*केशकाल के पूर्व विधायक कृष्ण कुमार ने की पृथक बस्तर राज्य की मांग, कहा – रायपुर-दिल्ली के AC कमरों से नहीं चलेगा बस्तर*
– राजमन नाग, बस्तर
बस्तर की धरती से एक बार फिर पृथक राज्य की मांग ने जोर पकड़ा है। केशकाल के पूर्व विधायक कृष्ण कुमार ने बस्तर के जल-जंगल-जमीन को कॉर्पोरेट लूट से बचाने और सर्वहारा वर्ग की मुक्ति के लिए पृथक बस्तर राज्य के गठन को अपरिहार्य बताया है।
पूर्व विधायक कृष्ण कुमार ने एक बयान जारी कर कहा, “मैं, कृष्ण कुमार, पूर्व विधायक केशकाल, बस्तर के मेहनतकशों, आदिवासियों, किसानों और सर्वहारा वर्ग की ऐतिहासिक चेतना तथा उनके लोकतांत्रिक अधिकारों के हक में ‘पृथक बस्तर राज्य’ की क्रांतिकारी मांग का पुरजोर समर्थन करता हूँ।”
उन्होंने कहा कि एक जन-प्रतिनिधि के रूप में उन्होंने हमेशा पूंजीवादी ताकतों और प्रशासनिक तंत्र के गठजोड़ को इस शांत अंचल का शोषण करते देखा है। बस्तर की नीतियां आज उन लोगों द्वारा तय की जा रही हैं जिनका बस्तर की जमीन और यहां के मेहनतकश समाज से कोई सरोकार नहीं है।
“आज हमारी नीतियां रायपुर और दिल्ली के वातानुकूलित कमरों में बैठे वे लोग तय करते हैं, जिनका बस्तर के मेहनतकश समाज से कोई सरोकार नहीं है। पूंजीपतियों के हित में काम करने वाली यह व्यवस्था बस्तर को केवल कच्चा माल निकालने और संसाधनों की लूट का जरिया मानती है। बस्तर के जल-जंगल-जमीन का कॉर्पोरेट लूट के खिलाफ जन-संघर्ष और सर्वहारा की मुक्ति के लिए पृथक बस्तर राज्य का गठन अपरिहार्य है,” कृष्ण कुमार ने कहा।
पूर्व विधायक ने कहा कि पृथक बस्तर राज्य की यह मांग किसी प्रशासनिक सुविधा मात्र का मामला नहीं है, बल्कि यह एक वर्गीय संघर्ष और अधिकारों की लड़ाई है। बस्तर के आदिवासियों का दशकों से शोषण हो रहा है। यहां से लौह अयस्क, बॉक्साइट और कीमती वनोपज बाहर जा रहे हैं, लेकिन स्थानीय लोगों को विस्थापन, पलायन और गरीबी के सिवा कुछ नहीं मिल रहा।
उन्होंने आरोप लगाया कि विकास के नाम पर बस्तर में बड़े-बड़े प्रोजेक्ट लाए जाते हैं, लेकिन उनका लाभ स्थानीय आदिवासी और किसान वर्ग को नहीं मिलता। बेरोजगारी, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाओं में बस्तर आज भी सबसे पीछे है।
कृष्ण कुमार ने कहा कि पृथक राज्य बनने से ही बस्तर के लोगों को अपने संसाधनों पर अधिकार मिलेगा और वे अपने भविष्य का फैसला खुद कर सकेंगे। उन्होंने बस्तर के युवाओं, किसानों, मजदूरों और आदिवासी संगठनों से इस मांग को जन-आंदोलन बनाने की अपील की है।

