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*फंदा मुक्त इंद्रावती की ओर मजबूत कदम: एंटी-स्नेयर एवं टाइगर मॉनिटरिंग पर एक दिवसीय कार्यशाला*

*फंदा मुक्त इंद्रावती की ओर मजबूत कदम: एंटी-स्नेयर एवं टाइगर मॉनिटरिंग पर एक दिवसीय कार्यशाला*

 

*लगभग 100 वन अधिकारियों एवं मैदानी कर्मचारियों को दिया गया वैज्ञानिक निगरानी और स्नेयर पहचान का प्रशिक्षण*

 

बीजापुर, 21 सितम्बर 2026

वन्यजीव संरक्षण, अवैध फंदों (स्नेयर) की रोकथाम तथा बाघों की वैज्ञानिक एवं प्रभावी निगरानी को मजबूत करने के उद्देश्य से इंद्रावती टाइगर रिजर्व, बीजापुर एवं नोवा नेचर वेलफेयर सोसायटी के संयुक्त तत्वावधान में बीजापुर में एंटी-स्नेयर एवं टाइगर मॉनिटरिंग कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला का आयोजन फील्ड डायरेक्टर इंद्रावती टाइगर रिजर्व श्री उत्तम कुमार गुप्ता तथा डिप्टी डायरेक्टर श्री सुमेध संजय सुरवाडे के पर्यवेक्षण एवं मार्गदर्शन में किया गया।

 

*फंदों की पहचान और रोकथाम पर विशेष जोर*

 

कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य इंद्रावती टाइगर रिजर्व को स्नेयर मुक्त बनाने की दिशा में एंटी-स्नेयर वॉक को अधिक प्रभावी एवं वैज्ञानिक बनाना था। प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को वन क्षेत्रों में अवैध फंदों की पहचान, संभावित स्नेयर क्षेत्रों का चिन्हांकन, फंदों के संकेतों की पहचान, सर्च तकनीक, आवश्यक सुरक्षा सावधानियों तथा मैदानी स्तर पर डेटा संकलन एवं दस्तावेजीकरण की जानकारी दी गई।

 

प्रतिभागियों को एंटी-स्नेयर वॉक की वैज्ञानिक प्रक्रिया से अवगत कराते हुए बताया गया कि नियमित एवं व्यवस्थित निगरानी के माध्यम से वन क्षेत्रों में अवैध गतिविधियों और वन्यजीवों के लिए संभावित खतरों की समय रहते पहचान की जा सकती है।

 

*बाघ मॉनिटरिंग की वैज्ञानिक तकनीकों का प्रशिक्षण*

 

कार्यशाला में बाघों की वैज्ञानिक निगरानी के लिए अपनाए जाने वाले विभिन्न ट्रैकिंग एवं मॉनिटरिंग प्रोटोकॉल पर भी प्रशिक्षण दिया गया। इसमें टाइगर इकोलॉजी, पगमार्क एवं अन्य अप्रत्यक्ष संकेतों की पहचान, स्कैट, स्क्रैच, किल साइट, ट्रेल वॉक, कैमरा ट्रैप तथा फील्ड डेटा कलेक्शन जैसे महत्वपूर्ण विषय शामिल रहे।

 

प्रशिक्षण में मैदानी निगरानी के दौरान प्राप्त वन्यजीव संकेतों को व्यवस्थित रूप से दर्ज करने और उनका दस्तावेजीकरण करने की प्रक्रिया समझाई गई, ताकि इन आंकड़ों का उपयोग दीर्घकालीन वन्यजीव मॉनिटरिंग, बाघ संरक्षण तथा प्रबंधन योजनाओं में किया जा सके।

 

*नोवा नेचर वेलफेयर सोसायटी की टीम ने दिया प्रशिक्षण*

 

कार्यशाला में तकनीकी एवं व्यावहारिक प्रशिक्षण नोवा नेचर वेलफेयर सोसायटी की टीम द्वारा प्रदान किया गया। प्रशिक्षण टीम में एम. सुरज, मोइज अहमद, सिद्धांत जैन एवं भूपेंद्र जगत शामिल रहे। प्रशिक्षण के दौरान सैद्धांतिक जानकारी के साथ मैदानी परिस्थितियों में एंटी-स्नेयर वॉक एवं टाइगर मॉनिटरिंग को सुरक्षित, व्यवस्थित एवं प्रभावी तरीके से संचालित करने पर विशेष जोर दिया गया।

 

*लगभग 100 अधिकारी-कर्मचारी हुए शामिल*

 

एक दिवसीय कार्यशाला में इंद्रावती टाइगर रिजर्व के विभिन्न क्षेत्रों से लगभग 100 वन अधिकारी एवं मैदानी कर्मचारी शामिल हुए। इनमें रेंज अधिकारी, डिप्टी रेंजर, बीट गार्ड एवं पेट्रोलिंग गार्ड प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।

 

वन विभाग की ओर से मनोज बघेल, SDO कोर एरिया; अजय कावरे, SDO बफर एरिया तथा कुबेर चरण बारिहा, SDO भैरमगढ़ सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे। विभिन्न रेंजों से सुभांशराय मांझी, रेंजर बीजापुर बफर; ढालेंद्र वर्मा, रेंजर मद्देड बफर; कुमार वर्मा, रेंजर कुटरू बफर; सुमित साह, रेंजर पिल्लूर कोर तथा राखी सलाम, रेंजर फरसगढ़ एवं पासेवाड़ा सहित अन्य रेंज अधिकारी एवं मैदानी कर्मचारी प्रशिक्षण में शामिल हुए।

 

*संरक्षण प्रयासों को मिलेगी नई मजबूती*

 

यह कार्यशाला इंद्रावती टाइगर रिजर्व में एंटी-स्नेयर अभियान एवं बाघ मॉनिटरिंग को अधिक व्यवस्थित, वैज्ञानिक और प्रभावी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल रही। प्रशिक्षित मैदानी अमले के माध्यम से वन क्षेत्रों में नियमित निगरानी, अवैध फंदों की पहचान, समयबद्ध कार्रवाई तथा बाघ एवं अन्य वन्यजीवों से संबंधित फील्ड डेटा का बेहतर संकलन किया जा सकेगा।

 

फंदा मुक्त इंद्रावती और सुरक्षित बाघ आवास की दिशा में यह प्रशिक्षण वन विभाग एवं संरक्षण संस्थाओं के संयुक्त प्रयासों को और मजबूत करने वाला महत्वपूर्ण कदम है।

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