम ने कहा कि ग्राम सभाएं इस सर्कुलर के खिलाफ आधिकारिक प्रस्ताव पास करके सरकार को भेजेंगी।

पारंपरिक नेतृत्व और सर्व आदिवासी समाज: समाज ‘सर्व आदिवासी समाज’ जैसी बड़ी संस्थाओं और पारंपरिक ग्राम प्रमुखों के माध्यम से सामूहिक बैठकें बुलाएगा।

कानूनी रास्ता: सलाम ने कहा कि यदि आवश्यक हुआ, तो आदिवासी समाज उच्च न्यायालय में जनहित याचिका (PIL) दायर करने से नहीं हिचकिचाएगा। उन्होंने राज्यपाल से भी अपील की कि वे अपने विशेष अधिकारों का प्रयोग करते हुए इस सर्कुलर को रद्द करें।

शिक्षा मंत्री को औपचारिक पत्र

सलाम ने शिक्षा मंत्री के नाम एक औपचारिक पत्र भी जारी किया है, जिसमें उन्होंने सर्कुलर को “छत्तीसगढ़ के व्यापक सामाजिक और संवैधानिक ढांचे के दृष्टिकोण से चिंताजनक” बताया है और इसे “तत्काल प्रभाव से वापस लेने” का आग्रह किया है। उन्होंने पत्र में लिखा है कि स्कूलों में केवल राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत जैसे सर्वमान्य राष्ट्रीय व प्रांतीय प्रतीकों को ही अनिवार्य रखा जाए।,,,,,

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