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*मोहला—क्या मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी में ‘बेअसर’ हो गया है सूचना का अधिकार? 30 दिन का कानून, महीनों का इंतजार!RTI की अनदेखी या प्रशासनिक लापरवाही? सूचना के अधिकार पर उठ रहे गंभीर सवाल!”*

मनीष कौशिक

मोहला—लोकतंत्र में सूचना का अधिकार (RTI) आम नागरिक का सबसे बड़ा कानूनी हथियार माना जाता है। इसी कानून के दम पर सरकारी कामकाज में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की व्यवस्था बनाई गई। लेकिन जिला मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी में कई विभागों में आरटीआई आवेदनों के समयबद्ध निराकरण को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।जिले में ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जिनमें निर्धारित समय-सीमा बीत जाने के बाद भी आवेदकों को जानकारी का इंतजार करना पड़ा। कई लोगों को प्रथम अपील और फिर द्वितीय अपील तक की प्रक्रिया अपनानी पड़ी। इससे यह सवाल उठ रहा है कि आखिर सूचना का अधिकार कानून का पालन किस स्तर तक सुनिश्चित हो रहा है।आरटीआई अधिनियम के अनुसार सामान्य स्थिति में 30 दिनों के भीतर सूचना उपलब्ध कराना अनिवार्य है। इसके बावजूद यदि आवेदनों का समय पर निराकरण नहीं होता, तो नागरिकों का कानून पर भरोसा प्रभावित हो सकता है।प्रशासनिक जानकारों का कहना है कि समय पर सूचना उपलब्ध कराना केवल कानूनी दायित्व ही नहीं, बल्कि सुशासन की पहचान भी है। यदि विभाग समय-सीमा का पालन करें तो अपीलों की संख्या कम होगी, पारदर्शिता बढ़ेगी और जनता का विश्वास मजबूत होगा।उठ रहे हैं बड़े सवाल क्या जिले के सभी विभाग आरटीआई अधिनियम का पूरी तरह पालन कर रहे हैं? कितने आवेदन 30 दिनों के भीतर निराकृत हुए और कितने लंबित हैं?लंबित मामलों की समीक्षा कौन कर रहा है?क्या जन सूचना अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की कोई प्रभावी व्यवस्था है?सूचना का अधिकार केवल एक आवेदन नहीं, बल्कि नागरिकों का वैधानिक अधिकार है। ऐसे में समयबद्ध सूचना उपलब्ध कराना हर विभाग की जिम्मेदारी है। यदि कहीं देरी हो रही है, तो उसके कारणों की समीक्षा और सुधार की आवश्यकता है।

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