चौपाटी में प्रभावितों के साथ धरना, कलेक्ट्रेट एवं भाजपा प्रदेश अध्यक्ष-विधायक किरण देव के कार्यालय तक पैदल मार्च; व्यक्तिगत क्षति के आवेदन सहित ज्ञापन सौंपा।

विशेष राहत पैकेज, वास्तविक नुकसान का मुआवजा और किसानों की राहत की मांग; सरकार को 30 दिन का अल्टीमेटम।

जगदलपुर, 5 नवंबर 2026।
बस्तर बाढ़ पीड़ितों को वास्तविक नुकसान के आधार पर मुआवजा एवं विशेष राहत पैकेज दिलाने की मांग को लेकर आज बस्तर अधिकार मुक्ति मोर्चा एवं जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) के जिला पदाधिकारियों ने प्रदेश उपाध्यक्ष एवं मुख्य संयोजक नवनीत चाँद के नेतृत्व में जगदलपुर चौपाटी (फूड कोर्ट) में एक दिवसीय धरना दिया। इसके बाद प्रभावित परिवारों के साथ कलेक्ट्रेट एवं भाजपा प्रदेश अध्यक्ष तथा जगदलपुर विधायक श्री किरण देव के कार्यालय तक पैदल मार्च कर व्यक्तिगत क्षति के आवेदनों सहित ज्ञापन सौंपा।

भाजपा सरकार से सीधा सवाल
नवनीत चाँद ने कहा कि भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एवं जगदलपुर विधायक श्री किरण देव ने स्वयं 1 अक्टूबर 2026 को मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर बस्तर के बाढ़ प्रभावितों के लिए विशेष राहत पैकेज की मांग की थी। लेकिन अब तक उस मांग पर शासन का कोई ठोस निर्णय अथवा विशेष पैकेज की स्वीकृति सार्वजनिक नहीं हुई है। सवाल है कि जब सत्तारूढ़ दल के प्रदेश अध्यक्ष के पत्र पर ही निर्णय स्पष्ट नहीं है, तो आम बाढ़ पीड़ितों की सुनवाई कब होगी?
उन्होंने कहा कि कांग्रेस के पूर्व शासनकाल में भी बस्तर की बाढ़ एवं जल निकासी की समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं हो सका। अब भाजपा सरकार को भी केवल आश्वासन नहीं, ठोस कार्रवाई से जवाब देना होगा।
बाढ़ प्रभावितों की 10 प्रमुख मांगें
1. बस्तर के लिए विशेष बाढ़ राहत एवं पुनर्वास पैकेज स्वीकृत किया जाए।
2. पूर्ण क्षतिग्रस्त मकानों पर ₹5 लाख एवं आंशिक क्षति पर ₹1 लाख विशेष सहायता दी जाए।
3. किसानों को कृषि ऋण माफी अथवा ₹62,000 प्रति एकड़ विशेष फसल मुआवजा मिले।
4. बाढ़ में मृत व्यक्तियों के परिवारों को ₹25 लाख सहायता एवं एक पात्र सदस्य को सरकारी नौकरी हेतु विशेष नीति बने।
5. प्रभावित परिवारों की उपस्थिति में संयुक्त टीम द्वारा निष्पक्ष पुनः सर्वेक्षण कराया जाए।
6. ओडिशा के खाटीगुड़ा बांध के जलप्रवाह, डिस्चार्ज रिकॉर्ड एवं चेतावनी व्यवस्था की स्वतंत्र जांच हो।
7. जिला आपदा प्रबंधन एवं राहत वितरण का उच्चस्तरीय ऑडिट हो।
8. जगदलपुर के पिछले 10 वर्षों के ड्रेनेज एवं निर्माण कार्यों का तकनीकी-वित्तीय ऑडिट हो।
9. इंद्रावती नदी के बाढ़ क्षेत्र, ग्रीन बेल्ट एवं प्राकृतिक जल निकासी मार्गों की जांच कर स्थायी समाधान बने।
10. मुख्यमंत्री, संबंधित मंत्रियों, सांसद-विधायकों, प्रशासन एवं प्रभावित प्रतिनिधियों की सर्वदलीय बैठक हो।
30 दिन में लिखित निर्णय नहीं तो जनआंदोलन
धरने एवं पैदल मार्च में प्रभावित परिवारों के व्यक्तिगत नुकसान के आवेदन प्रस्तुत किए गए। संगठन ने प्रत्येक आवेदन का पंजीयन, स्थलीय सत्यापन एवं पात्रतानुसार मुआवजे की मांग की।
नवनीत चाँद ने सरकार को 30 दिन का समय देते हुए कहा कि इस अवधि में विशेष पैकेज, मुआवजा, कृषि राहत एवं पुनर्वास पर लिखित निर्णय और विभागवार कार्रवाई प्रतिवेदन सार्वजनिक किया जाए। अन्यथा प्रभावित गांवों, पंचायतों एवं वार्डों को जोड़कर चरणबद्ध लोकतांत्रिक जनआंदोलन किया जाएगा।
उन्होंने कहा, “बस्तर की जनता को भाजपा और कांग्रेस की राजनीतिक बयानबाजी नहीं, वास्तविक मुआवजा और स्थायी समाधान चाहिए। भाजपा अपने प्रदेश अध्यक्ष के पत्र पर जवाब दे और कांग्रेस अपने शासनकाल की जवाबदेही स्वीकार करे। अब बस्तर की जनता को सरकार से लिखित जवाब चाहिए।”
हमारी मांग स्पष्ट है—
बस्तर को विशेष राहत पैकेज चाहिए।
बाढ़ पीड़ितों को वास्तविक नुकसान का मुआवजा चाहिए।
किसानों को फसल क्षति की भरपाई चाहिए।
सरकार को 30 दिन में लिखित जवाब देना होगा।
आंदोलन का नेतृत्व:
नवनीत चाँद
प्रदेश उपाध्यक्ष – जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे)
मुख्य संयोजक – बस्तर अधिकार मुक्ति मोर्चा।
बस्तर अधिकार मुक्ति मोर्चा एवं जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) के जिला पदाधिकारी तथा बाढ़ प्रभावित परिवार आंदोलन में शामिल रहे।राम नाथ नेगी जी बस्तर संभाग महामंत्री
रैमोन मड़कामी दंतेवाड़ा जिला अध्यक्ष
कुरसो मौर्य सचिन
लकमा कोर्राम महासचिव
रामेश किरंदुल मंडल अध्यक्ष,ग्रामीण जिला अध्यक्ष संतु कश्यप चित्रकूट विधानसभा अध्यक्ष कमल बघेल उपाध्यक्ष पाकलु कश्यप ब्लॉक उपाध्यक्ष सूरज कश्यप सचिव हरि राम कश्यप बलि मंडावी ग्रामीण राजकुमार भारद्वाज परमेश्वर भारद्वाज गणेश नाग धारेश्वरप्रतीक जॉन, हिमांशु आनंद, धन सिंह बघेल, ओम मरकाम, गोपाल कश्यप, मेहताब सिंह, आकाश जॉन, रामू नाथ, चेतू राम बघेल, महेश कश्यप, नूरी जोशी, मधु साहू, संगीता सोनी, सुशीला नाग, नीमा नाग, आदि कार्यकर्ता एवं बाढ़ प्रभावित जन उपस्थित थे

