स्टेट हाईवे पर जाम – 68 गांवों का आक्रोश, कोयलीबेड़ा से ट्रैक्टरों में अंतागढ़ पहुंचे, चारों तरफ से किया चक्काजाम,,,,,,,, कोयलीबेडा़ से लक्ष्मण दर्रो की रिपोर्ट÷
कोयलीबेड़ा /
विकासखंड मुख्यालय के सरकारी दफ्तरों को वापस लाने 8 दिनों से चल रहा आंदोलन को नजरअंदाज करने से गुस्साए ग्रामीण कोयलीबेड़ा से 25 _ 30 किमी दूर – अंतागढ़ पहुंच गए। सभी मार्गों में चक्काजाम कर दिया। अंतागढ़ को चारों ओर से सील कर दिया। स्टेट हाइवे समेत सभी रास्ते बंद होने से नगरवासियों की दिक्कतें बढ़ गईं। किसी भी वाहन को गुजरने नहीं दिया जा रहा है। 5 आंदोलनकारियों का कहना है, यह प्रदर्शन अनिश्चितकालीन है। जब तक मांग पूरी नहीं होती, चक्काजाम जारी रहेगा।
कोयलीबेड़ा के 18 ग्राम पंचायतों के 68 गांव के ग्रामीण 26 मई से अनिश्चितकालीन प्रदर्शन कर रहे हैं। उनके प्रदर्शन व मांगों पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। बार-बार ध्यानाकर्षण के बाद भी जब ध्यान नहीं दिया गया, तो मंगलवार सुबह 9 बजे सभी ग्रामीण ट्रैक्टरों में भरकर अंतागढ़ पहुंचे। छोटे बच्चों के साथ महिलाएं, पुरुष, युवक-युवतियां बड़ी संख्या में सड़क पर उतर आए। गांव के बुजुर्गों को गांव कोयलीबेड़ा में ही छोड़ दिया गया। उद्वेलित ग्रामीणों ने पहले नगर के दो मुख्य मार्गों पर चक्काजाम किया। अंतागढ़-नारायणपुर स्टेट हाईवे पर कुहचे मोड़ में बैठे। अंतागढ़-भानुप्रतापपुर मार्ग पर इमलीपदर मोड़ में भी बैठ गए। इसके बाद अंतागढ़-आमाबेड़ा व अन्य सभी छोटे-बड़े गांवों की ओर जाने वाले मागों में भी चक्काजाम कर दिया। सड़क के दोनों ओर यात्री बसों, ट्रकों और मालवाहक वाहनों की लंबी कतारें लग गई। शाम 5 बजे तक कुहचे मोड़ स्थित प्रदर्शन स्थल पर कोई भी जिम्मेदार अधिकारी चर्चा करने नहीं पहुंचा। आंदोलनरत ग्रामीणों ने स्पष्ट कहा, इस बार किसी भी तरह के आश्वासन को मानने तैयार नहीं हैं। शाम 5 बजे तक प्रदर्शन स्थल पर कोई भी अधिकारी चर्चा करने नहीं पहुंचा कांकेर। अंतागढ़ के कुहचे मोड़ में सड़क पर टेंट लगाकर चक्काजाम करते ग्रामीण। प्रदर्शनकारियों ने चार दिन पहले दफ्तरों में लगाए थे ताले चार दिन पहले,
*29 मई को प्रदर्शनकारियों ने* कोयलीबेड़ा में जनपद पंचायत कार्यालय, बीईओ व कृषि कार्यालय में घुसकर नारेबाजी की। इसके बाद सभी दफ्तरों में बाहर से ताला जड़ दिया। इस दौरान कर्मचारी व अफसर अंदर थे। काफी समझाइश के बाद भी नहीं माने। बातचीत भी विफल रही। प्रशासन को चाबी मिलने के बाद ताला खोला गया। अंदर बंद कर्मचारियों व अधिकारियों को बाहर निकाला गया। सड़क पर उतरने प्रशासन ने मजबूर किया आंदोलन का नेतृत्व कर रहे सहदेव उसेंडी, बसंत ध्रुव, स्त्तीराम दुग्गा, मोहन हुपेंडी, पीलू उसेंडी, समलू उसेंडी, कमलूराम मंडावी, दिनेश आंचला ने कहा,
कोयलीबेड़ा क्षेत्र में लंबे समय से सड़क, पानी, स्वास्थ्य, शिक्षा और अन्य मूलभूत सुविधाओं की कमी है। यहां का विकासखंड मुख्यालय भी पखांजूर में लगाया जा रहा है। कोयलीबेड़ा पिछड़ गया है। अपनी मांग को लेकर वे शांतिपूर्वक धरने पर बैठे थे। प्रशासन को जगाने के लिए हर संभव प्रयास किया। हमारे शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक प्रदर्शन को नजरअंदाज कर दिया गया। हमें मजबूरीवश यह कदम उठाना पड़ा। अब यह आंदोलन तब तक समाप्त नहीं होगा, जब तक हमारी मांगें पूरी नहीं होतीं। प्रशासन का जिम्मेदार अधिकारी आए। हमसे चर्चा करे। सांसद के खिलाफ लगाए नारे-नींबू काटना बंद करो आंदोलन के दौरान ग्रामीणों का गुस्सा स्थानीय जनप्रतिनिधियों पर जमकर फूटा। ग्रामीणों ने स्थानीय सांसद व विधायक के खिलाफ मुर्दाबाद के नारे लगाए। आरोप लगाया कि चुनाव जीतने के बाद नेता क्षेत्र की बुनियादी समस्याओं को भूल चुके हैं। नींबू काटना बंद करो जैसे स्थानीय,,,,,,
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आर एल कुलदीप
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