Homeबस्तर संभागग्राम बढ़ानजी खासपारा में बाढ़ प्रभावित परिवारों से मिले संतु कश्यप, लगभग...

ग्राम बढ़ानजी खासपारा में बाढ़ प्रभावित परिवारों से मिले संतु कश्यप, लगभग 65 परिवारों पर बाढ़ की मार

किसी के मकान गिरे, तो किसी की फसल बर्बाद; किसानों को प्रति हेक्टेयर मात्र ₹8,000 मुआवजा मिलने की बात पर उठे सवाल

बस्तर। ग्राम बढ़ानजी खासपारा में बाढ़ से प्रभावित ग्रामीणों की समस्याओं और नुकसान का जायजा लेने के लिए बस्तर ग्रामीण जिला अध्यक्ष संतु कश्यप, सचिव हरिराम कश्यप एवं परमेश्वर भारद्वाज ने गांव का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने बाढ़ प्रभावित परिवारों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनीं और बाढ़ से हुए नुकसान की जानकारी ली।

दौरे के दौरान ग्रामीणों ने बताया कि गांव के लगभग 65 परिवार बाढ़ से प्रभावित हुए हैं। बाढ़ के कारण किसी का मकान क्षतिग्रस्त होकर गिर गया, तो किसी किसान की मेहनत से तैयार की गई धान की फसल बर्बाद हो गई। कई परिवारों के सामने अब घर की मरम्मत, परिवार के भरण-पोषण और अगली फसल की तैयारी का संकट खड़ा हो गया है।

ग्रामीणों ने बताया कि बाढ़ से हुए फसल नुकसान के लिए किसानों को प्रति हेक्टेयर मात्र ₹8,000 मुआवजा दिए जाने की बात सामने आ रही है। ऐसे में किसानों के सामने सवाल है कि इतनी कम राशि से वे अगली फसल की तैयारी कैसे करेंगे, खेती के लिए लिया गया कर्ज कैसे चुकाएंगे और अपने परिवार का भरण-पोषण कैसे करेंगे?

₹8,000 प्रति हेक्टेयर में किसान कैसे उबरेंगे बाढ़ की तबाही से?

बाढ़ से प्रभावित किसानों का कहना है कि खेतों में पानी भरने और फसल खराब होने से उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है। किसानों के लिए खेती ही आजीविका का प्रमुख साधन है। ऐसे में फसल बर्बाद होने के बाद उन्हें आर्थिक सहायता की आवश्यकता है, ताकि वे दोबारा खेती शुरू कर सकें।

वहीं, जिन परिवारों के मकान बाढ़ के कारण क्षतिग्रस्त हुए हैं, उनके सामने रहने और घर की मरम्मत कराने की गंभीर समस्या है। ऐसे परिवारों को भी नुकसान के आकलन के आधार पर उचित सहायता मिलनी चाहिए।

संतु कश्यप ने प्रशासन से की उचित मुआवजे की मांग

बस्तर ग्रामीण जिला अध्यक्ष संतु कश्यप ने कहा कि बाढ़ प्रभावित परिवारों की समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए प्रशासन को वास्तविक नुकसान का आकलन करना चाहिए। जिन किसानों की फसल बर्बाद हुई है, उनके खेतों का निष्पक्ष सर्वे कर नियमानुसार उचित मुआवजा दिया जाए। जिन ग्रामीणों के मकान गिरे या क्षतिग्रस्त हुए हैं, उन्हें भी पात्रता के अनुसार राहत राशि उपलब्ध कराई जाए।

उन्होंने कहा कि प्राकृतिक आपदा से प्रभावित ग्रामीण पहले ही आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं। ऐसे समय में प्रशासन की जिम्मेदारी है कि वह प्रभावित परिवारों तक समय पर राहत पहुंचाए। किसानों को ऐसी सहायता मिलनी चाहिए, जिससे वे अगली फसल की तैयारी कर सकें और अपने परिवार को इस संकट से बाहर निकाल सकें।

उन्होंने प्रशासन से मांग की कि ग्राम बढ़ानजी खासपारा के सभी प्रभावित परिवारों का निष्पक्ष सर्वे कराया जाए तथा कोई भी पात्र परिवार राहत और मुआवजे से वंचित न रहे।

ग्रामीणों ने बताई अपनी पीड़ा

ग्राम दौरे के दौरान स्थानीय ग्रामीणों ने बाढ़ से हुए नुकसान की जानकारी साझा की और अपनी समस्याओं से प्रतिनिधिमंडल को अवगत कराया। ग्रामीणों का कहना है कि मकान और फसल को हुए नुकसान के कारण उनके सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। उन्होंने प्रशासन से मांग की कि प्रभावित परिवारों की स्थिति को देखते हुए उन्हें उचित राहत और मुआवजा दिया जाए।

इस दौरान स्थानीय ग्रामीण मोटू भारद्वाज, भागीरथी भारद्वाज, दामोदर भारद्वाज, भवानी, परमेश्वर, दुशासन, हीरामनी, फारसू भारद्वाज सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे।

आपकी राय

[poll id="2"]

- Advertisment -spot_img

राशिफल

आज का मौसम

क्रिकेट लाइव स्कोर

Most Popular

RELATED ARTICLES