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*शारदीय नवरात्रि के पंचमी तिथि पर ,करें मां स्कंदमाता की आराधना, जानिए संपूर्ण पूजा विधि, मंत्र, भोग और शुभ रंग** नवरात्रि विशेष रिपोर्ट दीपक मरकाम*

*शारदीय नवरात्रि के पंचमी तिथि पर ,करें मां स्कंदमाता की आराधना, जानिए संपूर्ण पूजा विधि, मंत्र, भोग और शुभ रंग** नवरात्रि विशेष रिपोर्ट दीपक मरकाम*

शारदीय नवरात्रि का पांचवां दिन ममता, करुणा और स्नेह की मूर्ति मां स्कंदमाता को समर्पित होता है। भगवान कार्तिकेय (स्कंद कुमार) की माता होने के कारण देवी के इस पांचवें स्वरूप को ‘स्कंदमाता’ कहा जाता है। मान्यता है कि जो भक्त सच्चे मन से मां स्कंदमाता की पूजा करता है, उसे बल, ज्ञान, मोक्ष और संतान सुख की प्राप्ति होती है। मां अपने भक्तों पर ठीक वैसे ही ममता बरसाती हैं जैसे एक मां अपनी संतान पर लुटाती है।

आइए जानते हैं पांचवें दिन की संपूर्ण पूजा विधि, प्रिय भोग, मंत्र और अन्य महत्वपूर्ण जानकारियां:

*मां स्कंदमाता का स्वरूप और धार्मिक महत्व*

* स्वरूप: मां स्कंदमाता कमल के आसन पर विराजमान रहती हैं, इसी वजह से इन्हें ‘पद्मासना देवी’ भी कहा जाता है। इनकी गोद में बाल रूप में भगवान कार्तिकेय (स्कंद) विराजमान हैं। माता की चार भुजाएं हैं—ऊपर की एक भुजा में उन्होंने भगवान स्कंद को पकड़ा हुआ है, एक भुजा में कमल का फूल है, दूसरी भुजा वरमुद्रा में है और नीचे वाले हाथ में भी उन्होंने कमल का पुष्प धारण किया हुआ है। इनका वाहन सिंह (शेर) है।

*दिन का विशेष रंग और वस्त्र *

* शुभ रंग: नवरात्रि के पांचवें दिन पीला रंग पहनना अत्यंत शुभ और मंगलकारी माना जाता है। पीला रंग ऊर्जा, प्रसन्नता और सकारात्मकता का प्रतीक है। पूजा के दौरान पीले वस्त्र धारण करना और पीले फूलों का प्रयोग करना श्रेष्ठ फल देता है।

*मां स्कंदमाता की संपूर्ण पूजा विधि*

* स्नान और शुद्धि: ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नानादि से निवृत्त होकर स्वच्छ या पीले रंग के वस्त्र पहनें।

* पूजा स्थल की सफाई: मंदिर या पूजा स्थान को गंगाजल छिड़क कर पवित्र करें।

* चौकी स्थापना: यदि घर में कलश स्थापना की है तो उसकी पूजा करने के बाद चौकी पर मां स्कंदमाता की तस्वीर या मूर्ति स्थापित करें।

* पंचोपचार/षोडशोपचार पूजा:*

* मां को पीले फूल (विशेषकर कमल या गुलाब) अर्पित करें।

* रोली, अक्षत, कुमकुम, सिंदूर और श्रृंगार का सामान चढ़ाएं।

* भोग अर्पण: मां को प्रसाद स्वरूप केला या बेसन के लड्डू, केसर की खीर अथवा कोई भी पीली मिठाई और पान-सुपारी का बीड़ा अर्पित करें।

* मंत्र जाप और आरती: घी का दीपक और धूप जलाकर मां के मंत्रों का जाप करें, दुर्गा सप्तशती या दुर्गा चालीसा का पाठ करें और अंत में श्रद्धापूर्वक आरती संपन्न करें।

*चमत्कारी मंत्र एवं स्तुति*

* प्रधान मंत्र:

ॐ देवी स्कन्दमातायै नमः

* शालोक / ध्यान मंत्र:

सिंहासनगता नित्यं पद्माश्रितकरद्वया।

शुभदास्तु सदा देवी स्कन्दमाता यशस्विनी,

* प्रार्थना मंत्र:

या देवी सर्वभू‍तेषु माँ स्कंदमाता रूपेण संस्थिता।

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

*मां का प्रिय भोग*

* मां स्कंदमाता को केला अति प्रिय है। भोग में केला अवश्य शामिल करें। इसके अलावा आप दूध से बनी खीर या अन्य पीले मिष्ठान का भोग भी लगा सकते हैं। पूजा के बाद प्रसाद को परिवार के सभी सदस्यों में बांटें।

*पूजा का विशेष लाभ*

संतान प्राप्ति की कामना रखने वाले दंपत्तियों या संतान के सुखी जीवन और उन्नति के लिए मां स्कंदमाता की आराधना अत्यंत फलदायी मानी गई है। इनकी कृपा से भक्तों के सभी संकट दूर होते हैं और घर में सुख-शांति व समृद्धि का वास होता है।

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