*छग में एक दिवसीय हड़ताल से थमी आंगनबाड़ी की रफ्तार: ताले लटकने से गरम भोजन से लेकर ICDS की महत्वपूर्ण योजनाओं पर मंडराया बड़ा संकट*
छत्तीसगढ़ 27 अक्टूबर 2026
छत्तीसगढ़ भर में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाओं के एक दिवसीय धरना-प्रदर्शन और हड़ताल के चलते प्रदेशभर के आंगनबाड़ी केंद्रों में ताले लटके नजर आए।
इस अचानक और व्यापक हड़ताल का सीधा असर महिला एवं बाल विकास विभाग की रीढ़ कहे जाने वाले एकीकृत बाल विकास सेवा (ICDS) पर पड़ा है, जिससे मैदानी स्तर पर व्यवस्थाएं पूरी तरह चरमरा गई हैं।
*1. गरम भोजन योजना से लेकर पोषाहार पर ब्रेक*
आंगनबाड़ी केंद्रों की दिनचर्या की शुरुआत ही बच्चों और गर्भवती महिलाओं के लिए बनने वाले गरम भोजन और पौष्टिक आहार से होती है।
केंद्रों में ताला लटकने के कारण आज बच्चों का निवाला छिन गया, वहीं नियमित रूप से मिलने वाला सूखा राशन, टेक-होम राशन (THR) और पोषाहार वितरण भी पूरी तरह ठप हो गया है।
*2. ICDS की अन्य महत्वपूर्ण योजनाओं को झटका*
आंगनबाड़ी केंद्र केवल भोजन वितरण का केंद्र नहीं हैं, बल्कि यह ग्रामीण और शहरी स्वास्थ्य की धुरी हैं।
एक दिन के इस अवकाश या प्रदर्शन से कई महती योजनाओं पर सीधा असर पड़ा है:
* टीकाकरण और स्वास्थ्य जांच: नवजात शिशुओं, बच्चों और गर्भवती महिलाओं के नियमित टीकाकरण और स्वास्थ्य परीक्षण कार्यक्रम बाधित हुए।
* कुपोषण मुक्ति अभियान: वजन त्योहार और कुपोषित बच्चों की मानिटरिंग का काम रुकने से विभागीय आंकड़ों और गतिविधियों पर असर पड़ा है।
* गर्भवती और धात्री महिलाओं की देखरेख: मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य परामर्श सेवाएं एक दिन के लिए पूरी तरह थम गईं।
3. अनिश्चितकालीन हड़ताल हुई, तो क्या होगा हाल?
4. यह एक दिवसीय सांकेतिक धरना-प्रदर्शन शासन-प्रशासन के लिए एक बड़ी चेतावनी है।
5, यदि आने वाले समय में कार्यकर्ताओं की मांगें नहीं मानी गईं और यह आंदोलन अनिश्चितकालीन हड़ताल में तब्दील हो जाता है, तो इसके परिणाम बेहद गंभीर होंगे:
* महीनों से चल रहे कुपोषण मुक्ति अभियान को करारा झटका लगेगा।
* जमीनी स्तर पर योजनाओं की मॉनिटरिंग करने वाला मैदानी अमला पूरी तरह निष्क्रिय हो जाएगा, जिससे शासन की जनकल्याणकारी योजनाएं फाइलों में सिमट कर रह जाएंगी।
* सबसे अधिक प्रभाव गरीब तबके के उन नन्हे बच्चों और माताओं पर पड़ेगा जो पूरी तरह आंगनबाड़ी की सुविधाओं पर निर्भर हैं।

