विद्यार्थियों ने मिसाइल मैन के जीवन, संघर्ष और राष्ट्र निर्माण में योगदान को किया याद

बीजापुर, 15 अक्टूबर 2026। जनपद प्राथमिक शाला बीजापुर एवं जनपद माध्यमिक शाला बीजापुर के संयुक्त तत्वावधान में गुरुवार को भारत के पूर्व राष्ट्रपति एवं महान वैज्ञानिक डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम की जयंती उत्साहपूर्वक मनाई गई। इस अवसर पर विद्यार्थियों एवं शिक्षकों ने उनके छायाचित्र पर माल्यार्पण कर पुष्प अर्पित किए तथा दीप प्रज्ज्वलित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी।

कार्यक्रम के दौरान संस्था के विद्यार्थियों विनोद तेलम, संदीप कुड़ियम, अनुज उईका, विकास कुड़ियम, कुमारी प्रियंका साहू, कुमारी आमना खातून, हुसैन खान, लव्यांश एंड्रिक, कुमारी अश्वनी फूलमाद्री, रिजवान बेग, आशीष कोरसा एवं प्रदीप वाचम सहित अन्य विद्यार्थियों ने डॉ. कलाम के जीवन, उपलब्धियों और राष्ट्र के प्रति उनके योगदान पर प्रकाश डाला। विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक उनके प्रेरणादायी जीवन से जुड़ी जानकारी साझा की।

संघर्ष से सफलता तक का प्रेरणादायी सफर
कार्यक्रम में शिक्षक कैलाश रामटेके ने विद्यार्थियों को डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम के जीवन परिचय और वैज्ञानिक उपलब्धियों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि डॉ. कलाम का जन्म 15 अक्टूबर 1931 को तमिलनाडु के रामेश्वरम में एक साधारण परिवार में हुआ था। अपनी मेहनत, लगन और दृढ़ संकल्प के बल पर उन्होंने विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल कीं।

उन्होंने बताया कि डॉ. कलाम ने भारत के अंतरिक्ष एवं रक्षा कार्यक्रमों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। स्वदेशी उपग्रह प्रक्षेपण यान एसएलवी-3 के विकास में उनके योगदान से भारत ने वर्ष 1980 में रोहिणी उपग्रह को पृथ्वी की कक्षा में स्थापित करने में सफलता प्राप्त की। इसके बाद उन्होंने रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) तथा भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
भारत के मिसाइल विकास कार्यक्रम में उनकी अग्रणी भूमिका के कारण उन्हें ‘मिसाइल मैन ऑफ इंडिया’ के नाम से जाना गया। अग्नि और पृथ्वी जैसी मिसाइलों के विकास में उनके योगदान ने देश की रक्षा क्षमता को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वर्ष 1998 के पोखरण परमाणु परीक्षणों में भी उन्होंने अहम भूमिका निभाई।
देश के 11वें राष्ट्रपति बनकर युवाओं को किया प्रेरित
शिक्षक रामटेके ने बताया कि डॉ. कलाम वर्ष 2002 से 2007 तक भारत के 11वें राष्ट्रपति रहे। राष्ट्रपति पद पर रहते हुए भी वे विद्यार्थियों और युवाओं से संवाद करना बेहद पसंद करते थे। वे युवाओं को बड़े सपने देखने, वैज्ञानिक सोच विकसित करने और कठिन परिश्रम के माध्यम से अपने लक्ष्य हासिल करने के लिए प्रेरित करते थे।
डॉ. कलाम का सपना वर्ष 2020 तक भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाने का था। उन्होंने अपने विचारों और लेखन के माध्यम से देश के युवाओं को राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भागीदारी निभाने का संदेश दिया। उनका जीवन इस बात का उदाहरण है कि दृढ़ इच्छाशक्ति, अनुशासन और निरंतर प्रयास से कठिन से कठिन लक्ष्य भी हासिल किए जा सकते हैं।
डॉ. कलाम का निधन 27 जुलाई 2015 को मेघालय की राजधानी शिलांग में भारतीय प्रबंधन संस्थान में विद्यार्थियों को व्याख्यान देते समय हुआ। अंतिम समय तक विद्यार्थियों के बीच रहकर ज्ञान साझा करना उनके शिक्षा और युवा पीढ़ी के प्रति समर्पण को दर्शाता है।
राष्ट्र निर्माण में योगदान देने का लिया संदेश
कार्यक्रम के अंत में शिक्षक कैलाश रामटेके ने विद्यार्थियों से डॉ. कलाम के जीवन से प्रेरणा लेकर अपने लक्ष्य निर्धारित करने, मेहनत करने, वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाने और देश की प्रगति में योगदान देने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि प्रत्येक विद्यार्थी को यह विचार करना चाहिए कि वह अपने ज्ञान, प्रतिभा और कार्यों के माध्यम से समाज तथा राष्ट्र के विकास में किस प्रकार सहभागी बन सकता है।
कार्यक्रम को सफल बनाने में संस्था की शिक्षिका सुश्री रजनी लता सिंह एवं शिक्षक सुरेश कुमार नरेटी का विशेष योगदान रहा। कार्यक्रम का संचालन छात्र नायक राजू गटपल्ली ने किया।
प्रेषक:
जनपद माध्यमिक शाला, बीजापुर, छत्तीसगढ़।

