*ग्रामसभा के बाद एसडीएम को सौंपा गया ज्ञापन, तहसीलदार पर PESA उल्लंघन का आरोप*,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,* बीजापुर जिले के भोपाल पटनम से दीपक मरकाम की खबर*
*गोटाईगुड़ा में पारंपरिक ग्रामसभा के बाद ग्रामीणों ने की नोटिस निरस्त करने और दोषी अधिकारी पर कार्रवाई की मांग*
बीजापुर, भोपाल पटनम, दिनांक 12 मई 2026
भोपालपटनम : मंगलवार को ब्लॉक के ग्राम गोटाईगुड़ा में आयोजित पारंपरिक ग्रामसभा के पश्चात ग्रामीणों ने एसडीएम भोपालपटनम को ज्ञापन सौंपकर तहसीलदार पर PESA कानून के उल्लंघन, ग्रामसभा के अधिकारों को कुचलने और जनप्रतिनिधियों को डराने-धमकाने का आरोप लगाया।
ज्ञापन की प्रतिलिपि राज्यपाल, मुख्य सचिव, आदिम जाति विभाग, बस्तर संभाग आयुक्त, जिला अनुसूचित जनजाति आयोग, सांसद और विधायक को भी प्रेषित की गई है।
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि ग्रामसभा गोटाईगुड़ा ने खसरा नंबर 61/12 की 0.400 हेक्टेयर भूमि को “आदिवासी सामाजिक भवन” हेतु सुरक्षित करने का निर्णय लिया था, जो PESA नियम 2022 की धारा-4 के अंतर्गत वैधानिक है। इसके बावजूद तहसीलदार भोपालपटनम द्वारा 29 अप्रैल 2026 को ग्रामसभा पदाधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी कर इस निर्णय को “शासकीय बाधा” बताया गया।
ज्ञापन में कहा गया है कि यह कार्रवाई संविधान के अनुच्छेद 244(1) और पांचवीं अनुसूची की भावना के विपरीत है।
ग्रामीणों ने यह भी आपत्ति जताई कि नोटिस में छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम 1965 का उल्लेख करते हुए ग्रामसभा प्रतिनिधियों पर कार्रवाई की चेतावनी दी गई, जबकि सरपंच, पटेल और माटी पुजारी शासकीय कर्मचारी नहीं हैं।
ग्रामीणों ने इसे प्रशासनिक तानाशाही बताते हुए संबंधित तहसीलदार के विरुद्ध विभागीय जांच और निलंबन की मांग की है। साथ ही नोटिस को तत्काल निरस्त करने तथा अनुसूचित क्षेत्रों में पदस्थ अधिकारियों के लिए “संवैधानिक साक्षरता” कार्यशाला आयोजित करने की मांग भी उठाई गई।
ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि यदि मामले में शीघ्र न्याय नहीं मिला तो बस्तर संभाग की ग्रामसभाएं लोकतांत्रिक विरोध प्रदर्शन के लिए बाध्य होंगी।
इस दौरान माटी पुजारी शिवराम, पटेल दशरथ, सरपंच सरिता गोटे, एटी शंकर, पारेट बापू, तोडेम चन्द्रैया, वासम राकेश, कोरम लक्ष्मीनारायण सहित 150 से अधिक ग्रामीण उपस्थित रहे।






