Tuesday, May 12, 2026

UDYAM CG08D0001018

register form
Home Kanker अंतागढ़ अनुविभागीय अधिकारी (एस डी एम) का पद लंबे समय से रिक्त...

अंतागढ़ अनुविभागीय अधिकारी (एस डी एम) का पद लंबे समय से रिक्त होना क्षेत्र के प्रति प्रशासनिक उदासीनता का बेहतरीन उदाहरण,, अनूप नाग,,,,,,अंतागढ़ ब्यूरो मिथलेश उसेंडी की रिपोर्ट:-

0
61

अंतागढ़ अनुविभागीय अधिकारी (एस डी एम) का पद लंबे समय से रिक्त होना क्षेत्र के प्रति प्रशासनिक उदासीनता का बेहतरीन उदाहरण,, अनूप नाग,,,,,,अंतागढ़ ब्यूरो मिथलेश उसेंडी की रिपोर्ट:-

*अंतागढ़ परलकोट को जिला बनाने का सार्थक प्रयास करे*

अंतागढ़।। अंतागढ़ विधानसभा के पूर्व विधायक अनूप नाग ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा कि अंतागढ़ जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र में जहां लम्बे अरसे से एस.डी.एम जैसे महत्वपूर्ण पद का रिक्त होना क्षेत्र के प्रति प्रशासनिक उदासीनता का अच्छा उदाहरण इन दिनों देखने को मिल रहा है। उक्त महत्वपूर्ण पद का फिलहाल अंतागढ़ के अतिरिक्त कलेक्टर प्रभार मे है, उक्त वक्तव्य है अनूप नाग ने कहा है कि जिले में अंतागढ़ क्षेत्र को प्रशासन कितना महत्व देती है, ये इसी से स्पष्ट हो गया कि अंतागढ़ अनुभाग मुख्यालय में अनुविभागीय अधिकारी (एस.डी.एम.) जैसे महत्वपूर्ण पद पर दूसरे अधिकारी को प्रभार मे देकर काम चलाया जा रहा है। जबकि इस ओर स्थानीय सांसद और विधायक कितना गंभीर है इसका अच्छा उदाहरण है जबकि वर्तमान में धान खरीदी, मतदाता पुनरीक्षण एवं अन्य जनता एवं प्रशासन से जुड़े कई कार्य चल रहा है। ऐसे में अंतागढ़ अनुविभाग मुख्यालय में अनुविभागीय अधिकारी (एस.डी.एम.) अलग से पदस्थ होना अति आवश्यक है। इसी तरह कुछ अन्य विभागों का भी यही हाल है यदि शासन प्रशासन निर्वाचित जन प्रतिनिधियों के बात को महत्व नहीं दे रही है तो मेरा व्यक्तिगत अनुरोध है कि एक की जगह दो निम्बू काटकर पद की नियुक्ति कराना चाहिए। पूर्व विधायक अनूप नाग ने प्रेष विज्ञप्ति के माध्यम से आगे कहा है कि कुछ दिन पूर्व क्षेत्रीय विधायक विक्रम उसेण्डी स्थानीय प्रतिनिधि मण्डल के साथ दिल्ली जाकर परिवहन मंत्री से भेंट मुलाकात कर सड़क, पुलिया की मांग की है इसके लिए साधुवाद, परन्तु उक्त रोड, पुलिया के निर्माण क्षेत्रवासियों को इंतजार रहेगा। क्योंकि कोटरी नदी के बेचा घाट में पुलिया निर्माण का प्रयास मेरे द्वारा भी किया गया था तात्कालिन कांग्रेस की सरकार के सी.एम. भूपेश बघेल के द्वारा वित्तीय स्वीकृती प्रदान किया गया था। कार्य एजेंसी सेतू निगम रायपुर को बनाया गया था तथा 16 महीने में निर्माण कार्य पूर्ण करने के निर्देश जारी किया गया था तथा इसके लिए सी.जी.आर.आई.डी.सी.एल. भी जारी की गई थी, परन्तु उन दिनों में यह क्षेत्र अतिसंवेदनशील होने से सड़क, पुलिया निर्माण प्रारंभ नही किया जा सका। करीब डेढ़ वर्षों तक अनजान क्षेत्रों से तथा नारायणपुर, दुर्गुकोन्दल जैसे क्षेत्रों से भोले भाले ग्रामवासियों के द्वारा विरोध कराया जाता रहा। वर्षा ऋतु आ जाने एवं आचार सांहिता लग जाने के कारण कांग्रेस शासन काल में पुलिया निर्माण नहीं किया जा सका। आगे अनूप नाग यह भी बात प्रेष विज्ञप्ति में उल्लेख किए है कि विधायक, सांसद तथा साथ गए स्थानीय जनप्रतिनिधियों के द्वारा आमाबेड़ा और पंखाजूर को पृथक विकासखण्ड बनाने का कोई प्रयास नहीं किया गया। इन्ही के द्वारा विकासखण्ड बनाने की बात लम्बे अरसे भोली भाली जनता को झूठी तसल्ली देते रहते है। तसल्ली देना बंद करें और भविष्य में विकासखण्ड आमाबेड़ा एवं पखांजूर को पृथक से विकासखण्ड का दर्जा दिलाकर अंतागढ-परलकोट नाम से जिला बनाने का सार्थक प्रयास करें।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here