*पामगल आश्रम शाला में नौनौनिहालों के भविष्य से खिलवाड़: 8 महीने बीते, 39 मासूमों का भविष्य ‘भगवान भरोसे’!*
*मिडिल स्कूल में शिक्षकों का जमघट, लेकिन प्राइमरी स्कूल की एक भी कक्षा में गुरुजी नहीं*
*बीजापुर भोपाल पटनम मद्देड़ 27अक्टूबर 2026*
बीजापुर जिले के भोपाल पटनम विकास खण्ड अंतर्गत ग्राम पंचायत पामगल शासकीय बालक प्राथमिक शाला पामगल के प्रायमरी स्कूल में शिक्षा व्यवस्था के बड़े-बड़े दावों की धज्जियाँ उड़ाती एक दर्दनाक और चिंताजनक तस्वीर आश्रम शाला पामगल से सामने आई है।
स्कूल सत्र 15, जून 2026 चालू हुए कई महीने बीत चुके हैं, लेकिन प्राथमिक स्तर (कक्षा 1 से 5) में पढ़ाई कर रहे 39 मासूम बच्चों का भविष्य आज भी अंधेरे में है।
हैरान कर देने वाली बात यह है कि स्कूल सत्र का आधा समय बीत जाने के बाद भी प्राथमिक विभाग में एक भी शिक्षक की नियुक्ति नहीं की गई है।
पूर्व में एक शिक्षक की पदस्थापना थी जिनकी पदोन्नति 02/2026 को हुई, तब से लेकर आज 10/2026 अक्टूबर चल राह हैं एक भी शिक्षक की पदस्थ नहीं हुई हैं।
विरोधाभास का आलम: एक तरफ शिक्षकों की भीड़, दूसरी तरफ प्राथमिक कक्षाएं खाली
आश्रम शाला परिसर की जमीनी हकीकत शिक्षा विभाग की लापरवाही और अव्यवस्था को साफ उजागर करती है:
* प्राथमिक विभाग (कक्षा 1 से 5): कुल 39 छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं, लेकिन पढ़ाने के लिए शून्य (0) शिक्षक हैं।
* मिडिल स्कूल में (कक्षा 6 से 8): यहाँ 4 शिक्षक पदस्थ हैं।
* बच्चों की कुल आंकड़ा: पूरे स्तर पर 67 बच्चे दर्ज है,
मिडिल स्कूल में पुरुष शिक्षक 3 महिला शिक्षक 1 पदस्थ होने के बावजूद इस आश्रम शाला के प्राथमिक विभाग को एक भी शिक्षक नसीब नहीं हुआ है।
एक ही परिसर में मिडिल स्कूल के लिए शिक्षक मौजूद हैं, जबकि नीव मजबूत करने वाली प्राथमिक कक्षाओं में ताला लटकने जैसी नौबत है।
ऐसे में सवाल उठता है कि बिना शिक्षकों के 39 बच्चे स्कूल में क्या सीख रहे हैं?
अधिकारियों के दरवाजों पर कागजी चक्कर, पर कोई सुनवाई नहीं,
प्राथमिक शाला पामगल के शिक्षक ने बताया कि बच्चों के भविष्य को लेकर विकासखंड शिक्षा अधिकारी (BEO) को लिखित आवेदन दिए हैं। इसके बावजूद महकमे की नींद नहीं टूटी।
विभागीय उदासीनता का आलम यह है कि महीनों बीत जाने के बाद भी प्राथमिक स्तर के बच्चों के लिए एक अदद शिक्षक तक की वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की जा सकी है।
> पालक अपने बच्चों को अच्छे भविष्य की उम्मीद में स्कूल भेजते हैं, लेकिन जब स्कूल में शिक्षक ही नहीं होंगे, तो बच्चे क्या पढ़ेंगे? क्या गरीब और आदिवासी अंचल के बच्चों को शिक्षा पाने का हक नहीं है?”
* सत्र 2026 के कई महीने बीत जाने के बाद भी प्राथमिक शाला बिना शिक्षक के क्यों चल रही है?
* समायोजन कर पामगल में शिक्षक क्यों नहीं भेजा गया?
* क्या विभागीय अधिकारी किसी बड़े हादसे या बच्चों के एक पूरा साल बर्बाद होने का इंतजार कर रहे हैं?

