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*विभाग का नाम बदलने के विरोध में सर्व आदिवासी समाज ने सौंपा ज्ञापन*

*विभाग का नाम बदलने के विरोध में सर्व आदिवासी समाज ने सौंपा ज्ञापन*

 

*15 दिन में जवाब देने की मांग, निर्णय वापस नहीं लेने पर आंदोलन की चेतावनी*

 

बीजापुर 16 अक्टूबर 2026

 

आदिम जाति कल्याण विभाग का नाम बदलकर जनजातीय कार्य विभाग किए जाने के निर्णय के विरोध में शुक्रवार को सर्व आदिवासी समाज ने एसडीएम राकेश साहू के माध्यम से मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। समाज ने विभाग का पुराना नाम यथावत रखने और नाम परिवर्तन के औचित्य को सार्वजनिक करने की मांग की है।

सर्व आदिवासी समाज के जिला अध्यक्ष जग्गूराम तेलामी के नेतृत्व में सौंपे गए ज्ञापन में समाज ने कहा कि आदिवासी समाज के कल्याण, शिक्षा और विकास के उद्देश्य से स्थापित विभाग के नाम से ‘कल्याण’ और ‘विकास’ जैसे शब्द हटाने से समाज में असंतोष है। समाज ने सरकार से निर्णय के पीछे का कारण स्पष्ट करने और इस संबंध में आदिवासी प्रतिनिधियों व सामाजिक संगठनों से चर्चा करने की मांग की है।

ज्ञापन में आश्रम शालाओं और छात्रावासों की व्यवस्था, शिक्षा की गुणवत्ता, स्वास्थ्य, रोजगार, कुपोषण उन्मूलन तथा पांचवीं अनुसूची, पेसा कानून और वनाधिकार अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन का मुद्दा भी उठाया गया। समाज ने विभागीय बदलावों, बजट और प्रशासनिक जिम्मेदारियों का विवरण सार्वजनिक करने की मांग की है।

सर्व आदिवासी समाज ने ज्ञापन प्राप्त होने के 15 दिनों के भीतर लिखित जवाब देने की मांग करते हुए चेतावनी दी कि संतोषजनक जवाब नहीं मिलने और नाम परिवर्तन वापस लेने की दिशा में कार्रवाई नहीं होने पर चरणबद्ध आंदोलन किया जाएगा। समाज ने स्पष्ट किया कि उसका विरोध किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि आदिवासी समाज की पहचान, गरिमा और संवैधानिक अधिकारों से जुड़ा है।

इस दौरान शंकर कुडियम, कुंवर सिंह मज्जी, पांडु तेलम, मंगू लेकम, मासा लेकम, बुधराम लेकम, सु ताती, लक्ष्मण मिच्चा, लक्ष्मण कड़ती, गणपत यालम, जितेंद्र हेमला, सुखराम, कश्मीर एक्का, मुन्ना मिच्चा, गुड्डू मोडियाम, राकेश तेलम, विनोद काका सहित अन्य सामाजिक पदाधिकारी मौजूद थे।

*विभाग के नाम परिवर्तन का आधार स्पष्ट करे सरकार: सर्व आदिवासी समाज*

 

सरकार बताए कि ‘आदिम जाति कल्याण विभाग’ का नाम बदलकर ‘जनजातीय कार्य विभाग’ करने का निर्णय किन प्रशासनिक, नीतिगत अथवा वैधानिक आधारों पर लिया गया है। नाम परिवर्तन से आदिवासी समाज को क्या ठोस लाभ मिलेगा और इस निर्णय से पहले समाज के प्रतिनिधियों एवं सामाजिक संगठनों से विचार-विमर्श क्यों नहीं किया गया? सर्व आदिवासी समाज ने सरकार से नाम परिवर्तन का औचित्य सार्वजनिक करने और पूर्व नाम ‘आदिम जाति कल्याण विभाग’ को यथावत रखने की मांग की है।

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