बस्तर अंचल केशकाल मे देवी देवताओं की अदालत, परंपरा और आस्था का अनोखा संगम
यहां हर साल की तरह इस बार भी देवी देवताओं का यात्रा और अदालत लगी जिसमें इंसानों की तरह देवी देवताओं पर भी आप प्रति आप होते हैं और फैसला सुनाए जाते हैं
कहा जाता है कि इस परंपरा की शुरुआत बस्तर राजधराने के समय हुई थी जातरा के दिन तीनों स्थानों पर दूर दराज गांवों से देवी देवताओं अपनी पुजारी माझी मुखियाओं और भक्तों के साथ पहुंचते हैं
हजारों की भीड़ जब पहाड़ों और जंगलों के बीच उमड़ती है तो आस्था का अद्भुत माहौल बन जाता है
देवी देवताओं की अदालत में इंसानी अदालत की तरह सुनाई होती है
फरियादी इंसान होता है जबकि आरोपी के रूप में देवी देवता पेश होते हैं अपराध सिद्ध न होने पर बरी कर दिया जाता है और दोषी पाए जाने पर सजाई दी जाती है कभी-कभी कभी पूजा पाठ से वंचित रहना पड़ता है कभी कारावास जैसी सजा और कभी मृत्यु दंड तक,,
यह आयोजन बस्तर की संस्कृति धरोहर और लोग आस्था का जीवित प्रतीक है जो ग्रामीण अंचल की परंपरा और विश्वास की गहराई को दर्शाता है

