Saturday, April 18, 2026

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कब तक होगी अनदेखी, मलांजकुडुम जलप्रपात में ना सुरक्षा ना व्यवस्था, हर साल घट रही घटनाएं… दीपक मरकाम की रिपोर्ट,,,,,,,,,,,,

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कब तक होगी अनदेखी, मलांजकुडुम जलप्रपात में ना सुरक्षा ना व्यवस्था, हर साल घट रही घटनाएं…
दीपक मरकाम की रिपोर्ट,,,,,,,,,,,,

कांकेर ::::::: मलांजकुडुम जलप्रपात में सोमवार की शाम डूबे दोनो युवको का शव बरामद कर लिया गया है, एक युवक कुलेश्वर उइके का शव मंगलवार को बरामद किया गया था, जबकि दूसरे युवक सतेंद्र जैन का शव आज सुबह करीब 42 घन्टे बाद बरामद किया गया है।

इस बीच सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिला मुख्यालाय के इतने नजदीक होने के बाद भी यह जल प्रपात क्यों इस कदर उपेक्षा का शिकार है, कि यहां सुरक्षा और व्यव्स्था में नाम पर कार्य शून्य है।

जलप्रपात में बारिश के मौसम में बड़ी संख्या में लोग पहुचते है, जलप्रपात इस दौरान अपने सबाब पर होता है, तेज बहाव और बड़े बड़े चिकने चट्टानों के बीच लोग जाकर फ़ोटो खिंचने से भी बाज नहीं आते है, यही कारण है कि बीते 5 सालों में 4 लोगो ने यहां अपनी जान गंवाई और कई घायल भी हुए।

लेकिन स्थानीय प्रशासन ने इन घटनाओ से कोई सबक नही लिया और दो दिन पहले हुई घटना में दो परिवारों ने अपना चिराग खो दिया।

जिनके शव भी बड़ी मशक्कत के बाद मिल सके। जलप्रपात में बारिश के मौसम में बड़ी संख्या में लोगो के पहुचने के बाद भी प्रशासन ने यहां सुरक्षा व्यवस्था मुहैया करवाने की जरूरत नही समझी, यही कारण है कि लोग बेफिक्र होकर डेंजर जॉन तक जा पहुचते है और छोटी सी लापरवाही से अपनी जान गंवा देते है।

व्यवस्था के नाम पर कुछ भी नही,,,,,,,

कांकेर की शान कहे जाने वाले इस जलप्रपात में व्यवस्था के नाम पर कुछ भी नही है , आमाबेड़ा मुख्य मार्ग से कटकर जैसे ही जलप्रपात का मार्ग शुरू होता है, सड़के इस कदर खराब है कि चार पहिया वाहन से आप जलप्रपात तक पहुच ही नही सकेंगे।

करीब 3 साल पहले तत्कालीन कलेक्टर, विधायक पूरी प्रशासनिक टीम के साथ यहां पहुचे थे और जलप्रपात को सवारने की बात कही थी, लेकिन 3 साल में इसकी नींव तक नही रखी जा सकी ।

व्यवस्था और सुरक्षा के अभाव में युवाओं की मनमर्ज़ी
व्यवस्था के अभाव में अब लोगो का आना यहां पहले की तुलना में काफी कम हो चुका है, यही कारण है कि यह अब बस युवाओं का मस्ती का केंद्र बनकर रह गया है, युवा वर्ग पिकनिक मनाने यहां आते तो है लेकिन सुरक्षा व्यवस्था के अभाव में मनमर्ज़ी कर बैठते है और हादसों का शिकार हो जाते है।

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