*शक्ति की उपासना का महापर्व: आज से शुरू हुई शारदीय नवरात्रि, जानिए पंचांग, घटस्थापना मुहूर्त और संपूर्ण विधि-विधान*
*नव रात्रि विशेष रिपोर्ट दीपक मरकाम*
भारतीय सनातन संस्कृति में शक्ति और साधना के सबसे बड़े पर्व शारदीय नवरात्रि का शुभारंभ हो चुका है।
हिंदू पंचांग के अनुसार, आज आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि और वर्ष 2026 के इस पावन पर्व का प्रथम दिन है।
नवरात्रि के इस पहले दिन मां दुर्गा के प्रथम स्वरूप माता शैलपुत्री की पूजा-अर्चना की जा रही है।
आइए जानते हैं पंचांग के हिसाब से इस बार की तिथियों, घटस्थापना के शुभ मुहूर्तों और पूजा की पूरी विधि के बारे में,
पंचांग और तिथि विवरण
* माह और पक्ष: आश्विन मास, शुक्ल पक्ष,
* प्रतिपदा तिथि आरंभ: 10 अक्टूबर 2026 की रात्रि 09:19 बजे से,
* प्रतिपदा तिथि समापन: 11 अक्टूबर 2026 की रात्रि 09:30 बजे तक,
* उदया तिथि के अनुसार: नवरात्रि और घटस्थापना मुख्य रूप से 11 अक्टूबर 2026 (रविवार) को मान्य है।,
* माता का आगमन: इस वर्ष रविवार के दिन नवरात्रि का आरंभ होने के कारण माता दुर्गा का आगमन ‘हाथी’ पर हुआ है, जिसे शास्त्रों में बेहद शुभ, उत्तम वर्षा और सुख-समृद्धि का प्रतीक माना गया है।
घटस्थापना (कलश स्थापना) के शुभ मुहूर्त
हिंदू धर्म में नवरात्रि के पहले दिन घटस्थापना का विशेष महत्व है।
आज कलश स्थापित करने के लिए प्रमुख मुहूर्त इस प्रकार हैं:
* प्रातःकाल मुख्य मुहूर्त: सुबह 06:19 बजे से सुबह 10:12 बजे तक (पूजा के लिए यह सबसे लंबी और उत्तम अवधि है)
* अभिजीत मुहूर्त (दोपहर का शुभ समय): सुबह 11:44 बजे से दोपहर 12:31 बजे तक (यदि आप सुबह ना कर पाएं, तो इस दौरान कलश स्थापित कर सकते हैं),
घटस्थापना और पूजा की संपूर्ण विधि-विधान
* सफाई और मंडप सजावट: सबसे पहले अपने घर के मंदिर या पूजा स्थल की अच्छी तरह साफ-सफाई करें। गंगाजल छिड़ककर पवित्र करें।
* जौ (खेती) बोना: एक साफ मिट्टी के बर्तन या वेदी में पवित्र मिट्टी बिछाएं और उसमें जौ के बीज बोएं।
इसमें प्रतिदिन हल्का जल छिड़कना होता है।
* कलश स्थापना: तांबे, पीतल या मिट्टी के कलश (घड़े) में शुद्ध जल भरें। उसमें एक सिक्का, सुपारी, अक्षत (चावल) और दूर्वा डालें।
* आम के पत्ते और नारियल: कलश के मुख पर आम या अशोक के 5 पत्ते लगाएं। इसके बाद कलश के ऊपर लाल कपड़े में लिपटा हुआ जटावाला नारियल रखें। इस तैयार कलश को जौ वाले मिट्टी के पात्र के ठीक पास स्थापित करें।
* माता का आह्वान: अब गणेश जी और मां शैलपुत्री का ध्यान करते हुए कलश पर रोली, अक्षत और पुष्प अर्पित करें।
* अखंड दीप प्रज्वलन: यदि आपके यहां परंपरा है, तो पूजा स्थल पर घी या तेल का अखंड दीपक प्रज्वलित करें।
* प्रथम स्वरूप की पूजा: मां शैलपुत्री को सफेद वस्तुएं
शारदीय नवरात्रि के पहले दिन यानी आज माँ दुर्गा के प्रथम स्वरूप माँ शैलपुत्री को मुख्य रूप से गाय के शुद्ध घी का भोग लगाया जाता है।
इसके अलावा आप माता को उनकी पसंद की निम्नलिखित चीजें भी अर्पित कर सकते हैं:
* सफेद वस्तुएं व मिठाइयाँ: चूँकि माँ शैलपुत्री को सफेद रंग अतिप्रिय है, इसलिए आप उन्हें दूध और चावल से बनी खीर, सफेद बर्फी, पेड़ा, या मावा (खोया) से बनी शुद्ध सात्विक मिठाइयों का भोग लगा सकते हैं।
* फल और मिश्री: माता को ताजे फल और मिश्री का भोग भी बेहद प्रिय है।
* विशेष फूल: पूजा के दौरान माँ शैलपुत्री को चमेली का फूल अवश्य अर्पित करें, यह उन्हें बहुत पसंद है।
उनके प्रिय भोग अर्पित करें, धूप-दीप दिखाएं और दुर्गा चालीसा या ‘ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चै’ मंत्र का जाप करें।
माता रानी की कृपा से आप सभी के जीवन में सुख, शांति, आरोग्य और ऐश्वर्य का संचार हो।
*जय माता दी! 💐🙏🙏🙏*

