*शक्ति स्वरूपा माँ शैलपुत्री की पूजा से हुई शारदीय नवरात्रि की अलौकिक शुरुआत* *नवरात्रि विशेष रिपोर्ट दीपक मरकाम*
*जानिए घटस्थापना, विधि-विधान और पंचांग*
देशभर में आज आस्था और उल्लास के साथ गूंजे माता के जयकारे, जानिए पहले दिन का पूरा महत्व और अनुष्ठान विधि,
भारतीय संस्कृति में सनातन धर्म के सबसे बड़े और पावन पर्वों में से एक शारदीय नवरात्रि का शुभारंभ हो चुका है।
आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से शुरू होने वाले इस नौ दिवसीय अनुष्ठान के पहले दिन माँ दुर्गा के प्रथम स्वरूप माँ शैलपुत्री की अराधना की जाती है।
पर्वतराज हिमालय की पुत्री होने के कारण इन्हें ‘शैलपुत्री’ कहा गया है।
आज पहले दिन देश भर के मंदिरों और घरों में घटस्थापना (कलश स्थापना) के साथ माँ की पूजा-अर्चना का दौर शुरू हो गया है।
पंचांग एवं घटस्थापना मुहूर्त
* तिथि: आश्विन शुक्ल पक्ष, प्रतिपदा तिथि
* नक्षत्र: हस्त / चित्रा (पंचांगीय गणना के अनुसार)
* घटस्थापना का महत्व: नवरात्रि के पहले दिन शुभ मुहूर्त में कलश स्थापित करके वरुण देव, समस्त देवी-देवताओं और नौ माताओं का आह्वान किया जाता है। यह घर में सकारात्मक ऊर्जा, सुख और समृद्धि का संचार करता है।
माँ शैलपुत्री का स्वरूप और महिमा,
माँ शैलपुत्री का वाहन वृषभ (नंदी) है और इनके दाहिने हाथ में त्रिशूल तथा बाएं हाथ में कमल का फूल सुशोभित रहता है।
यह देवी प्रकृति, स्थिरता, धैर्य और असीम शक्ति की प्रतीक हैं।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जो भक्त सच्चे मन से पहले दिन माँ शैलपुत्री की पूजा करता है, उसे जीवन में दृढ़ता, आरोग्य और मोक्ष की प्राप्ति होती है।
विधि-विधान: ऐसे करें माँ शैलपुत्री की पूजा,
* ब्रह्म मुहूर्त और संकल्प: सुबह जल्दी उठकर स्नानादि से निवृत्त होकर स्वच्छ वस्त्र धारण करें और माँ के व्रत व पूजन का संकल्प लें।
* घटस्थापना (कलश स्थापना):
* एक साफ चौकी पर लाल वस्त्र बिछाकर माँ शैलपुत्री की तस्वीर या मूर्ति स्थापित करें।
* षोडशोपचार पूजन: माँ को रोली, अक्षत, सिंदूर, लाल फूल, धूप, दीप और नैवेद्य (भोग) अर्पित करें।
* विशेष भोग: माँ शैलपुत्री को गाय के घी का भोग अतिप्रिय माना जाता है।
मान्यता है कि घी का भोग लगाने से आरोग्य की प्राप्ति होती है।
* मंत्र जाप और आरती: पूजा के दौरान माँ के बीज मंत्र का जाप करें और अंत में कपूर जलाकर आरती करें।
माँ शैलपुत्री का मंत्र एवं प्रार्थना
ॐ ऐं ह्रीं क्लीं शैलपुत्र्यै नमः।
वन्दे वाञ्छितलाभाय चन्द्रार्धकृतशेखराम्
वृषारूढाम शूलधरां शैलपुत्रीं यशस्विनीम्॥

