*शारदीय नवरात्रि पंचमी पर मां स्कंदमाता की आराधना और दीप यज्ञ का रहस्य व संपूर्ण विधि-विधान**नवरात्रि विशेष रिपोर्ट दीपक मरकाम*
शारदीय नवरात्रि का पावन पर्व हिंदू धर्म में अदम्य शक्ति, भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा का प्रतीक है। नवरात्रि के हर दिन का अपना एक विशिष्ट महत्व है, लेकिन पंचमी तिथि का विशेष स्थान है क्योंकि यह दिन जगत जननी के मातृ स्वरूप यानी मां स्कंदमाता को समर्पित होता है। इसी पावन दिन पर ‘दीप यज्ञ’ करने की प्राचीन और दिव्य परंपरा रही है।
आइए जानते हैं कि नवरात्रि के पांचवें दिन मां स्कंदमाता की पूजा का क्या विधान है और इसी विशिष्ट दिन पर दीप यज्ञ क्यों किया जाता है, इसका संपूर्ण विवरण।
1. नवरात्रि के पांचवें दिन ही ‘दीप यज्ञ’ क्यों किया जाता है? (आध्यात्मिक और धार्मिक कारण)
नवरात्रि की पंचमी तिथि को दीप यज्ञ के आयोजन के पीछे गहरा वैज्ञानिक और तांत्रिक-आध्यात्मिक रहस्य छिपा है:
* मां स्कंदमाता और सूर्य मंडल की अधिष्ठात्री: ज्योतिष और पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, मां स्कंदमाता सूर्य मंडल की अधिष्ठात्री देवी मानी जाती हैं। उनके शरीर का तेज सूर्य के समान ही दैदीप्यमान है। चूंकि अग्नि और प्रकाश (दीपक) सूर्य का ही लघु रूप हैं, इसलिए पंचमी तिथि पर दीप यज्ञ करने से सीधे तौर पर सूर्य की ऊर्जा और मां स्कंदमाता की दिव्य शक्ति का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
* ज्ञान और चेतना का विस्तार: मां स्कंदमाता अपने भक्तों को अज्ञान रूपी अंधकार से निकालकर ज्ञान के प्रकाश की ओर ले जाती हैं। दीप यज्ञ के माध्यम से प्रज्वलित होने वाली हजारों ज्योतियां साधಕ के भीतर छिपी नकारात्मकता को जलाकर उसकी चेतना को जाग्रत करती हैं।
* कार्तिकेय (स्कंद) की ऊर्जा का प्रतीक: मां स्कंदमाता की गोद में उनके पुत्र भगवान कार्तिकेय (स्कंद) बाल रूप में विराजित हैं, जो देवताओं के सेनापति और महापराक्रमी योद्धा हैं। युद्ध कौशल, तेज और वीरता के प्रतीक स्कंद की ऊर्जा को पुष्ट करने और जीवन के हर क्षेत्र में विजय पाने के लिए पंचमी तिथि पर अग्नि (दीप यज्ञ) की आहुति व प्रकाश का विशेष महत्व है।
2. पंचमी तिथि का पूजा पंचांग और शुभ स्वरूप
* तिथि: आश्विन मास, शुक्ल पक्ष, पंचमी तिथि
* स्वरूप: मां स्कंदमाता (कमल के आसन पर विराजमान और अपनी गोद में कुमार कार्तिकेय को लिए हुए)
* प्रिय रंग: पीला (इस दिन पीले वस्त्र पहनना और पीली वस्तुओं का दान/भोग अत्यंत फलदायी होता है)
* विशेष भोग: केले का फल, केसर युक्त खीर या बेसन के मिष्ठान्न
* मंत्र:
‘सिंहासनगता नित्यं पद्माश्रितकरद्वया। शुभदास्तु सदा देवी स्कन्दमाता यशस्विनी॥’
3. दीप यज्ञ की संपूर्ण विधि-विधान और सामग्री
पंचमी तिथि के दिन दीप यज्ञ को घर के पूजा स्थल पर विधिपूर्वक इस प्रकार संपन्न किया जा सकता है:
आवश्यक सामग्री:
* शुद्ध गाय का घी या तिल का तेल
* लंबी या गोल रुई की बत्तियां
* मुख्य स्थापना हेतु एक बड़ा दीपक तथा दीप यज्ञ के लिए 11, 21 या 51 छोटे दीपक
* पूजा थाली, रोली, अक्षत, कलावा, जनेऊ, और पीले पुष्प (गेंदे के फूल)
* धूप, कपूर, फल और नैवेद्य
चरण-बद्ध पूजा और दीप यज्ञ विधि:
* शुद्धिकरण: पंचमी के दिन ब्रह्म मुहूर्त में स्नानादि करके स्वच्छ और पीले वस्त्र धारण करें। अपने घर के मंदिर को गंगाजल से शुद्ध कर लें।
* चौकी की स्थापना: एक साफ लकड़ी की चौकी पर पीला वस्त्र बिछाकर मां स्कंदमाता की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें।
* संकल्प: हाथ में जल और अक्षत लेकर मां का स्मरण करते हुए परिवार की सुख-शांति, आरोग्यता और दीप यज्ञ का संकल्प लें।
* मां स्कंदमाता का पूजन: सबसे पहले मां को रोली, अक्षत, पीले फूल और वस्त्र अर्पित करें। इसके बाद उन्हें उनके प्रिय भोग (केले या खीर) का नैवेद्य लगाएं।
* दीप यज्ञ का अनुष्ठान:
* सबसे पहले मां के आगे घी का मुख्य दीपक जलाएं।
* इसके बाद, मुख्य दीप के चारों ओर या एक व्यवस्थित कतार में छोटे-छोटे दीपों (11 या 21) को सजाएं।
* सभी दीपों में घी और बत्ती डालकर उन्हें एक-एक करके प्रज्वलित करें। यह दीपों की श्रृंखला ही ‘दीप यज्ञ’ का रूप ले लेती है।
* मंत्र जाप व आरती: दीप प्रज्वलित करने के बाद मां स्कंदमाता के मूल मंत्र ‘ॐ देवी स्कन्दमातायै नमः’ का कम से कम एक माला (108 बार) जाप करें। अंत में कर्पूर जलाकर मां की भव्य आरती करें।
4. दीप यज्ञ के दौरान ध्यान रखने योग्य मुख्य नियम
* पवित्रता और अनुशासन: दीप यज्ञ के दौरान घर का वातावरण शांत, सात्विक और पूरी तरह पवित्र होना चाहिए। इस दिन तामसिक भोजन (मांस-मदिरा) का सेवन पूर्णतः वर्जित है।
* दिशा का महत्व: दीपों की लौ हमेशा पूर्व या उत्तर दिशा की ओर रखें, इसे दीर्घायु और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है।
* अखंडता और सुरक्षा: यदि आप बड़े पैमाने पर दीप यज्ञ कर रहे हैं, तो अग्नि सुरक्षा का विशेष ध्यान रखें। साथ ही, संकल्पित दीपों को बीच में बुझने न दें, आवश्यकतानुसार उनमें घी या तेल डालते रहें।
मां स्कंदमाता की कृपा और दीप यज्ञ के इस दिव्य प्रकाश से आपके जीवन में सुख, शांति, यश और ऐश्वर्य का संचार हो।

