*साय सरकार द्वारा लागू नयी तेंदूपत्ता नीति से ग्रामीण नाराज,भाजपा की नीति उद्योगपतियों और पूंजीपतियों को आर्थिक रूप से मजबूत करने की-बसंत ताटी*,,,,,,,,,,,,,,,,,,,*दीपक मरकाम की रिपोर्ट*
बीजापुर,भोपालपटनम
प्रदेश की साय सरकार द्वारा लागू नयी तेंदूपत्ता नीति से ग्रामीण आदिवासी खासे नाराज हैं।
प्रदेश की भाजपा सरकार गरीब आदिवासियों की हितैषी नहीं है। भाजपा की नीति उद्योगपतियों और पूंजीपतियों को आर्थिक रूप से मजबूत करने की है। इस सरकार को गरीब मजदूर आदिवासियों की बिल्कुल चिंता नहीं है।
यह कहना है, पूर्व जिला पंचायत सदस्य एवं कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता बसंत राव ताटी का। कांग्रेस नेता ताटी के अनुसार पूर्व में तेंदूपत्ता संग्रहण कार्य में ठेकेदारी प्रथा लागू होने से,संबंधित ठेकेदारों द्वारा बूटा कटाई से लेकर तेंदूपत्ता संग्रहण तक सभी कार्य तय समय सीमा में कर लिया जाता था, जिससे तेंदूपत्ता संग्रहण कार्य में लगे गरीब आदिवासियों को अच्छी खासी आमदनी हो जाया करती थी, लेकिन अब प्रदेश की भाजपा सरकार द्वारा तेंदूपत्ता नियमों में बदलाव कर उनका सरकारीकरण किया गया है, जिसका सीधा असर तेंदूपत्ता संग्राहकों की आमदनी पर पड़ रहा है।
तेंदूपत्ता की नयी नीति लागू होने के बाद वन विभाग द्वारा इस कार्य को संपादित करने में कोई विशेष रुचि नहीं ली जा रही है।मौसम का हवाला देकर तेंदूपत्ता संग्रहण कार्य भी विभाग द्वारा विलंब से प्रारंभ किया गया है, ताकि इस कार्य में लगे मजदूरों को तेंदूपत्ता संग्रहण करने का अवसर कम मिल सके।
पूर्व जिला पंचायत सदस्य ताटी का कहना है कि गरीब आदिवासी तेंदूपत्ता सीजन का इस उम्मीद के साथ बेसब्री से इंतजार करते हैं कि इस सीजन में तेंदूपत्ता संग्रहण कार्य से हुई आमदनी से वर्ष भर परिवार के खर्चों की पूर्ति कर लेंगे,किंतु साय सरकार की नयी नीति ने तेंदूपत्ता संग्राहकों की आशाओं पर पानी फेरने का काम किया है।






