*12 वर्षों की साधना: भोपालपटनम के बद्दी राजू गढ़ रहे हैं आस्था के आकार, तिमेड से लेकर आसपास के गाँवों में भारी माँग*
भोपालपटनम मद्देड़,
कला जब लगन और सही मार्गदर्शन से मिलती है, तो वह न केवल जीवन संवारती है बल्कि संस्कृति और परंपरा को भी सजीव रखती है।
भोपालपटनम के तिमेड निवासी 33 वर्षीय बद्दी राजू की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। बद्दी राजू पिछले 12 वर्षों से लगातार भगवान श्री गणेश और माँ दुर्गा की अत्यंत भव्य व सुंदर मूर्तियाँ बनाने का कार्य कर रहे हैं।
कला के प्रति रुचि ने पहुँचाया गुरु के द्वार
बद्दी राजू को बचपन से ही चित्रकला में विशेष रुचि थी। जब गीदम में कालाहांडी (ओडिशा) के प्रसिद्ध मूर्तिकार गुरु जयंतो जी मूर्तियाँ बना रहे थे, तब राजू की उत्सुकता उन्हें गुरु जी तक ले गई।
राजू ने नम्रतापूर्वक कला सीखने की इच्छा जताई, जिसे गुरु जयंतो जी ने सहर्ष स्वीकार कर लिया। अगले ही दिन से राजू का प्रशिक्षण शुरू हुआ और अपनी अटूट मेहनत व प्रतिभा के बल पर उन्होंने मात्र एक ही वर्ष में मूर्ति निर्माण की बारीकियाँ सीख लीं।
गणेश चतुर्थी से एक माह पूर्व शुरू होती है तैयारी
गणेश उत्सव से एक माह पहले ही बद्दी राजू मूर्ति निर्माण के लिए आवश्यक सामग्री जैसे विशेष मिट्टी, पैरा घास, बाँस, लकड़ी और रंगों की व्यवस्था में जुट जाते हैं। वे आधा फीट की छोटी मूर्तियों से लेकर 12 फीट तक की विशाल व मनमोहक गणेश प्रतिमाएँ तैयार करते हैं। वे हर साल गणेश चतुर्थी पर कम से कम 25 से अधिक मूर्तियाँ स्वयं बनाकर बेचते हैं।
दुर्गा पूजा के लिए 5 से 8 फीट की प्रतिमाएँ
गणेशोत्सव के साथ-साथ बद्दी राजू माँ दुर्गा की भी 5 से 8 फीट ऊँची भव्य मूर्तियों का निर्माण करते हैं। उनकी मूर्तियों की फिनिशिंग और सजीवता इतनी उत्कृष्ट होती है कि उत्सवों से काफी समय पहले ही लोग अग्रिम बुकिंग (एडवांस बुकिंग) करा लेते हैं।
आसपास के इलाकों में राजू की मूर्तियों की भारी माँग
आज तिमेड, भोपालपटनम, चेरपल्ली और मद्देड़ सहित आसपास के तमाम ग्रामीण इलाकों से समिति के सदस्य और श्रद्धालु राजू के पास मूर्तियाँ खरीदने पहुँचते हैं।
12 वर्षों का यह सफल सफर बद्दी राजू की कड़ी मेहनत, कला के प्रति समर्पण और उनकी कलात्मक पहचान का जीवंत प्रमाण है।

