Tuesday, April 21, 2026

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“*मानसिक विकार कोई भूत-प्रेत का प्रकोप नहीं, बल्कि एक बीमारी है” डॉ.ऋषभ साव* *बस्तर सम्भाग,जगदलपुर,* *तेज नारायण सिंह की रिपोर्ट*

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“*मानसिक विकार कोई भूत-प्रेत का प्रकोप नहीं, बल्कि एक बीमारी है” डॉ.ऋषभ साव*

*बस्तर सम्भाग,जगदलपुर,*

*तेज नारायण सिंह की रिपोर्ट*

*बुधराम ने जाना नींद नही आने की समस्या का कारण*

जगदलपुर ::::::: जिले में मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता लाने को गांवों मे भी मानसिक स्वास्थ्य शिविर आयोजित किये जा रहे है। इसका परिणाम भी अब दिखने लगा है, सुदूर अंचल में रहने वाले ग्रामीण अब इस बीमारी को समझकर अपना और अपने करीबियों का इलाज करवाने आ रहे है। मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता लाने के उद्देश्य से ही प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र नेगानार में मेंटल हेल्थ कैंप का आयोजन किया गया।

इस दौरान कुल 29 मरीजों का मानसिक स्वास्थ्य परीक्षण कर उन्हें निःशुल्क दवाई का वितरण किया गया।

इस सम्बंध में जिला मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के नोडल अधिकारी डॉ. ऋषभ साव ने बताया: “ग्रामीण परिवेश में मानसिक स्वास्थ्य की जागरूकता के लिये लगने वाले शिविर से अब मानसिक रोगियों को शंका की दृष्टि से नही देखा जाता है।

इसके अलावा ग्रामीण ये मानने लगे हैं कि ‘मानसिक विकार कोई भूत-प्रेत का प्रकोप नहीं बल्कि एक बीमारी है, जिसका इलाज सम्भव है।

’ इसी जागरूकता को आगे बढ़ाने ग्रामीण इलाकों तक जिला मानसिक स्वास्थ्य की टीम अपना शिविर आयोजित कर पीड़ित लोगों का निःशुल्क इलाज कर रहे हैं।”

उन्होंने आगे बताया: “ग्राम नेगानार में शिविर आयोजन के पश्चात जिला मानसिक स्वास्थ्य की टीम के द्वारा ग्राम चिंगपाल के, हाट बाजार क्लीनिक में भी मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया जहां ग्रामीणों को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और जिला अस्पताल में उपलब्ध सुविधाओं के बारे में जानकारी दी गई।

इसके अलावा शिविर में उपस्थित मितानिन को मानसिक बीमारियों के बारे में बताया गया जिससे वे मरीजों पहचान कर उन्हें नजदीकी अस्पताल तक लेकर आ सकें।

क्लीनिकल साइकोलॉजिस्ट मोनिका ने बताया : “मानसिक रोग अब अभिशाप नहीं रहा, लक्षण दिखते ही चिकित्सक से संपर्क कर हर इंसान को मानसिक रूप से स्वस्थ बनाया जा सकता है।

कोई भी व्यक्ति कभी भी मानसिक रोग से ग्रसित हो सकता है।

समाज द्वारा मानसिक रोगियों के प्रति अच्छा व्यवहार हो इसके लिए लोगों का जागरूक होना जरूरी है, उचित उपचार और समाज के स्नेह से मानसिक रोगी स्वस्थ हो सकते हैं।”

आगे उन्होंने बताया, “एक दिवसीय आयोजित शिविर में ग्रामीणों में नींद कम आना, सिर भारी रहना,ज्यादा गुस्सा करना, अवसाद, नशे के कारण याददाश्त में कमी,घबराहट तथा बेचैनी जैसी समस्याओं का उपचार किया गया।

शिविर में आये लोगों को अपने आसपास रहने वाले ऐसे लोग, जो मानसिक रोग से पीड़ित है उन्हें उचित उपचार के लिए प्रेरित करने और अस्पताल में इलाज करवाने हेतु जागरूक किया गया।”

शिविर में अपना इलाज करवाने आये 40 वर्षीय बुधराम (बदला हुआ नाम) ने बताया: ” कुछ समय से मुझे सोने में बहुत कठिनाई होती थी, मैं अपनी नींद पूरी नही कर पा रहा था इस कारण दिन में बहुत अधिक थका हुआ रहने से तनावग्रस्त महसूस करने लगा था।

आज शिविर में अपनी समस्या के बारे में जब डॉक्टर को बताया तो उन्होंने मुझे नींद नही आने की समस्या (इंसोमेनिया) के कारणों के बारे में बताया,उन्होंने मुझे सोने से पहले खुद को नियमित रूप से स्वच्छ रखने, नशापान का सेवन न करने, समय पर भोजन करने और व्यायाम की सलाह दी और एक सप्ताह की दवा देकर, इलाज के लिये पुनः आने को कहा है।”

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