PV ऐप की अव्यवहारिक प्रक्रिया से किसानों के हितों पर मंडरा रहा खतरा, पटवारी संघ ने उठाए तकनीकी एवं व्यवहारिक सवाल,,,,,,,,,,,,,,,
,,,,,,,, तेजनारायण सिंह की रिपोर्ट,,,,,,,,
बीजापुर,,,,,,,,
राजस्व पटवारी संघ छत्तीसगढ़ ने फसल भौतिक सत्यापन (PV) ऐप की वर्तमान प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा है कि बिना पर्याप्त तकनीकी आधार एवं नक्शा बटांकन के खसरे की डिजिटल मैपिंग कराने की प्रक्रिया भविष्य में किसानों के लिए बड़ी परेशानी का कारण बन सकती है। संघ का कहना है कि यह मामला केवल पटवारियों की कार्य-सुविधा का नहीं, बल्कि किसानों के खेतों की सही पहचान, राजस्व अभिलेखों की शुद्धता एवं धान खरीदी से जुड़े उनके आर्थिक हितों का भी है।
संघ ने बताया कि पारंपरिक गिरदावरी व्यवस्था में पटवारी मौके पर जाकर फसल का निरीक्षण करते थे तथा संबंधित खसरे में फसल की जानकारी दर्ज करते थे। बाद में डिजिटल क्रॉप सर्वे (DCS) लागू किया गया, जिसमें प्रारंभिक रूप से उन्हीं खसरों को शामिल किया गया जिनका नक्शा बटांकन डिजिटल सर्वर पर उपलब्ध था। बाद में कुछ और खसरे DCS में जोड़े गए, लेकिन अनेक खसरों की मैपिंग एक ही स्थान पर कई खसरों को सम्मिलित करके की गई। इसके बावजूद बड़ी संख्या में खसरे DCS से बाहर रह गए।
इन्हीं शेष खसरों को डिजिटल सर्वेक्षण में शामिल करने के लिए PV ऐप लाया गया। इस ऐप में ऐसे खसरे शामिल हैं जिनका नक्शा बटांकन उपलब्ध नहीं है। इन खसरों की पहचान के लिए पटवारी को मौके पर जाकर खेत के चारों कोनों की फोटो लेनी होती है, जिसके आधार पर Polygon तैयार कर DCS सर्वर में भेजा जाता है। इसके बाद संबंधित खसरे में लगी फसल का पुनः सर्वेक्षण प्राइवेट सर्वेयरों से कराया जाता है।
संघ के अनुसार वर्तमान समय में खेतों में खरीफ की फसल खड़ी है। अनेक स्थानों पर जलभराव, मेड़ों की खराब स्थिति, पहुंच मार्ग का अभाव, तार की घेराबंदी एवं अन्य बाधाओं के कारण खेतों के चारों कोनों तक पहुंचना अत्यंत कठिन है। सबसे बड़ी समस्या यह है कि जिन खसरों का नक्शा बटांकन ही उपलब्ध नहीं है, उनकी सही पहचान किसान के सहयोग के बिना करना भी मुश्किल है। छत्तीसगढ़ के अलग-अलग जिलों की भौगोलिक एवं कृषि परिस्थितियां भी भिन्न हैं, ऐसे में एक समान प्रक्रिया सभी क्षेत्रों में लागू करना व्यवहारिक नहीं है।
संघ ने यह भी कहा कि पटवारियों द्वारा इन कठिनाइयों को सामने रखकर विरोध दर्ज कराने के बाद अब PV ऐप का कार्य प्राइवेट सर्वेयरों के माध्यम से कराया जा रहा है। जबकि संबंधित गांव के राजस्व अभिलेखों, खसरा नंबरों एवं खेतों की वास्तविक सीमाओं की जानकारी के बिना बाहरी सर्वेयरों द्वारा खसरे की सही पहचान करना एक गंभीर चुनौती है। जब स्थानीय राजस्व अभिलेखों से परिचित पटवारियों को ही बिना नक्शा बटांकन के खसरे की पहचान में कठिनाई हो रही है, तो बाहरी सर्वेयरों द्वारा तैयार किए गए Polygon की शुद्धता एवं प्रमाणिकता कैसे सुनिश्चित होगी?
संघ ने आशंका जताई है कि गलत पहचान के आधार पर तैयार किया गया Polygon एक किसान के खेत को दूसरे किसान के खसरे में प्रदर्शित कर सकता है। इससे खेत की वास्तविक सीमा, रकबे एवं फसल संबंधी डिजिटल रिकॉर्ड में विसंगतियां उत्पन्न हो सकती हैं।
इस पूरे मामले का सबसे गंभीर पहलू धान खरीदी से जुड़ा हुआ है। केंद्र शासन की व्यवस्था के संबंध में प्राप्त निर्देशों के अनुसार धान खरीदी DCS सर्वेक्षण में शामिल खसरों के आधार पर की जानी है। ऐसी स्थिति में यदि प्राइवेट सर्वेयरों द्वारा गलत खसरे की पहचान कर Polygon तैयार किया जाता है और उसके आधार पर DCS में गलत फसल दर्ज हो जाती है, तो वास्तविक रूप से धान की फसल उगाने वाला किसान भी अपनी उपज बेचने में परेशानी का सामना कर सकता है। आखिरकार तकनीकी सर्वेक्षण की त्रुटियों का खामियाजा किसान क्यों भुगते?
संघ ने सवाल उठाया है कि गलत Polygon अथवा गलत फसल सर्वेक्षण के कारण यदि कोई किसान धान बेचने से वंचित होता है तो उसकी जिम्मेदारी किसकी होगी? क्या ऐसी स्थिति में किसानों के नुकसान की भरपाई की कोई व्यवस्था है? बिना नक्शा बटांकन के खसरे की सही भौगोलिक सीमा निर्धारित करने एवं तैयार Polygon की प्रमाणिकता सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी किसकी होगी?
राजस्व पटवारी संघ छत्तीसगढ़ ने स्पष्ट किया है कि पटवारी डिजिटल गिरदावरी अथवा आधुनिक तकनीक के विरोधी नहीं हैं। विरोध केवल ऐसी अव्यवहारिक प्रक्रिया एवं दबावपूर्ण क्रियान्वयन का है, जिसमें तकनीकी कमियों और मैदानी परिस्थितियों की अनदेखी की जा रही है।
संघ ने मांग की है कि PV ऐप की प्रक्रिया की तकनीकी एवं व्यवहारिक समीक्षा कराई जाए। जिन खसरों का नक्शा बटांकन उपलब्ध नहीं है, उनके लिए पहले उचित नक्शा एवं मैपिंग की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। Geo Referencing Sheet एवं Map Overlap Sheet उपलब्ध कराई जाए। चारों कोनों की फोटो लेने की अनिवार्यता के स्थान पर Google Map अथवा अन्य उपयुक्त डिजिटल माध्यम से खेत की वास्तविक सीमाओं के अनुसार Polygon तैयार करने की सुविधा दी जाए। साथ ही, विपरीत परिस्थितियों में सर्वेक्षण नहीं कर पाने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था उपलब्ध कराई जाए तथा प्राइवेट सर्वेयरों द्वारा किए गए सर्वेक्षण का स्थानीय राजस्व अभिलेखों के आधार पर सत्यापन सुनिश्चित किया जाए।
संघ ने कहा कि PV ऐप की तकनीकी एवं व्यवहारिक कमियों को दूर किए बिना सर्वेक्षण का कार्य दबावपूर्वक कराना न तो उचित है और न ही किसानों के हित में है।
संघ का स्पष्ट मत है कि यह लड़ाई पटवारियों की सुविधा मात्र की नहीं, बल्कि किसानों के खेतों की सही पहचान, राजस्व अभिलेखों की शुद्धता एवं उनकी मेहनत से उपजाई गई फसल के उचित अधिकार की रक्षा की लड़ाई है।
डिजिटल व्यवस्था का उद्देश्य किसानों को सुविधा देना होना चाहिए, न कि तकनीकी त्रुटियों के कारण उन्हें अपनी ही उपज बेचने के लिए परेशान होना पड़े।

