55 टन भार वाले 18 चक्का वाहनों से दुर्गूकोंदल–पखांजूर मार्ग पर बढ़ा दबाव, सड़क की हालत हुई बदहाल
प्रतिदिन दौड़ रहे दर्जनों भारी वाहन, सड़क की क्षमता से अधिक भार ढोने पर लोगों ने जताई चिंता
दुर्गूकोंदल। पखांजूर–दुर्गूकोंदल–भानुप्रतापपुर मुख्य मार्ग पर इन दिनों 18 चक्का भारी वाहनों की आवाजाही लगातार बढ़ गई है। प्रतिदिन दर्जनों भारी वाहन इस मार्ग से गुजर रहे हैं, जिससे सड़क की स्थिति तेजी से खराब होती जा रही है। क्षेत्रवासियों का कहना है कि अधिकांश वाहन लगभग 55 टन तक का भार लेकर चल रहे हैं, जबकि सड़क की वर्तमान स्थिति और क्षमता इतनी अधिक भार वहन करने के लिए उपयुक्त नहीं है।
जानकारी के अनुसार, महाराष्ट्र के आलापल्ली क्षेत्र से लौह अयस्क लोड कर कई भारी वाहन रायपुर और अन्य औद्योगिक क्षेत्रों की ओर जा रहे हैं। इन वाहनों का प्रमुख आवागमन पखांजूर, दुर्गूकोंदल और भानुप्रतापपुर मार्ग से हो रहा है। लगातार भारी दबाव के कारण सड़क के कई हिस्सों में गड्ढे बनने लगे हैं तथा डामर उखड़ने की शिकायतें सामने आ रही हैं।
स्थानीय नागरिकों एवं वाहन चालकों का कहना है कि दुर्गूकोंदल–पखांजूर मार्ग पहले से ही कई स्थानों पर जर्जर स्थिति में है। बरसात के मौसम के पूर्व ही सड़क की हालत चिंताजनक बनी हुई है। यदि इसी प्रकार भारी क्षमता वाले वाहन लगातार चलते रहे तो आने वाले समय में सड़क पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो सकती है, जिससे आम नागरिकों, यात्री बसों, एम्बुलेंस तथा छोटे वाहनों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ेगा।
ग्रामीणों ने बताया कि सड़क निर्माण के समय इसकी डिजाइन सामान्य यातायात को ध्यान में रखकर की गई थी। क्षमता से अधिक वजन वाले वाहनों के लगातार संचालन से सड़क की आयु कम हो रही है। साथ ही दुर्घटनाओं की आशंका भी बढ़ रही है। कई स्थानों पर सड़क के किनारे टूटने लगे हैं, जिससे बरसात के दौरान स्थिति और गंभीर हो सकती है।
क्षेत्र के नागरिकों ने परिवहन विभाग, लोक निर्माण विभाग तथा जिला प्रशासन से इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। लोगों का कहना है कि सड़क की क्षमता के अनुरूप ही वाहनों के संचालन की अनुमति दी जाए तथा ओवरलोड और भारी वाहनों की नियमित जांच की जाए। साथ ही इस मार्ग पर 18 चक्का भारी वाहनों के संचालन पर आवश्यक प्रतिबंध लगाने अथवा वैकल्पिक मार्ग निर्धारित करने की मांग भी उठने लगी है।
स्थानीय लोगों का मानना है कि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो करोड़ों रुपये की लागत से निर्मित यह महत्वपूर्ण सड़क मार्ग शीघ्र ही कंडम होने की स्थिति में पहुंच सकता है, जिसका खामियाजा पूरे क्षेत्र को भुगतना पड़ेगा।

