Monday, May 11, 2026

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दुर्गूकोंदल के पलाचुर बांध में गहराया जल संकट, वन्यप्राणी और मवेशी प्यास से बेहाल नाली निर्माण कार्य की सुस्त रफ्तार से ग्रामीणों में नाराजगी, समय पर कार्य पूर्ण नहीं होने से बढ़ी चिंता।

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दुर्गूकोंदल के पलाचुर बांध में गहराया जल संकट, वन्यप्राणी और मवेशी प्यास से बेहाल

नाली निर्माण कार्य की सुस्त रफ्तार से ग्रामीणों में नाराजगी, समय पर कार्य पूर्ण नहीं होने से बढ़ी चिंता

दुर्गूकोंदल।

भीषण गर्मी और लगातार घटते जलस्तर के बीच दुर्गूकोंदल क्षेत्र के पलाचुर बांध में जल संकट गहराता जा रहा है। कभी क्षेत्र के ग्रामीणों, मवेशियों और वन्य प्राणियों के लिए जीवनदायिनी माने जाने वाले इस बांध का जलस्तर अब तेजी से नीचे पहुंच चुका है। बांध के अधिकांश हिस्से सूखने की कगार पर हैं, जिससे आसपास के गांवों में चिंता का माहौल बना हुआ है।

बांध में पानी की कमी का असर अब साफ तौर पर दिखाई देने लगा है। जंगलों से निकलकर वन्य जीव पानी की तलाश में बांध और गांवों की ओर पहुंच रहे हैं, वहीं मवेशियों को भी पीने के पानी के लिए भटकना पड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि जल्द बारिश नहीं हुई और वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गई तो आने वाले दिनों में स्थिति और भी भयावह हो सकती है।

ग्रामीणों ने बताया कि पलाचुर बांध क्षेत्र में लंबे समय से नाली निर्माण कार्य चल रहा है, लेकिन इसकी रफ्तार इतनी धीमी है कि लोगों ने इसे “कछुए की चाल” से भी धीमा काम करार दिया है। कई महीनों से निर्माण कार्य अधूरा पड़ा हुआ है, जिससे पानी संरक्षण और निकासी व्यवस्था प्रभावित हो रही है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि संबंधित विभाग और जिम्मेदार अधिकारी इस गंभीर समस्या पर ध्यान नहीं दे रहे हैं।

क्षेत्रवासियों का कहना है कि यदि समय रहते नाली निर्माण कार्य पूरा कर लिया जाता और जल संरक्षण की उचित व्यवस्था की जाती, तो आज इतनी गंभीर स्थिति उत्पन्न नहीं होती। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि निर्माण कार्य में तेजी लाई जाए तथा पलाचुर बांध में जल संरक्षण के लिए तत्काल ठोस कदम उठाए जाएं।

गर्मी के बढ़ते प्रकोप के बीच जल संकट ने ग्रामीण जीवन के साथ-साथ वन्यजीवों के अस्तित्व पर भी खतरा खड़ा कर दिया है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस गंभीर समस्या को लेकर कितनी तत्परता दिखाता है और कब तक लोगों को राहत मिल पाती है।

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