*नवरात्रि का दूसरा दिन: तपस्या और साधना की देवी मां ब्रह्मचारिणी की पूजा विधि, मंत्र और सम्पूर्ण विवरण*
*नवरात्रि विशेष रिपोर्ट दीपक मरकाम*
नवरात्रि के दूसरे दिन माता नवदुर्गा के द्वितीय स्वरूप मां ब्रह्मचारिणी की उपासना की जाती है।
‘ब्रह्म’ का अर्थ तपस्या और ‘चारिणी’ का अर्थ आचरण करने वाली है।
मां ब्रह्मचारिणी के दाएं हाथ में जप की माला और बाएं हाथ में कमंडल विद्यमान रहता है।
इनकी आराधना से साधक में तप, त्याग, वैराग्य, संयम और सदाचार के गुणों की वृद्धि होती है।
1. मां ब्रह्मचारिणी पूजा का शुभ मुहूर्त एवं सामग्री,
* पवित्र रंग: हरा (Green) या श्वेत (White),
* प्रिय पुष्प: कमल, चमेली या श्वेत पुष्प,
* प्रिय भोग: चीनी (शक्कर), मिश्री या पंचामृत,
* पूजन सामग्री: गंगाजल, अक्षत, रोली, चंदन, धूप-दीप, पान-सुपारी, वस्त्र, और फल।
2. कदम-दर-कदम सम्पूर्ण पूजा विधि (Step-by-Step Vidhi),
* प्रातःकाल स्नान एवं वस्त्र:,
प्रातः जल्दी उठकर स्नान करें और हरे या सफेद रंग के स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
* कलश ध्यान एवं शुद्धिकरण:,
प्रथम दिन स्थापित कलश का जल छिड़कें और थोड़ा गंगाजल मिलाकर पवित्र करें।
* दीप प्रज्वलन एवं स्नान:,
माता की प्रतिमा के समक्ष घी का दीपक जलाएं। मां ब्रह्मचारिणी को पहले शुद्ध जल और फिर पंचामृत से स्नान कराएं।
* श्रृंगार एवं अर्पण:,
देवी मां को रोली, अक्षत, और चंदन का तिलक लगाएं। इसके बाद सफेद या सुगंधित पुष्प और कमल का फूल अर्पित करें।
* विशेष भोग अर्पण:,
मां ब्रह्मचारिणी को मिश्री या चीनी (शक्कर) का भोग लगाएं। मान्यता है कि चीनी का भोग लगाने से व्यक्ति को दीर्घायु प्राप्त होती है।
* मंत्र जप एवं आरती:,
कमल गट्टे या रुद्राक्ष की माला से माता के दिव्य मंत्रों का 108 बार जाप करें। अंत में कपूर और घी के दीपक से मां ब्रह्मचारिणी की आरती करें और क्षमा प्रार्थना करके प्रसाद वितरित करें।
3. मां ब्रह्मचारिणी के सिद्ध मंत्र,
* ध्यान श्लोक:
दधाना करपद्माभ्यामक्षमालाकमण्डलू।
देवी प्रसीदतु मयि ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा॥
* सरल आराधना मंत्र (108 बार जप करें):
या देवी सर्वभूतेषु माँ ब्रह्मचारिणी रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
4. पूजा का धार्मिक एवं ज्योतिषीय महत्व,
विशेष मान्यता: मां ब्रह्मचारिणी नवग्रहों में मंगल ग्रह (Mars) को नियंत्रित करती हैं। जिनकी कुंडली में मंगल दोष हो, उन्हें आज मां ब्रह्मचारिणी की पूजा अवश्य करनी चाहिए। इससे मन में धैर्य, साहस और कार्य- सिद्धि की प्राप्ति होती है।
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