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* त्योहारों में सुरक्षा का भरोसा या जनता पर अविश्वास?, प्रदेशभर में 1 अक्टूबर से रासुका लागू करने का आदेश तुगलकी: सूरज कश्यप*

* त्योहारों में सुरक्षा का भरोसा या जनता पर अविश्वास?, प्रदेशभर में 1 अक्टूबर से रासुका लागू करने का आदेश तुगलकी: सूरज कश्यप*

 

जगदलपुर, बस्तर सम्भाग,

छत्तीसगढ़ शासन के गृह विभाग द्वारा 1 अक्टूबर से 31 दिसंबर तक प्रदेश के सभी 33 जिलों

के कलेक्टरों को राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (रासुका/NSA) के तहत विशेष प्रशासनिक अधिकार

सौंपे जाने के फैसले पर तीखा विरोध शुरू हो गया है। जनपद प सदस्य सूरज कश्यप ने इस आदेश को आम नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों पर कुठाराघात

बताते हुए इसे सरकार का तानाशाही और तुगलकी फरमान करार दिया है।

 

जनपद सदस्य के तीखे सवाल:

• जब बस्तर का ऐतिहासिक दशहरा और दीपावली सामने है, तो जनता को रासुका का खौफ क्यों?

 

• क्या सामान्य पुलिसिंग और दंड प्रक्रिया पूरी तरह विफल हो चुकी है?

 

• क्या लोकतांत्रिक तरीके से हक मांगने वाले ग्रामीणों व युवाओं की आवाज दबाई जाएगी?

 

बस्तर दशहरा के बीच भय का माहौल क्यों?

सूरज कश्यप ने कहा कि आने वाले दिनों में नवरात्रि, दीपावली और पूरे विश्व में प्रसिद्ध

बस्तर का ऐतिहासिक दशहरा पर्व है। जब प्रदेश और बस्तर की जनता उल्लास और श्रद्धा के साथ

त्योहारों की तैयारी कर रही है, ऐसे समय में सरकार नागरिकों के सिर पर रासुका की तलवार

लटका रही है। उन्होंने सवाल किया कि क्या शासन को अपनी ही शांतिप्रिय जनता पर भरोसा

नहीं रहा, जो सामान्य कानूनों को दरकिनार कर इतने कठोर कानून का सहारा लेना पड़ रहा है?

 

आदिवासी और कमजोर वर्ग पर पड़ेगा सबसे बुरा असर

जनपद सदस्य ने चिंता जताई कि रासुका जैसे ‘निवारक निरोध’ कानून का सबसे ज्यादा दुरुपयोग

जमीनी स्तर पर गरीब, अशिक्षित और अधिकारों से अनजान ग्रामीणों के खिलाफ होता है। उन्होंने

पूछा— “यदि बस्तर का कोई किसान, बेरोजगार युवा या ग्रामीण अपने जल-जंगल-जमीन या बुनियादी

हकों के लिए शांतिपूर्ण आवाज उठाएगा, तो क्या स्थानीय प्रशासन उसे कानून-व्यवस्था के लिए

खतरा बताकर बिना सुनवाई जेल भेज देगा? क्या किसी गरीब परिवार के पास इतने संसाधन हैं कि

वह रासुका जैसी लंबी और पेचीदा कानूनी प्रक्रिया का सामना कर सके?”

 

आंदोलनों को कुचलने की साजिश, आदेश वापस ले सरकार.

 

कश्यप ने आरोप लगाया कि कलेक्टरों को असीमित शक्तियां देकर सरकार अपनी नीतियों के खिलाफ

होने वाले जायज विरोध प्रदर्शनों को कुचलना चाहती है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि शांति और सुरक्षा के नाम पर किसी भी निर्दोष नागरिक या युवा को प्रताड़ित किया गया, तो वे सड़क

से लेकर सदन तक लोकतांत्रिक आंदोलन करेंगे। उन्होंने शासन से इस आदेश को तत्काल वापस लेने की मांग की है।

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