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,* आंगनबाड़ी केंद्र में संचालित शाला,अंदरूनी अंचल में शिक्षा की ‘धूम’: रिमझिम बारिश में  भी धनगोल स्कूल के बच्चों ने पेश की मिसाल,*दीपक मरकाम की खबर,,,,,

,* आंगनबाड़ी केंद्र में संचालित शाला,अंदरूनी अंचल में शिक्षा की ‘धूम’: रिमझिम बारिश में  भी धनगोल स्कूल के बच्चों ने पेश की मिसाल,*दीपक मरकाम की खबर,,,,,

 

*कम सुविधाओं के बाद भी प्राथमिक शाला धनगोल में 90% से ज्यादा उपस्थिति, नेशनल हाईवे से लगे स्कूलों की स्थिति चिंताजनक,*

 

बीजापुर,भोपालपटनम, मददेड,

एक ओर जहां रिमझिम बरसते मौसम के बीच अंदरूनी ग्रामीण क्षेत्रों के शिक्षक और बच्चे शिक्षा के प्रति अपनी अद्भुत लगन और समर्पण का परिचय दे रहे हैं, वहीं दूसरी ओर सभी सुविधाओं से युक्त नेशनल हाईवे (राष्ट्रीय राजमार्ग) से लगे स्कूलों में विद्यार्थियों की कम उपस्थिति अब एक बड़ा चिंता का विषय बन गई है।

 

सीमित संसाधन, पर हौसले बुलंद बीजापुर जिले के भोपालपटनम विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत अंगमपल्ली के धनगोल (संकुल केंद्र: पेगड़ापल्ली, डाइस कोड: 22203611902) के आंगनबाड़ी केंद्र के भवन में संचालित प्राथमिक शाला इसका सबसे बड़ा उदाहरण है।

 

वर्तमान में यह स्कूल धनगोल के स्थानीय आंगनबाड़ी केंद्र के भवन में संचालित हो रहा है।

संसाधनों की भारी कमी के बावजूद यहाँ बच्चे नियमित रूप से पढ़ाई करने पहुँच रहे हैं।

धनगोल के आंगनबाड़ी केंद्र में संचालित शाला में  दर्ज कुल 28 विद्यार्थियों में से 25 बच्चे उपस्थित पाए गए, जो पूरे उत्साह के साथ शिक्षिका बच्चों के पढ़ाई के मार्गदर्शन में जुटे थे।

 

संसाधन के अभाव के साथ  ही शाला में मध्यान्ह भोजन का संचालन भी सुचारू रूप से होता मिला।

 

ग्रामीण अंचल के इन स्कूलों में भले ही शहरी क्षेत्रों जैसी चमक-दमक या पक्की सुविधाएं न हों, लेकिन बच्चों और शिक्षकों की यह प्रतिबद्धता हर किसी के लिए प्रेरणादायक है।

पालकों का मिल रहा है भरपूर सहयोग

इस संबंध में मीडिया से चर्चा करते हुए प्राथमिक शाला धनगोल की शिक्षिका श्रीमती सपना अड़पा ने बताया कि शाला में वर्तमान में 28 छात्र-छात्राएं दर्ज हैं और नए दाखिले (प्रवेश) की प्रक्रिया भी लगातार जारी है।

गांव के ग्रामीण और बच्चों के माता-पिता (पालक) लगातार अपनों बच्चों को नियमित रूप से स्कूल भेजने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। यही वजह है कि क्षेत्र में  हो रही रिमझिम बारिश के बावजूद बच्चों की उपस्थिति शानदार बनी हुई है। हमारा प्रयास है कि इस उपस्थिति को शत-प्रतिशत तक ले जाया जाए।”

प्रशासन के लिए चिंतन का विषय

अंदरूनी क्षेत्रों की यह तस्वीर यह संदेश देती है कि अगर सीखने और सिखाने की इच्छा मजबूत हो, तो कोई भी परिस्थिति बाधा नहीं बन सकती। लेकिन इसके ठीक उलट, नेशनल हाईवे से लगे सुगम रास्तों वाले स्कूलों में बच्चों की कम उपस्थिति ने शिक्षा विभाग और स्थानीय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

 

स्थानीय नागरिकों का मानना है कि शासन और प्रशासन को क्षेत्र की भौगोलिक और जलवायु परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए शिक्षा व्यवस्था की नए सिरे से समीक्षा करनी चाहिए, ताकि हर बच्चे तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रभावी रूप से पहुंच सके और सुगम क्षेत्रों के स्कूलों में भी उपस्थिति सुधारी जा सके।

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