*स्थानीय ट्रैक्टर मालिकों की आजीविका पर संकट, तेलंगाना से भोपालपटनम पहुंचे 50 से अधिक ट्रैक्टर, उठने लगे सवाल*
*भोपालपटनम से तेज नारायण की रिपोर्ट*
*क्षेत्र में कृषि सीजन की शुरुआत के साथ ही स्थानीय ट्रैक्टर मालिकों और चालकों के सामने रोजी-रोटी का गंभीर संकट खड़ा होता नजर आ रहा है*
*बीजापुर भोपाल पटनम 29 अक्टूबर 2026*
भोपालपटनम स्थित मदिरा दुकान के पास बीते दो-तीन दिनों से पड़ोसी राज्य तेलंगाना की पासिंग वाले लगभग 50 से अधिक ट्रैक्टर एक साथ जमा हैं।
इतनी बड़ी संख्या में बाहरी वाहनों की मौजूदगी को लेकर स्थानीय लोगों और ट्रैक्टर मालिकों में भारी चिंता और आक्रोश देखा जा रहा है।
धान की कटाई से पहले ही डेरा, उठे सवाल
जब इस संबंध में जानकारी जुटाई गई, तो बाहरी चालकों का कहना था कि वे हर साल किसानों के कृषि कार्यों (मिंजाई व परिवहन) के लिए बीजापुर, ओडिशा तथा आसपास के क्षेत्रों में आते हैं।
हालाँकि, स्थानीय लोगों का कहना है कि अभी क्षेत्र में धान की फसल पूरी तरह कटी भी नहीं है, ऐसे में इतनी बड़ी संख्या में ट्रैक्टरों का पहले से ही जमावड़ा समझ से परे है।
> “जब स्थानीय स्तर पर ही पर्याप्त संख्या में ट्रैक्टर उपलब्ध हैं, तो इतनी बड़ी संख्या में दूसरे राज्य की गाड़ियों का यहाँ काम करना स्थानीय मालिकों के हितों पर सीधा कुठाराघात है।”
स्थानीय ट्रैक्टर मालिकों के सामने किस्त और भरण-पोषण की चुनौती
बाहरी राज्यों के ट्रैक्टरों के प्रवेश से स्थानीय परिवहन व कृषि सेवा क्षेत्र पर गहरा असर पड़ रहा है। स्थानीय ट्रैक्टर मालिकों की चिंताएँ निम्नलिखित हैं:
*बैंक की किस्तें और फाइनेंस का बोझ:*
स्थानीय किसानों व युवाओं ने बैंक से लोन या फाइनेंस कराकर ट्रैक्टर खरीदे हैं। यदि उनका काम बाहरी गाड़ियाँ कर लेंगी, तो वे अपने वाहनों की मासिक किस्तें (EMI) कैसे जमा करेंगे?
*स्थानीय रोजगार पर डाका:*
कृषि सीजन ही स्थानीय ट्रैक्टर मालिकों के लिए पूरे साल की कमाई का मुख्य जरिया होता है।
यदि यही काम बाहर के लोग ले जाएंगे, तो स्थानीय चालकों और मालिकों के सामने भुखमरी की नौबत आ जाएगी।
*नियमावली और कर (Tax) का मुद्दा:*
दूसरे राज्य की गाड़ियाँ बिना स्थानीय परमिट या कम दरों पर काम करके बाजार के रेट बिगाड़ देती हैं, जिससे स्थानीय मालिकों को भारी नुकसान उठाना पड़ता है।
छत्तीसगढ़ और तेलंगाना जैसे पड़ोसी राज्यों के बीच व्यावसायिक गतिविधियों का संतुलन बनाए रखना आवश्यक है, लेकिन स्थानीय प्राथमिकताओं की अनदेखी नहीं की जा सकती।
यदि अन्य राज्यों के वाहन इसी तरह बिना किसी नियमन या सीमांकन के काम करते रहे, तो छत्तीसगढ़ के स्थानीय ट्रैक्टर मालिकों का भविष्य अंधकारमय हो जाएगा।
*स्थानीय ट्रैक्टर मालिकों की मांग:*
* प्रशासन और परिवहन विभाग इस विषय पर तत्काल संज्ञान ले और बाहरी वाहनों की वैधता/परमिट की जाँच करे।

