* साहस, पराक्रम और शांति की अधिष्ठाता मां चंद्रघंटा की पूजा आज, जानिए पूर्ण विधि-विधान, मंत्र और प्रिय भोग* *नवरात्रि विशेष रिपोर्ट दीपक मरकाम*
शारदीय नवरात्रि का पावन पर्व पूरे देश में पूरी श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जा रहा है। नवरात्रि के तीसरे दिन मां दुर्गा के तृतीय स्वरूप मां चंद्रघंटा की आराधना की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां चंद्रघंटा का यह स्वरूप परम शांतिदायक, कल्याणकारी और भक्तों के सभी संकटों को हरने वाला है। उनके मस्तक पर घंटे के आकार का अर्धचंद्र सुशोभित है, इसीलिए इन्हें ‘चंद्रघंटा’ कहा जाता है।
आइए जानते हैं आज के दिन की विशेष पूजा-विधि, मंत्र, भोग और इसका क्या है खास आध्यात्मिक महत्व।
मां चंद्रघंटा का स्वरूप और महत्व
मां चंद्रघंटा का वाहन सिंह (शेर) है और उनके दस हाथ हैं, जिनमें अस्त्र-शस्त्र सुशोभित रहते हैं। उनके गले में हमेशा घंटे की गूंज बनी रहती है जो नकारात्मक शक्तियों और बाधाओं को दूर रखती है। मान्यता है कि इनकी उपासना करने से भक्तों में असीम साहस, आत्मबल और निर्भयता की प्राप्ति होती है।
चरणबद्ध पूजा-विधि (Puja Vidhi)
* प्रातः स्नान और संकल्प:
सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि से निवृत्त होकर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। आज के दिन लाल या सुनहरे रंग के वस्त्र पहनना अत्यंत शुभ माना जाता है। इसके बाद माता का ध्यान कर व्रत और पूजा का संकल्प लें।
* चौकी की सजावट और स्थापना:
पूजा घर की अच्छी तरह साफ-सफाई करें। यदि घर में घटस्थापना (कलश) की गई है, तो उसकी नियमित पूजा जारी रखें। माता चंद्रघंटा की प्रतिमा या तस्वीर को चौकी पर स्थापित करें।
* षोडशोपचार पूजन:
* माता को गंगाजल छिड़ककर शुद्ध करें।
* उन्हें रोली, कुमकुम, अक्षत (चावल) और सुगंधित पुष्प अर्पित करें।
* मां को लाल या श्वेत-पीले पुष्प विशेष प्रिय हैं, अतः ताजे फूल अर्पित करें।
* धूप-दीप और आरती:
शुद्ध घी का दीपक और धूप प्रज्वलित करें। इसके बाद परिवार के साथ मां दुर्गा और मां चंद्रघंटा की आरती गाएं।
मां का विशेष भोग (Bhog)
मां चंद्रघंटा को दूध और दूध से बनी चीजों का भोग अति प्रिय है।
* मुख्य भोग: आप माता को केसरयुक्त चावल की खीर, दूध की मिठाई (जैसे पेड़ा, बर्फी) या मखाने की खीर का भोग लगा सकते हैं।
* भोग में मिश्री और पंचमेवा (ड्राई फ्रूट्स) शामिल करना भी बहुत फलदायी माना गया है।
अमोघ मंत्र और स्तुति
पूजा के दौरान एकाचित होकर मां के इस मूल मंत्र का कम से कम 108 बार (एक माला) जाप अवश्य करें:
* मूल मंत्र:*
* ॐ देवी चन्द्रघण्टायै नमः॥*
* प्रार्थना मंत्र:*
* पिण्डजप्रवरारूढ़ा चण्डकोपास्त्रकैर्युता। प्रसादं तनुते मह्यं चन्द्रघण्टेति विश्रुता॥*
*विशेष संदेश*
तृतीय नवरात्रि की यह साधना मानसिक शांति, एकाग्रता और आंतरिक शत्रुओं पर विजय पाने के लिए सर्वश्रेष्ठ मानी जाती है। मां चंद्रघंटा की कृपा से आपके जीवन में भी साहस, सुख-समृद्धि और आरोग्य का संचार हो—ऐसी मंगल कामना है।
*जय माता दी, 🌺 💐 🌺 🙏 🙏 🙏 🙏*

